भाद्रपद अमावस्या 2026: तिथि, महत्व, व्रत विधि और पितृ पूजा

By पं. संजीव शर्मा

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर पितृ तर्पण, दान और आध्यात्मिक चिंतन का विशेष महत्व

भाद्रपद अमावस्या 2026: तिथि और पितृ तर्पण

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को भाद्रपद अमावस्या कहा जाता है। इसे अनेक स्थानों पर भादों अमावस्या, भादी अमावस्या या कुशग्राहणी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है और यह दिन विशेष रूप से पितरों के तर्पण, दान, स्नान और कालसर्प दोष के उपायों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

भाद्रपद अमावस्या 2026 की तिथि और अमावस्या का समय

पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में भाद्रपद अमावस्या की तिथि और अमावस्या काल इस प्रकार रहेगा।

विवरण तिथि और दिन समय / जानकारी
भाद्रपद अमावस्या 2026 शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 अमावस्या व्रत और पितृ कर्म का मुख्य दिन
अमावस्या तिथि प्रारंभ 10 सितम्बर 2026 रात्रि लगभग 10 बजकर 34 मिनट 59 सेकंड के आसपास
अमावस्या तिथि समाप्त 11 सितम्बर 2026 प्रातः लगभग 08 बजकर 58 मिनट 05 सेकंड के आसपास

इस प्रकार अमावस्या तिथि 10 सितम्बर की रात्रि से लगकर 11 सितम्बर की सुबह तक रहेगी, इसलिए 11 सितम्बर शुक्रवार के दिन सूर्योदय के साथ ही भाद्रपद अमावस्या का स्नान, दान, पितृ तर्पण और व्रत करना सर्वमान्य माना जाएगा।

भाद्रपद अमावस्या क्या है और इसे किन नामों से जाना जाता है?

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को ही भाद्रपद अमावस्या कहा जाता है।
इसे कई क्षेत्रों में

  • भादों अमावस्या,
  • भादी अमावस्या,
    के नाम से भी पुकारा जाता है।

यह तिथि विशेष रूप से पितृ कार्य, श्राद्ध, दान और जल तर्पण के लिए मान्य मानी गई है। भाद्रपद मास स्वयं भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित माना जाता है, इसलिए इस मास की अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है। परंपरानुसार इस दिन पवित्र कुशा घास एकत्र की जाती है और पूरे वर्ष के धार्मिक कार्यों में प्रयोग के लिए सुरक्षित रखी जाती है।

भाद्रपद अमावस्या पर कुशा का महत्व क्यों बढ़ जाता है?

कुशा अर्थात हरी पवित्र घास को वैदिक और पौराणिक कर्मकांड में अत्यंत शुभ माना गया है।

  • यज्ञ, श्राद्ध, तर्पण, संकल्प और अनेक पूजा विधि में कुशा की आसंदी या कुशा की अंगूठी धारण करने की परंपरा है।
  • भाद्रपद अमावस्या के दिन विशेष रूप से कुशा के तृण को काटकर शुद्ध रीति से घर लाया जाता है, इसलिए इसे कुशग्राहणी अमावस्या भी कहा जाता है।

प्राचीन धर्मग्रंथों में इसे कुशोत्पातिनी अमावस्या नाम से भी वर्णित किया गया है। मान्यता है कि यदि यह अमावस्या सोमवार के दिन आए तो इस दिन ग्रहण की गई कुशा को बारह वर्ष तक धार्मिक कार्यों में प्रयोग किया जा सकता है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि इस विशेष अमावस्या पर कुशा में अधिक पावनता और स्थायित्व माना जाता है।

भाद्रपद अमावस्या 2026 पर व्रत और पूजन विधि

भाद्रपद अमावस्या मुख्य रूप से पितृ शांति, दान और आत्मशुद्धि के लिए जानी जाती है। इस दिन किए गए स्नान, दान और जप का फल सामान्य दिनों की तुलना में अधिक बताया गया है।

प्रातः स्नान, सूर्य अर्घ्य और तिल दान

भाद्रपद अमावस्या की सुबह शीघ्र उठकर स्नान करना शुभ माना गया है।

  • यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी, सरोवर या तालाब में स्नान किया जाए।
  • स्नान के बाद भगवान सूर्य को जल से अर्घ्य दिया जाता है और तिल जल में प्रवाहित किए जाते हैं।

तिल का जल में विसर्जन पाप शमन और पितृ तृप्ति दोनों के लिए अत्यंत फलप्रद माना गया है। जो लोग नदी तक नहीं पहुँच सकते, वे घर में स्नान कर शुद्ध जल में तिल मिलाकर ही सूर्य अर्घ्य कर सकते हैं।

पितृ तर्पण और पिंडदान की विधि

भाद्रपद अमावस्या पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी गई है।

  • नदी या सरोवर के तट पर बैठकर काले तिल, जौ, कुशा और जल से पितृ तर्पण किया जाता है।
  • पिंडदान के माध्यम से पितृगण को जल, तिल, चावल और अन्य सामग्री अर्पित की जाती है।

मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए पिंडदान और तर्पण से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देकर ऋण से मुक्त कर देते हैं।

दान, कालसर्प दोष के उपाय और शनि पूजन

भाद्रपद अमावस्या के दिन दान का भी विशेष महत्त्व है।

  • भोजन, अन्न, वस्त्र, ताम्र या धातु के पात्र, तिल, तेल या आवश्यकता की वस्तुएँ जरूरतमंदों को दान की जाती हैं।
  • इस अमावस्या को कालसर्प दोष के निवारण के लिए भी उपयोगी माना गया है, इसलिए कई लोग इस दिन विशेष पूजा या उपाय कराते हैं।

धारणा यह भी है कि भाद्रपद अमावस्या को शनिदेव से भी विशेष रूप से जोड़ा जाता है। अतः इस दिन शनि पूजा, शनि मंत्र जप या पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना गया है।

पीपल पूजन और तेल का दीपक

शाम के समय पीपल वृक्ष के नीचे mustard oil का दीपक जलाकर सात बार परिक्रमा करने की परंपरा भी इस अमावस्या से जुड़ी है।

  • परिक्रमा करते समय पितरों को स्मरण करना और उनके लिए शांति की प्रार्थना करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।
  • इससे पितृ दोष शांत होता है और शनि संबंधी कष्टों में भी धीरे धीरे कमी आ सकती है, ऐसा जनश्रुति में उल्लेख मिलता है।

देवताओं, पितरों और देव वृक्षों तीनों के प्रति एक साथ श्रद्धा प्रकट करने का यह सरल किन्तु प्रभावी उपाय माना जाता है।

भाद्रपद अमावस्या का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

भाद्रपद अमावस्या को भक्ति, कर्म और ज्योतिषीय दृष्टि से कई कारणों से महत्वपूर्ण देखा जाता है।

  • भाद्रपद मास भगवान कृष्ण को समर्पित है, इसलिए इस मास की अमावस्या पर किया गया पितृ तर्पण और दान विशेष फलदायी माना जाता है।
  • जो लोग जन्मकुंडली में कालसर्प दोष, पितृ दोष या शनि की कठोर दृष्टि से पीड़ित हैं, वे इस तिथि पर उपाय करके राहत की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
  • इस दिन का व्रत आत्मसमीक्षा, नकारात्मक भावनाओं के त्याग और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का अवसर भी देता है।

ज्योतिषीय दृष्टि से अमावस्या वह समय है जब चंद्र का प्रकाश न्यूनतम होता है और मन भीतर की ओर अधिक मुड़ता है। यदि इस समय का उपयोग जप, ध्यान और दान के लिए किया जाए तो मन के संस्कारों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

पिथोरी अमावस्या क्या है और माता दुर्गा की उपासना कैसे होती है?

भाद्रपद अमावस्या को ही कई स्थानों पर पिथोरी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। यह विशेष रूप से मातृ शक्ति और बालकों के स्वास्थ्य से जुड़ी मानी जाती है।

पुरानी मान्यताओं के अनुसार इस दिन माता पार्वती ने इंद्राणी को पिथोरी अमावस्या व्रत का महत्व बताया था।

  • इसी कारण विवाहित स्त्रियाँ इस तिथि पर माता दुर्गा या गौरी की पूजा करती हैं।
  • वे संतान प्राप्ति, संतान की दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य के लिए व्रत रखकर मातृ शक्ति से आशीर्वाद माँगती हैं।

पिथोरी शब्द को कई विद्वान पिठार या पिठारिया शब्द से जोड़ते हैं, जिसका संबंध बच्चों और माता के पोषण से है। इस दृष्टि से यह अमावस्या केवल पितृ तर्पण ही नहीं बल्कि मातृ संरक्षण और बालकों के कल्याण का भी पर्व बन जाती है।

भाद्रपद अमावस्या 2026 से मिलने वाला मार्गदर्शन

भाद्रपद अमावस्या 2026 उन सभी के लिए एक अवसर है जो अपने पितरों, देवताओं और प्रकृति तीनों के प्रति धन्यवाद की भावना को प्रकट करना चाहते हैं।

  • यह तिथि याद दिलाती है कि वर्तमान जीवन पर पूर्वजों का योगदान और आशीर्वाद कितना गहरा होता है।
  • कुशा, पीपल, तिल, जल और दान जैसे साधारण साधनों के माध्यम से भी बड़ी आध्यात्मिक साधना की जा सकती है।

यदि इस दिन थोड़ा समय निकालकर पितृ तर्पण, दान और शांत भाव से प्रार्थना की जाए और साथ ही अपने व्यवहार में विनम्रता, कृतज्ञता और परस्पर सहयोग को थोड़ा और स्थान दिया जाए, तो भाद्रपद अमावस्या 2026 सच अर्थों में फलदायी सिद्ध हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाद्रपद अमावस्या 2026 कब है और अमावस्या तिथि का समय क्या रहेगा?
भाद्रपद अमावस्या 2026 शुक्रवार 11 सितम्बर 2026 को पड़ेगी। अमावस्या तिथि 10 सितम्बर की रात लगभग 10 बजकर 34 मिनट 59 सेकंड पर शुरू होकर 11 सितम्बर की सुबह लगभग 08 बजकर 58 मिनट 05 सेकंड पर समाप्त होगी, इसलिए 11 सितम्बर का दिन स्नान, दान और पितृ तर्पण के लिए मुख्य माना जाएगा।

भाद्रपद अमावस्या पर कौन कौन से प्रमुख धार्मिक कार्य किए जाते हैं?
इस दिन प्रातः पवित्र नदी या स्वच्छ जल में स्नान, सूर्य को अर्घ्य, तिलदान, पितृ तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं। शाम को पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीप जलाकर उसकी सात परिक्रमा की जाती है और शनि तथा पितरों का स्मरण किया जाता है।

कुशग्राहणी या कुशोत्पातिनी अमावस्या कहने का कारण क्या है?
भाद्रपद अमावस्या के दिन विशेष रूप से कुशा घास काटकर धार्मिक उपयोग के लिए संचित की जाती है, इसलिए इसे कुशग्राहणी या कुशोत्पातिनी अमावस्या कहा जाता है। मान्यता है कि यदि यह अमावस्या सोमवार को पड़े तो इस दिन ग्रहण की गई कुशा को बारह वर्ष तक धार्मिक कार्यों में प्रयोग किया जा सकता है।

पिथोरी अमावस्या किसे कहते हैं और इस दिन क्या व्रत रखा जाता है?
भाद्रपद अमावस्या को ही पिथोरी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन माता दुर्गा या गौरी की पूजा कर विवाहित महिलाएँ संतान प्राप्ति, बच्चों की दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती हैं और माता पार्वती द्वारा इंद्राणी को बताए गए पिथोरी व्रत की परंपरा को आगे बढ़ाती हैं।

भाद्रपद अमावस्या पर कालसर्प दोष या पितृ दोष के लिए क्या किया जा सकता है?
जो जातक कालसर्प दोष या पितृ दोष से पीड़ित हों, वे इस दिन पितृ तर्पण, पिंडदान, तिल जल अर्पण और शनि या पितृ संबंधी विशेष पूजा करा सकते हैं। पीपल के नीचे दीपक जलाकर सात परिक्रमा करना भी पितृ शांति और शनि कृपा के लिए शुभ माना गया है।

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