By पं. संजीव शर्मा
चंद्र देव का प्रभाव चारों चरण और नाम से नक्षत्र तय करने के भ्रम का संपूर्ण वैदिक समाधान

वैदिक ज्योतिष में किसी भी नवजात शिशु के नामकरण का प्रथम और सर्वोपरि आधार उसकी जन्म कालीन चंद्र राशि और नक्षत्र चरण होता है। श्रवण नक्षत्र संपूर्ण भचक्र का बाईसवां और अत्यंत पावन ज्ञान प्रदाता नक्षत्र है जो मकर राशि में 10 अंश से आरंभ होकर 23 अंश 20 कला तक पूर्ण रूप से विस्तृत रहता है। इसके अंतर्गत कुल 4 चरण आते हैं और प्रत्येक चरण के लिए प्राचीन ऋषियों ने विशिष्ट ध्वनि बीजाक्षर निर्धारित किए हैं। श्रवण नक्षत्र में जन्म लेने वाले बालकों और बालिकाओं का नामकरण केवल इन्हीं शास्त्रीय अक्षरों से किया जाना चाहिए।
श्रवण नक्षत्र के अंतर्गत निर्धारित 4 मुख्य नामाक्षर इस प्रकार हैं: खी खू खे खो। जब शिशु को इन विशिष्ट बीजाक्षरों से युक्त नाम से पुकारा जाता है तो उसके मस्तिष्क की तंत्रिकाओं और आभा मंडल में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है जिससे उसकी एकाग्रता श्रवण कौशल विद्या ग्रहण करने की क्षमता उच्च चरित्र और सामाजिक प्रतिष्ठा में निरंतर वृद्धि होती है।
| नक्षत्र चरण | राशि एवं अंश विस्तार | चरण का नामाक्षर | नवमांश राशि | अधिष्ठाता देवता |
|---|---|---|---|---|
| प्रथम चरण | मकर राशि 10 अंश से 13 अंश 20 कला | खी | मेष नवमांश | भगवान श्री हरि विष्णु |
| द्वितीय चरण | मकर राशि 13 अंश 20 कला से 16 अंश 40 कला | खू | वृषभ नवमांश | भगवान श्री हरि विष्णु |
| तृतीय चरण | मकर राशि 16 अंश 40 कला से 20 अंश | खे | मिथुन नवमांश | भगवान श्री हरि विष्णु |
| चतुर्थ चरण | मकर राशि 20 अंश से 23 अंश 20 कला | खो | कर्क नवमांश | भगवान श्री हरि विष्णु |
तालिका में दिए गए विवरण के अनुसार प्रथम चरण का नामाक्षर खी है जो मकर राशि और मेष नवमांश में आता है तथा इसमें शनि और मंगल का संयुक्त प्रभाव होने से उच्च तकनीकी बुद्धि त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और नेतृत्व शक्ति समाहित रहती है। द्वितीय चरण का नामाक्षर खू है जो मकर राशि और वृषभ नवमांश में जाकर चंद्रमा का उच्च नवमांश प्राप्त करता है जिससे जातक को शुक्र और चंद्र के प्रभाव से कलात्मक सुरुचि वाणी माधुर्य और भौतिक संपन्नता प्राप्त होती है। तृतीय चरण का नामाक्षर खे है जो मकर राशि और मिथुन नवमांश में बुध के प्रभाव से उत्कृष्ट बौद्धिक प्रखरता तार्किक वाकपटुता और गहन अध्ययन क्षमता को दर्शाता है। चतुर्थ चरण का नामाक्षर खो है जो मकर राशि और कर्क नवमांश में पहुंचकर वर्गोत्तम फल देता है जिससे जातक को चंद्रमा की स्वराशि में उच्च भावनात्मक संवेदनशीलता आध्यात्मिक करुणा और समाज सेवा का भाव प्राप्त होता है। जब जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र चरण में गोचर कर रहा होता है उसी चरण के अक्षर को बच्चे का वास्तविक जन्म नामाक्षर माना जाता है।
सनातन वैदिक परंपरा में मानव जीवन को संस्कारित और तेजस्वी बनाने के लिए 16 पवित्र संस्कारों का विधान किया गया है। जातकर्म के उपरांत संपन्न होने वाला नामकरण संस्कार शिशु के आध्यात्मिक और मानसिक विकास की आधारशिला है। वैदिक दर्शन में नाद ब्रह्म का सिद्धांत स्पष्ट करता है कि संपूर्ण दृश्य जगत सूक्ष्म ध्वनि तरंगों के संयोजन से संचालित होता है। जब किसी व्यक्ति को किसी विशिष्ट नाम से पुकारा जाता है तो वह शब्द ध्वनि बारंबार उसके अवचेतन मन को जाग्रत करती है।
कालपुरुष के चक्र में श्रवण नक्षत्र दोनों कानों श्रवण तंत्रिकाओं और घुटनों के आंतरिक भाग का प्रतिनिधित्व करता है। इस पावन नक्षत्र के अधिपति ग्रह मन और जननी के कारक चंद्र देव हैं जबकि इसके अधिष्ठाता देवता संपूर्ण जगत के पालनकर्ता साक्षात भगवान श्री हरि विष्णु हैं। श्रवण शब्द का अर्थ होता है सुनना अर्थात प्राचीन काल में वेदों और शास्त्रों को गुरुमुख से सुनकर कंठस्थ करने की पवित्र श्रुति परंपरा। इस नक्षत्र का पावन प्रतीक चिन्ह कान अथवा वामन अवतार के तीन चरण हैं जो यह दर्शाते हैं कि यह नक्षत्र सुनकर ज्ञान अर्जित करने आत्मसात करने और संपूर्ण ब्रह्मांड को ज्ञान की दृष्टि से नाप लेने का सामर्थ्य रखता है। जब किसी शिशु का जन्म श्रवण नक्षत्र में होता है तो चंद्र देव की मानसिक शीतलता और भगवान विष्णु का दिव्य संरक्षण मिलकर जातक को उच्च चरित्र आदर सत्कार और विद्या का वरदान देते हैं। मकर राशि के स्वामी शनि देव का अनुशासन और नक्षत्र स्वामी चंद्र का संवेदन मिलकर जातक को शांत गंभीर और दूरदर्शी बनाते हैं। इसलिए श्रवण नक्षत्र के बच्चों का नामकरण शास्त्र सम्मत अक्षरों पर ही होना चाहिए ताकि भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र जातक की रक्षा कर सके और चंद्र देव की एकाग्रता जीवनभर उसका पोषण कर सके।
आधुनिक युग में इंटरनेट और पत्रिकाओं के सतही ज्ञान के कारण जनसामान्य में एक बहुत बड़ा भ्रम फैल गया है। अधिकांश लोग किसी व्यक्ति के केवल प्रचलित नाम अथवा स्कूल सर्टिफिकेट में दर्ज पुकार नाम के पहले अक्षर को देखकर उसका नक्षत्र मान लेते हैं। यह एक अत्यंत गंभीर भूल है जिसका वैदिक फलित ज्योतिष से कोई संबंध नहीं है। भारतीय ज्योतिष का स्पष्ट और अकाट्य नियम है कि नाम से नक्षत्र कभी नहीं निकाला जा सकता बल्कि नक्षत्र से नाम निकाला जाता है।
अनेक माता पिता बिना कुंडली देखे केवल अपनी पसंद से बच्चे का नाम खेमचंद अथवा खुशवंत रख देते हैं। बाद में वे समाचार पत्रों में ख अथवा खे अक्षर देखकर यह मान लेते हैं कि बच्चे का जन्म श्रवण नक्षत्र के तृतीय चरण में हुआ है। यह धारणा पूरी तरह भ्रामक है। यह कतई आवश्यक नहीं है कि खेमचंद नाम वाले व्यक्ति का जन्म श्रवण नक्षत्र में ही हुआ हो। बहुत संभव है कि उसके जन्म के समय चंद्रमा रोहिणी हस्त अनुराधा मूल पूर्वाषाढ़ा अथवा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में गोचर कर रहा हो। यदि जन्म के समय चंद्रमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में था तो उसका वास्तविक जन्म नक्षत्र उत्तराषाढ़ा ही कहलाएगा और उसके जीवन पर सूर्य देव का प्रभाव रहेगा न कि चंद्र देव और भगवान विष्णु का।
जब ऐसा व्यक्ति जीवन में आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए श्रवण नक्षत्र के उपाय करने लगता है अथवा बिना कुंडली जांचे मोती रत्न धारण कर लेता है तो उसे कोई लाभ नहीं मिलता बल्कि भारी मानसिक तनाव और ऊर्जा असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। विवाह हेतु नाड़ी मिलान गण मिलान महादशा और अंतर्दशा का प्रभाव तथा जीवन की दिशा का संपूर्ण विचार केवल और केवल जन्म कालीन चंद्र नक्षत्र से ही किया जाता है। पुकार नाम केवल सामाजिक व्यवहार का एक माध्यम है किंतु जातक का प्रारब्ध जन्म कालीन ग्रहों और नक्षत्रों की वास्तविक खगोलीय स्थिति से ही संचालित होता है।
शास्त्रों में नामकरण संस्कार को एक अत्यंत पवित्र यज्ञीय अनुष्ठान माना गया है। श्रवण नक्षत्र में जन्म लेने वाले बालक अथवा बालिका का नामकरण करते समय कुछ अनिवार्य वैदिक नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए।
यदि किसी बालक का नाम अज्ञानतावश बिना कुंडली देखे किसी अन्य अक्षर पर रख दिया गया है अथवा श्रवण नक्षत्र के प्रभाव से स्वभाव में अत्यधिक संवेदनशीलता या मानसिक तनाव आ रहा हो तो शास्त्रों में इसके लिए अत्यंत सरल और प्रभावी वैदिक उपाय बताए गए हैं।
| क्या अवश्य करें | किन गलतियों से सर्वथा दूर रहें |
|---|---|
| जन्म समय चंद्रमा के सटीक नक्षत्र चरण से ही नाम का चयन करें | केवल आधुनिक फैशन के आधार पर बिना कुंडली देखे नाम न रखें |
| नाम का अर्थ ज्ञानवर्धक मर्यादित और सात्विक होना चाहिए | निरर्थक कटु अथवा भ्रामक अर्थ वाले शब्दों का चयन न करें |
| मकर राशि के स्वामी शनि और नक्षत्र स्वामी चंद्र का ध्यान रखें | पुकार नाम के पहले अक्षर से अपना भविष्यफल देखने की भूल न करें |
| बालक का नाम विषम अक्षरों वाला और बालिका का सम अक्षरों वाला रखें | बिना कुंडली मिलाए बच्चे को कोई भी रत्न पहनाने की भूल न करें |
| नामकरण संस्कार शुभ मुहूर्त वार और सात्विक वातावरण में करें | रिक्ता तिथियों चतुर्थी नवमी चतुर्दशी अथवा भद्रा में नामकरण न करें |
जब किसी नवजात शिशु का नामकरण वैदिक गणित नक्षत्र सिद्धांत और नाद विज्ञान के आधार पर किया जाता है तो वह नाम उसके संपूर्ण जीवन के लिए एक दिव्य सुरक्षा कवच बन जाता है। वह केवल पुकारने का शब्द नहीं रहता बल्कि जीवन पर्यंत उसके अंतर्मन को ऊर्जावान बनाए रखने वाला एक शक्तिशाली मंत्र सिद्ध होता है। श्रवण नक्षत्र के स्वामी चंद्र देव और अधिष्ठाता देवता भगवान श्री हरि विष्णु जीवन में अगाध ज्ञान विद्या ग्रहण करने की अद्भुत क्षमता और उच्च चरित्र प्रदान करने वाले हैं। जब शिशु अपने नक्षत्र चरण के अनुकूल पावन ध्वनि को धारण करता है तो उसके भीतर की सुप्त प्रज्ञा शक्तियां बिना किसी अवरोध के जाग्रत होती हैं और वह समाज में एक यशस्वी प्रखर विद्वान मार्गदर्शक और अत्यंत सम्मानित नागरिक के रूप में प्रतिष्ठित होता है।
श्रवण नक्षत्र के बच्चों के नाम किन अक्षरों से शुरू होते हैं? श्रवण नक्षत्र के अंतर्गत आने वाले 4 प्रमुख नामाक्षर खी खू खे और खो हैं जो इसके चार चरणों से संबंधित हैं।
क्या किसी व्यक्ति के पुकार नाम से उसका जन्म नक्षत्र तय हो सकता है? पुकार नाम से जन्म नक्षत्र कभी तय नहीं हो सकता क्योंकि वास्तविक नक्षत्र केवल जन्म के समय चंद्रमा की खगोलीय स्थिति से निर्धारित होता है।
श्रवण नक्षत्र के स्वामी ग्रह और अधिष्ठाता देवता कौन हैं? श्रवण नक्षत्र के स्वामी ग्रह चंद्र देव हैं और इसके अधिष्ठाता देवता संपूर्ण जगत के पालनकर्ता भगवान श्री हरि विष्णु हैं।
श्रवण नक्षत्र में जन्म लेने वाले बच्चों का स्वभाव कैसा होता है? इस नक्षत्र में जन्मे बच्चों में सुनकर सीखने की अद्भुत क्षमता उच्च विद्या आदर सत्कार करने की भावना और चरित्रवान व्यक्तित्व के गुण होते हैं।
श्रवण नक्षत्र के दोष निवारण के लिए कौन सा रुद्राक्ष धारण करना चाहिए? श्रवण नक्षत्र के जातकों के लिए दो मुखी अथवा दस मुखी नेपाली रुद्राक्ष धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है जो मानसिक शांति और ज्ञान को बल प्रदान करता है।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्र
अनुभव: 20
इनसे पूछें: Family Planning, Career
इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें
ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।
अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।
अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।
WELCOME TO
Right Decisions at the right time with ZODIAQ