By पं. अभिषेक शर्मा
जानें क्या लड़कियां हनुमान जी का व्रत कर सकती हैं और उनके आध्यात्मिक अधिकार

यह समाज में फैला एक बहुत बड़ा भ्रम है कि हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं इसलिए महिलाओं को उनकी पूजा या व्रत नहीं करना चाहिए। ज्योतिष और अध्यात्म के गहरे विज्ञान के अनुसार भक्ति की कोई लैंगिक पहचान नहीं होती। आत्मा न तो पुरुष है और न ही स्त्री। हनुमान जी के लिए हर भक्त या तो एक बालक के समान है या एक माता या बहन के समान। लड़कियां पूरी श्रद्धा के साथ मंगलवार का व्रत रख सकती हैं और हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ कर सकती हैं। केवल उनके विरक्त और सन्यासी स्वरूप का सम्मान करते हुए मूर्ति को सीधे स्पर्श करने से बचने की सलाह दी जाती है जो कि मर्यादा का प्रतीक है। हनुमान जी संकटमोचक हैं और वे अपनी बहनों और माताओं की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं इसलिए किसी भी रूढ़िवादिता में फंसे बिना महिलाएं निर्भीक होकर उनकी शरण ले सकती हैं।
भक्ति मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति के लिए उसका शरीर या लिंग मायने नहीं रखता। वैदिक सनातन धर्म में ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग केवल प्रेम और श्रद्धा से बना होता है। हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी माना जाता है लेकिन इसका अर्थ यह कभी नहीं था कि वे स्त्री भक्तों से दूर रहते हैं। उनका ब्रह्मचर्य उनके अपने संकल्प और तप का प्रतीक है न कि भक्तों के प्रति कोई दूरी। जिस प्रकार एक माता अपने पुत्र से और एक बहन अपने भाई से प्रेम करती है उसी प्रकार एक महिला भक्त हनुमान जी को अपना रक्षक और आश्रयदाता मान सकती है।
सनातन परंपरा में अहल्या तापसा और शबरिनी जैसे अनेक उदाहरण मिलते हैं जिन्होंने भगवान राम और हनुमान जी की भक्ति में अपनी आत्मा समर्पित कर दी थी। हनुमान जी स्वयं भक्ति के ऐसे सागर हैं जहां जाति कुल या लिंग का कोई भेदभाव नहीं होता। वे तो केवल भक्ति के भूखे हैं। यदि किसी महिला के हृदय में सच्ची श्रद्धा है तो हनुमान जी उसके लिए सदैव उपस्थित रहते हैं। इस भ्रम को तोड़कर महिलाओं को अपने आध्यात्मिक अधिकारों का पूर्ण उपयोग करना चाहिए।
मंगलवार का दिन मंगल ग्रह और हनुमान जी को समर्पित माना जाता है। इस दिन व्रत करने से भक्त पर आने वाले संकट दूर होते हैं और मानसिक शक्ति प्राप्त होती है। महिलाओं के लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी होता है क्योंकि यह पारिवारिक सुख और पति की सुरक्षा का कारक माना जाता है।
व्रत के मुख्य नियम इस प्रकार हैं:
यदि पूर्ण व्रत संभव न हो तो केवल एक बार भोजन करके भी इसे आंशिक रूप से किया जा सकता है। गर्भवती महिलाएं या स्वास्थ्य समस्या वाले लोग फलाहार करके भी इस व्रत का पुण्य प्राप्त कर सकती हैं। नियमों से अधिक महत्व भावना का होता है।
हनुमान चालीसा के 40 चौपाइयां हैं जो भक्त को मानसिक भय से मुक्त करती हैं। इसका पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। सुंदरकांड रामायण का वह अध्याय है जहां हनुमान जी ने लंका में माता सीता की खोज की थी। इसका पाठ करने से घर में सुख शांति आती है और वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
महिलाओं के लिए इन ग्रंथों के पाठ के विशेष लाभ हैं:
इन पाठों को करते समय शुद्धता और एकाग्रता का ध्यान रखना चाहिए। साफ वस्त्र पहनकर और पूजा स्थल को स्वच्छ करके ही बैठना चाहिए।
यह प्रश्न अक्सर मन में आता है कि क्या महिलाएं हनुमान जी की मूर्ति को स्पर्श कर सकती हैं। शास्त्रों में हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी और تیपस्वी माना गया है। मर्यादा और सम्मान की दृष्टि से यह परंपरा चली आई है कि महिलाएं उनकी मूर्ति को सीधे स्पर्श न करें। इसका अर्थ यह नहीं है कि वे पूजा नहीं कर सकतीं।
इस नियम का पालन करते हुए महिलाएं निम्नलिखित उपाय अपना सकती हैं:
यह मर्यादा हनुमान जी के तपस्वी स्वरूप के प्रति सम्मान है न कि महिलाओं के प्रति कोई प्रतिबंध। भक्ति के मार्ग में हृदय की शुद्धता ही सबसे बड़ी पूजा है।
हनुमान जी अत्यंत सरल हैं और थोड़ी सी भी सच्ची भक्ति पर वे प्रसन्न हो जाते हैं। उनकी कृपा पाने के लिए कुछ सरल उपाय किए जा सकते हैं जो महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं।
इन उपायों को करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और भक्त पर आने वाले संकट टल जाते हैं।
हनुमान जी की भक्ति का सार केवल बाहरी पूजा नहीं बल्कि आंतरिक आत्मसमर्पण है। जब एक भक्त अपने अहंकार को त्यागकर पूर्ण विश्वास के साथ हनुमान जी की शरण में जाता है तो उनका जीवन बदल जाता है। महिलाएं अपनी सहज भावना और प्रेम के गुण के कारण हनुमान जी की भक्ति में बहुत आगे बढ़ सकती हैं।
हनुमान जी अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। वे न केवल बाहरी शत्रुओं से बचाते हैं बल्कि आंतरिक भय और कमजोरियों का भी नाश करते हैं। जब कोई महिला हनुमान जी को अपना रक्षक मानकर पूजा करती है तो उसे मानसिक धैर्य और शारीरिक शक्ति प्राप्त होती है। यह भक्ति उसे जीवन के कठिन संघर्षों में अडिग रहने का सामर्थ्य देती है।
समाज में फैले कई अंधविश्वासों के कारण महिलाएं हनुमान जी की पूजा से वंचित रह जाती हैं। यह समझना आवश्यक है कि ईश्वर का भवन सभी के लिए खुला है। जाति धर्म या लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता। हनुमान जी तो स्वयं भगवान राम के परम भक्त हैं और उन्होंने हमेशा नारी शक्ति का सम्मान किया है।
सीता हरण के समय हनुमान जी ने माता सीता का सम्मान करते हुए उन्हें आश्वस्त किया था और उनकी रक्षा का वचन दिया था। इसी प्रकार आज भी वे अपनी हर भक्त बहन की रक्षा के लिए तैयार हैं। इसलिए महिलाओं को डर या संकोच के बिना हनुमान जी की शरण लेनी चाहिए। सच्ची भक्ति वही है जो हृदय से हो और जिसमें किसी प्रकार का भेदभाव न हो।
क्या महिलाएं हनुमान जी का व्रत रख सकती हैं?
जी हां महिलाएं पूर्ण श्रद्धा के साथ मंगलवार का व्रत रख सकती हैं और हनुमान जी की पूजा कर सकती हैं।
क्या महिलाएं हनुमान चालीसा का पाठ कर सकती हैं?
जी हां महिलाएं हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ कर सकती हैं इससे उन्हें मानसिक शांति मिलती है।
क्या हनुमान जी की मूर्ति को स्पर्श करना मना है?
मर्यादा और सम्मान की दृष्टि से महिलाओं को हनुमान जी की मूर्ति को सीधे स्पर्श करने से बचने की सलाह दी जाती है।
मंगलवार व्रत में क्या खाना चाहिए?
व्रत में फलाहार करना चाहिए जिसमें फल दूध और साबूदाना शामिल हो सकते हैं और नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
हनुमान जी की कृपा पाने का सबसे अच्छा उपाय क्या है?
हनुमान जी को राम नाम से अधिक प्रिय कुछ नहीं है इसलिए राम नाम का जाप और गरीबों की सेवा से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
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