By अपर्णा पाटनी
दांपत्य सुख और शांति के लिए पूजन नियम और सावधानियां

जयापार्वती व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक अत्यंत पवित्र व्रत है, जिसे विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने दांपत्य जीवन की सुख शांति और पति की दीर्घायु के लिए करती हैं।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| व्रत तिथि | 27 जुलाई 2026, सोमवार |
| पक्ष | आषाढ़ शुक्ल पक्ष |
| तिथि | त्रयोदशी |
| त्रयोदशी प्रारंभ | 26 जुलाई 2026, 01:57 अपराह्न |
| त्रयोदशी समाप्त | 27 जुलाई 2026, 04:14 अपराह्न |
| प्रदोष पूजन समय | 07:15 सायं से 09:20 सायं |
| मुख्य देवता | भगवान शिव और माता पार्वती |
| उद्देश्य | दांपत्य सुख, दीर्घायु, पारिवारिक शांति |
इस व्रत की विधि सरल होते हुए भी अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है, क्योंकि इसमें श्रद्धा, अनुशासन और भावनात्मक शुद्धता का विशेष महत्व है।
जयापार्वती व्रत में प्रदोष काल का समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह वह समय होता है जब शिव तत्व अधिक सक्रिय होता है और साधना का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
इस समय की गई पूजा मन और संबंधों में संतुलन लाने में सहायक मानी जाती है।
इस व्रत में केवल पूजा ही नहीं बल्कि व्यवहार का भी विशेष महत्व होता है। कुछ बातों से बचना आवश्यक माना गया है।
जयापार्वती व्रत केवल बाहरी अनुष्ठान नहीं है बल्कि यह आंतरिक अनुशासन और भावनात्मक संतुलन का अभ्यास भी है।
यह व्रत सिखाता है कि दांपत्य जीवन केवल संबंध नहीं बल्कि एक साधना है, जिसमें धैर्य, सम्मान और समर्पण आवश्यक होते हैं।
हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग होती है। यदि पूर्ण उपवास संभव न हो, तो फलाहार या हल्का सात्विक भोजन लेकर भी व्रत किया जा सकता है।
व्रत का मुख्य उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं बल्कि मन को शुद्ध करना है।
इस व्रत में शिव और पार्वती की उपासना के माध्यम से शुक्र और चंद्र ऊर्जा का संतुलन होता है।
| ग्रह | प्रभाव | जीवन में परिणाम |
|---|---|---|
| शुक्र | प्रेम और संबंध | दांपत्य सुख |
| चंद्र | भावनाएं | मानसिक शांति |
यह संतुलन जीवन में स्थिरता और सामंजस्य लाता है।
जयापार्वती व्रत यह सिखाता है कि संबंधों को बनाए रखने के लिए केवल प्रेम पर्याप्त नहीं है बल्कि समझ, संवाद और धैर्य भी आवश्यक हैं।
जब व्यक्ति अपने व्यवहार को सुधारता है तब संबंधों में स्वाभाविक रूप से मिठास आती है।
यह व्रत व्यक्ति को यह समझने में सहायता करता है कि सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं बल्कि संबंधों की गुणवत्ता और आंतरिक शांति में है।
जयापार्वती व्रत 2026 कब है
यह व्रत 27 जुलाई 2026, सोमवार को रखा जाएगा।
प्रदोष पूजा का समय क्या है
प्रदोष पूजा 07:15 सायं से 09:20 सायं तक है।
इस व्रत में कौन से मंत्र जपें
ॐ नमः शिवाय और ॐ पार्वत्यै नमः मंत्र का जप करें।
क्या बिना उपवास के व्रत कर सकते हैं
हाँ, फलाहार या हल्के भोजन के साथ भी व्रत किया जा सकता है।
इस व्रत का मुख्य लाभ क्या है
यह दांपत्य सुख, मानसिक शांति और संबंधों में सामंजस्य प्रदान करता है।
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