क्या गंडांत दोष में जन्म संकट लाता है?

By पं. नरेंद्र शर्मा

नक्षत्र और लग्न संधि काल में जन्मे जातक के संकटों का रहस्य 27वें दिन शांति पूजा और राजयोग बनने के नियम

गंडांत दोष प्रभाव 27वें दिन शांति पूजा विधान एवं उपाय

जल और अग्नि की संधि का रहस्यमयी संजाल

सनातन वैदिक ज्योतिष परंपरा में काल गणना और जीवात्मा के जन्म का समय केवल एक खगोलीय घटना नहीं है अपितु यह पूर्व जन्मों के संचित कर्मों और सूक्ष्म प्रारब्ध का पावन प्रकटीकरण है। जब कोई शिशु इस नश्वर संसार में अपनी प्रथम श्वास लेता है, तो उस क्षण ब्रह्मांड के आकाशीय मंडल में उपस्थित ग्रह और नक्षत्र उसके संपूर्ण जीवन का खाका खींच देते हैं। वैदिक ऋषियों ने नक्षत्र चक्र और राशि चक्र के कुछ अत्यंत संवेदनशील और नाजुक संधि बिंदुओं की पहचान की है जहां दो सर्वथा विपरीत प्रकृति के तत्व आपस में मिलते हैं। जब कोई जल तत्व की राशि समाप्त हो रही हो और ठीक उसी बिंदु पर अग्नि तत्व की राशि का प्रारंभ हो रहा हो, तो उस परम संवेदनशील मिलन बिंदु को गंडांत कहा जाता है। जल और अग्नि का यह टकराव एक भयंकर वाष्प और ऊर्जा का निर्माण करता है जिसे शास्त्रों में आत्मिक ग्रंथि अर्थात कर्म की गांठ माना गया है। इस संधि काल में जन्म लेने वाले जातक के प्रारंभिक वर्षों में अनेक शारीरिक, मानसिक और पारिवारिक संकट आते हैं, किंतु जब यह ग्रंथि खुल जाती है, तो वही जातक समाज में अप्रतिम प्रतिष्ठा और राजा समान ऐश्वर्य का स्वामी बनता है।

गंडांत दोष के तीन प्रमुख स्वरूप

वैदिक ज्योतिष के प्रमाणिक ग्रंथों में गंडांत दोष को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है जो काल के भिन्न घटकों के संधि काल से उत्पन्न होते हैं।

गंडांत के तीन मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं।

  • नक्षत्र गंडांत जब 27 नक्षत्रों के चक्र में जल राशि के अंतिम नक्षत्र और अग्नि राशि के प्रथम नक्षत्र की संधि होती है, तो उसे नक्षत्र गंडांत कहा जाता है। यह मुख्यतः रेवती से अश्विनी, आश्लेषा से मघा और ज्येष्ठा से मूल नक्षत्र के मिलन बिंदु पर घटित होता है।
  • लग्न गंडांत जब जन्म लग्न जल राशि (कर्क, वृश्चिक, मीन) के अंतिम अंशों में हो अथवा अग्नि राशि (मेष, सिंह, धनु) के प्रारंभिक अंशों में प्रवेश कर रहा हो तब लग्न गंडांत बनता है। यह जातक के स्वयं के शारीरिक स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित करता है।
  • तिथि गंडांत जब पूर्णा तिथियों (पंचमी, दशमी, पूर्णिमा, अमावस्या) की समाप्ति और नंदा तिथियों (प्रतिपदा, षष्ठी, एकादशी) का प्रारंभ होता है, तो उस संधि समय को तिथि गंडांत कहा जाता है। यह जातक की मानसिक शांति और पारिवारिक सुख को प्रभावित करता है।
गंडांत का प्रकार प्रभावित संधि क्षेत्र संबंधित तत्व जीवन पर मुख्य प्रभाव का स्वरूप
नक्षत्र गंडांत रेवती से अश्विनी, आश्लेषा से मघा, ज्येष्ठा से मूल जल से अग्नि संक्रमण माता पिता का स्वास्थ्य, बालारिष्ट और व्यक्तिगत जीवन संघर्ष
लग्न गंडांत मीन से मेष, कर्क से सिंह, वृश्चिक से धनु लग्न भौतिक देह की संधि शारीरिक दुर्बलता, जीवन शक्ति का क्षय और रोग
तिथि गंडांत 5 से 6, 10 से 11, 15 से 1 तिथि का संधिकाल काल चक्र संधि मानसिक तनाव, निर्णय क्षमता में भ्रम और आर्थिक उतार चढ़ाव

तीन प्रमुख नक्षत्र गंडांत और उनके चरण फल

नक्षत्र गंडांत का निर्माण 6 विशिष्ट नक्षत्रों के माध्यम से होता है। इन नक्षत्रों के अंतिम अथवा प्रथम चरण में जन्म होने पर विशेष फल प्राप्त होते हैं।

प्रत्येक गंडांत युग्म का विस्तृत विवरण इस प्रकार समझा जाता है।

  • आश्लेषा और मघा गंडांत कर्क राशि के अंतिम नक्षत्र आश्लेषा के चतुर्थ चरण और सिंह राशि के प्रथम नक्षत्र मघा के प्रथम चरण का यह मिलन पितृ दोष और माता के कुल से जुड़े ऋणानुबंध को दर्शाता है। इसमें जन्म होने पर माता के स्वास्थ्य अथवा जातक के बचपन में शारीरिक कष्ट की संभावना रहती है।
  • ज्येष्ठा और मूल गंडांत वृश्चिक राशि के अंतिम नक्षत्र ज्येष्ठा के चतुर्थ चरण और धनु राशि के प्रथम नक्षत्र मूल के प्रथम चरण का यह संधिकाल सबसे तीव्र और कठोर माना जाता है। इसे काल गंडांत भी कहते हैं जो पिता के स्वास्थ्य, पारिवारिक संपत्ति और जातक के जीवन संघर्ष से जुड़ा होता है।
  • रेवती और अश्विनी गंडांत मीन राशि के अंतिम नक्षत्र रेवती के चतुर्थ चरण और मेष राशि के प्रथम नक्षत्र अश्विनी के प्रथम चरण का यह मिलन जीव और आत्मा के नए चक्र का प्रारंभ है। इसमें जन्म होने पर जातक को जीवन के आरंभिक वर्षों में स्वयं की सेहत का विशेष ध्यान रखना पड़ता है।
गंडांत नक्षत्र युग्म नक्षत्र चरण स्थिति संबंधित राशियां प्रभावित पारिवारिक क्षेत्र
आश्लेषा से मघा आश्लेषा का 4था चरण व मघा का 1ला चरण कर्क से सिंह माता का स्वास्थ्य और पारिवारिक शांति
ज्येष्ठा से मूल ज्येष्ठा का 4था चरण व मूल का 1ला चरण वृश्चिक से धनु पिता का स्वास्थ्य, कुल संपत्ति और दीर्घायु
रेवती से अश्विनी रेवती का 4था चरण व अश्विनी का 1ला चरण मीन से मेष जातक का स्वयं का शरीर और जीवन शक्ति

गंडांत शांति पूजा का शास्त्रीय विधान

वैदिक सनातन परंपरा में गंडांत दोष को एक अभिशाप नहीं बल्कि एक अनसुलझी दिव्य ऊर्जा माना गया है जिसे उचित वैदिक अनुष्ठान द्वारा शुद्ध किया जाना अनिवार्य है। शास्त्रों के अनुसार जन्म के ठीक 27वें दिन जब वही जन्म नक्षत्र पुनः आकाश मंडल में आता है तब गंडांत शांति पूजा संपन्न की जाती है।

यदि किसी कारणवश 27वें दिन यह पूजा न हो सके, तो अगले माह जब वही नक्षत्र आए अथवा जातक के उपनयन संस्कार या विवाह से पूर्व यह शांति अनुष्ठान अवश्य करवा लेना चाहिए।

गंडांत शांति विधान के प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं।

  • 27 तीर्थों अथवा कुओं का पावन जल गंडांत के जल तत्व दोष को शांत करने के लिए 27 भिन्न स्थानों के जल से जातक का औषधीय स्नान कराया जाता है।
  • 27 वृक्षों की पत्तियां और 27 स्थानों की मिट्टी पृथ्वी तत्व को स्थिर करने के लिए 27 प्रकार के पवित्र वृक्षों की पत्तियों और गौशाला, राजद्वार, नदी संगम आदि की मिट्टी का उपयोग कलश स्थापन में किया जाता है।
  • छाया पात्र दान कांसे अथवा तांबे के पात्र में शुद्ध गाय का घी भरकर उसमें जातक अथवा उसके माता पिता का मुख देखकर वस्त्र और दक्षिणा सहित दान किया जाता है।
  • नक्षत्र देवता और रुद्र आराधना जिस नक्षत्र में जन्म हुआ हो, उसके अधिष्ठाता देवता की विशेष आहुतियां दी जाती हैं और भगवान सदाशिव का महामृत्युंजय मंत्रों से लघु रुद्राभिषेक किया जाता है।
  • गौ माता और स्वर्ण दान ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ साथ यथाशक्ति गौ दान और स्वर्ण प्रतिमा का दान करने से गंडांत की नकारात्मक ऊर्जा पूरी तरह समाप्त हो जाती है।
शांति पूजा की सामग्री आवश्यक संख्या या मात्रा आध्यात्मिक महत्व दोष निवारण का स्वरूप
पावन तीर्थों का जल 27 विभिन्न स्रोत जल तत्व की शुद्धि बालारिष्ट और शारीरिक व्याधियों का शमन
पवित्र वृक्षों की पत्तियां 27 औषधीय वृक्ष प्रकृति की प्राण शक्ति का संचार जीवन शक्ति और आरोग्य की पुनर्स्थापना
छाया पात्र कांस्य पात्र में शुद्ध घी नकारात्मक ऊर्जा का विसर्जन अचानक आने वाली विपत्तियों और नजर दोष से रक्षा
महामृत्युंजय महायज्ञ 11000 अथवा 21000 जप भगवान शिव का रक्षा कवच अकाल मृत्यु के भय का नाश और दीर्घायु प्राप्ति

संकट से शिखर तक असाधारण व्यक्तित्व का उदय

गंडांत में जन्म लेने का सबसे चमत्कारी सत्य यह है कि यह जातक को साधारण जीवन जीने की अनुमति नहीं देता। जब उचित शांति विधान द्वारा गंडांत की ऊर्जा को संतुलित कर दिया जाता है, तो जातक के भीतर की सुप्त शक्तियां जाग्रत हो उठती हैं।

इतिहास और समकालीन जगत में ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं जहां गंडांत में जन्मे बालकों ने प्रारंभिक जीवन में अनाथालय, भयंकर निर्धनता अथवा प्राणघातक बीमारियों का सामना किया, किंतु युवावस्था में आते ही वे युग प्रवर्तक महापुरुष, महान दार्शनिक, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक अथवा देश के शीर्ष राजनीतिक पदों पर आसीन हुए।

गंडांत की ग्रंथि जब खुलती है, तो व्यक्ति को अद्वितीय अंतर्ज्ञान, अदम्य साहस और जनता पर सम्मोहक प्रभाव डालने की शक्ति प्राप्त होती है। ऐसा जातक किसी भी संकट के सामने कभी नहीं झुकता और अपनी प्रतिभा से इतिहास के पन्नों पर अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित करता है।

गंडांत दोष शांति के नित्य सात्विक उपाय

यदि किसी जातक की गंडांत शांति पूजा बचपन में न हो पाई हो और वह वर्तमान में जीवन संघर्ष का सामना कर रहा हो, तो सनातन वैदिक परंपरा में जीवन पर्यंत किए जाने वाले अत्यंत कल्याणकारी सात्विक उपाय बताए गए हैं।

साधना क्षेत्र अधिष्ठाता देव एवं साधना सात्विक वैदिक विधान
स्वास्थ्य रक्षा और दीर्घायु भगवान सदाशिव की उपासना प्रतिदिन शिवलिंग पर कच्चा दूध व जल अर्पण और महामृत्युंजय जप
पारिवारिक शांति और कुल रक्षा माँ भगवती दुर्गा की आराधना नित्य दुर्गा सप्तशती के कीलक स्तोत्र का पाठ और कन्या पूजन
बुद्धि शुद्धि और विघ्न निवारण भगवान श्री गणेश की सेवा बुधवार को 21 दूर्वा अर्पित करना और संकटनाशन स्तोत्र पाठ
आत्मबल और तेज संवर्धन भगवान सूर्यनारायण को अर्घ्य प्रातः काल तांबे के पात्र से जल अर्पण और गायत्री मंत्र जप

दैनिक जीवन में पालन किए जाने वाले प्रमुख नियम इस प्रकार हैं।

  • भगवान शिव का नित्य रुद्राभिषेक प्रतिदिन प्रातः काल तांबे अथवा पीतल के पात्र से शिवलिंग पर जल की अखंड धारा अर्पित करते हुए ॐ नमः शिवाय का 108 बार जप करना चाहिए।
  • गौ माता की नित्य सेवा प्रतिदिन भोजन की पहली रोटी में गुड़ और हल्दी मिलाकर गौ माता को खिलाने से तीनों प्रकार के गंडांत दोषों का दुष्प्रभाव समाप्त होता है।
  • चांदी के पात्र का नियमित प्रयोग अपने जल तत्व को स्थिर रखने और मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए चांदी के गिलास में रखा जल ग्रहण करना चाहिए।
  • निर्धनों को अन्न और वस्त्र दान प्रत्येक पूर्णिमा अथवा अमावस्या के दिन जरूरतमंदों को पका हुआ अन्न और काले सफेद तिल का दान करने से प्रारब्ध के कर्म बंधन कटते हैं।

आत्मिक ग्रंथि का भेदन और दिव्य उत्कर्ष

गंडांत दोष वास्तव में आत्मा के विकास की एक अत्यंत उच्च और पवित्र अवस्था है जहां प्रकृति जातक की परीक्षा लेकर उसे सोने की भांति तपाती है। जब मनुष्य वैदिक परंपरा के अनुसार शांति विधान और सात्विक साधना के साथ अपने कर्मों का परिष्कार करता है, तो गंडांत की वही अग्नि उसके समस्त पापों को भस्म कर देती है। अनुकूल ग्रह दशाएं और ईश्वरीय अनुग्रह साधारण बालक को भी एक युग प्रवर्तक महापुरुष और सम्राट बना देते हैं। अपनी ऊर्जा को लोक कल्याण, धर्म रक्षा और सत्य के मार्ग पर समर्पित करना ही गंडांत में जन्मे जातक के जीवन की सर्वोच्च और अंतिम सार्थकता है।

FAQ

क्या गंडांत दोष में जन्म लेने वाला हर बच्चा हमेशा संकट में रहता है? नहीं, गंडांत में जन्मे बच्चे पर केवल प्रारंभिक बाल्यावस्था में कष्ट की संभावना रहती है, किंतु उचित शांति पूजा के बाद वही बच्चा असाधारण प्रतिभा और सफलता का धनी बनता है।

गंडांत शांति पूजा कराने का सबसे उत्तम समय कौन सा माना जाता है? जन्म के ठीक 27वें दिन जब वही नक्षत्र पुनः आकाश में उदित होता है तब गंडांत शांति पूजा कराना शास्त्रों में सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है।

कौन से नक्षत्र गंडांत नक्षत्र कहलाते हैं? रेवती, अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा और मूल नक्षत्रों का संधिकाल गंडांत नक्षत्र कहलाता है।

क्या बचपन में गंडांत पूजा न होने पर बड़े होकर पूजा कराई जा सकती है? हां, यदि बचपन में शांति पूजा न हुई हो तो किसी भी शुभ मुहूर्त में अथवा विवाह से पूर्व विधिपूर्वक गंडांत निवारण महायज्ञ कराया जा सकता है।

गंडांत दोष से पीड़ित व्यक्ति को प्रतिदिन कौन सा मंत्र जपना चाहिए? गंडांत दोष के प्रभाव को शांत करने और पूर्ण सुरक्षा प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन 108 बार महामृत्युंजय मंत्र का जप करना सर्वोत्तम माना गया है।

पाएं अपनी सटीक कुंडली

कुंडली बनाएं

क्या आपको यह पसंद आया?

लेखक

पं. नरेंद्र शर्मा

पं. नरेंद्र शर्मा (63)


अनुभव: 20

इनसे पूछें: Family Planning, Career

इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें

ZODIAQ के बारे में

ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।

यदि आप एक उपयोगकर्ता हैं

अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।

यदि आप एक ज्योतिषी हैं

अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।

WELCOME TO

ZODIAQ

Right Decisions at the right time with ZODIAQ