By पं. संजीव शर्मा
जानें मार्च 2026 में फाल्गुन और चैत्र माह की विशेषताएँ और हिंदू नववर्ष तिथि

मार्च 2026 हिंदू पंचांग की दृष्टि से परिवर्तन और आरंभ, दोनों का विशेष संगम लेकर आता है। इस एक ही महीने में फाल्गुन का समापन होता है, चैत्र का आरंभ होता है और साथ ही नया विक्रम संवत भी शुरू होता है। इस कारण मार्च 2026 का हिंदू कैलेंडर केवल तिथियों की सूची नहीं बल्कि ऋतु परिवर्तन, पंचांग क्रम और नववर्ष के संकेतों का सुंदर संगम है।
मार्च 2026 में फाल्गुन और चैत्र दोनों चंद्र मास चलते हैं। यह अवधि उत्तरायण और वसंत ऋतु के अंतर्गत आती है। इस समय विक्रम संवत 2082 का फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी से 2083 के चैत्र शुक्ल त्रयोदशी तक का क्रम देखा जाता है। चैत्र मास 4 मार्च 2026 से प्रारंभ होगा और हिंदू नव वर्ष 2026, अर्थात चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, गुरुवार 19 मार्च 2026 को मनाया जाएगा, जब विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1947 एक साथ आरंभ होंगे।
मार्च 2026 के पूरे माह को यदि हिंदू दृष्टि से देखें, तो यह समय फाल्गुन के शुभ समापन और चैत्र की आध्यात्मिक शुरुआत दोनों को समेटे हुए है। ज्योतिषीय रूप से यह उत्तरायण और वसंत ऋतु का काल है, जो नए संकल्प, तप और उल्लास का संदेश देता है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| ग्रेगोरियन महीना | मार्च 2026 |
| प्रमुख चंद्र मास | फाल्गुन और चैत्र |
| चैत्र मास आरंभ | 4 मार्च 2026 |
| ऋतु | वसंत ऋतु |
| अयन | उत्तरायण |
| विक्रम संवत क्रम | 2082 फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी से 2083 चैत्र शुक्ल त्रयोदशी |
| हिंदू नव वर्ष 2026 | चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, गुरुवार 19 मार्च 2026 |
| आरंभ होने वाले संवत | विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1947 |
फाल्गुन का अंतिम चरण और चैत्र का आरंभ, दोनों ही इस महीने में आते हैं। इसलिए जो लोग पंचांग, व्रत, त्योहार और नए वर्ष की योजना बनाते हैं, उनके लिए मार्च 2026 विशेष रूप से ध्यान देने योग्य महीना है।
हिंदू पंचांग में एक ही अंग्रेजी माह में दो अलग अलग चंद्र मास का मेल होना सामान्य बात है। मार्च 2026 में यही स्थिति देखने को मिलती है, जहाँ फाल्गुन के अंतिम दिन और चैत्र के प्रारंभिक दिन इसी महीने में आते हैं।
| चंद्र मास | मार्च 2026 में स्थिति |
|---|---|
| फाल्गुन मास | माह की शुरुआत में फाल्गुन के शुक्ल पक्ष की तिथियाँ चलती हैं |
| चैत्र मास | 4 मार्च 2026 से चैत्र मास प्रारंभ होता है |
इस प्रकार यदि कोई साधक फाल्गुन के व्रत या साधना कर रहा हो, तो मार्च के प्रारंभिक दिनों में वह क्रम पूर्ण होगा और 4 मार्च के बाद नए संकल्प के साथ चैत्र माह की साधना आरंभ की जा सकती है।
मार्च 2026 का समय उत्तरायण के अंतर्गत आता है। उत्तरायण वह अवधि है जब सूर्य देव की गति मकर से कर्क की दिशा में उत्तर की ओर मानी जाती है। वैदिक परंपरा में इसे देवताओं का दिन और साधकों के लिए विशेष रूप से अनुकूल समय माना गया है।
इसके साथ ही यह समय वसंत ऋतु का भी है। वसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा गया है, क्योंकि यह न तो अत्यधिक शीत का समय है, न अधिक ग्रीष्म का बल्कि मध्यम और संतुलित वातावरण लेकर आता है। वसंत में
ये सभी परिवर्तन साधक को भी भीतर से नवीनता, प्रसन्नता और संतुलित ऊर्जा की ओर ले जा सकते हैं। मार्च 2026 के व्रत, जप और नए संकल्प इस वसंत ऊर्जा के साथ जुड़कर अधिक प्रभावशाली बन सकते हैं।
मार्च 2026 का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसी महीने में नया विक्रम संवत 2083 प्रारंभ होगा। साथ ही शक संवत 1947 का भी यही आरंभ दिवस रहेगा।
| संवत | आरंभ तिथि |
|---|---|
| विक्रम संवत 2083 | गुरुवार, 19 मार्च 2026 |
| शक संवत 1947 | गुरुवार, 19 मार्च 2026 |
| आरंभ तिथि का आधार | चैत्र शुक्ल प्रतिपदा |
हिंदू परंपरा में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही हिंदू नव वर्ष का प्रारंभ माना जाता है। इस दिन से
इस प्रकार मार्च 2026 केवल ऋतु परिवर्तन ही नहीं बल्कि संवत परिवर्तन और नव वर्ष का वाहक भी है।
हिंदू नव वर्ष 2026 को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, गुरुवार 19 मार्च 2026 के दिन मनाया जाएगा। इस दिन से
दोनों की गणना एक साथ प्रारंभ हो जाएगी।
हिंदू नव वर्ष को केवल एक उत्सव के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होता। यह दिन
कई लोग इस दिन
मार्च 2026 का हिंदू कैलेंडर साधक को कई स्तर पर संकेत देता है।
जो लोग इस महीने को केवल तिथियों की दृष्टि से नहीं बल्कि आंतरिक परिवर्तन और नए आरंभ की भावना से देखेंगे, उनके लिए मार्च 2026 एक शक्तिशाली समय बन सकता है।
मार्च 2026 में कौन से चंद्र मास चल रहे होंगे
मार्च 2026 में फाल्गुन और चैत्र दोनों चंद्र मास आएंगे। माह के प्रारंभिक दिनों में फाल्गुन का क्रम रहेगा और 4 मार्च 2026 से चैत्र मास प्रारंभ होगा, जो आगे नव वर्ष तक चलेगा।
चैत्र मास 2026 कब से शुरू होगा
चैत्र मास 2026 में 4 मार्च 2026 से शुरू होगा। इसके बाद चैत्र कृष्ण पक्ष और चैत्र शुक्ल पक्ष की तिथियाँ चलेंगी, जिनमें से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नव वर्ष के रूप में माना जाएगा।
हिंदू नव वर्ष 2026 किस दिन मनाया जाएगा
हिंदू नव वर्ष 2026, जिसे चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के रूप में जाना जाता है, गुरुवार, 19 मार्च 2026 को पड़ेगा। इसी दिन विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1947 दोनों का आरंभ माना जाएगा।
मार्च 2026 में कौन से संवत का परिवर्तन होगा
मार्च 2026 में विक्रम संवत 2082 का क्रम आगे बढ़ते हुए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर विक्रम संवत 2083 के रूप में नया वर्ष शुरू करेगा। उसी दिन शक संवत 1947 भी प्रारंभ होगा, इसलिए यह तिथि संवत परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।
उत्तरायण और वसंत ऋतु का इस महीने पर क्या प्रभाव है
मार्च 2026 उत्तरायण और वसंत ऋतु के भीतर आता है। उत्तरायण साधना और देव अनुग्रह के लिए अनुकूल माना जाता है, जबकि वसंत ऋतु संतुलित और मधुर वातावरण देकर मन और शरीर दोनों को नए उत्साह, रचनात्मकता और आध्यात्मिक संकल्प के लिए तैयार करती है।
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