By अपर्णा पाटनी
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा, घटस्थापना का महत्व, शुभ समय और सही विधि जानें

चैत्र नवरात्रि का आगमन भक्त हृदयों में नई भक्ति जागृत करता है। नवरात्रि का पहला दिन सबसे पवित्र क्षण होता है। घटस्थापना के माध्यम से देवी शक्ति घर में प्रवेश करती है। माँ शैलपुत्री की आराधना इस यात्रा का आधार बनती है।
| विवरण | समय |
|---|---|
| दिन | गुरुवार, 19 मार्च 2026 |
| घटस्थापना मुहूर्त | 06:52 AM से 09:44 AM |
| अवधि | 2 घंटे 51 मिनट |
| अभिजित मुहूर्त | 11:20 AM से 12:09 PM |
| प्रतिपदा प्रारंभ | 19 मार्च 06:52 AM |
| प्रतिपदा समाप्त | 20 मार्च 04:52 AM |
इस वर्ष विशेष ज्योतिषीय योग है। प्रतिपदा तिथि सूर्योदय के समय उपलब्ध नहीं थी। इसलिए अमावस्या के अंत में घटस्थापना होगी। गुरुवार का संयोग शुभ फल बढ़ाता है। पंचांग अनुसार यह समय देवी आवाहन हेतु सर्वोत्तम है।
माँ शैलपुत्री हिमालय की पुत्री हैं। वे पिछले जन्म में सती थीं। भगवान शिव की पत्नी के रूप में दक्ष यज्ञ में पिता के अपमान से व्यथित हुईं। योगाग्नि द्वारा देह त्याग दी। अगले जन्म में पार्वती बनकर कठोर तपस्या की। शिव से पुनर्विवाह हुआ। इसलिए शैलपुत्री नाम मिला।
उनका स्वरूप स्थिरता और धैर्य का प्रतीक है। मस्तक पर अर्धचंद्र शोभित है। दाहिने हाथ में त्रिशूल, बाएं में कमल धारण करती हैं। वाहन वृषभ है। नंदी पर सवार यह रूप आध्यात्मिक आधार प्रदान करता है। पुराण कथाएं उनकी महिमा का गुणगान करती हैं। भक्तों को जीवन नींव मजबूत करने की प्रेरणा मिलती है।
नवरात्रि का पहला दिन मूलाधार चक्र जागरण से जुड़ा है। यह चक्र शरीर का मूल आधार है। कुंडलिनी शक्ति यहीं निहित रहती है। पूजा से आत्मविश्वास बढ़ता है। जीवन की अस्थिरता दूर होती है। मानसिक भ्रम समाप्त होता है। ज्योतिष में चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है। मेष राशि वालों को विशेष लाभ होता है।
नवरात्रि के पहले दिन पीला रंग प्रमुख रहता है। यह ज्ञान, ऊर्जा और शुभ प्रारंभ का प्रतीक है। पीले वस्त्र धारण करें। पीले फूल अर्पित करें। पीली मिठाई भोग लगाएं। वास्तु शास्त्र में पीला पूर्व दिशा से संबंधित है। सूर्य ऊर्जा आकर्षित करता है। महिलाओं के लिए पीली साड़ी शुभ रहती है।
घटस्थापना नवरात्रि की आत्मा है। कलश ब्रह्मांड का प्रतीक है। भीतर का जल जीवन ऊर्जा दर्शाता है। ऊपर नारियल ब्रह्म चेतना का संकेत है। आसपास जौ बोना आगामी वर्ष की समृद्धि लाता है। वैदिक विधान घर को शक्ति केंद्र बनाता है। नौ दिन इसी कलश की रक्षा और पूजा होती है। वातावरण शुद्धिकरण होता है।
| सामग्री | विवरण | महत्व |
|---|---|---|
| मिट्टी कलश | मध्यम आकार | ब्रह्मांड प्रतीक |
| स्वच्छ मिट्टी | कलश भरने योग्य | अंकुरण आधार |
| जौ बीज | एक मुट्ठी | समृद्धि हेतु |
| गंगाजल | आधा कलश | शुद्धिकरण |
| आम पत्ते | 5-7 | स्वास्थ्य रक्षा |
| नारियल | साबुत एक | चेतना प्रतीक |
| लाल वस्त्र | कलश लपेटने हेतु | शक्ति आसन |
| सुपारी | 5-7 दाने | स्थिरता |
| चांदी सिक्का | एक | धन संचय |
| मौली | लाल धागा | रक्षा सूत्र |
| रोली अक्षत | पूजन हेतु | शुभ संचार |
पूजा स्थल गंगाजल से शुद्ध करें। उत्तर या पूर्व दिशा मुख होकर आसन लें। पात्र में स्वच्छ मिट्टी भरें। जौ के बीज समान रूप से बोएं। जलयुक्त कलश स्थापित करें। कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्का, अक्षत डालें। मुख पर आम के पत्ते सजाएं। नारियल को मौली से बांधें। लाल वस्त्र लपेटें। देवी दुर्गा का आवाहन करें। प्रार्थना करें कि नौ दिन विराजमान रहें। मंत्र जपें। ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। स्वास्तिक बनाएं। दीप प्रज्वलित करें।
सबसे पहले शांत मन से देवी का ध्यान करें। चित्र या मूर्ति के समक्ष विराजें। रोली तिलक लगाएं। अक्षत अर्पित करें। पुष्पमाला चढ़ाएं। धूप दिखाएं। घी का दीप जलाएं। घी युक्त व्यंजन भोग चढ़ाएं। दुर्गा सप्तशती प्रथम अध्याय पढ़ें। देवी कवच का पाठ करें। मुख्य मंत्र ॐ शं शैलपुत्री देव्यै नमः 108 बार जपें। आरती उतारें। प्रसाद वितरित करें। संध्या समय पुनः पूजन करें।
माँ शैलपुत्री को घी से बने व्यंजन अत्यंत प्रिय हैं। घी शीरा, लड्डू, हलवा भोग लगाएं। इससे स्वास्थ्य लाभ होता है। शारीरिक शक्ति बढ़ती है। व्रतधारियों के लिए घी मिश्रित फलाहार उपयुक्त है। भोग के बाद कन्या भोजन परंपरा प्रारंभ करें। यह भोग विशेष फलदायी रहता है।
नवरात्रि पहला दिन स्थिरता का संदेश देता है। माँ शैलपुत्री धैर्य सिखाती हैं। मजबूत नींव पर खड़ी साधना शिखर तक ले जाती है। इस दिन की भक्ति वर्ष भर शक्ति प्रदान करती है। साधक को आत्मिक बल प्राप्त होता है। आध्यात्मिक यात्रा का प्रारंभ बिंदु बनता है।
नवरात्रि पहले दिन घटस्थापना मुहूर्त भूल जाएं तो क्या करें?
अभिजित मुहूर्त 11:20 से 12:09 अपनाएं। देरी न करें।
माँ शैलपुत्री का मूल मंत्र कौन सा है?
ॐ शं शैलपुत्री देव्यै नमः। 108 बार जपें।
नवरात्रि पहले दिन शुभ रंग क्या है?
पीला रंग। वस्त्र और फूल पीले चढ़ाएं।
जौ के बीज क्यों बोए जाते हैं?
समृद्धि, उन्नति और संतान सुख हेतु।
अभिजित मुहूर्त मुख्य मुहूर्त का विकल्प है?
हां। मुख्य समय उपलब्ध न हो तो तुरंत उपयोग करें।
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