By पं. अभिषेक शर्मा
16 जुलाई 2026 की रथ यात्रा, द्वितीया तिथि, परंपरा, रथ खींचने की विधि और भक्तिमय महत्व

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। द्रिक पंचांग के अनुसार द्वितीया तिथि 15 जुलाई 2026 को 11:50 बजे दोपहर आरंभ होकर 16 जुलाई 2026 को 8:52 बजे सुबह समाप्त होगी। इसी कारण रथ यात्रा का मुख्य पर्व 16 जुलाई को मान्य होगा। यह अवसर केवल एक उत्सव नहीं बल्कि भक्ति, सामूहिक श्रद्धा और दिव्य स्मरण का जीवंत पर्व है।
पुरी की रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ, उनके ज्येष्ठ भ्राता बलभद्र और भगिनी सुभद्रा को जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक ले जाने की परंपरा से जुड़ी है। यह यात्रा भगवान के अपनी मौसी के घर जाने के प्रतीक के रूप में भी जानी जाती है। देश ही नहीं, समूचे भक्तिमय लोक में यह पर्व अत्यंत सम्मान और आनंद के साथ देखा जाता है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| पर्व | जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 |
| तिथि | द्वितीया तिथि |
| मुख्य दिन | 16 जुलाई 2026 |
| तिथि आरंभ | 15 जुलाई 2026, 11:50 AM |
| तिथि समाप्त | 16 जुलाई 2026, 8:52 AM |
| स्थान | पुरी, ओडिशा |
| आराध्य | भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा |
| प्रमुख भाव | भक्ति, यात्रा, सामूहिकता |
रथ यात्रा का मूल स्वर भक्ति और लोक एकता है।
रथ यात्रा को केवल मूर्तियों की यात्रा समझना उचित नहीं होगा। यह भगवान के सजीव प्रेम, निकटता और लोकमंगल का प्रतीक है। जब विशाल रथ नगर की सड़कों पर चलते हैं तब श्रद्धालु स्वयं को उस दिव्य प्रवाह का भाग मानते हैं। यह दृश्य केवल बाहरी भव्यता नहीं बल्कि अंतःकरण में जागती हुई श्रद्धा का संकेत है।
यह पर्व बताता है कि भगवान केवल मंदिर में सीमित नहीं हैं। वे अपने भक्तों के बीच, उनके नगर में और उनके जीवन के बीच चल सकते हैं। यही कारण है कि रथ खींचने की क्रिया को इतना पुण्यदायी माना जाता है। इसमें शरीर की शक्ति, मन की श्रद्धा और हृदय की विनम्रता एक साथ सक्रिय होती हैं।
रथ यात्रा चलती हुई भक्ति का रूप है।
वर्ष 2026 में रथ यात्रा 16 जुलाई को मनाई जाएगी। द्वितीया तिथि 15 जुलाई को दोपहर 11:50 बजे शुरू होगी और 16 जुलाई को सुबह 8:52 बजे समाप्त होगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार तिथि का निर्णय केवल तारीख से नहीं बल्कि तिथि की उपलब्धता से किया जाता है। इसलिए 16 जुलाई को रथ यात्रा का उत्सव उचित रूप से निर्धारित होता है।
यह तिथि आषाढ़ शुक्ल पक्ष से जुड़ी हुई है। आषाढ़ मास भारतीय परंपरा में वर्षा, उपासना और अंतर्मुखी भक्ति का समय माना जाता है। ऐसे समय में की गई पूजा अधिक गहन भाव से जुड़ सकती है।
| तिथि विषय | विवरण |
|---|---|
| मास | आषाढ़ |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| तिथि | द्वितीया |
| पर्व दिवस | 16 जुलाई 2026 |
| तिथि प्रारंभ | 15 जुलाई 2026, 11:50 PM |
| तिथि समाप्त | 16 जुलाई 2026, 8:52 AM |
रथ यात्रा में तिथि का शास्त्रीय आधार विशेष महत्त्व रखता है।
जगन्नाथ रथ यात्रा की उत्पत्ति को लेकर अनेक कथाएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि इसका इतिहास 12वीं से 16वीं शताब्दी के बीच के समय से जुड़ा हो सकता है। कुछ परंपराओं में यह श्रीकृष्ण के अपनी मातृभूम��� और मातृत्व भाव से जुड़े स्मरण के रूप में देखा जाता है। कुछ मतों के अनुसार राजा इंद्रद्युम्न ने इस परंपरा को आरंभ किया।
इतिहास चाहे जिस रूप में प्रस्तुत हो, पर्व का जीवंत प्रभाव आज भी उतना ही शक्तिशाली है। पुरी की रथ यात्रा समय के साथ केवल एक आयोजन नहीं रही बल्कि एक ऐसी सांस्कृतिक धारा बन गई जिसने भक्ति को जनमानस में स्थायी रूप दिया। यही इस परंपरा की शक्ति है।
इतिहास रथ यात्रा को गहराई देता है।
रथ यात्रा का सबसे बड़ा संदेश यह है कि भगवान अपने भक्तों के निकट आते हैं और भक्त उनके लिए मार्ग तैयार करते हैं। रथ खींचना केवल अनुष्ठान नहीं बल्कि अहंकार को पीछे छोड़कर सेवा में आगे बढ़ना है। जब हजारों लोग एक साथ रथ को खींचते हैं तब सामूहिक श्रद्धा की अद्भुत शक्ति प्रकट होती है।
यह पर्व जाति, वर्ग, आयु और भेद से ऊपर उठकर एकता का अनुभव कराता है। बच्चे, युवा, वृद्ध, स्त्री और पुरुष सभी एक ही आध्यात्मिक धारा में बहते दिखाई देते हैं। यही रथ यात्रा की सबसे बड़ी सामाजिक और आध्यात्मिक विशेषता है।
| आध्यात्मिक पक्ष | अर्थ |
|---|---|
| रथ खींचना | सेवा और समर्पण |
| सामूहिक भागीदारी | एकता |
| मंदिर से यात्रा | दिव्य निकटता |
| नगर भ्रमण | लोकमंगल |
| दर्शन | कृपा और आनंद |
रथ यात्रा एकता और भक्ति का उत्सव है।
रथ यात्रा के दिन मंदिर और घरों में भी भक्ति का वातावरण बनता है। रथ को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियों को श्रद्धापूर्वक स्थापित किया जाता है। इसके बाद हर्ष और उल्लास के साथ रथ यात्रा आरंभ होती है।
बंगाल और ओडिशा में इस पर्व का विशेष उत्साह देखने को मिलता है। मार्ग में बच्चे भी रथ खींचते दिखाई देते हैं और मंत्रोच्चार का वातावरण बनता है। लगभग एक सप्ताह बाद उल्टा रथ की परंपरा होती है, जब मान्यता के अनुसार देवता अपने स्थान पर लौटते हैं। यह वापसी भी उतनी ही पवित्र मानी जाती है जितनी यात्रा स्वयं।
रथ यात्रा की विधि में श्रद्धा प्रधान है।
रथ यात्रा के अवसर पर पारंपरिक भोजन का भी विशेष स्थान है। जलेबी, तला हुआ पापड़ और पकौड़े जैसे व्यंजन इस उत्सव के लोकस्वाद से जुड़े हुए हैं। उत्सव के समय भोजन केवल स्वाद का विषय नहीं रहता, वह आनंद, साझा प्रसन्नता और संस्कृति का प्रतीक बन जाता है।
भोजन यदि सात्त्विक भाव से लिया जाए, तो उत्सव की पवित्रता और भी बढ़ जाती है। रथ यात्रा जैसे पर्व पर भोजन का सामाजिक पक्ष भी मजबूत होता है, क्योंकि लोग एक साथ बैठकर प्रसाद और स्थानीय स्वाद का आनंद लेते हैं। यह अनुभव पर्व की स्मृति को लंबे समय तक जीवित रखता है।
| भोजन | भाव |
|---|---|
| जलेबी | उत्सव |
| तला हुआ पापड़ | परंपरा |
| पकौड़े | लोकस्वाद |
| प्रसाद | साझा भक्ति |
रथ यात्रा में प्रसाद और उत्सव साथ चलते हैं।
रथ यात्रा केवल दर्शन और रस्मों का पर्व नहीं है। यह शुभकामनाओं, करुणा और मंगल भावों को साझा करने का भी अवसर है। भक्त एक दूसरे को प्रेम, समृद्धि और शांति की कामना भेजते हैं। यह परंपरा बताती है कि भक्ति व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामूहिक भी हो सकती है।
भगवान जगन्नाथ की कृपा से जीवन में शांति, समृद्धि और धर्ममय दिशा बनी रहे, यह इस दिन की सबसे सुंदर प्रार्थना है। जब मन श्रद्धा से भरता है तब शुभकामना केवल शब्द नहीं रहती, वह एक जीवंत संकल्प बन जाती है।
रथ यात्रा की शुभकामनाएं मंगल का संदेश देती हैं।
रथ यात्रा व्यक्ति को यह सिखाती है कि जब दिव्यता चलती है तब मनुष्य को भी अपने भीतर के जड़पन को छोड़ना चाहिए। जो लोग इस दिन केवल भीड़ देखते हैं, वे बाहरी दृश्य को देखते हैं। जो लोग भीतर की यात्रा समझते हैं, वे भक्ति की शक्ति को अनुभव करते हैं। यही इस पर्व का वास्तविक प्रभाव है।
यह पर्व जीवन की चाल को स्मरण कराता है। रथ की तरह जीवन भी तभी सुंदर होता है जब वह नियम, दिशा और भक्ति से खींचा जाए। यदि मन में श्रद्धा हो, तो यात्रा ही साधना बन जाती है।
रथ यात्रा का संदेश चलते हुए धर्म का है।
जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 कब है
जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को है।
रथ यात्रा की द्वितीया तिथि कब शुरू होगी
द्वितीया तिथि 15 जुलाई 2026 को 11:50 बजे दोपहर शुरू होगी।
रथ यात्रा की द्वितीया तिथि कब समाप्त होगी
द्वितीया तिथि 16 जुलाई 2026 को 8:52 बजे सुबह समाप्त होगी।
रथ यात्रा किन देवताओं को समर्पित है
यह भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को समर्पित है।
रथ यात्रा का सबसे बड़ा संदेश क्या है
इस पर्व का सबसे बड़ा संदेश भक्ति, सेवा, एकता और दिव्य समर्पण है।
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