क्या आप डॉक्टर या सर्जन बनेंगे?

By पं. संजीव शर्मा

षष्ठ अष्टम दशम भाव सूर्य और मंगल के सूक्ष्म विश्लेषण से जानें डॉक्टर सर्जन अथवा फार्मास्युटिकल टाइकून बनने के योग

डॉक्टर या सर्जन बनने के ज्योतिषीय योग और सात्विक उपाय

आरोग्य सेवा और चिकित्सा का दिव्य विधान

मानव समाज में रोग निवारण और जीवन रक्षा को सनातन परंपरा में सर्वोच्च सेवा और धर्म माना गया है। आयुर्वेद के मूल में भगवान धन्वंतरि की पावन चेतना विद्यमान है, जो समस्त प्राणियों को व्याधियों से मुक्त कर आरोग्य प्रदान करते हैं। जब कोई व्यक्ति चिकित्सा के क्षेत्र में जाकर दूसरों के प्राणों की रक्षा करने का संकल्प लेता है, तो यह केवल एक व्यावसायिक करियर का चयन नहीं होता अपितु यह पूर्व जन्मों के संचित पुण्य और ईश्वरीय अनुग्रह का प्रत्यक्ष प्रकटीकरण होता है। अनेक विद्यार्थी वर्षों तक रात दिन एक करके मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, किंतु उनमें से कुछ ही सफल होकर ख्यातिलब्ध चिकित्सक, कुशल सर्जन अथवा बड़े फार्मास्युटिकल संस्थान के संस्थापक बन पाते हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चिकित्सा कर्म का संबंध जन्म पत्रिका के विशिष्ट भावों, प्राणदाता ग्रहों और स्वास्थ्य त्रिकोण के मजबूत संजाल से होता है। सूक्ष्म ज्योतिषीय विश्लेषण यह प्रमाणित कर देता है कि जातक किस चिकित्सा विधा में शिखर पर पहुंचेगा और कब उसे जनमानस की सेवा का स्वर्णिम अवसर प्राप्त होगा।

चिकित्सा क्षेत्र के मुख्य ज्योतिषीय भाव

वैदिक ज्योतिष में चिकित्सा सेवा, शल्य क्रिया और औषधीय व्यवसाय का आकलन करने के लिए कुंडली के त्रिक भावों और कर्म भाव का विशेष समन्वय देखा जाता है। जब इन आधारभूत भावों के बीच एक शक्तिशाली ऊर्जा चक्र बनता है तब जातक में रोगों को पहचानने और उनका समूल नाश करने की अद्भुत क्षमता उत्पन्न होती है।

चिकित्सा क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले प्रमुख भाव निम्नलिखित हैं।

  • षष्ठ भाव जन्म कुंडली का छठा भाव रोग, ऋण और व्याधि निवारण का मुख्य स्थान है। इस भाव का बली होना व्यक्ति को रोगों के निदान और रोगियों को स्वस्थ करने की स्वाभाविक क्षमता प्रदान करता है।
  • अष्टम भाव आठवां भाव आयु, आकस्मिक संकट, क्रिटिकल केयर, गहन चिकित्सा, सूक्ष्म अनुसंधान और मानव शरीर की आंतरिक संरचना का प्रतीक है।
  • द्वादश भाव बारहवां भाव अस्पताल, चिकित्सालय में भर्ती, एकांतवास, शय्या सुख और विदेशी शोध संस्थानों का प्रतिनिधित्व करता है।
  • दशम भाव कर्म स्थान होने के कारण दसवां भाव व्यक्ति के सामाजिक पद, प्रतिष्ठा, आजीविका के स्वरूप और एक सफल चिकित्सक के रूप में मिलने वाले यश का निर्धारण करता है।
  • द्वितीय भाव यह भाव संचित ज्ञान, मुख मंडल और उस औषधीय दृष्टि का स्थान है जो रोगी की स्थिति को देखकर तुरंत सही उपचार सुझाती है।
ज्योतिषीय भावनैसर्गिक प्रतिनिधित्वचिकित्सा क्षेत्र में प्रभाव का स्वरूप
षष्ठ भावरोग और व्याधि निवारणरोग का निदान, उपचार क्षमता और नियमित ओपीडी सेवा
अष्टम भावआयु और क्रिटिकल केयरआपातकालीन चिकित्सा, जटिल सर्जरी और जीवन रक्षा
द्वादश भावअस्पताल और संस्थागत सेवाबड़े अस्पतालों में कार्य, शोध और संस्थागत प्रबंधन
दशम भावकर्म, पद और प्रतिष्ठावरिष्ठ कंसल्टेंट, विभागाध्यक्ष अथवा मेडिकल डायरेक्टर
पंचम भावप्रज्ञा और पूर्व पुण्यसटीक डायग्नोसिस, औषधीय ज्ञान और मंत्र विद्या

चिकित्सक और सर्जन बनाने वाले मुख्य ग्रह

चिकित्सा के क्षेत्र में विशेषज्ञता और अपार सफलता प्राप्त करने के लिए नवग्रहों में से विशिष्ट ग्रहों का बलवान होना अनिवार्य माना जाता है।

जीवनदायिनी शक्ति और आत्मा के कारक सूर्य देव को सभी प्रकार की चिकित्सा और स्वास्थ्य का नैसर्गिक अधिपति माना गया है। सूर्य व्यक्ति को रोगों से लड़ने की अद्भुत प्राण ऊर्जा, आत्मविश्वास और सटीक नैदानिक दृष्टि प्रदान करते हैं। एक बली सूर्य के बिना कोई भी व्यक्ति सफल सरकारी डॉक्टर अथवा प्रतिष्ठित फिजिशियन नहीं बन सकता।

मंगल ग्रह अग्नि तत्व, शारीरिक साहस, रक्त संचार, शल्य क्रिया और चीर फाड़ के उपकरणों का स्वामी है। एक कुशल सर्जन बनने के लिए मंगल का मजबूत होना पहली शर्त है क्योंकि सर्जरी के दौरान रक्त देखकर विचलित न होना और सटीक चीरा लगाना मंगल की कृपा से ही संभव होता है।

छाया ग्रह केतु ग्रह को सूक्ष्मता, चीर फाड़, ऑपरेशन के बारीक औजारों, लेजर सर्जरी और सूक्ष्म जीवाणुओं का कारक माना गया है। जब मंगल और केतु का शुभ संबंध बनता है, तो व्यक्ति न्यूरोसर्जरी अथवा कार्डियक सर्जरी जैसी अत्यंत जटिल विधाओं में निपुणता प्राप्त करता है।

देवगुरु बृहस्पति समस्त औषधियों, आयुर्वेद, आंतरिक हीलिंग और परोपकारी चिकित्सा के स्वामी हैं। गुरु का प्रभाव चिकित्सक के हाथों में ऐसा स्पर्श देता है जिससे साधारण दवा भी अमृत बन जाती है।

बुध ग्रह रसायन शास्त्र, दवाओं के फॉर्मूले और फार्मास्युटिकल व्यापार के मुख्य नियंत्रक हैं।

सर्जन और फिजिशियन बनने के विशिष्ट ग्रह योग

जन्म कुंडली में विभिन्न ग्रहों का विशिष्ट संयोग यह तय करता है कि व्यक्ति किस विधा में सबसे अधिक ख्याति अर्जित करेगा।

  • सफल सर्जन के योग जब कुंडली में मंगल और केतु का संबंध 6ठे, 8वें अथवा 10वें भाव से बनता है और लग्न बली होता है, तो व्यक्ति विख्यात सर्जन बनता है। यदि मंगल अपनी स्वराशि मेष, वृश्चिक अथवा उच्च राशि मकर में होकर केंद्र में बैठे, तो रुचक योग निर्मित होता है जो जातक को शल्य चिकित्सा में अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाता है।
  • कुशल फिजिशियन के योग जब सूर्य और देवगुरु बृहस्पति की युति अथवा दृष्टि संबंध पंचम, नवम या दशम भाव से बनता है, तो जातक आंतरिक रोगों का विशेषज्ञ, एमडी मेडिसिन अथवा प्रख्यात बाल रोग विशेषज्ञ बनता है।
  • फार्मास्युटिकल टाइकून के योग यदि जन्म पत्रिका में बुध और शुक्र का शुभ संबंध 2रे, 10वें और 11वें भाव से हो तथा शनि देव का समर्थन प्राप्त हो, तो व्यक्ति दवाओं के बड़े कारखाने, दवा आपूर्ति शृंखला अथवा अंतरराष्ट्रीय फार्मा कंपनी का स्वामी बनता है।
  • रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी के योग राहु, केतु और बुध का अष्टम भाव से संबंध व्यक्ति को आधुनिक मेडिकल इमेजिंग, एमआरआई, सीटी स्कैन और पैथोलॉजिकल जांच का बड़ा विशेषज्ञ बनाता है।

दशमांश कुंडली और प्रतियोगी परीक्षा में विजय

मेडिकल प्रवेश परीक्षा जैसे नीट अथवा नीट पीजी में शीर्ष स्थान प्राप्त करने और प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए लग्न कुंडली के साथ दशमांश कुंडली अर्थात डी 10 चक्र का विश्लेषण अत्यंत आवश्यक होता है।

दशमांश और ग्रह दशा से प्राप्त होने वाले निर्णायक सूत्र इस प्रकार हैं।

  • यदि दशमांश कुंडली में षष्ठेश और दशमेश आपस में शुभ संबंध बना रहे हों और लग्न में सूर्य या मंगल दिग्बली हों, तो जातक प्रथम प्रयास में ही कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर लेता है।
  • जब व्यक्ति की कुंडली में सूर्य, मंगल अथवा गुरु की महादशा में षष्ठेश या दशमेश की अंतर्दशा सक्रिय होती है तब उसे सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट और मनचाही विशेषज्ञता प्राप्त होती है।
  • सर्वाष्टकवर्ग चक्र में यदि 6ठे भाव और 10वें भाव को 28 से अधिक शुभ बिंदु प्राप्त हों, तो व्यक्ति का मेडिकल करियर बिना किसी रुकावट के निरंतर प्रगति करता है।
  • यदि दशमांश में 8वें और 12वें भाव पर शुभ ग्रहों का प्रभाव हो, तो जातक विदेश में जाकर उच्च मेडिकल फेलोशिप और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्जरी का अभ्यास करता है।
मेडिकल विशेषज्ञतामुख्य ग्रह संयोजनआवश्यक भाव संबंधज्योतिषीय स्वरूप
सामान्य सर्जरी और ऑर्थोपेडिकमंगल, शनि और केतु का बल6, 8 और 10 भाव की युतिहड्डियों की सर्जरी, आपातकालीन ऑपरेशन और ट्रॉमा केयर
कार्डियोलॉजी और हृदय रोगसूर्य, मंगल और गुरु का प्रभाव4, 5 और 10 भाव का संबंधहृदय की बाईपास सर्जरी, एंजियोप्लास्टी और कार्डियक केयर
न्यूरोलॉजी और मस्तिष्क सर्जरीबुध, चंद्रमा और केतु का मेल1, 5 और 8 भाव का समन्वयमस्तिष्क की सूक्ष्म सर्जरी, तंत्रिका रोग और जटिल निदान
बाल रोग और सामान्य मेडिसिनगुरु, चंद्रमा और सूर्य की दृष्टि5, 9 और 10 भाव की स्थितिबच्चों का उपचार, पारिवारिक चिकित्सा और सात्विक परामर्श
फार्मा उद्योग और अस्पताल मालिकबुध, शनि और शुक्र का योग2, 7, 10 और 11 भाव का संबंधबड़े निजी अस्पताल की स्थापना और दवा निर्माण साम्राज्य

मेडिकल करियर में सफलता हेतु सात्विक उपाय

चिकित्सा के कठिन मार्ग पर आने वाली बाधाओं को दूर करने, बौद्धिक एकाग्रता बढ़ाने और हाथों में रोग निवारक शक्ति जाग्रत करने के लिए वैदिक सनातन परंपरा में अत्यंत प्रभावशाली सात्विक उपाय बताए गए हैं।

साधना क्षेत्रअधिष्ठाता देव एवं साधनासात्विक वैदिक विधान
जीवन शक्ति और शासकीय पदभगवान सूर्यनारायण की उपासनानित्य प्रातः तांबे के पात्र से अर्घ्य और आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ
शल्य क्रिया में निपुणता और साहसश्री हनुमान जी की आराधनामंगलवार को सुंदरकांड का पाठ और चमेली के तेल का दीपक
औषधीय सिद्धि और हीलिंग टचभगवान धन्वंतरि की सेवानित्य ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये नमः जप
तार्किक प्रज्ञा और फार्मा सफलताभगवान श्री गणेश की पूजाबुधवार को दूर्वा अर्पित करना और गणपति अथर्वशीर्ष पाठ

चिकित्सा साधकों के लिए प्रमुख सात्विक नियम निम्नलिखित हैं।

  • भगवान धन्वंतरि का नित्य स्मरण प्रतिदिन अध्ययन अथवा रोगी का परीक्षण प्रारंभ करने से पूर्व भगवान धन्वंतरि का ध्यान करने से बुद्धि में तुरंत सही औषधि का विचार आता है।
  • भगवान सूर्य देव को नियमित अर्घ्य तांबे के लोटे में शुद्ध जल, लाल चंदन और अक्षत डालकर सूर्योदय के समय अर्घ्य समर्पित करने से मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जप जटिल सर्जरी करने वाले सर्जनों को नियमित रूप से महामृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए जिससे उनके हाथों से किसी मरीज की अकाल हानि न हो।
  • गरीब और असहाय रोगियों की निस्वार्थ सेवा सामर्थ्य अनुसार निर्धन रोगियों को निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराना और उनकी सेवा करना कुंडली के 6ठे और 8वें भाव के अशुभ प्रभाव को वरदान में बदल देता है।

धन्वंतरि कृपा और निस्वार्थ सेवा संकल्प

चिकित्सा का पेशा केवल धन उपार्जन का माध्यम नहीं अपितु पीड़ित मानवता के आंसू पोंछने का एक अत्यंत पवित्र ईश्वरीय कार्य है। जब कोई विद्यार्थी अपनी जन्म कुंडली में स्थित मंगल, सूर्य और गुरु की ऊर्जा को पहचानकर कठोर अध्ययन, सात्विक साधना और सेवा भाव से आगे बढ़ता है, तो प्रकृति उसके मार्ग के सभी अवरोधों को समाप्त कर देती है। अनुकूल ग्रह दशाएं और ईश्वरीय अनुग्रह एक सामान्य छात्र को उच्च कोटि का चिकित्सक और सर्जन बना देते हैं। अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग बिना किसी भेदभाव के रोगियों को नया जीवन देने के लिए करना ही किसी भी डॉक्टर के जीवन की वास्तविक और सर्वोच्च सार्थकता है।

FAQ

क्या कमजोर मंगल होने पर भी कोई व्यक्ति सर्जन बन सकता है? शल्य क्रिया के लिए मंगल का बली होना अनिवार्य है, यदि मंगल कमजोर हो तो व्यक्ति फिजिशियन, पैथोलॉजिस्ट अथवा फार्मासिस्ट के रूप में अधिक सफल होता है।

नीट पीजी परीक्षा में टॉप करने के लिए कौन से ग्रह सबसे महत्वपूर्ण हैं? नीट परीक्षा में शीर्ष स्थान पाने के लिए सूर्य का दशम भाव में बलवान होना, षष्ठेश की अनुकूलता और बुध की तीव्र विश्लेषणात्मक क्षमता सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।

फार्मास्युटिकल बिजनेस में बड़ा टाइकून बनने के लिए कौन सा योग जरूरी है? फार्मा बिजनेस में सफलता के लिए बुध, शुक्र और एकादश भाव का संबंध दशम भाव से होना चाहिए जो बड़े पैमाने पर दवा निर्माण और व्यापारिक लाभ प्रदान करता है।

हाथों में हीलिंग टच लाने के लिए कौन सा वैदिक मंत्र श्रेष्ठ है? हाथों में रोग निवारक शक्ति जाग्रत करने के लिए प्रतिदिन 108 बार भगवान धन्वंतरि के मंत्र अथवा महामृत्युंजय मंत्र का जप करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

क्या 12वें भाव का संबंध हमेशा डॉक्टर को विदेश में सफलता दिलाता है? द्वादश भाव अस्पताल और विदेश दोनों का कारक है, यदि इसका संबंध दशम भाव और 9वें भाव से बने तो डॉक्टर को विदेशी मेडिकल रिसर्च और अंतरराष्ट्रीय अस्पतालों में बड़ी ख्याति मिलती है।

पाएं अपनी सटीक कुंडली

कुंडली बनाएं

क्या आपको यह पसंद आया?

लेखक

पं. संजीव शर्मा

पं. संजीव शर्मा (63)


अनुभव: 20

इनसे पूछें: Family Planning, Career

इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें

ZODIAQ के बारे में

ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।

यदि आप एक उपयोगकर्ता हैं

अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।

यदि आप एक ज्योतिषी हैं

अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।

WELCOME TO

ZODIAQ

Right Decisions at the right time with ZODIAQ