By पं. सुव्रत शर्मा
शिव पार्वती के पावन मिलन का पर्व

हरियाली तीज उत्तर भारतीय राज्यों, विशेष रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में महिलाओं द्वारा मनाई जाती है। द्रिक पंचांग के अनुसार, सावन और भाद्रपद के महीनों के दौरान महिलाओं द्वारा मनाई जाने वाली तीन प्रसिद्ध तीज हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज हैं। हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज विशेष तीज हैं क्योंकि ये श्रावण और भाद्रपद के महीनों में आती हैं। श्रावण माह और भाद्रपद माह वर्तमान में वर्षा ऋतु या मानसून अवधि के साथ मेल खाते हैं और इन तीनों तीज का समय इन्हें महिलाओं के लिए और अधिक विशेष बनाता है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| तिथि | 15 अगस्त 2026 |
| दिन | शनिवार |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष त्रितीया |
| माह | श्रावण |
| विशेषता | विवाहित महिलाओं के लिए शुभ |
| अन्य नाम | छोटी तीज, श्रावण तीज, सिंधारा तीज |
हरियाली तीज श्रावण के पवित्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रितीया को मनाई जाती है। यह पर्व विवाहित महिलाओं के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है, जो अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि, सफलता और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए एक दिन का व्रत रखती हैं और प्रार्थना करती हैं।
हरियाली तीज 2026 शनिवार, 15 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन के शुभ मुहूर्त निम्नलिखित हैं।
| मुहूर्त | समय |
|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 4:50 से 5:35 |
| अभिजित मुहूर्त | दोपहर 12:17 से 1:08 |
| विजया मुहूर्त | दोपहर 2:51 से 3:42 |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 7:06 से 7:29 |
| अमृत काल | रात 8:18 से 9:53 |
इन मुहूर्तों में पूजा करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। ब्रह्म मुहूर्त आध्यात्मिक साधना के लिए श्रेष्ठ है, जबकि अभिजित और विजया मुहूर्त पूजा और व्रत के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं।
हरियाली तीज श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की त्रितीया को मनाई जाती है। यह पर्व विवाहित महिलाओं के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि, सफलता और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं।
| प्रतीक | अर्थ |
|---|---|
| हरियाली | प्रकृति की हरियाली |
| व्रत | पति की लंबी आयु |
| पूजा | शिव पार्वती कृपा |
| मेहंदी | सुहाग और सौभाग्य |
| झूला | आनंद और उत्सव |
इस दिन भक्त भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा भी करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने की आशा में दान पुण्य के कार्य करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की त्रितीया को ही भगवान शिव ने देवी पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए वर्षों की कठोर तपस्या की थी। इस प्रकार हरियाली तीज प्रेम, भक्ति, विश्वास और वैवाहिक सुख का प्रतीक है।
हरियाली तीज का पौराणिक महत्व अत्यंत गहरा है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने देवी पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।
| कथा का तत्व | विवरण |
|---|---|
| देवी पार्वती | कठोर तपस्या |
| भगवान शिव | प्रसन्न होकर वरदान |
| तिथि | श्रावण शुक्ल त्रितीया |
| प्रतीक | प्रेम और समर्पण |
| फल | वैवाहिक सुख |
देवी पार्वती ने हिमालय की पुत्री होने के बावजूद भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए घोर तप किया। वे वन में जाकर केवल बेलपत्र और फलों पर निर्वाह करती थीं। उनकी इस तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि वे उनकी पत्नी बनेंगी। यही कारण है कि हरियाली तीज पर विवाहित महिलाएं व्रत रखकर अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।
द्रिक पंचांग के अनुसार, हरियाली तीज के दौरान विवाहित महिलाएं अपने माता पिता के घर जाती हैं, नए कपड़े पहनती हैं, विशेष रूप से हरी साड़ी और चूड़ियां, झूले सजाती हैं और तीज के गीत गाते हुए जोड़े में झूला झूलती हैं। सिंधारा उपहार की एक टोकरी है जो विवाहित लड़की के माता पिता द्वारा बेटी और उसके ससुराल भेजी जाती है। सिंधारा में घरेलू मिठाई, घेवर, मेंहदी, चूड़ियां आदि होती हैं। इस तीज के दौरान बेटी और उसके ससुराल को सिंधारा उपहार में देने की परंपरा के कारण, हरियाली तीज को सिंधारा तीज के नाम से भी जाना जाता है।
| सिंधारा सामग्री | विवरण |
|---|---|
| मिठाई | घरेलू |
| घेवर | पारंपरिक |
| मेंहदी | सुहाग प्रतीक |
| चूड़ियां | सौभाग्य |
| अन्य उपहार | पारिवारिक प्रेम |
यह परंपरा पारिवारिक प्रेम और संबंधों को मजबूत करती है। माता पिता अपनी बेटी के प्रति अपना प्रेम व्यक्त करते हैं और ससुराल वाले भी इस उपहार को स्वीकार करके बेटी को अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं।
हरियाली तीज की पूजा के लिए निम्नलिखित विधि अपनाई जा सकती है।
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान शिव के साथ पूरी शिव परिवार की पूजा करें।
गंगाजल से शिवलिंग का जलाभिषेक करें।
भगवान शिव और शिव परिवार को जल अर्पित करें।
भगवान शिव और देवी पार्वती को नए वस्त्र अर्पित करें।
देवी पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के फूल, चंदन, अक्षत और फल अर्पित करें।
व्रत कथा का पाठ करें।
भगवान शिव की आरती करें और परंपरा के अनुसार विवाहित महिलाओं के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
| पूजा सामग्री | अर्थ |
|---|---|
| गंगाजल | पवित्रता |
| नए वस्त्र | सम्मान |
| सोलह श्रृंगार | सौभाग्य |
| बेलपत्र | शिव प्रिय |
| फल | प्रकृति प्रसाद |
| आरती | भक्ति भाव |
व्रत कथा का पाठ हरियाली तीज पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है।
हरियाली तीज के सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक विवाहित महिलाओं के हाथों में मेहंदी लगाना है। दूसरा है सजे हुए झूलों का आनंद लेना, जहां महिलाएं पारंपरिक लोक गीत गाने के लिए एकत्रित होती हैं।
| परंपरा | महत्व |
|---|---|
| मेहंदी | सुहाग और सौभाग्य |
| झूला | आनंद और उत्सव |
| लोक गीत | सांस्कृतिक विरासत |
| हरी साड़ी | प्रकृति और हरियाली |
मेहंदी लगाना सुहाग का प्रतीक है। झूला झूलना और गीत गाना महिलाओं के बीच आनंद और उत्सव का भाव जागृत करता है।
हरियाली तीज को छोटी तीज और श्रावण तीज के नाम से भी जाना जाता है। कजरी तीज, जो हरियाली तीज के पंद्रह दिन बाद आती है, को बड़ी तीज के नाम से जाना जाता है।
| तीज | तिथि | नाम |
|---|---|---|
| हरियाली तीज | श्रावण शुक्ल त्रितीया | छोटी तीज |
| कजरी तीज | भाद्रपद कृष्ण त्रितीया | बड़ी तीज |
| हरतालिका तीज | भाद्रपद शुक्ल त्रितीया | हरतालिका |
इन तीनों तीज का अपना विशेष महत्व है और महिलाएं इन सभी को श्रद्धा और भक्ति से मनाती हैं।
हरियाली तीज 2026 कब है?
हरियाली तीज 2026 शनिवार, 15 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी।
हरियाली तीज का क्या महत्व है?
यह पर्व विवाहित महिलाओं के लिए शुभ है और पति की लंबी आयु तथा सुखी वैवाहिक जीवन के लिए मनाया जाता है।
सिंधारा क्या है?
सिंधारा उपहार की टोकरी है जो माता पिता अपनी बेटी और ससुराल को हरियाली तीज पर भेजते हैं।
हरियाली तीज पूजा की विधि क्या है?
शिव परिवार की पूजा, जलाभिषेक, वस्त्र और सोलह श्रृंगार अर्पित करें, व्रत कथा पढ़ें और आरती करें।
कजरी तीज और हरियाली तीज में क्या अंतर है?
हरियाली तीज श्रावण शुक्ल त्रितीया को और कजरी तीज भाद्रपद कृष्ण त्रितीया को मनाई जाती है।
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