By पं. संजीव शर्मा
सूर्य भगवान और छठी मईया की भक्ति में चार दिवसीय व्रत का महत्व

चैती छठ पूजा 2026 उन लोगों के लिए विशेष अवसर लेकर आ रही है जो सूर्य देव और छठी माई की आराधना को वर्ष में दो बार पूरे नियम और श्रद्धा के साथ निभाते हैं। कार्तिक छठ की तरह ही चैत्र मास में आने वाली यह चैती छठ भी चार दिनों तक चलने वाला लंबा और अनुशासित व्रत है जिसमें नहाय खाय से लेकर उगते सूर्य को अंतिम अर्घ्य देने तक हर कदम शारीरिक संयम, मानसिक एकाग्रता और गहरी भक्ति की माँग करता है। बहुत से लोगों के मन में इस बार यह प्रश्न है कि 2026 में चैती छठ कब है और किस दिन कौन सा विधान होगा, इसलिए पहले पूरे शेड्यूल को साफ़ समझ लेना उपयोगी रहता है।
चैती छठ हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर मनाई जाती है, लेकिन व्रत की अवधि कुल चार दिनों की मानी जाती है। 2026 में चैती छठ पूजा का पूरा क्रम इस प्रकार रहेगा।
| दिन | तिथि | वार | मुख्य विधान |
|---|---|---|---|
| दिन 1 | 22 मार्च 2026 | रविवार | नहाय खाय |
| दिन 2 | 23 मार्च 2026 | सोमवार | खरना पूजा |
| दिन 3 | 24 मार्च 2026 | मंगलवार | डूबते सूर्य का अर्घ्य संध्या अर्घ्य |
| दिन 4 | 25 मार्च 2026 | बुधवार | उगते सूर्य का अर्घ्य उषा अर्घ्य और व्रत समापन |
यह चारों दिन मिलकर चैती छठ 2026 का पूरा पर्व बनाते हैं जिसमें पहले दिन शुद्धि, दूसरे दिन संकल्प और निर्जला की शुरुआत, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन प्रातःकालीन अर्घ्य के साथ व्रत का समापन होता है।
छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण भाग डूबते और उगते सूर्य को दिया जाने वाला अर्घ्य है। इसलिए सूर्योदय और सूर्यास्त का सही समय जानना बहुत आवश्यक माना जाता है।
| अर्घ्य का प्रकार | तिथि | समय |
|---|---|---|
| संध्या अर्घ्य सूर्यास्त समय | 24 मार्च 2026 | शाम 06 बजकर 40 मिनट |
| उषा अर्घ्य सूर्योदय समय | 25 मार्च 2026 | प्रातः 05 बजकर 47 मिनट |
तीसरे दिन 24 मार्च को संध्या के समय जब सूर्य क्षितिज की ओर ढलने लगता है तब व्रती सामूहिक रूप से जल में खड़े होकर संध्या अर्घ्य अर्पित करते हैं। चौथे दिन 25 मार्च की भोर में लगभग 05 बजकर 47 मिनट पर उगते सूर्य को अंतिम उषा अर्घ्य दिया जाता है, जिसके बाद व्रत का पारण होता है।
चैती छठ को छठ पूजा का वह रूप माना जाता है जो चैत्र मास में आता है और जिसे विशेष रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया दोनों को एक साथ समर्पित होता है।
धार्मिक मान्यता है कि छठ व्रत करने से संतान की आयु में वृद्धि, रोगों से रक्षा और परिवार पर सूर्य देव की ऊर्जा का विशेष संरक्षण बना रहता है। छठी मैया को संतान सुख, परिवार की समृद्धि और कठिन रोगों से मुक्ति देने वाली देवी माना जाता है। व्रती स्त्रियाँ और कई स्थानों पर पुरुष भी इस व्रत को पूरे परिवार की भलाई और सुख समृद्धि के लिए रखते हैं।
चैती छठ 2026 का हर दिन अपना अलग आध्यात्मिक अर्थ और अनुशासन लिए होता है।
पहला दिन नहाय खाय 22 मार्च 2026 रविवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन व्रती पवित्र स्नान करती है, घर की अच्छी तरह सफाई की जाती है और शुद्ध सात्त्विक भोजन बनाया जाता है। व्रती स्वयं केवल उसी शुद्ध भोजन को ग्रहण करती है जिसे प्रसाद मानकर बनाया गया हो। इस प्रकार शरीर और घर दोनों को अगले कठोर व्रत के लिए तैयार किया जाता है।
दूसरा दिन खरना या लोहंडा 23 मार्च 2026 सोमवार को होगा। इस दिन व्रती दिन भर बिना अन्न और बिना जल के रहती है। शाम को सूर्यास्त के बाद गंगा जल या शुद्ध जल के पास बैठकर गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाया जाता है। यह प्रसाद छठी मैया को अर्पित किया जाता है। इसके बाद व्रती यही प्रसाद ग्रहण करती है और उसी के बाद आगे के दो दिनों के लिए निर्जला व्रत की शुरुआत मानी जाती है।
तीसरा दिन 24 मार्च 2026 मंगलवार का होगा जब डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा। व्रती पूरे दिन निर्जला रहती है और संध्या के समय नदी, तालाब या कृत्रिम घाट पर जल में खड़े होकर सूर्य देव और छठी मैया को पहला अर्घ्य अर्पित करती है। चारों ओर टोकरी में रखे सुपली, नारियल, फल, ठेकुआ और अन्य प्रसाद के साथ भजनों की ध्वनि एक विशेष लोक आध्यात्मिक वातावरण बनाती है।
चौथा दिन 25 मार्च 2026 बुधवार को उगते सूर्य को उषा अर्घ्य देने के लिए माना जाएगा। भोर से पहले ही व्रती और परिवारजन घाट पर पहुँच जाते हैं। सूर्योदय के समय अंतिम अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद व्रती घर लौटकर प्रसाद बाँटती है और फिर व्रत का पारण करती है।
चैती छठ केवल व्रत की कठोरता या परंपरा का प्रतीक नहीं है बल्कि यह मनुष्य के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक तीनों स्तरों को छूने वाला पर्व माना जाता है।
सूर्य देव को जीवन, ऊर्जा और स्वास्थ्य का आधार माना गया है। सुबह शाम जल में खड़े होकर सूर्य की किरणों को ग्रहण करने से शरीर पर भी एक विशेष प्रकार का प्राणिक प्रभाव पड़ता है और मन में जागरूकता तथा स्थिरता का विकास होता है।
छठी मैया के बारे में विश्वास है कि वह संतान की रक्षा, परिवार की उन्नति और कठिन रोगों से छुटकारे के लिए विशेष कृपा करती हैं। व्रती यह व्रत केवल अपने लिए नहीं बल्कि पूरे परिवार, खासकर बच्चों और आने वाली पीढ़ियों की भलाई के लिए रखती है। इस प्रकार चैती छठ 2026 में भी संतान की लंबी आयु, परिवार की समृद्धि और रोगों से मुक्ति की प्रार्थना पूरे भाव से की जाएगी।
छठ व्रत की सबसे बड़ी विशेषता इसका अनुशासन और सात्त्विकता है। लंबे समय तक जल और अन्न त्याग का अभ्यास एक प्रकार का तप है, जो व्रती के मन में धैर्य और सहनशीलता को मजबूत करता है।
चार दिनों तक शुद्धता पर इतना ध्यान रखने से घर का वातावरण भी अलग प्रकार की पवित्रता से भर जाता है। नहाय खाय से लेकर उषा अर्घ्य तक घर में बनने वाला हर व्यंजन प्रसाद भाव से तैयार किया जाता है। घरों में भजन, लोकगीत और पूजा के स्वर सुनाई देते हैं, जिससे बच्चों के मन में भी श्रद्धा और परंपरा के प्रति सम्मान जन्म लेता है।
चैती छठ 2026 में जो परिवार इस पूरे व्रत को सामूहिक भाव से निभाएँगे, उनके लिए यह केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं रहेगा बल्कि परस्पर सहयोग, त्याग और सामूहिक प्रार्थना का अनुभव भी बन सकता है।
चैती छठ पूजा 2026 की शुरुआत और समापन किस तिथि को होगा चैती छठ पूजा 2026 की शुरुआत 22 मार्च 2026 रविवार को नहाय खाय से होगी और 25 मार्च 2026 बुधवार को उषा अर्घ्य तथा व्रत पारण के साथ इसका समापन होगा।
चैती छठ 2026 में नहाय खाय, खरना और दोनों अर्घ्य किस दिन पड़ेंगे 22 मार्च 2026 रविवार को नहाय खाय, 23 मार्च सोमवार को खरना पूजा, 24 मार्च मंगलवार को डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य और 25 मार्च बुधवार को उगते सूर्य को उषा अर्घ्य दिया जाएगा।
चैती छठ पूजा 2026 में संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य का समय क्या रहेगा संध्या अर्घ्य के लिए सूर्यास्त का समय 24 मार्च 2026 को लगभग शाम 06 बजकर 40 मिनट रहेगा और उषा अर्घ्य के लिए सूर्योदय का समय 25 मार्च 2026 को प्रातः लगभग 05 बजकर 47 मिनट रहेगा।
चैती छठ मुख्य रूप से किन राज्यों और क्षेत्रों में मनाई जाती है चैती छठ को मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में बहुत श्रद्धा और अनुशासन के साथ मनाया जाता है, हालांकि अब प्रवासी परिवारों के कारण अन्य शहरों में भी इसकी छटा देखी जा सकती है।
चैती छठ पूजा 2026 का प्रमुख आध्यात्मिक संदेश क्या माना जा सकता है चैती छठ पूजा 2026 यह याद दिलाती है कि सूर्य देव और छठी मैया की कृपा पाने के लिए केवल याचना नहीं बल्कि अनुशासन, संयम और पूरे परिवार की भलाई के लिए किया गया समर्पित प्रयास भी आवश्यक है। जो व्रती चारों दिन शुद्धता, धैर्य और भक्ति के साथ यह व्रत करती है, उसके लिए यह पर्व संतान की दीर्घायु, परिवार की समृद्धि और मानसिक स्थिरता का गहरा आधार बन सकता है।
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