अक्षय तृतीया 2026: तिथि, तृतीया तिथि और पूजा मुहूर्त

By पं. अमिताभ शर्मा

वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया पर शुभ कार्य और आध्यात्मिक महत्व

अक्षय तृतीया 2026: तिथि, पूजा मुहूर्त और परंपराएँ

सामग्री तालिका

अक्षय तृतीया को हिन्दू पंचांग में उन दुर्लभ दिनों में गिना जाता है, जब शुभ कार्यों के लिए अलग से मुहूर्त खोजने की आवश्यकता नहीं मानी जाती। अक्षय शब्द का अर्थ है जो कभी नष्ट न हो, जो घटे नहीं। मान्यता है कि इस दिन किया गया शुभ कर्म, दान, जप, पूजन या निवेश दीर्घकाल तक स्थायी फल देता है और उसका पुण्य आसानी से क्षीण नहीं होता। इसलिए परिवार, धन, धर्म और आध्यात्मिक जीवन, सभी के लिए यह दिवस विशेष महत्व रखता है।

अक्षय तृतीया हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आती है। यह ऐसा समय माना जाता है जब सूर्य और चन्द्र, दोनों अपनी अत्यन्त अनुकूल स्थिति में होते हैं, जिससे दिन की शुभता और भी बढ़ जाती है। 2026 में भी अक्षय तृतीया अनेक नए आरम्भ, संकल्प और दीर्घकालीन योजनाओं के लिए अत्यन्त अनुकूल मानी जा रही है।

अक्षय तृतीया 2026 की तिथि और तृतीया तिथि का समय

सबसे पहले अक्षय तृतीया 2026 के सटीक दिन और तिथि समय को समझ लेना आवश्यक है, क्योंकि यहीं से पूजा, व्रत और नये कार्यों की योजना बनती है।

विवरण तिथि वार समय / टिप्पणी
अक्षय तृतीया 2026 पर्व तिथि 17 अप्रैल 2026 शुक्रवार वैशाख शुक्ल तृतीया
तृतीया तिथि प्रारम्भ 16 अप्रैल 2026 गुरुवार 05:08 PM पर आरम्भ
तृतीया तिथि समाप्त 17 अप्रैल 2026 शुक्रवार 03:18 PM पर समाप्त

क्योंकि 17 अप्रैल 2026 के सूर्योदय के समय तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए अक्षय तृतीया का व्रत, पूजा और सभी धार्मिक अनुष्ठान इसी दिन किए जाएँगे। यह दिन परिवारिक योजनाओं, आर्थिक निर्णयों और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष शुभ माना जाएगा।

अक्षय तृतीया 2026 में शुभ पूजा मुहूर्त कब है

अक्षय तृतीया को प्रायः सर्व सिद्ध मुहूर्त माना जाता है, अर्थात इस दिन अलग से जटिल गणना करके मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं होती। फिर भी जो लोग विशेष पूजा, संकल्प या निवेश की योजना बना रहे हों, वे तृतीया तिथि के भीतर का समय चुनें।

पूजा / कार्य तिथि समय
अनुशंसित पूजा समय 17 अप्रैल 2026 06:04 AM से 03:18 PM तक
नये कार्यों की शुरुआत 17 अप्रैल 2026 तृतीया तिथि के दौरान किसी भी समय

सुबह से लेकर तृतीया तिथि के अंत तक, विशेषकर 06:04 AM से 03:18 PM के बीच, लक्ष्मीनारायण पूजा, दान, स्वर्ण क्रय, भूमि या व्यवसाय से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य शुरू करना अत्यन्त शुभ माना जा सकता है।

अक्षय तृतीया क्या है और इसका अर्थ क्या समझें

अक्षय तृतीया दो शब्दों से मिलकर बनी है।

  • अक्षय का अर्थ है जो समाप्त न हो, जो घटता न हो।
  • तृतीया शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि को कहते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया।

  • दान, जप, हवन, पूजा या स्वाध्याय
  • योग्य स्थान पर निवेश या नया व्यापार
  • विवाह, गृहप्रवेश या महत्वपूर्ण संकल्प

इन सबका फल सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक स्थायी और लंबे समय तक शुभ माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन सोना, भूमि, गाय, अनाज और अन्य शुभ वस्तुओं का क्रय विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

अक्षय तृतीया से जुड़ी प्रमुख पौराणिक घटनाएँ

अक्षय तृतीया को कई पवित्र घटनाओं से जोड़ा जाता है, जिनके कारण इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है।

  • भगवान परशुराम का जन्म दिवस।
  • त्रेता युग के आरम्भ से इस दिवस का संबंध बताया जाता है।
  • धन के देवता कुबेर को विशेष वैभव प्राप्त होने की कथा इस दिन से जोड़ी जाती है।
  • भगवान कृष्ण के परम भक्त सुदामा का द्वारका पहुँचकर परमानंद और समृद्धि प्राप्त करना भी अक्षय फल का संकेत माना जाता है।
  • महाभारत में वर्णित अक्षय पात्र का द्रौपदी को प्राप्त होना, जिसमें भोजन की कमी न रहे, भी इसी दिन से जोड़ा जाता है।

इन घटनाओं का सामान्य संदेश यह है कि श्रद्धा, समर्पण, धर्म और सही समय पर लिया गया निर्णय, जीवन में स्थायी समृद्धि और कृपा के द्वार खोल सकता है।

अक्षय तृतीया 2026 पर कौन कौन से पूजन और अनुष्ठान करें

अक्षय तृतीया के दिन साधारण रूप से शुरू होकर भी गहरी आध्यात्मिकता तक पहुँचने वाला एक संतुलित पूजन क्रम अपनाया जा सकता है।

दिन की शुरुआत कैसे करें

  • प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ, हल्के एवं पारंपरिक वस्त्र धारण करें।
  • घर के पूजाघर में दीपक, धूप और जल से भगवान की आराधना की तैयारी करें।
  • दिन के लिए एक शांत संकल्प लें, जैसे किसी विशेष जप संख्या, दान, या किसी नयी अच्छी आदत की शुरुआत।

यह संकल्प अक्षय तृतीया को केवल शुभ तिथि नहीं बल्कि जीवन में ठोस परिवर्तन का आधार बना सकता है।

लक्ष्मी नारायण पूजा और अन्न समर्पण

  • इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा का विधान माना जाता है।
  • चावल, जौ, तिल, फूल और तुलसी दल अर्पित किए जाते हैं।
  • शंखनाद, विष्णु सहस्रनाम, लक्ष्मी स्तुति या सरल मंत्र जप से पूजा को पूर्ण किया जा सकता है।

कई परिवार इस दिन सत्यनारायण पूजा भी करते हैं, जिससे परिवारिक समृद्धि, सद्भाव और मानसिक शांति की कामना की जाती है।

दान, अन्न सेवा और जरूरतमंदों की सहायता

अक्षय तृतीया पर किया गया दान दीर्घकाल टिकने वाले फल का वाहक माना जाता है।

  • भूखे को अन्न देना, प्यासे को जल पिलाना और जरूरतमंद को वस्त्र प्रदान करना।
  • किसी धर्मार्थ संस्थान, गौशाला या सेवा कार्य से जुड़े स्थान पर योगदान देना।

यह दान केवल पुण्य के लिए नहीं बल्कि भीतर के कृतज्ञ भाव और करुणा को जगाने के लिए भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।

सोना, चाँदी और नये निवेश की परंपरा

अक्षय तृतीया के दिन स्वर्ण क्रय की परंपरा बहुत प्रसिद्ध है।

  • लोग सोना, चाँदी, बर्तन या अन्य दीर्घकाल टिकने वाली वस्तुओं की खरीदारी करते हैं।
  • इसका भाव यह है कि आज किया गया यह शुभ क्रय भविष्य में स्थिरता और समृद्धि का आधार बने।

यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि केवल दिखावे या सामाजिक दबाव में खरीदारी न की जाए बल्कि अपनी क्षमता, आवश्यकता और समझ के अनुसार विवेकपूर्ण निवेश किया जाए।

अक्षय तृतीया 2026 का ज्योतिषीय महत्व

ज्योतिष के दृष्टिकोण से अक्षय तृतीया की महत्ता और भी गहरी हो जाती है।

  • इस दिन सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में माना जाता है, जो आत्मविश्वास, नेतृत्व शक्ति और स्पष्टता का संकेत देता है।
  • चन्द्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में माना जाता है, जो स्थिरता, भावनात्मक संतुलन और भौतिक जीवन में सुरक्षित आधार से जुड़ा है।

जब सूर्य और चन्द्र दोनों अनुकूल स्थिति में माने जाएँ, तो इसे आत्मबल और मनोबल, दोनों के संतुलित होने का समय समझा जाता है।

ऐसी स्थिति में।

  • नये आर्थिक निर्णय, व्यवसाय विस्तार और धन संबंधित योजनाएँ अपेक्षाकृत अधिक स्थिर आधार पर शुरू की जा सकती हैं।
  • आध्यात्मिक दृष्टि से भी जप, ध्यान और संकल्प की शक्ति अधिक टिकाऊ फल दे सकती है।

इसीलिए अक्षय तृतीया को स्वयंसिद्ध शुभ दिवस कहा जाता है, जहाँ जटिल मुहूर्त गणना के बिना भी शुभ कार्य प्रारम्भ करने की अनुमति मानी जाती है।

अक्षय तृतीया 2026 किन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी

अक्षय तृतीया का शुभ प्रभाव सभी के लिए माना जाता है, फिर भी कुछ क्षेत्रों में इसका महत्व अधिक स्पष्ट दिख सकता है।

  • जो लोग नया व्यवसाय, स्टार्टअप या व्यापार विस्तार शुरू करना चाह रहे हों।
  • विवाह, सगाई, गृहप्रवेश या किसी दीर्घकालिक संबंध की शुरुआत की योजना वाले परिवार।
  • जो व्यक्ति भूमि, घर, वाहन या दीर्घकालिक निवेश के बारे में सोच रहे हों।
  • साधक जो किसी नये आध्यात्मिक संकल्प, जप संख्या या नियम की शुरुआत करना चाहते हों।

इनके लिए अक्षय तृतीया 2026 नये अध्याय की शुरुआत हेतु एक सशक्त और शुभ दिन बन सकता है।

अक्षय तृतीया 2026 के मुख्य समय एक सारणी में

नीचे एक सारणी में अक्षय तृतीया 2026 की प्रमुख जानकारी संक्षेप में दी जा रही है।

घटना तिथि समय / विवरण
अक्षय तृतीया तिथि 17 अप्रैल 2026 शुक्रवार
तृतीया तिथि प्रारम्भ 16 अप्रैल 2026 05:08 PM
तृतीया तिथि समाप्त 17 अप्रैल 2026 03:18 PM
पूजा और शुभ कार्य का समय 17 अप्रैल 2026 सूर्योदय से 03:18 PM तक

यह सारणी स्पष्ट करती है कि 17 अप्रैल 2026 का अधिकांश दिन तृतीया तिथि के प्रभाव में रहेगा, जो अक्षय तृतीया के अनुष्ठानों के लिए अनुकूल है।

अक्षय तृतीया 2026 से जीवन के लिए प्रेरक संदेश

अक्षय तृतीया को केवल धन और खरीदारी तक सीमित कर देना इसके गहरे अर्थ के साथ न्याय नहीं करता।

यह दिन सिखाता है कि।

  • जो संकल्प, सद्कर्म और अच्छे निर्णय आज किए जाएँ, वे दीर्घकाल तक जीवन की दिशा बदल सकते हैं।
  • समृद्धि केवल धन में नहीं बल्कि सद्भाव, स्वास्थ्य, संबंधों की मजबूती और आध्यात्मिक प्रगति में भी दिखनी चाहिए।
  • यदि अक्षय तृतीया 2026 के दिन कोई व्यक्ति जीवन में एक भी ऐसी आदत या संकल्प चुन ले जो सच्चे अर्थों में उसे भीतर से बेहतर बना दे, तो वही इस दिन का सबसे बड़ा अक्षय फल बन सकता है।

इस प्रकार 17 अप्रैल 2026 की अक्षय तृतीया, सही समझ के साथ मनाई जाए, तो केवल त्योहार नहीं बल्कि स्थायी विकास, संतुलित समृद्धि और गहरे आध्यात्मिक संकल्प की ओर एक महत्त्वपूर्ण कदम बन सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: अक्षय तृतीया 2026

अक्षय तृतीया 2026 किस दिन पड़ेगी
अक्षय तृतीया 2026 शुक्रवार 17 अप्रैल 2026 को पड़ेगी, क्योंकि इसी दिन वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि सूर्योदय पर विद्यमान रहेगी।

अक्षय तृतीया 2026 में तृतीया तिथि का समय क्या रहेगा
तृतीया तिथि 16 अप्रैल 2026 को 05:08 PM पर शुरू होगी और 17 अप्रैल 2026 को 03:18 PM पर समाप्त होगी। इस पूरी अवधि को अक्षय तृतीया के प्रभाव वाला समय माना जाएगा।

पूजा और नये कार्यों के लिए कौन सा समय सबसे शुभ माना जा सकता है
17 अप्रैल 2026 को सूर्योदय से लेकर 03:18 PM तक, विशेषकर 06:04 AM से 03:18 PM के बीच, लक्ष्मी नारायण पूजा, दान, निवेश, सोना क्रय या नये कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यन्त अनुकूल समय माना जा सकता है।

क्या अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना अनिवार्य है
सोना खरीदना अनिवार्य नहीं बल्कि प्रतीक मात्र है। यदि संभव हो तो अपनी क्षमता के अनुसार सोना, चाँदी या कोई स्थायी वस्तु खरीदी जा सकती है, पर उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण है कि इस दिन कुछ स्थायी अच्छे संकल्प और सत्कर्म अवश्य किए जाएँ।

अक्षय तृतीया 2026 से व्यक्ति अपने जीवन के लिए क्या मुख्य सीख ले सकता है
यह कि इस दिन शुरू किए गए अच्छे विचार, अनुशासन और निर्णय अधिक समय तक बने रह सकते हैं। यदि समृद्धि के साथ संयम, दान और आध्यात्मिकता को जोड़ा जाए, तो अक्षय तृतीया केवल बाहरी सफलता नहीं बल्कि भीतर की स्थायी शांति और संतुलन का माध्यम बन सकती है।

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लेखक

पं. अमिताभ शर्मा

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