By पं. नरेंद्र शर्मा
शिव पार्वती व्रत कथा महत्व जागरण पूर्ण गाइड

भारत के पश्चिमी भाग विशेष रूप से गुजरात की महिलाएं अषाढ़ मास में जया पार्वती व्रत धूमधाम से मनाती हैं। यह पांच दिवसीय व्रत अषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से आरंभ होता है। वर्ष 2026 में जया पार्वती व्रत 27 जुलाई को प्रारंभ होगा। यह 1 अगस्त तक चलेगा। गौरी व्रत 25 जुलाई 2026 को मनाया जाएगा। त्रयोदशी तिथि 26 जुलाई दोपहर 2 बजे से 27 जुलाई दोपहर 4 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। जया पार्वती प्रदोष पूजा मुहूर्त 27 जुलाई को सायं 7 बजकर 25 मिनट से 9 बजे तक है। अविवाहित कन्याएं मनचाहे पति की प्राप्ति हेतु और विवाहित महिलाएं पति की समृद्धि व कल्याण के लिए यह व्रत रखती हैं।
जया पार्वती व्रत सुखी दांपत्य जीवन की प्राप्ति के लिए किया जाता है। अविवाहित युवतियां उत्तम पति प्राप्ति की कामना रखती हैं। विवाहित महिलाएं वैवाहिक जीवन में प्रेम व सौहार्द बनाए रखने हेतु उपवास करती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से विशेष फल प्राप्त होते हैं। परिवार की समृद्धि उन्नति और कल्याण हेतु भी यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना जाता है। नियमों का कठोर पालन करने वाली भक्ताओं को मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। गुजरात में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है। यह जीवन के मूल्यों को भी सिखाता है। महिलाएं एकजुट होकर इसे मनाती हैं। परिवार में एकता का बंधन मजबूत होता है।
शास्त्रों में वर्णित कथा के अनुसार एक ब्राह्मण दंपति शिव भक्त थे। वे पूर्ण संतुष्ट जीवन जीते थे। पत्नी संतानहीनता के दुख से व्यथित रहती थी। एक दिन उन्होंने शिव की कठोर आराधना की। शिव प्रसन्न होकर वन में एकांत लिंग पूजा का निर्देश दिया। पति पूजा सामग्री लाने गया। सर्प दंश से उसकी मृत्यु हो गई।
पत्नी ने निराशा में शिव की प्रार्थना की। भगवान ने दया दिखाई। पति को जीवन प्रदान किया। संतान वरदान भी दिया। इस प्रकार जया पार्वती व्रत की परंपरा का सूत्रपात हुआ। महिलाएं इसी भक्ति से प्रेरित होकर व्रत का पालन करती हैं। यह कथा निष्ठा की विजय को प्रमाणित करती है। गुजरात के घरों में जागरण के दौरान इसे विस्तार से सुनाया जाता है।
ब्राह्मणी की श्रद्धा ने चमत्कार रच दिया। यह कथा पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है। कथा सुनने से मन में भक्ति जागृत होती है।
जया पार्वती व्रत की विधि सरल लेकिन कठोर है। पहले दिन छोटे मिट्टी के घड़े में जौ या गेहूं के दाने बोएं। इसे पूजा स्थल पर स्थापित करें। पांच दिन तक प्रतिदिन जलार्पण करें। नमक सब्जी गेहूं का पूर्ण त्याग करें।
यहां विस्तृत विधि दी गई है:
| चरण | विधि विवरण |
|---|---|
| प्रथम दिन | मिट्टी घड़े में जौ बोएं। पूजा स्थल पर रखें। |
| दैनिक पूजा | सिंदूर कंकु से नागला बनाएं। घड़े के किनारे बांधें। शिव पार्वती पूजा। |
| भोजन नियम | नमक सब्जी गेहूं वर्जित। फल दूध घी आटे का आहार। |
| अंतिम रात्रि | जया पार्वती जागरण। भजन कीर्तन आरती। |
| पारण दिवस | जौ अंकुर नदी तालाब में विसर्जित। नमकयुक्त भोजन ग्रहण। |
प्रदोष मुहूर्त में विशेष पूजा अनिवार्य है। यह विधि शुद्धि पर बल देती है। गुजरात की महिलाएं इसे पूर्ण निष्ठा से निभाती हैं।
व्रत के अंतिम रात्रि को जया पार्वती जागरण का आयोजन होता है। महिलाएं रात्रि भर जागकर भजन गाती हैं। शिव पार्वती की स्तुतियां गाती हैं। आरतियां उतारती हैं। यह गौरी तृतीया के नाम से भी जाना जाता है। जागरण से व्रत फल अक्षुण्ण रहता है। अगले दिन अंकुर विसर्जन के साथ पारण होता है। गुजरात में मित्र रिश्तेदार एकत्रित होकर भाग लेते हैं। यह सामूहिक भक्ति का प्रतीक है।
2026 की महत्वपूर्ण तिथियां और समय निम्न तालिका में दिए गए हैं:
| घटना | तिथि | समय विवरण |
|---|---|---|
| गौरी व्रत | 25 जुलाई 2026 (शनिवार) | पूर्ण दिवस |
| त्रयोदशी प्रारंभ | 26 जुलाई 2026 | दोपहर 2:00 बजे |
| त्रयोदशी समाप्त | 27 जुलाई 2026 | दोपहर 4:34 बजे |
| जया पार्वती व्रत प्रारंभ | 27 जुलाई 2026 (सोमवार) | - |
| प्रदोष पूजा मुहूर्त | 27 जुलाई 2026 | 7:25 PM से 9:00 PM |
| व्रत समापन | 1 अगस्त 2026 (शनिवार) | गौरी तृतीया पारण |
स्थानीय पंचांग से सत्यापित करें। ये तिथियां शुभ फलदायी हैं।
नियमित व्रत पालन से दांपत्य सुख की प्राप्ति होती है। शिव पार्वती की विशेष कृपा बनी रहती है। परिवार में समृद्धि आती है। संतान सुख प्राप्त होता है। जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं। यह व्रत आत्मिक बल प्रदान करता है। गुजरात की परंपरा में इसे सर्वोत्तम माना जाता है। भक्ताओं के अनुभव इसकी पुष्टि करते हैं।
जया पार्वती व्रत 2026 की तिथि क्या है?
27 जुलाई से 1 अगस्त। गौरी व्रत 25 जुलाई को। प्रदोष मुहूर्त 7:25 से 9 PM।
कौन रखता है जया पार्वती व्रत और क्यों?
अविवाहित कन्याएं मनचाहे पति हेतु। विवाहित पति कल्याण हेतु।
व्रत में नमक सब्जी क्यों वर्जित?
तपस्या संयम हेतु। पांच दिन पूर्ण त्याग।
जया पार्वती जागरण का तरीका क्या है?
अंतिम रात्रि भजन आरती से जागरण। फल दोगुना।
जौ अंकुरों का विसर्जन कैसे करें?
पारण दिवस नदी तालाब में विसर्जित।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएं
अनुभव: 20
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, करियर
इनके क्लाइंट: पंज., हरि., दि.
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें