By पं. नीलेश शर्मा
इच्छाओं की पूर्ति, पापों की मुक्ति और मोक्ष की ओर पहला एकादशी व्रत

कामदा एकादशी उन दुर्लभ व्रतों में से एक मानी जाती है जिन्हें मनोकामना पूर्ति, पाप क्षय और मोक्ष की दिशा में अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की यह पहली एकादशी, नववर्ष के आरंभिक दिनों में ही जीवन को शुद्ध संकल्पों और भक्तिपूर्ण अनुशासन से जोड़ने का अवसर देती है। भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित यह व्रत श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाए तो केवल वर्तमान जीवन ही नहीं, सूक्ष्म स्तर पर कर्म और संस्कारों की दिशा भी बदलने की क्षमता रखता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार कामदा एकादशी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। यह चंद्रमा के बढ़ते चरण की ग्यारहवीं तिथि होती है और चैत्र नवरात्र के समापन के बाद पड़ने वाली पहली शुक्ल एकादशी भी है, इसलिए वर्ष की पहली बड़ी एकादशी के रूप में विशेष महत्व रखती है।
| विवरण | तिथि और समय |
|---|---|
| कामदा एकादशी 2026 | रविवार, 29 मार्च 2026 |
| एकादशी तिथि प्रारंभ | 28 मार्च 2026, प्रातः 08 बजकर 47 मिनट |
| एकादशी तिथि समाप्त | 29 मार्च 2026, प्रातः 07 बजकर 48 मिनट |
| पारण तिथि | 30 मार्च 2026, सोमवार |
| पारण का समय | प्रातः 06 बजकर 16 मिनट से प्रातः 07 बजकर 11 मिनट तक |
| द्वादशी समाप्ति क्षण | प्रातः 07 बजकर 11 मिनट |
संकेत यह है कि व्रत एकादशी तिथि के अनुरूप 29 मार्च 2026 को रखा जाएगा और पारण 30 मार्च की प्रातः, द्वादशी के भीतर, निर्धारित समय सीमा में किया जाएगा।
संस्कृत में कामदा शब्द का अर्थ है इच्छाओं को प्रदान करने वाली। इस दृष्टि से कामदा एकादशी वह व्रत है जिसे इच्छापूर्ति करने वाली एकादशी भी कहा जा सकता है।
वराह पुराण और अन्य ग्रंथों में इस व्रत का विस्तृत माहात्म्य मिलता है। महाभारत के प्रसंग में भी श्रीकृष्ण द्वारा धर्मराज युधिष्ठिर को कामदा एकादशी के फल का वर्णन मिलता है। इन वर्णनों से स्पष्ट होता है कि यह व्रत केवल किसी एक विशेष फल के लिए नहीं बल्कि
के लिए अत्यंत उपयोगी माना गया है।
मान्यता यह भी है कि कामदा एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति और उसके परिवार पर लगे विभिन्न प्रकार के श्रापों से राहत मिल सकती है। शास्त्रीय कथाओं में यह तक कहा गया है कि यदि कोई गंभीर पाप, जैसे ब्राह्मण हत्या जैसा विचार भी मन पर बोझ बनकर बैठा हो, तो सच्चे प्रायश्चित के साथ किया गया यह व्रत पाप बोझ को हल्का करने में सहायक बनता है। विवाहित दंपतियों के लिए यह व्रत संतान प्राप्ति की दृष्टि से भी शुभ माना गया है।
कामदा एकादशी का एक और महत्वपूर्ण पक्ष मोक्ष से संबंधित है। विष्णु भक्त परंपरा में यह बताया गया है कि जो साधक नियमपूर्वक, श्रद्धा और संयम के साथ कामदा एकादशी का पालन करता है, उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति का मार्ग सरल होता है।
यहाँ मोक्ष का अर्थ केवल मृत्यु के बाद किसी लोक में जाना भर नहीं बल्कि
भी है। इस दृष्टि से कामदा एकादशी जीवन की दिशा को संसारकेंद्रित सोच से उठाकर ईश्वरकेंद्रित विचारों की ओर मोड़ने वाली तिथि बन जाती है।
कामदा एकादशी का व्रत केवल एक दिन की तिथि तक सीमित नहीं बल्कि दशमी से द्वादशी तक चलता अनुशासन माना जाता है।
इस प्रकार दशमी से ही यह व्रत, साधक के लिए एक क्रमबद्ध आत्मसंयम की प्रक्रिया शुरू कर देता है।
चैत्र शुक्ल एकादशी के दिन व्रत और पूजन की सामान्य विधि इस प्रकार अपनाई जा सकती है।
पूरे दिन का केंद्र मन की सजगता और भगवत स्मरण होना चाहिए, केवल भोजन त्यागना पर्याप्त नहीं माना जाता।
कामदा एकादशी को शास्त्रों में विशेष रूप से सात्त्विक आहार और निराहार तप दोनों के संतुलन का दिन बताया गया है।
स्वस्थ और समर्थ साधक केवल जल या फलाहार पर भी व्रत रख सकते हैं। किन्तु हर स्थिति में मन में यह भावना रहे कि आज का दिन इंद्रिय सुख के लिए नहीं बल्कि आत्मिक शुद्धि के लिए है।
पारण का अर्थ है व्रत का विधिवत समापन। कामदा एकादशी का पारण द्वादशी तिथि में, निर्धारित समय के भीतर किया जाता है।
कामदा एकादशी 2026 के लिए पारण 30 मार्च की प्रातः 06 बजकर 16 मिनट से 07 बजकर 11 मिनट के बीच करना श्रेष्ठ माना गया है।
व्रत पारण की सामान्य प्रक्रिया
इस प्रकार व्रत की शुरुआत से लेकर पारण तक पूरा क्रम भगवान की स्मृति और सेवा भाव से जुड़ा रहता है।
कामदा एकादशी पर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण के नामों का जप और स्तुति अत्यंत शुभ मानी जाती है।
इन सबके साथ साथ हरि नाम जप, जैसे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे, मन को एकाग्र करने और सांसारिक चिंताओं से ऊपर उठाने में सहायक माने जाते हैं।
कामदा एकादशी व्रत कथा का उल्लेख प्राचीन समय से होता रहा है। परंपरा में इसे पहले महर्षि वशिष्ठ द्वारा महाराज दिलीप को सुनाई गई कथा से भी जोड़ा गया है।
यही महाराज दिलीप आगे चलकर भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम के परदादा बने। इस संदर्भ से यह संकेत मिलता है कि कामदा एकादशी केवल एक साधारण व्रत नहीं बल्कि राजधर्म, कुलधर्म और लोककल्याण से भी जुड़ा हुआ व्रत माना गया है।
कथाएँ सामान्यतः यह संदेश देती हैं कि इस व्रत के प्रभाव से भयंकर पापों का भी शमन हो सकता है, बंधन में बंधे जीवों को मुक्ति मिल सकती है और श्रापग्रस्त लोगों के जीवन में भी नया संयम और संतुलन आ सकता है।
आज के समय में जब इच्छाएँ अनगिनत और धैर्य सीमित होता जा रहा है, कामदा एकादशी 2026 यह याद दिलाती है कि हर इच्छा के पीछे भागना समाधान नहीं बल्कि सही इच्छाओं को पहचानना और अनावश्यक कामनाओं को शांत करना ही सच्ची प्रगति है।
यह व्रत सिखाता है कि
जो व्यक्ति कामदा एकादशी 2026 को अवसर मानकर अपने भीतर की कुछ नकारात्मक आदतों को छोड़ने और कुछ नई सात्त्विक आदतें अपनाने का संकल्प लेता है, उसके लिए यह तिथि अगले कई महीनों की आध्यात्मिक दिशा तय कर सकती है।
कामदा एकादशी 2026 कब है और पारण कब किया जाएगा कामदा एकादशी 2026 रविवार 29 मार्च 2026 को पड़ेगी। एकादशी तिथि 28 मार्च की प्रातः 08 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर 29 मार्च की प्रातः 07 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। व्रत का पारण 30 मार्च 2026 सोमवार को प्रातः 06 बजकर 16 मिनट से 07 बजकर 11 मिनट के बीच करना श्रेष्ठ माना जाता है।
कामदा एकादशी को चैत्र शुक्ल एकादशी या वर्ष की पहली एकादशी क्यों कहा जाता है यह एकादशी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में आती है और हिंदू नववर्ष के बाद पहली शुक्ल एकादशी होती है। साथ ही यह चैत्र नवरात्र के बाद पड़ती है, इसलिए इसे चैत्र शुक्ल एकादशी या वर्ष की प्रमुख आरंभिक एकादशी के रूप में माना जाता है।
कामदा एकादशी व्रत में क्या खाना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए व्रती को इस दिन चावल, मूंग दाल, गेहूँ, जौ और अन्य अनाज से बचना चाहिए। फल, दूध, दही, सूखे मेवे और हल्का सात्त्विक फलाहार लिया जा सकता है, या सामर्थ्य हो तो केवल जल या फल पर व्रत रखा जा सकता है।
कामदा एकादशी व्रत से कौन से आध्यात्मिक लाभ बताए गए हैं शास्त्रों में वर्णन है कि कामदा एकादशी व्रत से पापों का शमन, श्रापों से मुक्ति, गुणों की पुनः प्राप्ति, संतान सुख और अंततः मोक्ष की दिशा में प्रगति जैसे अनेक आध्यात्मिक लाभ प्राप्त हो सकते हैं, यदि व्रत श्रद्धा और नियम से किया जाए।
कामदा एकादशी 2026 को जीवन में अधिक सार्थक कैसे बनाया जा सकता है यदि इस एकादशी पर केवल उपवास तक सीमित न रहकर मन में यह संकल्प लिया जाए कि आगे जीवन में अधिक सत्यनिष्ठ, संयमी और ईश्वरकेंद्रित दृष्टि अपनाई जाएगी, नियमित नाम जप और व्रत साधना को स्थान दिया जाएगा, तो कामदा एकादशी 2026 मनोकामना पूर्ति के साथ साथ गहरी आत्मिक शांति का मार्ग भी खोल सकती है।
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