By पं. संजीव शर्मा
रंगों का त्योहार होली कब मनाया जाएगा? तारीख और मुहूर्त जानें

होली को रंगों का पर्व कहा जाता है, फिर भी हर साल इसकी सही तिथि को लेकर मन में थोड़ी उलझन रहती है। वर्ष 2026 में भी बहुत से लोग यही सोच रहे हैं कि रंग वाली होली 3 मार्च को होगी या 4 मार्च को। यह उलझन स्वाभाविक है, क्योंकि हिंदू पंचांग की गणना और सामान्य कैलेंडर की गणना में अंतर होता है, हालांकि जब इस अंतर को शांत मन से समझा जाए तो पूरी तस्वीर बहुत साफ हो जाती है।
सबसे पहले मुख्य बात स्पष्ट कर लें। होली 2026 में दो दिन मनाई जाएगी। होलीका दहन 3 मार्च 2026, मंगलवार की शाम को होगा और रंग वाली होली या दुहंडी 4 मार्च 2026, बुधवार की सुबह मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 05 बजकर 55 मिनट पर प्रारंभ होकर 3 मार्च 2026 को शाम 05 बजकर 07 मिनट पर समाप्त होगी, इसलिए होलीका दहन 3 मार्च की शाम को किया जाएगा और रंगों की होली 4 मार्च की सुबह खेली जाएगी।
होली की तिथि को केवल “3 और 4 मार्च” तक सीमित कर देना पर्याप्त नहीं होता। तिथि, मुहूर्त और पंचांग की गणना को साथ में देखने पर इस उत्सव का स्वरूप और अधिक स्पष्ट रूप से समझ आता है। जो साधक पंचांग के अनुसार व्रत, पूजन और पर्व मनाते हैं, उनके लिए यह जानकारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
| पक्ष | तिथि और दिन | समय विवरण |
|---|---|---|
| होलीका दहन | 3 मार्च 2026, मंगलवार | शाम के समय, जब पूर्णिमा तिथि विद्यमान हो |
| रंग वाली होली | 4 मार्च 2026, बुधवार | प्रातः से दिन भर रंग खेलना |
| पूर्णिमा प्रारंभ | 2 मार्च 2026, शाम 05:55 | पंचांगानुसार तिथि आरंभ |
| पूर्णिमा समाप्त | 3 मार्च 2026, शाम 05:07 | इसी कारण होलीका दहन 3 मार्च की शाम |
इस सारणी से साफ है कि 3 मार्च 2026 को शाम तक पूर्णिमा तिथि रहने के कारण होलीका दहन उसी रात किया जाएगा और अगली सुबह दुहंडी या रंग वाली होली मनाई जाएगी।
अधिकांश लोग सामान्य ग्रेगेरियन कैलेंडर देखते हैं, जिसमें दिन आधी रात 12 बजे से बदलता है। जबकि हिंदू पंचांग में दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक माना जाता है। पर्व किस दिन मनाया जाएगा, इसका निर्णय इस आधार पर नहीं होता कि तारीख की संख्या क्या है बल्कि इस आधार पर होता है कि उस दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक कौन सी तिथि विद्यमान है और पर्व से संबंधित तिथि किस कालखंड में पड़ रही है।
यही कारण है कि होली के मामले में जब कोई “3 या 4 मार्च” पूछता है तो थोड़ा भ्रम हो सकता है। होलीका दहन पूर्णिमा तिथि की संध्या में किया जाता है, न कि केवल तिथि के अंक के आधार पर। चूंकि 2026 में पूर्णिमा तिथि 3 मार्च की शाम तक विद्यमान रहेगी, इसलिए होलीका दहन 3 मार्च की सांझ या रात में किया जाएगा। इसके बाद उसी पर्व का दूसरा भाग, यानी रंगों वाली होली, अगले दिन सूर्य निकलने के बाद, 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी।
होली पूर्णिमा पर आती है, इस बात को अधिकांश लोग जानते हैं, पर यह कम समझा जाता है कि पूर्णिमा तिथि की समाप्ति और संध्या के समय का आपस में क्या संबंध है। होली 2026 में पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 05:55 पर प्रारंभ होगी और 3 मार्च 2026 को शाम 05:07 पर समाप्त होगी। यानी 3 मार्च की शाम जब लोग होलीका दहन की तैयारी करते हैं तब भी पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि ही चल रही होगी।
इसी कारण शास्त्रीय परंपरा के अनुसार, जब भी किसी पर्व का मुख्य कर्म, जैसे होलीका दहन, संध्या या निशीथ काल में किया जाता है, तो यह देखा जाता है कि उस समय संबंधित तिथि विद्यमान हो। 3 मार्च 2026 की शाम को यह शर्त पूर्ण होती है, इसलिए होलीका दहन का मुहूर्त 3 मार्च की शाम को ही माना जाता है। अगले दिन सुबह तक तिथि बदल चुकी होती है, इसलिए रंगों वाली होली का उत्सव अलग दिन, यानी 4 मार्च को आता है।
| विवरण | समय |
|---|---|
| पूर्णिमा तिथि प्रारंभ | 2 मार्च 2026, शाम 05:55 |
| पूर्णिमा तिथि समाप्त | 3 मार्च 2026, शाम 05:07 |
| होलीका दहन का आधार | 3 मार्च की संध्या में पूर्णिमा तिथि की उपस्थिति |
इस प्रकार, होली की तिथि समझने की चाबी यही है कि पूर्णिमा तिथि संध्या के समय किस दिन पड़ रही है। 2026 में यह दिन 3 मार्च है, जबकि रंगों की धूम 4 मार्च को रहेगी।
बहुत से लोग यह प्रश्न पूछते हैं कि होली दो दिन क्यों मनाई जाती है। वास्तव में यह दो रूपों वाला एक ही पर्व है। पहला दिन होलीका दहन का होता है, जिसे कई स्थानों पर छोटी होली भी कहा जाता है। दूसरा दिन रंग वाली होली का होता है, जिसे कुछ क्षेत्रों में दुहंडी, धुलेंडी या धुलेटी के नाम से जाना जाता है।
हिंदू परंपरा में केवल रंगों के खेल पर जोर नहीं होता बल्कि उसके पीछे की आध्यात्मिक और सामाजिक भावना को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। होलीका दहन के दिन रात्रि में अग्नि प्रज्वलित कर नकारात्मकता, अहंकार और अन्याय को जलाकर समाप्त करने का भाव व्यक्त किया जाता है। इसके अगले दिन रंगों के माध्यम से खुशी, मेल मिलाप और नए सिरे से संबंधों को ताज़ा करने का संदेश दिया जाता है। इस तरह यह दो दिन मिलकर एक संपूर्ण अनुभव बनाते हैं।
अब विस्तार से देखें कि होलीका दहन 2026 में कब और किस तरह मनाया जाएगा। वर्ष 2026 में होलीका दहन 3 मार्च 2026, मंगलवार की शाम को किया जाएगा, जब पूर्णिमा तिथि विद्यमान होगी। इसी समय लोग मोहल्लों, कॉलोनियों और गांवों में एक स्थान पर लकड़ी, सूखी टहनियां और जली हुई पुरानी चीजों को एकत्रित कर अग्नि प्रज्वलित करते हैं।
होलीका दहन से जुड़ी प्रसिद्ध कथा प्रह्लाद और होलिका की है। माना जाता है कि अहंकारी राजा हिरण्यकश्यपु ने भगवान विष्णु के परम भक्त अपने पुत्र प्रह्लाद को समाप्त करने के लिए अपनी बहन होलिका को अग्नि में बैठाकर प्रह्लाद को जलाने का षड्यंत्र रचा। होलिका को वरदान था कि अग्नि उसे जला नहीं सकती। पर जब दोनों अग्नि में बैठे, तो भक्ति की शक्ति के कारण प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका जलकर भस्म हो गई। यह कथानक इस बात का प्रतीक है कि अहंकार और अत्याचार का अंत होता है, जबकि श्रद्धा और सत्य संरक्षित रहते हैं।
कई क्षेत्रों में होलीका दहन के समय लोग अग्नि की परिक्रमा करते हैं, मन में मनोकामनाएं रखते हैं और पुराने भय, दुश्मनी तथा नकारात्मक भावनाओं को इस अग्नि के साथ छोड़ने का संकल्प करते हैं। कुछ परिवार उस अग्नि से जली हुई राख को घर लाकर थोड़ी मात्रा में द्वार पर लगाते हैं, इसे शुभ और रक्षक माना जाता है।
होली की सबसे पहचान योग्य छवि रंगों से सजी सड़कों और हंसी से भरते आंगनों की होती है। वर्ष 2026 में रंग वाली होली या दुहंडी 4 मार्च 2026, बुधवार के दिन मनाई जाएगी। यह वह दिन है जब गुलाल, रंग और पानी के साथ खुलकर उत्सव मनाया जाता है। लोग अपने मित्रों, परिजनों और पड़ोसियों के घर जाते हैं। अबीर गुलाल लगाकर एक दूसरे को होली की शुभकामनाएं देते हैं।
कई घरों में सुबह सबसे पहले सूखे गुलाल से हल्का तिलक लगाया जाता है, उसके बाद रंग और पानी का अधिक खेल शुरू होता है। दिन में कहीं न कहीं त्योहारी भोजन, गुझिया, नमकीन और मिठाइयों की सुगंध घरों में फैलती है। इस दिन का वातावरण ऐसा होता है जिसमें औपचारिकता थोड़ी कम हो जाती है और खुलापन, अपनापन और हंसी अधिक दिखाई देती है। कुछ जगहों पर सामूहिक कीर्तन, ढोल, डीजे या पारंपरिक संगीत के साथ नृत्य भी देखने को मिलता है।
बहुत से लोग रंग खेलने के आनंद तक ही होली को सीमित कर देते हैं, जबकि अंदर से देखा जाए तो रंग वाली होली एक भावनात्मक और सामाजिक शुद्धि का अवसर भी है। रंग के छींटों के साथ मन में जमा हुई पुरानी शिकायतें, रूठना और दूरी को छोड़ने की भावना जागृत की जाती है। इस दिन लोग अक्सर कहते भी हैं कि “होली है, आज के दिन भूल जाओ पुरानी बातों को”। यह वाक्य केवल मजाक नहीं बल्कि एक प्रकार का आमंत्रण होता है कि नए सिरे से संबंधों को शुरू किया जाए।
कई घरों में नियम होता है कि होली के दिन किसी से मनमुटाव हो तो पहल करके उसे रंग लगाकर गले लगाया जाए। इससे सम्बंधों में जमी बर्फ पिघलती है और परिवार, मित्र मंडली तथा समाज में आपसी सौहार्द बढ़ता है। इस तरह देखा जाए तो रंग वाली होली केवल उत्साह नहीं बल्कि नवीनता, मेल मिलाप और मन की सफाई का भी प्रतीक बन जाती है।
होली की चर्चा हो और ब्रज की होली का उल्लेख न आए, ऐसा होना कठिन है। ब्रज क्षेत्र, जिसमें मथुरा, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव, गोकुल और गोवर्धन जैसे पवित्र स्थान आते हैं, होली के उत्सव के लिए दूर दूर तक प्रसिद्ध है। इन स्थलों पर होली के उत्सव केवल दो दिन नहीं बल्कि कई दिनों तक विविध रूपों में चलते रहते हैं।
बरसाना की लठमार होली अपनी अनोखी परंपरा के कारण विशेष चर्चित है। यहां महिलाएं हाथ में लाठियां लेकर पुरुषों पर प्रतीकात्मक प्रहार करती हैं और पुरुष ढाल लेकर स्वयं को बचाने का प्रयास करते हैं। यह सब प्रेम, हंसी और लोक परंपरा के बीच होता है। मथुरा और वृंदावन में मंदिरों के प्रांगण में फूलों की होली, रंगों की होली और कीर्तन से भरा वातावरण मन को भक्ति और आनंद दोनों से जोड़ देता है। वर्ष 2026 में भी जो साधक ब्रज की होली देखने जाएंगे, उन्हें वहां का उत्सव साधारण कैलेंडर की तारीख से आगे बढ़कर एक जीवंत अनुभव की तरह लगेगा।
कई बार मन में बार बार यही प्रश्न घूमता रहता है कि “इस बार होली 3 को है या 4 को”। इस लेख का उद्देश्य यही है कि इस उलझन को शांत ढंग से सुलझाया जाए। अब संक्षेप में स्थिति इस प्रकार है कि होलीका दहन 3 मार्च 2026, मंगलवार की शाम को होगा, क्योंकि उस समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी। इसके अगले दिन, 4 मार्च 2026, बुधवार को रंग वाली होली या दुहंडी पूरे उत्साह के साथ मनाई जाएगी।
इस प्रकार यदि कोई पूछे कि “होली 3 को है या 4 को” तो उत्तर यह होगा कि होली दो दिन है, पहला दिन होलीका दहन, दूसरा दिन रंगों की होली। कैलेंडर के नजरिए से दोनों अलग तिथियां हैं, पर पर्व की दृष्टि से यह एक ही उत्सव के दो सोपान हैं।
होली को अक्सर केवल रंग, मस्ती और छुट्टी के रूप में देखा जाता है, पर इसके भीतर छिपा संदेश उससे कहीं गहरा है। होलीका दहन यह याद दिलाता है कि भीतर के अहंकार, क्रोध और कटुता को समय रहते पहचानकर अग्नि के हवाले कर देना जरूरी है। यदि मन में पुरानी जलन या तुलना बैठी रहे, तो आनंद का स्रोत सूखने लगता है। होली की अग्नि के सामने खड़े होकर यह संकल्प लिया जा सकता है कि जो बात जीवन से अब आवश्यक नहीं, उसे वहीं छोड़ दिया जाए।
दूसरी ओर रंग वाली होली यह सिखाती है कि जीवन में सादगी, खेल भावना और अपनापन कितना जरूरी है। जब लोग बिना किसी औपचारिकता के एक दूसरे को रंग लगाकर गले मिलते हैं तो यह अनुभव देता है कि मनुष्य होने की सबसे बड़ी पहचान सम्बंध हैं। वर्ष 2026 की होली भी, चाहे 3 और 4 मार्च के रूप में कैलेंडर पर दिखाई दे, पर भीतर से यह अवसर है कि जीवन को थोड़ा हल्का, संबंधों को थोड़ा मीठा और मन को थोड़ा मुक्त किया जाए।
होली 2026 में 3 मार्च को क्या करना उचित माना जाता है
2026 में 3 मार्च 2026, मंगलवार के दिन होलीका दहन किया जाएगा। इस दिन शाम के समय जब पूर्णिमा तिथि विद्यमान हो तब मोहल्ले या खुले स्थान पर अग्नि प्रज्वलित कर प्रह्लाद और होलिका की कथा का स्मरण, नकारात्मकता को त्यागने का संकल्प और परिवार के साथ अग्नि की परिक्रमा करना शुभ माना जाता है।
रंग वाली होली 2026 में किस दिन और कैसे मनाई जाएगी
रंग वाली होली या दुहंडी 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन सुबह से अबीर, गुलाल और रंगों के साथ अपने मित्रों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के बीच जाकर शुभकामनाएं देना, मिठाइयां और व्यंजन बांटना तथा सौहार्द के साथ उत्सव मनाना इस पर्व का मुख्य रूप माना जाता है।
होली के दो दिन होने के पीछे मुख्य कारण क्या है
होली दो रूपों में मनाई जाती है, पहला दिन होलीका दहन के रूप में जहां अग्नि के माध्यम से नकारात्मकता और अहंकार को प्रतीकात्मक रूप से समाप्त करने का भाव रखा जाता है। दूसरा दिन रंग वाली होली का होता है, जिसमें रंगों और पानी के साथ मेल मिलाप, हंसी और अपनापन व्यक्त किया जाता है, इसलिए तिथि अलग होते हुए भी दोनों दिन मिलकर एक ही पर्व की पूर्णता दर्शाते हैं।
ब्रज की होली को विशेष क्यों माना जाता है
ब्रज क्षेत्र, विशेषकर मथुरा, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव, गोकुल और गोवर्धन, होली के उत्सव के लिए अत्यंत प्रसिद्ध हैं। यहां की लठमार होली, फूलों की होली और मंदिरों में होली भक्ति और लोक परंपरा को मिलाकर ऐसा वातावरण बनाती है, जो सामान्य रंग खेलने से कहीं अधिक गहरा और भावपूर्ण अनुभव देती है।
यदि कोई व्यक्ति तिथि को लेकर उलझन में रहे तो उसे क्या याद रखना चाहिए
यदि कभी भ्रम हो कि “होली 3 को है या 4 को” तो इतना याद रखना पर्याप्त है कि 3 मार्च 2026 को होलीका दहन होगा और 4 मार्च 2026 को रंगों वाली होली। होली को दो अलग दिन मानने के बजाय एक ही उत्सव की दो सीढ़ियां मानकर देखा जाए, तो तिथि को लेकर उलझन स्वतः कम हो जाती है।
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अनुभव: 15
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, आध्यात्मिकता और कर्म
इनके क्लाइंट: दि., उ.प्र., म.हा.
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