By पं. सुव्रत शर्मा
भगवान विष्णु, गुरु और वेद व्यास की पूजा के लिए शुभ दिन

श्रावण से ठीक पहले आने वाली आषाढ़ पूर्णिमा हिंदू पंचांग के अनुसार अत्यंत शुभ और फलदायी तिथि मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु, गुरु, वेदव्यास और देवी सरस्वती की उपासना का विशेष महत्व है। वर्ष 2026 में आषाढ़ पूर्णिमा गुरुवार 29 जुलाई 2026 को पड़ेगी। पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई 2026 की सायं लगभग 6 बजकर 19 मिनट से आरंभ होकर 29 जुलाई 2026 की रात्रि लगभग 8 बजकर 4 मिनट पर समाप्त होगी।
| विवरण | तिथि | समय |
|---|---|---|
| पूर्णिमा तिथि प्रारंभ | 28 जुलाई 2026 | लगभग सायं 6 बजकर 19 मिनट |
| पूर्णिमा तिथि समाप्त | 29 जुलाई 2026 | लगभग रात्रि 8 बजकर 4 मिनट |
| आषाढ़ पूर्णिमा व्रत पर्व | 29 जुलाई 2026, गुरुवार | प्रातःकाल से दिन भर पूजन और व्रत के लिए शुभ |
अधिकांश श्रद्धालु पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत रखते हैं। दिन भर पूजा, कथा श्रवण और दान के बाद रात्रि में परिवार सहित प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है। स्थान विशेष के अनुसार स्थानीय पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि करना भी उचित रहता है।
आषाढ़ मास की पूर्णिमा को आषाढ़ पूर्णिमा कहा जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की आराधना, सत्यनारायण कथा, गुरु वंदना और ज्ञान की साधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु, गुरु, वेदव्यास और देवी सरस्वती की पूजा करने से पाप क्षय, बुद्धि शुद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।
इस दिन अनेक स्थानों पर सत्संग, कीर्तन, हवन और सामूहिक सत्यनारायण कथा का आयोजन होता है। विद्यार्थी, साधक और गुरु परंपरा से जुड़े लोग इसे विशेष उत्साह से मनाते हैं। अनेक परिवारों में आषाढ़ पूर्णिमा व्रत पीढ़ियों से चला आ रहा पारिवारिक संस्कार होता है।
आषाढ़ पूर्णिमा के दिन विशेष रूप से गोपद्म व्रत रखा जाता है। इस व्रत में भगवान विष्णु की उपासना और गौसेवा प्रमुख मानी जाती है। जो साधक यह व्रत पूरे नियम और श्रद्धा से करते हैं उन्हें पापों से मुक्ति और इच्छित फल की प्राप्ति होती है।
आषाढ़ पूर्णिमा 2026 पर गोपद्म व्रत की सरल और पारंपरिक विधि इस प्रकार है।
| चरण | विधि विवरण |
|---|---|
| प्रातःकाल | सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें |
| संकल्प | भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत और पूजा का संकल्प लें |
| भगवान विष्णु पूजन | प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीप, धूप, पुष्प, तिलक और नैवेद्य अर्पित करें |
| नाम जप | दिन भर विष्णु के नाम और स्तोत्र का चिंतन करते रहें |
| गौ पूजन | गाय को तिलक लगाएं, चरण स्पर्श करें और हरी घास या पहली रोटी अर्पित करें |
| दान | पूजन के बाद वस्त्र, अन्न, मिठाई या अन्य उपयोगी वस्तुएं ब्राह्मण या जरूरतमंद को दें |
गोपद्म व्रत का फल तभी पूर्ण माना जाता है जब साधक मन, वाणी और कर्म से पूर्ण श्रद्धा के साथ दिन व्यतीत करे। क्रोध, असत्य और अपमानजनक व्यवहार से बचना इस दिन विशेष रूप से आवश्यक माना जाता है।
आषाढ़ पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की कथा पढ़ने और सुनने की भी विशेष परंपरा है। माने जाते हैं कि जो व्यक्ति इस तिथि पर विधिपूर्वक सत्यनारायण व्रत और कथा करता है उसकी मनोकामनाएं क्रमशः पूरी होती हैं।
पूजा में सामान्यतः यह क्रम रखा जाता है। पहले गणेश वंदना, फिर कलश स्थापना, उसके बाद सत्यनारायण पूजा और कथा श्रवण। कथा के उपरांत आरती उतारकर प्रसाद बांटा जाता है। परिवार के सभी सदस्य, विशेषकर बच्चे, कथा ध्यान से सुनें तो उनके मन में धर्म, सत्य और सदाचार के प्रति स्वाभाविक आदर उत्पन्न होता है।
आषाढ़ पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा और वेदव्यास पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन आध्यात्मिक गुरु, आचार्य, माता पिता और जीवन मार्गदर्शकों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर स्वरूप माना गया है। गुरु के चरणों में प्रणाम, माल्यार्पण, परिक्रमा, वचनानुसार सेवा और यदि संभव हो तो गुरु दक्षिणा देना गुरु पूर्णिमा के प्रमुख अंग हैं। जिन साधकों का कोई दीक्षा गुरु नहीं, वे इस दिन वेदव्यास, भगवान विष्णु या अपने अंतःकरण के सद्गुरु का ध्यान कर कृतज्ञता व्यक्त कर सकते हैं।
हिंदू पंचांग में प्रत्येक मास का नाम पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की स्थिति से जुड़ा होता है। आषाढ़ पूर्णिमा के दिन चंद्रमा यदि पूर्वाषाढ़ या उत्तराषाढ़ नक्षत्र में स्थित हो तो यह और भी अधिक शुभ माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए नक्षत्र पूजा फलप्रद मानी गई है जिनकी जन्म नक्षत्र पूर्वाषाढ़ या उत्तराषाढ़ है।
ऐसे जातक यदि आषाढ़ पूर्णिमा 2026 पर ध्यान, दान, जप और पूजा करें तो ग्रहदोष शांति, मानसिक संतुलन और जीवन मार्ग में आ रही रुकावटों में कमी अनुभव कर सकते हैं। यह दिन नक्षत्र देवताओं का आभार मानने और उनसे रक्षण का वर मांगने के लिए भी शुभ माना गया है।
आषाढ़ पूर्णिमा के दिन देवी सरस्वती की पूजा भी अत्यंत फलदायी मानी जाती है। विशेषकर विद्यार्थी, कलाकार, लेखक, संगीत या विद्या से जुड़े लोग इस दिन श्रद्धा से मां सरस्वती की आराधना करते हैं। इस दिन को गुरुतत्त्व और ज्ञानतत्त्व दोनों से जोड़ा जाता है।
सरस्वती पूजन की एक सरल विधि इस प्रकार समझी जा सकती है।
यह पूजा विद्यार्थियों के लिए स्मरण शक्ति, एकाग्रता और विद्या सिद्धि का आधार बन सकती है। जो साधक नियमित अध्ययन या साधना में लगे हैं उनके लिए भी यह दिन उत्साह और नई प्रेरणा देने वाला होता है।
आषाढ़ पूर्णिमा की तिथि को ही वेदव्यास पूर्णिमा कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन वेदव्यास का अवतरण हुआ माना गया है। उन्होंने वेदों का विभाजन, महाभारत की रचना और अनेकों पुराणों का संकलन कर मानव समाज पर अनन्य कृपा की। इसलिए इस दिन ग्रंथों, वेदों और शास्त्रों के प्रति सम्मान व्यक्त करना भी गुरु भक्ति का ही एक रूप माना जाता है।
घरों में मौजूद धार्मिक ग्रंथों को इस दिन धूप दिखाकर, साफ कपड़े से पोंछकर और उनके सामने दीपक जलाकर साधक यह प्रार्थना कर सकते हैं कि सदैव इनसे सही ज्ञान और प्रेरणा मिलती रहे। कई स्थानों पर वेदपाठ, गीता पाठ और भागवत पाठ का आयोजन भी इसी नीयत से किया जाता है।
आषाढ़ पूर्णिमा 2026 अनेक कारणों से विशेष महत्व रखती है। एक ही दिन गोपद्म व्रत, सत्यनारायण कथा, गुरु पूर्णिमा, वेदव्यास जयंती, सरस्वती पूजन और नक्षत्र पूजा जैसी अनेक धार्मिक परंपराएं जुड़ी रहती हैं। इस दिन को अपने जीवन के गुरुओं, शास्त्रों और आराध्य देवताओं के प्रति कृतज्ञता का दिन कहा जा सकता है।
पुराने समय में विद्यार्थी आश्रमों में रहकर गुरु की सेवा करते थे। गुरु के एक संकेत पर वे बिना संदेह उसका पालन करते थे। आषाढ़ पूर्णिमा उस युग की स्मृति भी दिलाती है जब सीखने वाले का पूरा जीवन अपने गुरु के प्रति समर्पित होता था। आज के समय में भी यह दिन याद दिलाता है कि जीवन में जो भी सच्चा मार्गदर्शन देता है, वह सम्मान और आभार के योग्य है।
आषाढ़ पूर्णिमा 2026 कब है और तिथि क्या रहेगी?
आषाढ़ पूर्णिमा 2026 गुरुवार 29 जुलाई 2026 को पड़ेगी। पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई सायं से 29 जुलाई रात्रि तक रहेगी।
गोपद्म व्रत क्या है और किस देवता की पूजा की जाती है?
गोपद्म व्रत आषाढ़ पूर्णिमा के दिन रखा जाने वाला व्रत है, जिसमें विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा और गाय की सेवा की जाती है।
आषाढ़ पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा क्यों पढ़ी जाती है?
मान्यता है कि आषाढ़ पूर्णिमा पर श्रद्धा से सत्यनारायण कथा करने पर व्यक्ति की मनोकामनाएं क्रमशः पूर्ण होती हैं और घर परिवार में सुख, शांति बढ़ती है।
क्या आषाढ़ पूर्णिमा 2026 को गुरु पूर्णिमा भी माना जाएगा?
हाँ, आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही गुरु पूर्णिमा और वेदव्यास पूर्णिमा मनाई जाती है, इसलिए गुरु पूजन और वेदव्यास स्मरण का विशेष महत्व है।
आषाढ़ पूर्णिमा पर सरस्वती पूजन किन लोगों के लिए अधिक लाभकारी है?
विद्यार्थियों, कलाकारों, गायक, लेखक, शोधकर्ता और ज्ञान साधना से जुड़े सभी लोगों के लिए आषाढ़ पूर्णिमा पर सरस्वती पूजन अत्यंत शुभ और प्रेरणादायी माना गया है।
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