By पं. नीलेश शर्मा
जानिए वैदिक ज्योतिष के अनुसार आपकी राशि और शारीरिक अंगों का गुप्त विज्ञान

वैदिक ज्योतिष में कालपुरुष कुंडली ब्रह्मांडीय पुरुष का एक प्रतीकात्मक खाका है जो ब्रह्मांड और मानव शरीर के बीच के गहरे संबंध को दर्शाता है। इसे ज्योतिषीय शरीर विज्ञान का आधार माना जाता है। ऋषि मुनियों के अनुसार यथा ब्रह्माण्डे तथा पिण्डे अर्थात् जो इस ब्रह्मांड में है वही हमारे शरीर के भीतर भी है। कालपुरुष की कुंडली हमेशा मेष लग्न से शुरू होती है। इसमें १ से लेकर १२ तक की राशियां मानव शरीर के शीर्ष से लेकर अंत तक के अंगों को एक क्रमबद्ध व्यवस्था में नियंत्रित करती हैं।
नीचे दी गई तालिका स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि कौन सी राशि शरीर के किस हिस्से पर आधिपत्य रखती है
| क्रम | राशि नाम | संबंधित शारीरिक अंग | शासी ग्रह |
|---|---|---|---|
| १ | मेष | सिर, मस्तिष्क, खोपड़ी, चेहरे की हड्डियां | मंगल |
| २ | वृषभ | मुख, आंखें, गला, जीभ, स्वर तंत्र | शुक्र |
| ३ | मिथुन | कंधे, भुजाएं, हाथ, श्वास नलिका, तंत्रिका तंत्र | बुध |
| ४ | कर्क | छाती, फेफड़े, हृदय, स्तन, आमाशय का ऊपरी हिस्सा | चंद्रमा |
| ५ | सिंह | पेट, हृदय की धमनियां, रीढ़ की हड्डी, ऊपरी पीठ | सूर्य |
| ६ | कन्या | कमर, आंतें, पाचन तंत्र का निचला हिस्सा | बुध |
| ७ | तुला | गुर्दे, नाभि के नीचे का भाग, त्वचा, गर्भाशय | शुक्र |
| ८ | वृश्चिक | जननांग, उत्सर्जन तंत्र, गुदा | मंगल |
| ९ | धनु | जांघें, कूल्हे, धमनियां | बृहस्पति |
| १० | मकर | घुटने, जोड़, हड्डियां | शनि |
| ११ | कुंभ | पिंडली, टखने, रक्त परिसंचरण | शनि |
| १२ | मीन | पैर के पंजे, तलवे, लसीका प्रणाली | बृहस्पति |
मेष राशि भचक्र की पहली राशि है। चूंकि जीवन या किसी भी आकृति की शुरुआत शीर्ष से होती है इसलिए यह मानव शरीर के सबसे ऊपरी हिस्से यानी सिर, खोपड़ी और मस्तिष्क का प्रतिनिधित्व करती है। इसका स्वामी मंगल है जो रक्त, मज्जा और तीव्र ऊर्जा का कारक है। मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह और मानसिक सक्रियता इसी राशि से नियंत्रित होती है।
यह कालपुरुष की कुंडली का द्वितीय भाव है जिसे ज्योतिष में मुख भवन या वाणी का घर कहा जाता है। इसलिए यह चेहरा, आंखें, दांत, जीभ और गला को दर्शाता है। शुक्र इसका स्वामी है जो सौंदर्य और स्वाद का कारक है। भोजन ग्रहण करने की क्षमता और स्वर की मधुरता इसी राशि के अधीन आती है।
मिथुन तृतीय भाव की राशि है जो पराक्रम, साहस और संचार को दर्शाती है। मनुष्य अपने साहस और कर्म का प्रदर्शन अपने हाथों और कंधों से करता है। इसका स्वामी बुध है जो संदेशवाहक है। हाथों की उंगलियां, श्वास नलिका जिससे मनुष्य बोलते और सांस लेते हैं और तंत्रिका तंत्र का ऊपरी हिस्सा इसके नियंत्रण में रहता है।
कर्क चतुर्थ भाव की राशि है जो माता, ममता, पोषण और हृदय की भावनाओं से जुड़ी है। शारीरिक रूप से यह हृदय, स्तन और फेफड़ों को कवर करती है। चंद्रमा इसका स्वामी है जो जल तत्व प्रधान है। शरीर के तरल पदार्थ, फेफड़ों में कफ का संतुलन और छाती के अंग इसी राशि से प्रभावित होते हैं।
सिंह पंचम भाव की राशि है जो जीवन शक्ति, सत्ता और केंद्र का प्रतीक है। शरीर का केंद्र मनुष्य की रीढ़ की हड्डी और पेट का ऊपरी हिस्सा है। इसका स्वामी सूर्य है जो आत्मा और हड्डियों की मजबूती का कारक है। हृदय की धड़कन की मुख्य शक्ति और शारीरिक ऊर्जा का केंद्र यही राशि है।
कन्या षष्ठ भाव यानी रोग और ऋण का भाव की राशि है। शरीर में रोगों की उत्पत्ति का मुख्य कारण पेट की गड़बड़ी और पाचन होता है। यह आंतों का प्रतिनिधित्व करती है। बुध इसका स्वामी है। यह भोजन के अवशोषण और पोषक तत्वों को अलग करने की प्रक्रिया को नियंत्रित करती है।
तुला सप्तम भाव की राशि है जिसका प्रतीक तराजू है। शरीर में जल और रसायनों का संतुलन बनाए रखने का काम गुर्दे करते हैं जो विषैले पदार्थों को छानते हैं। शुक्र के स्वामित्व वाली यह राशि नाभि के नीचे के आंतरिक अंगों और त्वचा की बनावट को संतुलित रखती है।
वृश्चिक अष्टम भाव की राशि है जो मृत्यु, पुनर्जन्म, गोपनीयता और गहरे बदलावों को दर्शाती है। शरीर में उत्सर्जन और जननांग इस श्रेणी में आते हैं। मंगल और केतु इसके कारक हैं। यह शरीर के सबसे गुप्त हिस्सों, प्रजनन तंत्र और मल मूत्र त्यागने वाले अंगों को नियंत्रित करती है।
धनु नवम भाव की राशि है जो लंबी यात्राओं और गतिशीलता को दर्शाती है। शरीर को खड़े रहने और लंबी दूरी तय करने के लिए जांघों की आवश्यकता होती है। बृहस्पति इसका स्वामी है। यह शरीर के सबसे बड़े जोड़ों और जांघों की मांसपेशियों को नियंत्रित करता है जो पूरे शरीर के वजन को सहारा देती हैं।
मकर दशम भाव यानी कर्म भाव की राशि है। किसी भी कार्य को करने या झुककर सम्मान देने के लिए घुटनों का लचीलापन और मजबूती अनिवार्य है। शनि इसका स्वामी है जो वायु तत्व और शुष्कता का कारक है। घुटनों का दर्द, हड्डियों के जोड़ और शरीर का ढांचा मकर राशि से ही देखा जाता है।
कुंभ एकादश भाव यानी लाभ और प्रवाह की राशि है। पैरों की पिंडलियां और टखने रक्त को वापस हृदय की तरफ पंप करने में द्वितीय हृदय का कार्य करते हैं। शनि इसका स्वामी है। यह पूरे शरीर में वायु के वेग और पैरों के निचले हिस्से की नसों के जाल को नियंत्रित करता है।
मीन भचक्र की अंतिम बारहवीं राशि है और द्वादश भाव मोक्ष, विश्राम और पैरों का होता है। इसलिए यह शरीर के सबसे अंतिम भाग यानी पैर के तलवों और पंजों को दर्शाती है। बृहस्पति इसका स्वामी है और यह जल तत्व की राशि है। यह शरीर की लसीका प्रणाली और पैरों की संवेदनशीलता को प्रभावित करती है।
कालपुरुष कुंडली क्या होती है और ज्योतिष में इसका क्या उपयोग है कालपुरुष कुंडली ब्रह्मांड को एक पुरुष के रूप में मानकर बनाई गई एक काल्पनिक कुंडली है। इसका मुख्य उपयोग चिकित्सा ज्योतिष में शरीर के अंगों की बनावट, उनकी शक्ति और रोगों की पहचान करने के लिए किया जाता है।
क्या कुंडली के कमजोर भावों से शारीरिक बीमारियों का पता चल सकता है हां बिल्कुल। यदि कालपुरुष कुंडली का कोई भाव या राशि आपकी व्यक्तिगत जन्म कुंडली में कमजोर या पाप ग्रहों से दृष्ट है तो उस भाग से जुड़े अंगों में कमजोरी या रोग होने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है।
पाचन तंत्र की खराबी को किस राशि से देखा जाता है कालपुरुष कुंडली के अनुसार छठी राशि यानी कन्या राशि आंतों और निचले पाचन तंत्र को नियंत्रित करती है। यदि कुंडली में कन्या राशि या इसका स्वामी बुध पीड़ित हो तो पाचन संबंधी विकार उत्पन्न होते हैं।
रीढ़ की हड्डी की मजबूती के लिए कौन सा ग्रह जिम्मेदार है रीढ़ की हड्डी और पीठ के ऊपरी हिस्से का नियंत्रण सिंह राशि के पास होता है जिसका स्वामी सूर्य है। सूर्य की स्थिति मजबूत होने पर रीढ़ की हड्डी सुदृढ़ रहती है।
पैरों और टखनों में दर्द का ज्योतिषीय कारण क्या है पैरों की पिंडलियों और टखनों का संबंध कुंभ राशि से है और पैरों के तलवों का संबंध मीन राशि से है। शनि और बृहस्पति के पीड़ित होने पर या इन राशियों पर अशुभ प्रभाव होने पर पैरों में दर्द की समस्या होती है।
चंद्र राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी चंद्र राशिअनुभव: 20
इनसे पूछें: Family Planning, Career
इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें
ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।
अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।
अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।
WELCOME TO
Right Decisions at the right time with ZODIAQ
500+
USERS
100K+
TRUSTED ASTROLOGERS
20K+
DOWNLOADS