By पं. नरेंद्र शर्मा
शुक्र देव का प्रभाव चारों चरण और नाम से नक्षत्र तय करने के भ्रम का संपूर्ण वैदिक समाधान

वैदिक ज्योतिष में किसी भी नवजात शिशु के नामकरण का प्रथम और सर्वोपरि आधार उसकी जन्म कालीन चंद्र राशि और नक्षत्र चरण होता है। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र संपूर्ण भचक्र का बीसवां और अत्यंत तेजस्वी व अपराजित ऊर्जा प्रदाता नक्षत्र है जो धनु राशि में 13 अंश 20 कला से आरंभ होकर 26 अंश 40 कला तक पूर्ण रूप से विस्तृत रहता है। इसके अंतर्गत कुल 4 चरण आते हैं और प्रत्येक चरण के लिए प्राचीन ऋषियों ने विशिष्ट ध्वनि बीजाक्षर निर्धारित किए हैं। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में जन्म लेने वाले बालकों और बालिकाओं का नामकरण केवल इन्हीं शास्त्रीय अक्षरों से किया जाना चाहिए।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के अंतर्गत निर्धारित 4 मुख्य नामाक्षर इस प्रकार हैं: भू धा फा ढा। जब शिशु को इन विशिष्ट बीजाक्षरों से युक्त नाम से पुकारा जाता है तो उसके मस्तिष्क की तंत्रिकाओं और आभा मंडल में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है जिससे उसकी अपराजित इच्छाशक्ति वाकपटुता लोकप्रियता और जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के उत्साह में निरंतर वृद्धि होती है।
| नक्षत्र चरण | राशि एवं अंश विस्तार | चरण का नामाक्षर | नवमांश राशि | अधिष्ठाता देवता |
|---|---|---|---|---|
| प्रथम चरण | धनु राशि 13 अंश 20 कला से 16 अंश 40 कला | भू | सिंह नवमांश | आपः वरुण देव |
| द्वितीय चरण | धनु राशि 16 अंश 40 कला से 20 अंश | धा | कन्या नवमांश | आपः वरुण देव |
| तृतीय चरण | धनु राशि 20 अंश से 23 अंश 20 कला | फा | तुला नवमांश | आपः वरुण देव |
| चतुर्थ चरण | धनु राशि 23 अंश 20 कला से 26 अंश 40 कला | ढा | वृश्चिक नवमांश | आपः वरुण देव |
तालिका में दिए गए विवरण के अनुसार प्रथम चरण का नामाक्षर भू है जो धनु राशि और सिंह नवमांश में आता है तथा इसमें गुरु और सूर्य का संयुक्त प्रभाव होने से उच्च प्रशासनिक नेतृत्व और राजसी गरिमा समाहित रहती है। द्वितीय चरण का नामाक्षर धा है जो धनु राशि और कन्या नवमांश में जाकर बुध के प्रभाव से व्यावहारिक बुद्धि सूक्ष्म विश्लेषण और उत्कृष्ट संप्रेषण कौशल प्राप्त करता है। तृतीय चरण का नामाक्षर फा है जो तुला नवमांश में वर्गोत्तम होकर शुक्र के प्रभाव से अद्वितीय कलात्मक सौंदर्य संतुलन और चुंबकीय आकर्षण प्रदान करता है। चतुर्थ चरण का नामाक्षर ढा है जो वृश्चिक नवमांश में पहुंचकर मंगल के प्रभाव से अगाध ऊर्जा आंतरिक साहस और संकटों से पार पाने की अटूट क्षमता से युक्त होता है। जब जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र चरण में गोचर कर रहा होता है उसी चरण के अक्षर को बच्चे का वास्तविक जन्म नामाक्षर माना जाता है।
सनातन वैदिक परंपरा में मानव जीवन को संस्कारित और तेजस्वी बनाने के लिए 16 पवित्र संस्कारों का विधान किया गया है। जातकर्म के उपरांत संपन्न होने वाला नामकरण संस्कार शिशु के आध्यात्मिक और मानसिक विकास की आधारशिला है। वैदिक दर्शन में नाद ब्रह्म का सिद्धांत स्पष्ट करता है कि संपूर्ण दृश्य जगत सूक्ष्म ध्वनि तरंगों के संयोजन से संचालित होता है। जब किसी व्यक्ति को किसी विशिष्ट नाम से पुकारा जाता है तो वह शब्द ध्वनि बारंबार उसके अवचेतन मन को जाग्रत करती है।
कालपुरुष के चक्र में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र जांघों और रक्त संचार प्रणाली का प्रतिनिधित्व करता है। इस पावन नक्षत्र के अधिपति ग्रह सौंदर्य कला सुरुचि और भौतिक वैभव के प्रदाता शुक्र देव हैं जबकि इसके अधिष्ठाता देवता समस्त ब्रह्मांडीय जल के अधिपति साक्षात आपः वरुण देव हैं। पूर्वाषाढ़ा का वास्तविक अर्थ होता है पूर्व में होने वाली विजय अथवा प्रथम अपराजित संकल्प। इस नक्षत्र का पावन प्रतीक चिन्ह सूप अथवा पंखा है जो यह दर्शाता है कि जिस प्रकार सूप अनाज में से भूसी को अलग करके शुद्ध अन्न को सुरक्षित रखता है उसी प्रकार पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में जन्मा जातक सत्य और असत्य का सूक्ष्म विवेक करने में सक्षम होता है। जब किसी शिशु का जन्म पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में होता है तो शुक्र की कलात्मक सुरुचि और धनु राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति का सात्विक ज्ञान मिलकर जातक को अजेय इच्छाशक्ति प्रदान करते हैं। यह जातक किसी भी परिस्थिति में अपनी पराजय स्वीकार नहीं करते और अपनी अद्भुत वाकपटुता से जनसमूह को अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। इसलिए पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के बच्चों का नामकरण शास्त्र सम्मत अक्षरों पर ही होना चाहिए ताकि आपः देव का अमृतमय पोषण और शुक्र का आकर्षण जीवनभर उसका पोषण कर सके।
आधुनिक युग में इंटरनेट और पत्रिकाओं के सतही ज्ञान के कारण जनसामान्य में एक बहुत बड़ा भ्रम फैल गया है। अधिकांश लोग किसी व्यक्ति के केवल प्रचलित नाम अथवा स्कूल सर्टिफिकेट में दर्ज पुकार नाम के पहले अक्षर को देखकर उसका नक्षत्र मान लेते हैं। यह एक अत्यंत गंभीर भूल है जिसका वैदिक फलित ज्योतिष से कोई संबंध नहीं है। भारतीय ज्योतिष का स्पष्ट और अकाट्य नियम है कि नाम से नक्षत्र कभी नहीं निकाला जा सकता बल्कि नक्षत्र से नाम निकाला जाता है।
अनेक माता पिता बिना कुंडली देखे केवल अपनी पसंद से बच्चे का नाम भूपेंद्र अथवा धर्मेंद्र रख देते हैं। बाद में वे समाचार पत्रों में भ अथवा ध अक्षर देखकर यह मान लेते हैं कि बच्चे का जन्म पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में हुआ है। यह धारणा पूरी तरह भ्रामक है। यह कतई आवश्यक नहीं है कि भूपेंद्र या धर्मेंद्र नाम वाले व्यक्ति का जन्म पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में ही हुआ हो। बहुत संभव है कि उसके जन्म के समय चंद्रमा मघा हस्त अनुराधा मूल अथवा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में गोचर कर रहा हो। यदि जन्म के समय चंद्रमा मूल नक्षत्र में था तो उसका वास्तविक जन्म नक्षत्र मूल ही कहलाएगा और उसके जीवन पर केतु देव का प्रभाव रहेगा न कि शुक्र और वरुण देव का।
जब ऐसा व्यक्ति जीवन में आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के उपाय करने लगता है अथवा बिना कुंडली जांचे हीरा या पुखराज रत्न धारण कर लेता है तो उसे कोई लाभ नहीं मिलता बल्कि भारी भ्रम और ऊर्जा असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। विवाह हेतु नाड़ी मिलान गण मिलान महादशा और अंतर्दशा का प्रभाव तथा आजीविका का संपूर्ण विचार केवल और केवल जन्म कालीन चंद्र नक्षत्र से ही किया जाता है। पुकार नाम केवल सामाजिक व्यवहार का एक माध्यम है किंतु जातक का प्रारब्ध जन्म कालीन ग्रहों और नक्षत्रों की वास्तविक खगोलीय स्थिति से ही संचालित होता है।
शास्त्रों में नामकरण संस्कार को एक अत्यंत पवित्र यज्ञीय अनुष्ठान माना गया है। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में जन्म लेने वाले बालक अथवा बालिका का नामकरण करते समय कुछ अनिवार्य वैदिक नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए।
यदि किसी बालक का नाम अज्ञानतावश बिना कुंडली देखे किसी अन्य अक्षर पर रख दिया गया है अथवा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रभाव से स्वभाव में अत्यधिक अहंकार हठधर्मिता या उत्तेजना उत्पन्न हो रही है तो शास्त्रों में इसके लिए अत्यंत सरल और प्रभावी वैदिक उपाय बताए गए हैं।
| क्या अवश्य करें | किन गलतियों से सर्वथा दूर रहें |
|---|---|
| जन्म समय चंद्रमा के सटीक नक्षत्र चरण से ही नाम का चयन करें | केवल आधुनिक फैशन के आधार पर बिना कुंडली देखे नाम न रखें |
| नाम का अर्थ प्रेरक तेजस्वी और विजय भाव से परिपूर्ण होना चाहिए | निरर्थक कटु अथवा भ्रामक अर्थ वाले शब्दों का चयन न करें |
| धनु राशि के स्वामी गुरु और नक्षत्र स्वामी शुक्र का संतुलन समझें | पुकार नाम के पहले अक्षर से अपना भविष्यफल देखने की भूल न करें |
| बालक का नाम विषम अक्षरों वाला और बालिका का सम अक्षरों वाला रखें | बिना कुंडली मिलाए बच्चे को कोई भी रत्न पहनाने की भूल न करें |
| नामकरण संस्कार शुभ मुहूर्त वार और सात्विक वातावरण में करें | रिक्ता तिथियों चतुर्थी नवमी चतुर्दशी अथवा भद्रा में नामकरण न करें |
जब किसी नवजात शिशु का नामकरण वैदिक गणित नक्षत्र सिद्धांत और नाद विज्ञान के आधार पर किया जाता है तो वह नाम उसके संपूर्ण जीवन के लिए एक दिव्य सुरक्षा कवच बन जाता है। वह केवल पुकारने का शब्द नहीं रहता बल्कि जीवन पर्यंत उसके अंतर्मन को ऊर्जावान बनाए रखने वाला एक शक्तिशाली मंत्र सिद्ध होता है। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी शुक्र देव और अधिष्ठाता देवता आपः वरुण देव जीवन में अपराजित सामर्थ्य जनप्रियता और समाज को दिशा देने वाली प्रखर वक्तृत्व क्षमता प्रदान करने वाले हैं। जब शिशु अपने नक्षत्र चरण के अनुकूल पावन ध्वनि को धारण करता है तो उसके भीतर की सुप्त नेतृत्व शक्तियां बिना किसी अवरोध के जाग्रत होती हैं और वह समाज में एक प्रतापी सफल और अत्यंत सम्मानित नागरिक के रूप में प्रतिष्ठित होता है।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के बच्चों के नाम किन अक्षरों से शुरू होते हैं? पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के अंतर्गत आने वाले 4 प्रमुख नामाक्षर भू धा फा और ढा हैं जो इसके चार चरणों से संबंधित हैं।
क्या किसी व्यक्ति के पुकार नाम से उसका जन्म नक्षत्र तय हो सकता है? पुकार नाम से जन्म नक्षत्र कभी तय नहीं हो सकता क्योंकि वास्तविक नक्षत्र केवल जन्म के समय चंद्रमा की खगोलीय स्थिति से निर्धारित होता है।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी ग्रह और अधिष्ठाता देवता कौन हैं? पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी ग्रह शुक्र देव हैं और इसके अधिष्ठाता देवता समस्त जल के स्वामी आपः वरुण देव हैं।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में जन्म लेने वाले बच्चों का स्वभाव कैसा होता है? इस नक्षत्र में जन्मे बच्चों में अपराजित ऊर्जा तीव्र वाकपटुता सामाजिक लोकप्रियता और निरंतर आगे बढ़ने की अद्भुत ललक होती है।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के दोष निवारण के लिए कौन सा रुद्राक्ष धारण करना चाहिए? पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के जातकों के लिए छह मुखी नेपाली रुद्राक्ष धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है जो शुक्र के प्रभाव को संतुलित करके मानसिक शांति प्रदान करता है।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्र
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