By पं. अभिषेक शर्मा
भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीया पर विवाहित महिलाओं द्वारा निर्जला व्रत और शिव-परवती कथा का महत्व जानें

हरतालिका तीज 2026 सोमवार, 14 सितंबर को उत्तर भारत में असीम उत्साह के साथ मनाया जाएगा। प्रातःकाल हरतालिका पूजा मुहूर्त 06:45 से 07:00 बजे तक रहेगा। विवाहित महिलाएं कठोर निर्जला व्रत रखेंगी। कन्याएं शिवरूप पति की प्राप्ति हेतु तपस्या करेंगी। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर शिव पार्वती की दिव्य कथा का पाठ होगा। यह व्रत दांपत्य सुख, संतान प्राप्ति और पारिवारिक समृद्धि का अक्षय वरदान प्रदान करता है। हरीयाली तीज के एक मास बाद प्रकृति का यह सुंदर संयोग आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहता है।
हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व सोमवार, 14 सितंबर को आएगा। प्रातःकालीन पूजा का सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 06:45 से 07:00 बजे तक रहेगा। निर्जला व्रत सूर्योदय से प्रारंभ होकर द्वितीया तिथि के उदयकाल तक चलेगा। यह व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।
उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश में लाखों महिलाएं भाग लेंगी। दक्षिण भारत में गौरी हब्बा के रूप में जाना जाता है। दोनों क्षेत्रों में एक ही भावना रहती है। विवाहित जीवन के सुख की कामना सभी करती हैं। व्रत का संकल्प सूर्योदय के समय लेना चाहिए। पूजा स्थल की शुद्धि पूर्ववत आवश्यक है।
हरतालिका तीज व्रत का विशेष स्थान है। निर्जला उपवास से शिव पार्वती अत्यंत प्रसन्न होते हैं। कन्याओं को शिव के समान धर्मात्मा पति की प्राप्ति होती है। विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु, संतान सुख और स्वयं की मंगल कामना करती हैं। यह व्रत वैवाहिक बंधन को अभेद्य बनाता है। पारिवारिक जीवन में शांति स्थापित करता है।
पार्वती की कठोर तपस्या का स्मरण कराया जाता है। हरतालिका शब्द का अर्थ है स्त्री मित्र द्वारा अपहरण। यह कथा प्रेम और त्याग का सुंदर संदेश देती है। व्रत का पालन जागरूक भाव से करना चाहिए। अज्ञानता से व्रत व्यर्थ हो जाता है। सच्ची भक्ति ही मुख्य फलदायी है। व्रत कथा का श्रवण अनिवार्य है।
विवाहित महिलाओं के लिए यह वर्ष का सबसे कठिन व्रत है। फिर भी आनंद के साथ किया जाता है। पारिवारिक सौहार्द बढ़ता है। पति का सम्मान बढ़ता है। यह व्रत सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।
हिमालय पर्वत के पुत्री रूप में शैलपुत्री पार्वती का जन्म हुआ। नारद मुनि के उपदेश पर पिता हिमवान ने विष्णु से विवाह का वचन दे दिया। किंतु पार्वती ने हृदय से अस्वीकार किया। उनकी सखी ने घने वन में ले जाकर छिपा दिया। भाद्रपद शुक्ल तृतीया को पार्वती ने अपने केशों और पत्रों से शिवलिंग का निर्माण किया।
पार्वती ने कठोर तपस्या प्रारंभ की। सूर्य की तपती किरणों में भी ध्यान नहीं भंग हुआ। वर्षा ऋतु में भी अविचल भाव रहा। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए। विवाह का वचन दिया। हिमवान को आशीर्वाद देकर विवाह संपन्न कराया। तब से यह तिथि हरतालिका तीज कहलाई। सखी ने पार्वती का हरण किया था।
यह कथा कन्याओं को साहस देती है। सच्ची तपस्या से कोई इच्छा अधूरी नहीं रहती। शिव पार्वती का मिलन समस्त दांपत्य जीवन का आदर्श है। यह कथा प्रत्येक व्रतालय में सुनी जाती है।
तृतीया तिथि के पूर्ववर्ती दिन से तैयारी प्रारंभ करें। गृह शुद्धिकरण करें। पूजा स्थल को फूलों और रंगोली से सजाएं। लाल वस्त्र से ढकी चबूतरे पर प्रतिमाएं स्थापित करें। सुबह प्रातः स्नान कर पवित्र वस्त्र धारण करें। दुल्हन की भांति सजें। सोलह श्रृंगार करें। हरा या लाल वस्त्र ग्रहण करें।
नदी की रेत या मिट्टी से शिव, पार्वती और गणेश की तीन प्रतिमाएं बनाएं। लकड़ी के चौकी पर स्थापित करें। कलश में जल, सुपारी, सिक्का रखें। आम पत्रों से सजाएं। नारियल स्थापित करें। गणेश पूजन से प्रारंभ करें।
| सामग्री | शिव हेतु | पार्वती हेतु |
|---|---|---|
| पत्र | बिल्व पत्र, धतूरा | गुलाब, चमेली |
| वस्त्र | धोती, अंगोछा | साड़ी, चूड़ियां |
| भोग | दूध, बेल पत्र | सुहाग पिटारी, मिठाई |
| श्रृंगार | - | सिंदूर, काजल, मेहंदी |
सुहाग पिटारी में चूड़ियां, सिंदूर, मेहंदी, बिंदी रखें। शिव को धोती अंगोछा अर्पित करें।
संध्या में शिवलिंग पर फूलमाला का झूला लटकाएं। रात्रि भर भजन कीर्तन करें। नृत्य गान करें। व्रत कथा का श्रवण करें। प्रातः शोभायात्रा निकालें। बिल्व पत्र, नारियल और फल प्रसाद ग्रहण करें। सासुजी का आशीर्वाद लें। ब्राह्मणों को दान दें।
पार्वती मंत्र
ॐ शिवायै नमः। ॐ उमायै नमः। ॐ पार्वत्यै नमः। ॐ जगद्धात्र्यै नमः। ॐ जगत्प्रतिष्ठायै नमः। ॐ शांतिरूपिण्यै नमः।
शिव मंत्र
ॐ नमः शिवाय। ॐ हराय नमः। ॐ महेश्वराय नमः। ॐ शम्भवे नमः। ॐ शूलपाणये नमः। ॐ पिनाकवृषे नमः। ॐ पशुपतये नमः।
इन मंत्रों का रात्रि जागरण में निरंतर जाप करें। वैवाहिक सुख के लिए विशेष फलदायी हैं।
व्रत कथा पाठ से शिव पार्वती का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। वैवाहिक संबंध अभेद्य बनते हैं। संतान सुख की प्राप्ति निश्चित होती है। कन्याओं को धर्मात्मा पति मिलता है। कुविडंबना का निवारण होता है। पारिवारिक शांति स्थापित होती है।
व्रत विधिवत पालन से कष्ट हरण होता है। धन प्राप्ति के द्वार खुलते हैं। ग्रह दोष शांत होते हैं। मानसिक शांति प्राप्त होती है। जागरूक भाव से व्रत करें। कठिनाइयों का चिंतन न करें। शिव की कृपा सदा बनी रहती है। यह व्रत जीवन को समृद्ध बनाता है।
उत्तर प्रदेश में भव्य शोभायात्राएं निकलती हैं। राजस्थान में सामूहिक जागरण प्रसिद्ध है। बिहार और झारखंड में पारिवारिक पूजा पर बल। मध्य प्रदेश में गीत संगीत का विशेष महत्व। दक्षिण भारत में गौरी हब्बा स्वरूप। सभी क्षेत्रों में एक ही उद्देश्य रहता है।
हरतालिका तीज सामाजिक एकता का प्रतीक है। महिलाओं का साहस दर्शाती है। पारंपरिक वेशभूषा का सुंदर प्रदर्शन होता है। रंग बिरंगे परिधान आकर्षक लगते हैं।
हरतालिका तीज 2026 कब मनाई जाएगी?
14 सितंबर 2026 को सोमवार। प्रातःकाल पूजा 06:45 से 07:00 बजे तक।
हरतालिका तीज व्रत का विशेष महत्व क्या है?
कन्याओं को शिवरूप पति। विवाहितों को दांपत्य सुख और संतान प्राप्ति।
हरतालिका पूजा मुहूर्त 2026 कौन सा है?
प्रातःकालीन मुहूर्त सुबह 06:45 से 07:00 बजे तक।
हरतालिका तीज में कौन सी रस्में निभाई जाती हैं?
निर्जला व्रत, सोलह श्रृंगार, मिट्टी शिवलिंग पूजा, रात्रि जागरण, शोभायात्रा।
हरतालिका नाम कैसे पड़ा?
सखी के अपहरण से। पार्वती को विष्णु विवाह से बचाने हेतु वन ले जाना।
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