By अपर्णा पाटनी
पति पत्नी के बीच चल रही अनबन को शांत करने के सरल ज्योतिषीय उपाय

हर विवाह में उतार चढ़ाव आते हैं। कभी बातों का गलत मतलब निकल जाता है, कभी थकान और तनाव के कारण पति पत्नी के बीच अनचाही नोकझोंक शुरू हो जाती है। थोड़ी बहुत अनबन रिश्ते को गहराई देती है, पर जब झगड़े लगातार होने लगें, बात बढ़ने लगे या अलग होने तक की नौबत आ जाए तब समस्या केवल स्वभाव की नहीं रहती। ज्योतिषीय दृष्टि से यह संकेत होता है कि कुंडली में विवाह और दांपत्य से जुड़े ग्रह संतुलित नहीं हैं या घर के वातावरण में नकारात्मकता सक्रिय हो गई है।
वैदिक ज्योतिष में दांपत्य सुख का गहरा संबंध शुक्र, बृहस्पति, सप्तम भाव, नवमांश और चतुर्थ भाव से माना जाता है। जब शुक्र या बृहस्पति दुर्बल हों, पाप ग्रहों से पीड़ित हों या अशुभ दशा चल रही हो तब छोटे कारण भी बड़ा विवाद बन जाते हैं। विचारों का टकराव, ईगो की जिद, किसी तीसरे व्यक्ति का दखल, आर्थिक तनाव या परिवारों के हस्तक्षेप से भी विवाह का संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसे समय में केवल व्यवहार सुधार काफी नहीं होता, ग्रहों की शांति और घर की ऊर्जा को भी संतुलित करना आवश्यक होता है।
जन्मकुंडली में जो संरचना बनती है, वही यह संकेत देती है कि वैवाहिक जीवन में किस प्रकार की चुनौतियां आ सकती हैं। सामान्य रूप से ये संकेत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
| तत्व | क्या प्रतीक है |
|---|---|
| शुक्र | वैवाहिक सुख, आकर्षण, प्रेम, सहजीवन |
| बृहस्पति | धर्म, नैतिकता, वैवाहिक संरचना की गुणवत्ता |
| सप्तम भाव | विवाह, जीवनसाथी, साझेदारी |
| चतुर्थ भाव | गृहस्थ सुख, घर का वातावरण |
| द्वितीय और एकादश भाव | परिवार का सहयोग, आर्थिक स्थिरता, साझा संसाधन |
जब शुक्र अत्यधिक कमजोर हो, शत्रु राशि में हो, पाप दृष्टि से ग्रस्त हो या अशुभ दशा में हो, तो विवाह में आकर्षण का घटाव, संवाद में कमी और भावनात्मक दूरी बढ़ सकती है। बृहस्पति की कमजोरी से नैतिकता, धैर्य और क्षमा की भावना कम हो सकती है जिसके कारण तकरार के बाद सुलह कठिन हो जाती है। यदि सप्तम भाव या उसके स्वामी पर राहु, केतु, शनि या मंगल की कठोर दृष्टि हो, तो झगड़े तीखे हो सकते हैं, गलतफहमियां बार बार दोहराई जा सकती हैं।
सिर्फ कुंडली ही नहीं, वर्तमान गोचर और दशा भी वैवाहिक जीवन को प्रभावित करते हैं। शनि का गोचर सप्तम भाव या उसके स्वामी पर हो तो रिश्ते की परीक्षा का समय शुरू होता है। गुरु का शुभ गोचर वैवाहिक संबंध के लिए राहत का काल माना जाता है। इन संकेतों के साथ घर की ऊर्जा भी महत्वपूर्ण हो जाती है जहां पति पत्नी अधिकतम समय बिताते हैं।
कई लोग वैवाहिक समस्या के समय घबराकर एक साथ कई उपाय शुरू कर देते हैं। इससे मन में उलझन और परिणाम में अस्पष्टता बढ़ जाती है। वैदिक परंपरा में यह अपेक्षा रहती है कि उपाय को श्रद्धा, स्थिरता और धैर्य के साथ किया जाए।
कुछ सरल नियम ध्यान में रखें।
जब विवाद वैवाहिक संबंध से जुड़ा हो तब छोटी बात भी तूल पकड़ लेती है। ऐसे समय में उपाय केवल किसी एक पक्ष के लिए नहीं, दोनों के लिए उपयोगी होते हैं। यदि दोनों मिलकर संकल्प लें कि कम से कम कुछ महीने तक झगड़े के बीच भी मंत्र, पूजा और थोड़े नियम साथ निभाएंगे, तो रिश्ते के चारों ओर एक सुरक्षात्मक ऊर्जा बनती है।
शुरुआत घर के सबसे निजी स्थान, शयन कक्ष से करनी चाहिए। विवाह का ऊर्जा केंद्र वही होता है।
पत्नी को पति के बाईं ओर सोना चाहिए
यह व्यवस्था ऊर्जा के संतुलन और आपसी तालमेल के लिए शुभ मानी जाती है। अलग अलग दिशा में सोना या बीच में अधिक दूरी रखना अनजाने में दूरी की भावना बढ़ा सकता है।
अलग गद्दा और तकिए न रखें
पति पत्नी के बीच भौतिक विभाजन, जैसे अलग गद्दे, अत्यधिक अलग बिस्तर या हमेशा अलग रजाई का प्रयोग, कई बार मन की दूरी को और पुष्ट कर देता है। एक ही गद्दे पर सोना और अधिकतर समय एक ही बिस्तर साझा करना निकटता को मजबूत करता है।
शयनकक्ष की दीवारों पर हल्के रंग
बहुत गहरे, चटक या आग्नेय रंग जैसे लाल और चमकीला नारंगी शयनकक्ष के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते। हल्का सफेद, क्रीम, हल्का गुलाबी, हल्का हरा या शांत नीले रंग का प्रयोग मन को स्थिर रखता है। पीले रंग का प्रयोग विशेष रूप से शयनकक्ष में करने से बचना चाहिए क्योंकि यह अध्ययन और सक्रियता का रंग माना जाता है, विश्राम की ऊर्जा के लिए यह सही नहीं होता।
इस प्रकार शयनकक्ष को शांत, साफ सुथरा और कम वस्तुओं वाला रखना भी महत्वपूर्ण है। अत्यधिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, पुराने झगड़ों की याद दिलाने वाली वस्तुएं या बहुत अधिक अव्यवस्था वैवाहिक ऊर्जा पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
शास्त्रों में बताया गया है कि जब ग्रह असंतुलित हों और मन बार बार क्रोध, निराशा या हताशा की ओर आकर्षित हो तब मंत्र और पूजन के माध्यम से सूक्ष्म स्तर पर परिवर्तन किया जा सकता है। वैवाहिक समस्याओं के लिए कुछ विशेष उपाय प्रभावी माने जाते हैं।
यदि पति पत्नी के बीच लगातार झगड़े होते हों, बात बात पर बहस हो जाती हो या अनेक प्रयास के बाद भी शांति न बन पा रही हो, तो यह उपाय सहायक हो सकता है।
मंत्र
ॐ नमः संभाव्य च मयो च नमः, शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च
इस मंत्र के उच्चारण से मन की कठोरता कम होती है और अहंकार में थोड़ी नरमी आती है। नियमित जप से संवाद की भाषा में भी फर्क महसूस होने लगता है। यह मंत्र न केवल संबंधों के लिए बल्कि भीतर की शांति के लिए भी बहुत प्रभावी माना जाता है।
यदि घर में आर्थिक तनाव के साथ साथ दाम्पत्य में भी खटास आ रही हो, तो शुक्रवार का दिन विशेष रूप से उपयोगी होता है।
यह प्रक्रिया केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं है बल्कि एक सूक्ष्म प्रतीक है कि घर में लक्ष्मी का स्वागत और दंपत्ति का संयुक्त संकल्प सक्रिय हो। एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करने से मन में एकता की भावना बढ़ती है।
यदि पति या पत्नी में से कोई एक व्यक्ति बात बात पर क्रोधित हो जाता हो, छोटी बात में भी नाराज हो जाए या बात को बहुत देर तक पकड़कर बैठे रहे, तो यह उपाय उपयोगी हो सकता है।
सूर्य मन की व्यापकता और आत्मबल का कारक है। सूर्य को नियमित जल अर्पण से क्रोध, अहंकार और अधिक प्रतिक्रिया की प्रवृत्ति धीरे धीरे कम होती है। इस उपाय को कम से कम कुछ सप्ताह तक निरंतर निभाना चाहिए।
यदि वैवाहिक विवाद इस स्तर तक पहुंच गया हो कि बात बार बार तलाक तक आ रही हो, घर के बड़े और परिवार वाले भी अत्यधिक चिंतित हों, तो यह उपाय भारी परिस्थितियों को हल्का करने में सहायक माना जाता है।
हनुमान जी को संकट मोचन माना जाता है। जब मन टूटने लगे, हिम्मत जवाब देने लगे और रिश्ते पर स्थायी खतरा दिखने लगे तब हनुमान चालीसा का नियमित पाठ भीतर की शक्ति को जगाने का सरल साधन है।
वैदिक परंपरा में कुछ वृक्षों को विशेष रूप से गुरुत्व, धर्म और दीर्घकालीन सुख का प्रतीक माना गया है। वैवाहिक जीवन को स्थिर और दीर्घकालिक बनाने के लिए पीपल और केले के वृक्ष से जुड़े उपाय भी उल्लेखित हैं।
शास्त्रों में बताया गया है कि सुखी वैवाहिक जीवन के लिए पीपल और केले के पेड़ की श्रद्धा से पूजा करना फलदायक होता है।
पीपल दीर्घायु और आध्यात्मिक धैर्य का प्रतीक है, जबकि केला समृद्धि, वृद्धि और बृहस्पति की कृपा से जुड़ा माना जाता है। दोनों की नियमित पूजा वैवाहिक जीवन में धैर्य और सामंजस्य के बीज को मजबूत करती है।
जब पति की आय सीधे पत्नी के हाथों से घर की तिजोरी तक पहुंचती है तब धन में स्थिरता और वृद्धि दोनों की संभावना बढ़ती है।
यह उपाय केवल परंपरा भर नहीं है। इससे घर की आर्थिक ऊर्जा साझा जिम्मेदारी की ओर बढ़ती है। धन पर दोनों की संयुक्त दृष्टि रहती है और अवचेतन स्तर पर यह संदेश जाता है कि गृहस्थी को दोनों मिलकर चला रहे हैं।
इसके साथ ही यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पति या पत्नी में से कोई भी साथी की कम आय पर ताना न दे। आय का स्तर अलग अलग हो सकता है, परंतु सम्मान और कृतज्ञता समान रहनी चाहिए। आय पर व्यंग्य या ताना वैवाहिक विवाद का बड़ा कारण बन सकता है और धीरे धीरे भावनात्मक दूरी बहुत बढ़ जाती है।
वैवाहिक सुख की नींव विवाह से पहले ही रखी जा सकती है। जिन लड़कियों का विवाह तय हो गया हो, उनके लिए माता द्वारा किया गया एक छोटा सा उपाय शुभ फल दे सकता है।
जिन कन्याओं का विवाह निश्चित हो गया हो, उनकी माता निम्न विधि कर सकती हैं।
इस विधि का संबंध गुरु ग्रह से माना जाता है, जो वैवाहिक जीवन के कारक हैं। बृहस्पति शुभ हो तो दाम्पत्य में सुरक्षा, सम्मान और विस्तार की ऊर्जा बढ़ती है। इस उपाय से उद्देश्य यह होता है कि लड़की अपने ससुराल में स्थिर, सम्मानजनक और सुखी दांपत्य जीवन जी सके।
उपाय करने से ऊर्जा बदलती है, मन को सहारा मिलता है और परिस्थितियां धीरे धीरे नरम पड़ती हैं। फिर भी केवल यंत्र, मंत्र और पूजा से ही पूरी तस्वीर नहीं बदलती। पति पत्नी की आपसी समझ और व्यवहार में परिवर्तन उतना ही आवश्यक रहता है।
जब भी झगड़ा हो जाए, संवाद टूट जाए या मन में आघात बैठ जाए तब कुछ बातें ध्यान में रखना उपयोगी है।
ज्योतिषीय उपाय संबंधों के चारों ओर एक सुरक्षात्मक ऊर्जा बनाते हैं। मंत्र, जप, दान, वृक्ष पूजा और ग्रह शांति से मन की तीखी धार कुछ नरम होती है। इसी नरमी में संवाद की एक नई शुरुआत संभव होती है। जब दोनों पक्ष थोड़ा झुकने तैयार हों, भीतर की जिद कुछ ढीली पड़े और घर की ऊर्जा भी सहयोग करे, तो बड़े से बड़ा वैवाहिक विवाद भी समय के साथ हल हो सकता है।
1. वैवाहिक समस्या के लिए एक साथ कई उपाय करना सही है
एक साथ बहुत सारे उपाय शुरू करना उचित नहीं माना जाता। बेहतर है कि एक या अधिकतम दो उपाय चुनकर उन्हें कम से कम 27 दिन तक लगातार किया जाए। इससे मन केंद्रित रहता है और परिणाम को समझना भी आसान होता है।
2. क्या ये उपाय बिना कुंडली दिखाए भी किए जा सकते हैं
ये उपाय सामान्य रूप से वैवाहिक जीवन की ऊर्जा को संतुलित करने के लिए बताए गए हैं, इसलिए इन्हें बिना कुंडली देखे भी किया जा सकता है। यदि समस्या बहुत पुरानी हो या बार बार टूटने की स्थिति बन रही हो तब किसी योग्य ज्योतिषी से कुंडली विश्लेषण करवाना उपयोगी रहता है।
3. शिवलिंग पर जल चढ़ाने और मंत्र जप का प्रभाव कब से दिखने लगता है
यदि श्रद्धा और नियमितता के साथ यह साधना की जाए, तो सामान्यतः कुछ सप्ताह में घर के वातावरण और संवाद की भाषा में हल्का बदलाव महसूस होने लगता है। कभी कभी परिणाम धीमे होते हैं, पर मन के भीतर शांत ऊर्जा बनने लगती है।
4. क्या केवल पत्नी ही पति का वेतन तिजोरी में रखे तो ही धन वृद्धि होगी
यह उपाय ऊर्जा के प्रतीक के रूप में बताया गया है कि पति की आय गृहस्थी में श्रद्धा और सम्मान के साथ समर्पित हो। यदि दोनों मिलकर योजना बनाएं और धन को मिलकर संभालें, तो भी सकारात्मक फल प्राप्त हो सकता है।
5. तलाक की स्थिति में हनुमान चालीसा का पाठ कैसे किया जाए
यदि बात तलाक तक पहुंच गई हो, तो रोज सुबह शांत मन से 11 बार हनुमान चालीसा पढ़ना बताया गया है। इस दौरान मन में यह संकल्प रखना उपयोगी है कि जो भी निर्णय जीवन के लिए उचित हो, उसी की दिशा में मार्गदर्शन मिले और मन कमजोर न पड़े।
लग्न राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
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इनके क्लाइंट: म.प्र., दि.
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