By पं. नीलेश शर्मा
जानें 25 जनवरी 2026 को ब्रह्म सवर्णि मन्वादी का महत्व, तिथि और आध्यात्मिक संदेश

जो साधक ब्रह्म सावर्णि मन्वादी 2026 के बारे में जानना चाहते हैं, उनके लिए यह दिन केवल पंचांग की कोई साधारण तिथि नहीं बल्कि धर्म, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति के लिए एक गहरा संकेत लेकर आता है। मन्वंतर, मनु और मन्वादी जैसे शब्द पहली नज़र में जटिल लग सकते हैं, पर इनका अर्थ समझ में आ जाए तो महसूस होता है कि यह सब मानव जीवन के भीतर चलने वाले बदलावों और नवीकरण का सूक्ष्म रूप है।
वर्ष 2026 में ब्रह्म सावर्णि मन्वादी के साथ साथ अनेक अन्य मन्वादी तिथियाँ भी पड़ रही हैं, जिनके माध्यम से साधक पूरे वर्ष बार बार अपने जीवन में आध्यात्मिक पुनरारंभ, संकल्प और शुद्धि का अनुभव कर सकते हैं। विशेष रूप से ब्रह्म सावर्णि मन्वादी 25 जनवरी 2026, रविवार को मनाया जाएगा, जब माघ शुक्ल सप्तमी की तिथि पर ब्रह्म सावर्णि मनु के युगारंभ का स्मरण किया जाएगा।
मन्वादी तिथियों को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि प्रत्येक मनु का शासनकाल मन्वंतर कहलाता है और उस शासनकाल के प्रारंभ को मन्वादी कहा जाता है। वर्ष 2026 में अनेक मन्वादी तिथियाँ पड़ रही हैं, जिनमें प्रत्येक की अपनी आध्यात्मिक विशेषता है।
| तिथि (2026) | वार | मन्वादी नाम | तिथि और मास |
|---|---|---|---|
| 25 जनवरी | रविवार | ब्रह्म सावर्णि मन्वादी | माघ, शुक्ल सप्तमी |
| 3 मार्च | मंगलवार | सावर्णि मन्वादी | फाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा |
| 21 मार्च | शनिवार | स्वायंभुव मन्वादी | चैत्र, शुक्ल तृतीया |
| 1 अप्रैल | बुधवार | स्वारोचिष मन्वादी | चैत्र, शुक्ल पूर्णिमा |
| 29 जून | सोमवार | वैवस्वत मन्वादी | ज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा |
| 24 जुलाई | शुक्रवार | रैवत मन्वादी | आषाढ़, शुक्ल दशमी |
| 29 जुलाई | बुधवार | चाक्षुष मन्वादी | आषाढ़, शुक्ल पूर्णिमा |
| 4 सितम्बर | शुक्रवार | इन्द्र सावर्णि मन्वादी | भाद्रपद, कृष्ण अष्टमी |
| 10 सितम्बर | गुरुवार | दैव सावर्णि मन्वादी | भाद्रपद, कृष्ण अमावस्या |
| 13 सितम्बर | रविवार | रुद्र सावर्णि मन्वादी | भाद्रपद, शुक्ल तृतीया |
| 20 अक्टूबर | मंगलवार | दक्ष सावर्णि मन्वादी | आश्विन, शुक्ल नवमी |
| 21 नवम्बर | शनिवार | तमस मन्वादी | कार्तिक, शुक्ल द्वादशी |
| 24 नवम्बर | मंगलवार | उत्तम मन्वादी | कार्तिक, शुक्ल पूर्णिमा |
इन सभी तिथियों में ब्रह्म सावर्णि मन्वादी को विशेष रूप से ज्ञान, तप, आध्यात्मिक संरक्षण और भीतर की स्थिरता के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
शास्त्रीय परंपरा में मन्वादी शब्द दो भागों से बना माना जाता है।
इसी से मन्वादी का अर्थ हुआ किसी विशेष मनु के शासनकाल के आरंभ की तिथि। समय को समझने के लिए यहाँ एक बड़ा चित्र सामने आता है जिसमें एक कल्प या ब्रह्मा के एक दिन को चौदह मन्वंतरों में बाँटा गया है और हर मन्वंतर के संचालक एक विशिष्ट मनु होते हैं।
फलक पर कुल चौदह मनु वर्णित हैं। उसी क्रम में ब्रह्म सावर्णि को मनुओं की श्रृंखला में बारहवें मनु के रूप में माना गया है। ब्रह्म सावर्णि मन्वादी वह दिन है जो ब्रह्म सावर्णि मनु के शासन का सूक्ष्म स्मरण कराता है और साधक को यह भाव देता है कि जीवन में भी किसी समय एक नया अध्याय शुरू करना आवश्यक हो जाता है।
ब्रह्म सावर्णि मनु से संबंधित कुछ प्रमुख गुण इस प्रकार समझे जाते हैं।
यही कारण है कि ब्रह्म सावर्णि मन्वादी 2026 को विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ माना जा सकता है जो अपने जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, अध्ययन, साधना और आंतरिक स्पष्टता के लिए कोई नया संकल्प लेना चाहें।
वर्ष 2026 में ब्रह्म सावर्णि मन्वादी की तिथि इस प्रकार है।
माघ शुक्ल पक्ष को वैसे भी सूर्य की तेजस्विता, तपस्या और स्नान दान के लिए शुभ माना जाता है। सप्तमी तिथि सूर्य से जुड़े आध्यात्मिक बल की प्रतीक होती है। ऐसे समय में ब्रह्म सावर्णि मनु के मन्वादी का स्मरण, साधना में दृढ़ता और स्पष्ट दृष्टि को प्रोत्साहित करने वाला माना जा सकता है।
मन्वादी तिथियों को एक प्रकार का ऊर्जात्मक संक्रमण काल समझा जाता है, जहाँ एक मनु के शासन से दूसरे मनु की ऊर्जा का संकेत मिलता है। यह परिवर्तन कई स्तरों पर नया आरंभ, पुराने बोझ का हल्का होना और नए संकल्प की प्रेरणा के रूप में महसूस किया जा सकता है।
मन्वादी दिवसों के कुछ मुख्य आध्यात्मिक लाभ इस प्रकार समझे जा सकते हैं।
यद्यपि मन्वादी किसी भी साधक के लिए खुला अवसर है, फिर भी ब्रह्म सावर्णि मन्वादी 2026 कुछ विशेष वर्गों के लिए और भी अधिक फलदायक माना जा सकता है।
इन सभी के लिए ब्रह्म सावर्णि मन्वादी का दिन यह संकेत दे सकता है कि अब समय आ गया है कि जीवन को थोड़ी अधिक सजगता और धर्म परक दृष्टि के साथ आगे बढ़ाया जाए।
ब्रह्म सावर्णि मन्वादी 2026 पर पूजा विधि सरल रहकर भी प्रभावशाली हो सकती है। मुख्य बात भाव और निरंतरता की होती है, न कि बाहरी भारी व्यवस्था की।
| चरण | क्या करें |
|---|---|
| चरण 1 | प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें |
| चरण 2 | पूजा स्थान साफ कर संकल्प करें |
| चरण 3 | भगवान विष्णु या मनु के प्रतीक के रूप में पूजा करें |
| चरण 4 | दीपक, धूप, पुष्प, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें |
| चरण 5 | मंत्र जप, ध्यान और मन्वादी कथा का संक्षिप्त पाठ करें |
| चरण 6 | दिन में किसी रूप में दान और सेवा का आचरण करें |
शांत बैठकर कुछ क्षण श्वास पर ध्यान देने के बाद मन ही मन यह भाव रखा जा सकता है कि
आज के दिन मन, वाणी और कर्म को यथासंभव धर्म, संयम और सत्य के अनुरूप रखने का प्रयास रहेगा।
यदि इच्छा हो तो कोई छोटा संकल्प ले सकते हैं, जैसे प्रतिदिन कुछ समय जप या पाठ के लिए निकालना, या व्यवहार में किसी एक नकारात्मक आदत को धीरे धीरे छोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाना।
मन्वादी पर पूजा करते समय साधक अपनी सुविधा के अनुसार सरल मंत्रों का उपयोग कर सकता है।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
Om Namo Bhagavate Vasudevaya
अर्थ, भगवान वासुदेव को नमस्कार, जो समस्त जगत के आधार हैं।
“ॐ नमः मनवे नमः”
Om Namah Manave Namah
अर्थ, मनु को नमस्कार, जो धर्म, ज्ञान और सृष्टि के मार्गदर्शक हैं।
इन मंत्रों का 108 बार या उपलब्ध समय के अनुसार कम अधिक जप कर मन को एकाग्र किया जा सकता है। जप के दौरान ब्रह्म सावर्णि या संबंधित मनु के गुणों पर शांत मन से चिंतन करना भी एक प्रकार की ध्यान साधना बन जाता है।
मन्वादी के दिन व्रत रखना अनिवार्य नहीं, पर उचित संयम लाभकारी माना जा सकता है।
सायंकाल पूजा या जप के बाद सात्विक भोजन, प्रसाद और कृतज्ञता के भाव के साथ दिन को पूरा करना मन पर एक स्थायी शांति छोड़ सकता है।
मन्वादी कथा का मुख्य भाव यह होता है कि
जब संसार में धर्म, संतुलन और ज्ञान का क्षय होने लगता है तब एक नए मनु के माध्यम से धर्म पुनः स्थापित होता है।
हर मनु का उदय यह संदेश देता है कि सृष्टि का क्रम केवल बाहरी स्तर पर नहीं बल्कि भीतर भी चलता है। जब साधक अपने भीतर अनुशासन, न्याय और जागरूकता को स्थान देता है तब उसके जीवन में भी एक नया मन्वंतर प्रारंभ हो जाता है।
नीचे 2026 की प्रमुख मन्वादी तिथियों से जुड़े भावों का संक्षिप्त संकेत दिया जा सकता है।
इन संकेतों के आधार पर साधक वर्ष भर में किसी एक या अधिक मन्वादी तिथियों को चुनकर विशेष साधना कर सकता है।
ब्रह्म सावर्णि मन्वादी 2026 साधक को यह स्मरण कराता है कि जीवन में जब भी दिशा अस्पष्ट लगे, जब मन बार बार पुराने कर्मों की उलझनों में फँसा महसूस हो तब किसी एक दिन को आंतरिक पुनरारंभ के लिए चुन लेना बहुत सहायक हो सकता है।
यह पुनरारंभ बाहरी शोर से दूर, शांत मन से लिया जाने वाला एक संकल्प हो सकता है। जैसे
इसी भाव में जीया गया ब्रह्म सावर्णि मन्वादी, केवल एक तिथि नहीं रहेगा बल्कि पूरे वर्ष के लिए दिशा और प्रेरणा दे सकता है।
ब्रह्म सावर्णि मन्वादी 2026 कब मनाया जाएगा और यह किस तिथि पर पड़ता है
ब्रह्म सावर्णि मन्वादी 2026 25 जनवरी 2026, रविवार को मनाया जाएगा। यह दिन माघ मास की शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि के साथ जुड़ा है और इसी तिथि पर ब्रह्म सावर्णि मनु के मन्वादी का स्मरण किया जाता है।
मन्वादी का सामान्य अर्थ क्या है और यह शब्द कैसे समझा जाए
मन्वादी में मनु का अर्थ उस दिव्य शासक से है जो एक मन्वंतर का अधिपति होता है और आदि का अर्थ प्रारंभ से है। इस प्रकार मन्वादी का अर्थ किसी मनु के शासन काल के आरंभ से जुड़ी तिथि है, जो आध्यात्मिक रूप से नए चक्र की शुरुआत का संकेत देती है।
ब्रह्म सावर्णि मन्वादी पर कौन से लोग विशेष रूप से साधना कर सकते हैं
जो साधक ज्ञान, अध्ययन, शोध, ध्यान और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हों, या जो अपने जीवन में नई दिशा, स्थिरता और स्पष्ट निर्णय लाना चाहें, उनके लिए ब्रह्म सावर्णि मन्वादी बहुत उपयोगी माना जा सकता है। विद्यार्थी, साधक, गृहस्थ और व्यवसायी सभी अपने अपने स्तर पर इस दिन संकल्प ले सकते हैं।
मन्वादी पर कौन सी सरल पूजा विधि अपनाना उचित है
प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थान पर दीपक, धूप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ नमः मनवे नमः” मंत्र का जप करें, संक्षिप्त मन्वादी कथा या मनु के गुणों का स्मरण करें और दिन में किसी जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र या अन्य सामग्री का दान कर दिन को शांत और सात्विक ढंग से बिताएँ।
यदि पूरे वर्ष में केवल एक दो मन्वादी ही मनाई जाएँ तो क्या लाभ मिल सकता है
मन्वादी का लाभ मात्रा से अधिक भाव और सजगता पर निर्भर करता है। यदि कोई साधक पूरे वर्ष में केवल एक या दो मन्वादी तिथियाँ भी पूरे मन से साधना, जप और दान के साथ मनाए, तो यह दिन उसके लिए कर्म शुद्धि, मानसिक स्पष्टता, नए संकल्प और आध्यात्मिक प्रगति की दिशा में लंबे समय तक सहायक प्रभाव छोड़ सकते हैं।
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