क्या केमद्रुम दोष राजा को रंक बनाएगा?

By अपर्णा पाटनी

चंद्रमा के दोनों ओर रिक्त भाव और केमद्रुम भंग राजयोग का संपूर्ण वैदिक ज्योतिषीय सच

क्या केमद्रुम दोष राजा को रंक बनाता है ज्योतिषीय सच

चंद्र चेतना और एकाकीपन का खगोलीय रहस्य

वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को केवल एक उपग्रह अथवा साधारण खगोलीय पिंड नहीं माना जाता बल्कि वह संपूर्ण ब्रह्मांडीय चेतना, मन, भावना, मानसिक शांति और अंतःकरण का साक्षात स्वामी है। जब किसी जातक की जन्म पत्रिका में चंद्रमा अत्यंत बलिष्ठ और शुभ ग्रहों से घिरा होता है, तो व्यक्ति का मन सदैव प्रफुल्लित, स्थिर और सुरक्षा के भाव से भरा रहता है। इसके सर्वथा विपरीत जब जन्म कुंडली में चंद्रमा आकाश मंडल में सर्वथा अकेला पड़ जाता है और उसके आगे अथवा पीछे कोई भी ग्रह उसका संबल बनने के लिए उपस्थित नहीं होता तब ज्योतिष शास्त्र के अत्यंत चर्चित और संवेदनशील योग का निर्माण होता है जिसे केमद्रुम दोष कहा जाता है।

संसार में यह धारणा बहुत गहराई से व्याप्त है कि केमद्रुम दोष जिस जातक की कुंडली में होता है, वह राजा के समान समृद्ध कुल में जन्म लेकर भी अंततः रंक बन जाता है। वैदिक तत्वज्ञान इस विषय का अत्यंत सूक्ष्म और तर्कसंगत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। चंद्रमा मनसो जातः अर्थात चंद्रमा संपूर्ण मानसिक जगत का अधिष्ठाता है। जब चंद्रमा को दोनों ओर से कोई ग्रहीय सहारा नहीं मिलता, तो व्यक्ति भौतिक रूप से चाहे कितना भी संपन्न क्यों न हो, वह भीतर से एक असहनीय मानसिक अकेलापन, निरंतर असुरक्षा और आंतरिक खालीपन अनुभव करता है। एक अनुभवी दैवज्ञ केवल इस दोष के निर्माण को देखकर भयभीत नहीं होता बल्कि वह कुंडली के केंद्र भावों, गुरु की अमृतमयी दृष्टि और केमद्रुम भंग राजयोग के विभिन्न सूत्रों का गहन परीक्षण करके यथार्थ सत्य उजागर करता है।

ज्योतिषीय तत्व खगोलीय स्थिति प्राथमिक प्रभाव संभावित परिणाम
चंद्रमा का दूसरा भाव चंद्रमा से अगला भाव रिक्त होना भविष्य की वित्तीय सुरक्षा का अभाव धन संचय में अनिश्चितता और चिंता
चंद्रमा का बारहवां भाव चंद्रमा से पिछला भाव रिक्त होना पूर्व संचित संस्कारों के सहारे की कमी मानसिक एकाकीपन और अवसाद
छाया ग्रहों का नियम सूर्य, राहु अथवा केतु की उपस्थिति इन ग्रहों की उपस्थिति से दोष भंग नहीं होता मानसिक भ्रम और भावनात्मक संघर्ष
केंद्र भावों की स्थिति लग्न से 1, 4, 7, 10 भावों में शुभ ग्रह केमद्रुम भंग राजयोग का निर्माण प्रारंभिक संघर्ष के बाद अकूत ख्याति
गुरु की दृष्टि देवगुरु बृहस्पति की पूर्ण दृष्टि दोष का पूर्ण शमन और ज्ञान का उदय समाज में उच्च पद, प्रतिष्ठा और विवेक

केमद्रुम दोष का निर्माण कैसे होता है?

वैदिक ज्योतिष के महर्षि पाराशर और वराहमिहिर के सिद्धांतों के अनुसार केमद्रुम दोष का निर्माण एक विशिष्ट ग्रहीय शून्यता के कारण होता है। जब जातक की जन्म पत्रिका में चंद्रमा जिस राशि में बैठा हो, उससे ठीक आगे वाले भाव अर्थात द्वितीय भाव में और चंद्रमा से ठीक पीछे वाले भाव अर्थात द्वादश भाव में कोई भी ग्रह स्थित न हो, तो केमद्रुम योग बनता है।

इस गणना में एक अत्यंत महत्वपूर्ण शास्त्रीय नियम यह है कि सूर्य, राहु और केतु को इस ग्रहीय गणना में सम्मिलित नहीं किया जाता है। इसका अर्थ यह है कि यदि चंद्रमा के दूसरे अथवा बारहवें भाव में केवल सूर्य बैठा हो अथवा राहु और केतु स्थित हों तब भी चंद्रमा को अकेला ही माना जाएगा और केमद्रुम दोष यथावत बना रहेगा। मंगल, बुध, गुरु, शुक्र अथवा शनि में से किसी भी एक ग्रह का चंद्रमा के आगे अथवा पीछे होना इस दोष को समाप्त कर देता है।

  • चंद्रमा से दूसरे भाव में ग्रह होने पर सुनफा योग बनता है जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर और धनवान बनाता है
  • चंद्रमा से बारहवें भाव में ग्रह होने पर अनफा योग बनता है जो जातक को दीर्घायु, नीतिवान और विलासिता प्रदान करता है
  • चंद्रमा के दोनों ओर ग्रह होने पर दुरुधरा योग बनता है जो व्यक्ति को सर्वगुण संपन्न और सर्वप्रिय बनाता है
  • जब यह तीनों ही शुभ योग अनुपस्थित होते हैं तब केमद्रुम दोष व्यक्ति के जीवन को एकाकी बना देता है

क्या यह दोष सचमुच रंक बना देता है?

जनमानस में यह बहुचर्चित प्रश्न निरंतर गूंजता रहता है कि क्या केमद्रुम दोष वास्तव में किसी संपन्न व्यक्ति को पूरी तरह कंगाल और असहाय बना सकता है। इस प्रश्न का उत्तर केवल हां अथवा ना में नहीं दिया जा सकता क्योंकि इसका प्रभाव मनुष्य की मानसिक स्थिति और कर्म प्रणाली के माध्यम से प्रकट होता है।

केमद्रुम दोष से पीड़ित जातक के जीवन में धन का आना नहीं रुकता बल्कि धन का टिकना और उसका सही प्रबंधन रुक जाता है। चंद्रमा जब अकेला होता है, तो व्यक्ति का मन निरंतर अशांत, शंकालु और अस्थिर रहता है। ऐसा व्यक्ति कई बार अत्यधिक भावुकता अथवा अवसाद में आकर ऐसे गलत वित्तीय निर्णय ले लेता है जो उसकी संचित पूंजी को नष्ट कर देते हैं।

यह दोष जातक को भीड़ के बीच में भी अकेला बना देता है। व्यक्ति को ऐसा प्रतीत होता है कि संसार में उसका कोई सच्चा हितैषी नहीं है। वह अपने निकटतम पारिवारिक जनों के बीच रहकर भी स्वयं को कटा हुआ अनुभव करता है। यही मानसिक अकेलापन जब लंबे समय तक बना रहता है, तो जातक की कार्यक्षमता और आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। यदि कुंडली में कोई अन्य मजबूत धन योग न हो, तो यह स्थिति व्यक्ति को गंभीर आर्थिक विपन्नता की ओर धकेल सकती है।

केमद्रुम भंग राजयोग के प्रमुख शास्त्रीय नियम

सनातन ज्योतिष की यह सबसे बड़ी सुंदरता है कि वह किसी भी दोष को अंतिम सत्य नहीं मानता। प्राचीन आचार्यों ने केमद्रुम दोष के अनेक ऐसे प्रबल परिहार और भंग योग बताए हैं जो इस दोष को पूरी तरह समाप्त करके एक शक्तिशाली राजयोग में परिवर्तित कर देते हैं।

जब जन्म कुंडली में केमद्रुम भंग राजयोग बनता है, तो जातक अपने जीवन के आरंभिक काल में अत्यधिक संघर्ष और उपेक्षा झेलने के पश्चात अपने बाहुबल से समाज में अत्यंत प्रतिष्ठित मुकाम हासिल करता है।

  1. केंद्र भावों में शुभ ग्रहों की उपस्थिति: यदि जन्म लग्न अथवा चंद्रमा से केंद्र भावों अर्थात 1, 4, 7 या 10वें भाव में कोई भी शुभ ग्रह जैसे गुरु, शुक्र अथवा बली बुध स्थित हो, तो केमद्रुम दोष पूरी तरह नष्ट हो जाता है।
  2. देवगुरु बृहस्पति की पूर्ण दृष्टि: यदि देवगुरु बृहस्पति अपनी 5वीं, 7वीं अथवा 9वीं अमृतमयी दृष्टि से चंद्रमा को देख रहे हों, तो यह दोष एक अत्यंत उच्च कोटि के गजकेसरी और केमद्रुम भंग राजयोग में बदल जाता है।
  3. चंद्रमा की उच्च अथवा स्वराशि स्थिति: यदि चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में अथवा अपनी स्वराशि कर्क में स्थित होकर बली हो, तो चंद्रमा का एकाकीपन उसकी कमजोरी न बनकर उसकी आध्यात्मिक शक्ति बन जाता है।
  4. लग्न पर समस्त ग्रहों की दृष्टि: यदि चंद्रमा से सभी ग्रह केंद्र भावों में स्थित हों अथवा जन्म लग्न अत्यधिक बलवान हो, तो जातक संसार का महानतम विचारक, दार्शनिक अथवा शासक बनता है।

मानसिक संताप और वित्तीय अस्थिरता का समाधान

केमद्रुम दोष से प्रभावित व्यक्ति को सबसे पहले अपनी मानसिक वृत्तियों पर नियंत्रण स्थापित करना चाहिए। जब मन स्थिर होता है, तो परिस्थितियां स्वतः अनुकूल होने लगती हैं।

जातक को किसी भी प्रकार के सट्टे, अनियंत्रित शेयर बाजार अथवा अत्यधिक जोखिम भरे सौदों से सदैव दूर रहना चाहिए क्योंकि चंद्रमा की अस्थिरता गलत समय पर गलत निर्णय करा सकती है। व्यक्ति को अपने जीवन में एक निश्चित और अनुशासित दिनचर्या का पालन करना चाहिए। एकांत में रहने के स्थान पर सकारात्मक और ज्ञानी व्यक्तियों की संगति में समय व्यतीत करना चाहिए।

चंद्र शांति और दोष निवारण के प्रामाणिक वैदिक उपाय

यदि जन्म पत्रिका में केमद्रुम दोष सक्रिय हो और उसका कोई प्रबल भंग योग न बन रहा हो, तो सनातन परंपरा में बताए गए सात्विक और प्रामाणिक उपायों का आश्रय लेना चाहिए।

  • प्रतिदिन प्रातःकाल और सायंकाल भगवान देवाधिदेव महादेव की विधिवत आराधना करें और शिवलिंग पर कच्चा दूध एवं गंगाजल अर्पित करें
  • प्रत्येक सोमवार को शुद्ध मन से भगवान शिव का जलाभिषेक करते हुए महामृत्युंजय मंत्र अथवा पंचाक्षरी मंत्र ॐ नमः शिवाय का 108 बार जप करें
  • सोमवार के दिन भगवान शिव के मंदिर में जाकर सफेद पुष्प, अक्षत, सफेद चंदन और मिश्री अर्पित करें
  • अपनी माता का नित्य चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लें क्योंकि ज्योतिष शास्त्र में माता को साक्षात चंद्रमा का स्वरूप माना गया है
  • पूर्णिमा के पावन दिन उपवास रखें और रात्रि में चंद्रमा को दूध एवं जल मिश्रित अर्घ्य अर्पित करें तथा चंद्र स्तोत्र का पाठ करें
  • कनिष्ठिका उंगली में किसी योग्य ज्योतिषी के परामर्श से चांदी का छल्ला अथवा शुद्ध चांदी का चौकोर टुकड़ा अपने पास रखें
  • प्रत्येक सोमवार को चावल, दूध, मिश्री, सफेद वस्त्र अथवा चांदी का दान किसी योग्य और जरूरतमंद व्यक्ति को करें

आत्मिक जागरण और आंतरिक संपन्नता का मार्ग

वैदिक दर्शन हमें यह पावन बोध कराता है कि केमद्रुम दोष वास्तव में जीवात्मा को संसार की नश्वरता और एकाकीपन का भान कराकर आत्मसाक्षात्कार की ओर ले जाने वाला एक आध्यात्मिक उत्प्रेरक है। इतिहास साक्षी है कि संसार के अनेक महान संत, तपस्वी, वैज्ञानिक और अमर कवि इसी योग के प्रभाव से एकांत में बैठकर कालजयी सृजन करने में समर्थ हुए। जब मनुष्य अपने एकाकीपन को भगवान शिव की भक्ति और लोक कल्याणकारी कार्यों में समर्पित कर देता है, तो वही अकेला चंद्रमा उसके जीवन को पूर्णता और अक्षय कीर्ति के दिव्य प्रकाश से आलोकित कर देता है।

FAQ

केमद्रुम दोष का निर्माण कुंडली में कैसे होता है? जब जन्म कुंडली में चंद्रमा के आगे वाले दूसरे भाव और पीछे वाले बारहवें भाव में सूर्य, राहु और केतु को छोड़कर कोई अन्य ग्रह न हो तब यह दोष बनता है।

क्या केमद्रुम दोष होने पर व्यक्ति हमेशा निर्धन रहता है? नहीं, यदि कुंडली में केंद्र भावों में शुभ ग्रह हों अथवा गुरु की दृष्टि चंद्रमा पर हो तो केमद्रुम भंग राजयोग बनता है और जातक अपार धन एवं प्रतिष्ठा प्राप्त करता है।

केमद्रुम भंग राजयोग के मुख्य लक्षण क्या हैं? प्रारंभिक जीवन में अत्यधिक संघर्ष और मानसिक अकेलापन झेलने के बाद जातक अपने पराक्रम से समाज में शीर्ष नेतृत्व और मान सम्मान प्राप्त करता है।

क्या सूर्य या राहु के चंद्रमा के पास होने से दोष कटता है? नहीं, वैदिक ज्योतिष के शास्त्रीय नियमों के अनुसार सूर्य, राहु और केतु की उपस्थिति से केमद्रुम दोष का परिहार नहीं होता है।

केमद्रुम दोष को शांत करने की सबसे उत्तम साधना क्या है? नित्य भगवान शिव की उपासना, शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करना, महामृत्युंजय मंत्र का जप और माता की सेवा करना सर्वोत्तम उपाय है।

पाएं अपनी सटीक कुंडली

कुंडली बनाएं

क्या आपको यह पसंद आया?

लेखक

अपर्णा पाटनी

अपर्णा पाटनी (63)


अनुभव: 20

इनसे पूछें: Family Planning, Career

इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें

ZODIAQ के बारे में

ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।

यदि आप एक उपयोगकर्ता हैं

अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।

यदि आप एक ज्योतिषी हैं

अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।

WELCOME TO

ZODIAQ

Right Decisions at the right time with ZODIAQ