By पं. अभिषेक शर्मा
हर वार के लिए सरल और प्रभावी ज्योतिषीय सूत्र

हर दिन सुबह उठते ही मन में एक हल्का सा सवाल रहता है कि आज का दिन कैसा जाएगा। कोई नया काम शुरू करना हो या किसी फैसले को लेकर मन दुविधा में हो तो अंदर से संकेत भी आता है कि आज करें या कुछ दिन रुक जाएं। वैदिक ज्योतिष में यह भावना केवल अनुमान नहीं मानी जाती बल्कि वार तिथि नक्षत्र योग और करण के स्पष्ट नियमों से जोड़ी जाती है।
सप्ताह के सातों दिन किसी न किसी ग्रह से जुड़े हैं। जिस दिन जिस ग्रह की भूमिका अधिक रहती है उस दिन किए गए काम उस ग्रह की ऊर्जा से रंगे हुए हो जाते हैं। जो व्यक्ति इस वार-विज्ञान को सरल तरीके से समझ लेता है वह धीरे धीरे यह जानने लगता है कि किस दिन कौन से काम करने से सफलता की संभावना बढ़ती है और किन कार्यों को टालना बेहतर रहता है।
ज्योतिष के अनुसार सूर्य उदय से लेकर अगले दिन के सूर्य उदय तक का समय एक वार कहलाता है। सातों वार क्रमशः सूर्य चंद्र मंगल बुध गुरु शुक्र और शनि से संबंधित माने गए हैं। इन्हीं ग्रहों का प्रभाव मन के मूड से लेकर शरीर की ऊर्जा निर्णय क्षमता संबंधों और धन तक पर दिखाई देता है।
जब किसी नए काम की योजना बनाई जाती है तो आदर्श स्थिति में तिथि वार नक्षत्र योग और करण को एक साथ देखा जाता है। परंतु हर व्यक्ति के लिए यह हमेशा संभव नहीं होता। इसलिए व्यावहारिक रूप से पहले वार के गुणों को समझना उपयोगी रहता है। इससे कम से कम इतना तो समझ में आ जाता है कि किस दिन कौन सा काम सहजता से आगे बढ़ सकता है और किस दिन संयम रखना अधिक बुद्धिमानी होगी।
नीचे दी गयी सारणी सप्ताह के दिनों को एक नज़र में समझने में मदद करती है।
| वार | ग्रह | प्रमुख देवता | यात्रा की शुभ दिशाएं | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|---|---|
| रविवार | सूर्य | विष्णु, सूर्य | पूर्व, उत्तर, अग्निकोण | स्वास्थ्य, सम्मान, पद |
| सोमवार | चंद्र | शिव | दक्षिण, पश्चिम | मन की शांति, निवेश |
| मंगलवार | मंगल | हनुमान | दक्षिण, पूर्व | साहस, ऋण मुक्ति, शौर्य |
| बुधवार | बुध | गणेश, दुर्गा | पूर्व, दक्षिण, नैऋत्य | बुद्धि, लेखन, व्यापार |
| गुरुवार | बृहस्पति | ब्रह्मा, गुरु | उत्तर, पूर्व, ईशान | धर्म, शिक्षा, त्याग |
| शुक्रवार | शुक्र | लक्ष्मी, काली | पूर्व, उत्तर, ईशान | धन, कला, सौंदर्य |
| शनिवार | शनि | भैरव, शनि | पश्चिम, दक्षिण | कर्म, अनुशासन, बाधा निवारण |
अब हर दिन को विस्तार से समझा जा सकता है।
रविवार सूर्य का दिन माना गया है। सूर्य शरीर की ऊर्जा आत्मविश्वास और प्रतिष्ठा का कारक ग्रह है। इस दिन भगवान विष्णु और सूर्य की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। जो लोग अच्छे स्वास्थ्य सम्मान और स्थिर नौकरी की कामना रखते हैं उनके लिए रविवार एक महत्वपूर्ण दिन बन जाता है।
अच्छा स्वास्थ्य केवल दवा से नहीं आता। रविवार को यदि व्यक्ति अपनी दिनचर्या में थोड़ी अनुशासनशीलता लाए जैसे समय पर उठना सूर्य को अर्घ्य देना या शरीर के लिए हल्का व्यायाम करना तो सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा धीरे धीरे मजबूत होती है।
यदि कुंडली में सूर्य कमजोर हो या आत्मविश्वास की कमी महसूस हो रही हो तो रविवार को यह आसान उपाय किए जा सकते हैं।
इस प्रकार रविवार व्यक्ति को नेतृत्व और जिम्मेदारी की दिशा में बढ़ने का अवसर देता है।
सोमवार चंद्रमा का दिन है। चंद्रमा मन का स्वामी माना जाता है और भगवान शिव से भी इसका गहरा संबंध बताया गया है। जिन लोगों का स्वभाव बहुत चंचल या उग्र है उनके लिए सोमवार का व्रत मन की उथल पुथल को शांत करने में सहायक माना जाता है।
चंद्रमा की ऊर्जा जल की तरह है। सही दिशा में रहे तो जीवन को पोषण देती है यदि असंतुलित हो जाए तो भावनात्मक परेशानी बढ़ा सकती है। इसलिए सोमवार को शांत मन से निर्णय लेना और भावावेश में आकर कदम न उठाना विशेष महत्वपूर्ण होता है।
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो या भावनात्मक अस्थिरता अधिक हो तो सोमवार को यह उपाय किया जा सकता है।
इससे चंद्र की शीतल ऊर्जा मन पर सकारात्मक प्रभाव डालती है।
मंगलवार मंगल ग्रह का दिन है और संकटमोचन श्री हनुमान जी से भी जुड़ा माना जाता है। मंगल साहस बल संघर्ष और रक्त का कारक ग्रह है। जो व्यक्ति अपने कार्य के परिणाम को मजबूत देखना चाहता है उसके लिए मंगलवार एक निर्णायक दिन बन सकता है बशर्ते ऊर्जा का सही उपयोग हो।
मंगल की ऊर्जा बहुत तीव्र होती है। यदि इसे अनुशासन से न जोड़ा जाए तो यह क्रोध झगड़े और दुर्घटना की दिशा में भी ले जा सकती है। इसलिए मंगलवार को विशेष रूप से संयम और जागरूकता की आवश्यकता रहती है।
जिन लोगों की कुंडली में मंगल की स्थिति ठीक न हो या मांगलिक योग बन रहा हो उन्हें मंगलवार को यह उपाय लाभ दे सकता है।
यह उपाय धीरे धीरे मंगल की कठोरता को नरम करता है और वैवाहिक जीवन में स्थिरता की संभावना बढ़ाता है।
बुधवार की प्रकृति चर और सौम्य मानी गई है। यह दिन बुध ग्रह के अधीन आता है जो बुद्धि तर्क संवाद व्यापार और विश्लेषण क्षमता का स्वामी है। इसलिए जिन लोगों का कार्य लेखन शिक्षा परामर्श या व्यापार से जुड़ा हो उनके लिए बुधवार का सही उपयोग बहुत महत्वपूर्ण है।
बुधवार का दिन विचारों को व्यवस्थित करने के लिए अच्छा माना जाता है। ऐसे लोग जो नए प्रोजेक्ट की योजना बनाना चाहते हैं या अनुबंध तैयार कर रहे हैं वे इस दिन मीटिंग या दस्तावेज़ों को अंतिम रूप देने पर विचार कर सकते हैं।
यदि कुंडली में बुध कमजोर हो तो
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु की स्थिति ठीक न हो तो
इस प्रकार रंगों और अन्न के माध्यम से ग्रहों की ऊर्जा को संतुलित करने की परंपरा बनी हुई है।
गुरुवार या बृहस्पतिवार ब्रह्मा और बृहस्पति का दिन माना जाता है। बृहस्पति गुरु धर्म ज्ञान और सद्बुद्धि के ग्रह हैं। कई परंपराओं में गुरुवार को रविवार से भी अधिक पवित्र दिन माना गया है क्योंकि यह दिन पापों के प्रायश्चित्त और संकल्प परिवर्तन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है।
यह दिन गुरुजनों के सम्मान और आध्यात्मिक अध्ययन के लिए भी विशेष माना जाता है। जो लोग किसी शास्त्र या आध्यात्मिक पुस्तक का नियमित अध्ययन शुरू करना चाहते हैं वे इसका प्रारंभ गुरुवार से कर सकते हैं।
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु कमजोर हो तो
यदि केतु की स्थिति ठीक न हो तो
इन उपायों से बृहस्पति और केतु दोनों की ऊर्जा को संतुलित करने में सहायता मिलती है।
शुक्रवार माता लक्ष्मी और माँ काली का दिन माना जाता है। यह दिन सौंदर्य कला प्रेम और भौतिक सुख सुविधाओं से संबंधित माना जाता है। आभूषण श्रृंगार सुगंधित पदार्थ सुंदर वस्त्र वाहन और चांदी आदि के क्रय-विक्रय के लिए शुक्रवार शुभ माना गया है।
जो लोग अपने जीवन में सौंदर्य और संबंधों में मधुरता बढ़ाना चाहते हैं उनके लिए शुक्रवार को संबंधों में आभार और स्नेह व्यक्त करना विशेष लाभ देता है।
यदि कुंडली में शुक्र कमजोर हो तो
यह उपाय शुक्र की सौम्य ऊर्जा को जागृत करते हैं और संबंधों तथा आर्थिक स्थितियों में धीरे धीरे सुधार का मार्ग खोलते हैं।
शनिवार शनि और भगवान भैरव का दिन है। शनि ग्रह कर्म अनुशासन विलंब और न्याय से संबंधित है। यह ग्रह व्यक्ति को उसके कर्मों का परिणाम दिखाने के लिए जाना जाता है इसलिए शनिवार का नाम सुनकर कई लोग सहज रूप से सावधान हो जाते हैं। सही दृष्टि से देखा जाए तो यह दिन जीवन के प्रति जिम्मेदारी बढ़ाने का अवसर देता है।
शनिवार को यदि व्यक्ति दिन भर अपने कर्मों पर जागरूक दृष्टि रखे और किसी भी प्रकार के छल द्वेष या आलस्य से बचे तो शनि की कठोरता भी धैर्य और स्थिरता के रूप में बदल सकती है।
यदि कुंडली में शनि पीड़ित हो तो
यदि राहु की स्थिति ठीक न हो तो
इन छोटे से नियमों के पीछे यही भावना है कि व्यक्ति स्वयं को अधिक अनुशासित और संयमित जीवन की ओर बढ़ाए।
सप्ताह के दिनों के अनुसार कार्य और उपाय जानना पहला कदम है। दूसरा कदम यह है कि व्यक्ति अपनी दिनचर्या में इन्हें सरल रूप से जोड़ दे। सब उपाय एक साथ करना आवश्यक नहीं है।
इस तरह वार के अनुसार उपाय केवल परंपरा नहीं रहते बल्कि जीवन को व्यवस्थित और संतुलित बनाने का माध्यम बन जाते हैं।
क्या हर ग्रह के लिए अलग वार उपाय करना आवश्यक है
यदि कुंडली में कोई ग्रह बहुत अधिक पीड़ित हो तो उसके वार पर विशेष ध्यान देना उपयोगी है। सामान्य स्थिति में छोटे छोटे उपाय भी पर्याप्त हो सकते हैं।
क्या गलत दिन पर शुभ काम करने से हमेशा नुकसान होता है
हर बार नुकसान होना आवश्यक नहीं है पर सही वार और सही मुहूर्त चुनने से सफलता की संभावना बढ़ जाती है और अनावश्यक रुकावटें कम होती हैं।
क्या सप्ताह के उपाय बिना कुंडली देखे भी किए जा सकते हैं
सामान्य उपाय जैसे तिलक व्रत या दान अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित होते हैं। फिर भी यदि किसी रोग या विशेष समस्या के लिए उपाय किया जा रहा हो तो कुंडली दिखाना बेहतर होता है।
क्या एक ही दिन बहुत सारे उपाय करना उचित है
अत्यधिक उपाय करने से मन में बोझ बढ़ सकता है। बेहतर है कि कम उपाय चुने जाएं और उन्हें नियमितता और श्रद्धा के साथ किया जाए।
यदि किसी कारण से निर्धारित दिन उपाय न कर सकें तो क्या प्रभाव समाप्त हो जाता है
नियम टूट जाने पर निराश होने की आवश्यकता नहीं होती। जितना संभव हो सके निरंतरता बनाए रखना ही मुख्य बात है। अगले सप्ताह फिर से उसी दिन से शुरू किया जा सकता है।
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