करडैयन नोम्बु 2026: सावित्री नोम्बु व्रत तिथि, समय और महत्व

By पं. सुव्रत शर्मा

14 मार्च 2026 को मनाए जाने वाले करडैयन नोम्बु का समय, सराडू और आध्यात्मिक महत्व जानें

करडैयन नोम्बु 2026: तिथि, समय और सराडू पहनने की जानकारी

सामग्री तालिका

दक्षिण भारतीय, विशेषकर तमिल परंपरा में करडैयन नोम्बु 2026 या सावित्री नोम्बु व्रतम विवाहिता स्त्रियों के लिए अत्यंत श्रद्धा और भाव से किया जाने वाला व्रत माना जाता है। इस दिन पत्नी अपने पति के दीर्घायु, आरोग्य और सुस्थिर वैवाहिक जीवन के लिए संकल्पपूर्वक उपवास रखती है और देवी के सामने सावित्री जैसी अटूट निष्ठा का आदर्श दोहराती है।

वर्ष 2026 में करडैयन नोम्बु 14 मार्च 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन उपवास भंग करने और सरडु बांधने का शुभ समय रात 07 बजकर 30 मिनट से 08 बजकर 30 मिनट के बीच माना गया है। तमिल पंचांग के अनुसार यह वही विशेष काल है जब मासी माह समाप्त होकर पंगुनी माह का आरम्भ होता है। इसी संधिकाल में करडैयन नोम्बु का व्रत पूर्ण किया जाता है, करडई नैवेद्य अर्पित किया जाता है और करडैयन नोम्बु सरडु गले में धारण किया जाता है।

करडैयन नोम्बु 2026: तिथि, समय और मास परिवर्तन

करडैयन नोम्बु का समय निर्धारण तमिल पंचांग में मासी से पंगुनी में होने वाले परिवर्तन पर आधारित होता है। यह परिवर्तन केवल तिथि पर नहीं बल्कि सूक्ष्म रूप से सूर्य के संक्रान्ति क्षण से भी जुड़ा माना जाता है।

करडैयन नोम्बु 2026: तिथि और उपवास भंग का समय

विवरणतिथि और समय
पर्व का नामकरडैयन नोम्बु 2026
अन्य नामसावित्री नोम्बु व्रतम
पर्व की तिथि14 मार्च 2026, शनिवार
तमिल मास परिवर्तनमासी से पंगुनी का संधिकाल
व्रत तोड़ने और सरडु पहनने का समय14 मार्च, रात 07:30 से 08:30, भारत मानक समय
पर्व की मूल भावनापति के दीर्घायु, स्वास्थ्य और वैवाहिक सुख के लिए व्रत

भारत से बाहर स्थित तमिल परिवार भी इसी दिन, अपने स्थानीय समय अनुसार, मासी पंगुनी के संधिकाल में यह व्रत और सरडु बांधने की परंपरा निभाते हैं।

करडैयन नोम्बु क्या है और सावित्री नोम्बु व्रतम क्यों कहा जाता है

करडैयन नोम्बु का अर्थ

इस व्रत के नाम में दो शब्द महत्वपूर्ण हैं।

  • करडई एक विशेष प्रकार के प्रसाद या नैवेद्य का नाम है जो इस दिन बनाया जाता है। यह मुख्यतः चावल के आटे, काले चने या अन्य पारंपरिक सामग्री से तैयार किया हुआ अदई जैसा व्यंजन होता है।
  • नोम्बु का अर्थ है व्रतम या उपवास, जिसे दृढ़ संकल्प के साथ किया जाता है।

इसीलिए इस दिन का नाम करडैयन नोम्बु पड़ा, क्योंकि उपवास तोड़ते समय विशेष रूप से यही करडई तैयार कर देवी के समक्ष अर्पित की जाती है और वही प्रसाद के रूप में ग्रहण की जाती है।

सावित्री नोम्बु व्रतम: सत्यमान सावित्री की कथा से जुड़ाव

करडैयन नोम्बु को सावित्री नोम्बु व्रतम भी कहा जाता है, क्योंकि यह व्रत सत्यवान सावित्री की महान कथा से प्रेरणा लेता है।

कथा के अनुसार

  • राजकुमारी सावित्री ने अपने जीवन साथी के रूप में सत्यवान को चुना, जबकि पहले से ज्ञात था कि उसकी आयु अल्प है।
  • विवाह के बाद जब सत्यवान की मृत्यु का समय निकट आया तब सावित्री ने अत्यंत कठोर व्रत, उपवास और साधना का संकल्प लिया।
  • नियत दिन पर जब यमराज सत्यवान का प्राण लेने आए, तो सावित्री उनकी पीछे पीछे चलती रही, उनसे संवाद करती रही और अपने व्रत तथा निष्ठा की शक्ति से उन्हें प्रसन्न कर लिया।
  • यमराज ने उसे वर माँगने का अवसर दिया और सावित्री ने बुद्धिमानी से ऐसे वर माँगे कि अंततः उन्हें सत्यवान का जीवन लौटा देना पड़ा।

इसीलिए सावित्री को आदर्श पत्नी, धैर्य और निष्ठा की प्रतीक माना जाता है और करडैयन नोम्बु के दिन स्त्रियाँ उसी भाव से अपने पति की दीर्घायु और सुरक्षा के लिए व्रत रखती हैं।

करडैयन नोम्बु 2026 पर व्रत कैसे रखा जाता है

व्रत का संकल्प और उपवास

करडैयन नोम्बु का व्रत

  • मुख्य रूप से विवाहिता स्त्रियाँ रखती हैं।
  • कुछ परिवारों में विवाह योग्य कन्याएँ भी अच्छे जीवन साथी के लिए, सावित्री की आदर्श प्रेरणा के साथ, यह व्रत रखती हैं।

व्रत का क्रम सामान्यतः इस प्रकार होता है।

  • दिन भर या निर्धारित समय तक उपवास रखा जाता है।
  • जल या फलाहार के नियम परिवार की परंपरा के अनुसार अपनाए जाते हैं।
  • व्रत तोड़ने का समय मासी से पंगुनी में परिवर्तन के क्षण के साथ ही रखा जाता है, जो 2026 में रात 07:30 से 08:30 के बीच है।

करडैयन नोम्बु 2026: व्रत और पूजन क्रम

क्रमक्या किया जाता है
पहला चरणप्रातः स्नान कर स्वच्छ और पारंपरिक वस्त्र धारण करना
दूसरा चरणदेवी और सावित्री के स्मरण के साथ व्रत का संकल्प लेना
तीसरा चरणघर में या मंदिर में पूजन स्थान तैयार करना
चौथा चरणकरडई नैवेद्य पकाना और अन्य पूजन सामग्री सजा कर रखना
पाँचवाँ चरणमासी पंगुनी संधिकाल में दीप, नैवेद्य और मंत्रों के साथ पूजा करना
छठा चरणकरडई को घी या मक्खन के साथ देवी को अर्पित करना
सातवाँ चरणनोंबु सरडु गले में धारण करना और उसी समय व्रत तोड़ना

करडई क्या है और करडैयन नोम्बु अदई का महत्व

करडई नैवेद्य का प्रतीकात्मक अर्थ

इस व्रत में जो विशेष व्यंजन बनाया जाता है, उसे करडैयन नोम्बु अदई या संक्षेप में करडई कहा जाता है। परंपरा के अनुसार

  • इसे चावल के आटे, काले चने या अन्य पारंपरिक दालों, मसालों और घी के साथ बनाया जाता है।
  • मीठे और नमकीन दोनों रूपों में करडई तैयार करने की भी परंपरा है, जो अलग अलग परिवारों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकती है।

कथाओं के अनुसार माना जाता है कि

  • सावित्री ने भी व्रत के पश्चात इसी प्रकार का व्यंजन बनाकर यमराज को नैवेद्य रूप में अर्पित किया और अपने पति के प्राण बचने के लिए आभार व्यक्त किया।
  • इसी भाव से इस व्यंजन का नाम और महत्व दोनों व्रत के केंद्र में स्थापित हो गए।

आधार भाव यह है कि

  • स्त्री अपने श्रम, प्रेम और विश्वास से तैयार किया हुआ यह प्रसाद
  • देवी और धर्म दोनों के सामने समर्पित करती है,
    ताकि वैवाहिक जीवन में स्थिरता, संरक्षण और समृद्धि बनी रहे।

करडैयन नोम्बु सरडु क्या है

पीले धागे का आध्यात्मिक अर्थ

करडैयन नोम्बु का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण पक्ष है सरडु बांधने की परंपरा।

  • यह पीले रंग का पवित्र धागा होता है, जिसे कभी कभी हल्दी से रंगा जाता है और उसमें एक छोटी सी माला या फूल भी लगाया जाता है।
  • इस धागे को करडैयन नोम्बु सरडु कहा जाता है।

इसे गले में बाँधते समय स्त्री यह संकल्प रखती है कि

  • पति के जीवन में दीर्घायु, स्वास्थ्य और धर्म पालन बने रहें।
  • घर परिवार में सम्मान, प्रेम और समर्पण बना रहे।

अनेक परिवारों में यह सरडु

  • करडैयन नोम्बु के बाद भी गले में सुरक्षित रखा जाता है,
    जब तक अगली किसी विशेष तिथि या परिवार की परंपरा के अनुसार इसे बदलने का समय न आ जाए।

करडैयन नोम्बु 2026: मासी से पंगुनी में परिवर्तन का महत्व

करडैयन नोम्बु केवल सावित्री की कथा से ही नहीं बल्कि तमिल पंचांग के संधिकाल से भी जुड़ा हुआ है।

  • यह व्रत उस समय किया जाता है जब तमिल मास मासी समाप्त होकर पंगुनी का आरम्भ होता है।
  • इस समय को बहुत सूक्ष्म रूप से सूर्य की नई स्थिति, ग्रहों के संतुलन और धर्मसंकेत से जोड़ा जाता है।

इसी संधिकाल में

  • स्त्रियाँ अपने जीवन में
    • पुराने भय, असुरक्षा और अशांति को पीछे छोड़ने
    • तथा नए मास के साथ विश्वास, धैर्य और स्थिरता को अपनाने

का संकल्प लेती हैं।

इस दृष्टि से करडैयन नोम्बु 2026 केवल पारिवारिक व्रत नहीं बल्कि एक नए अध्याय की शांत शुरुआत भी माना जा सकता है।

करडैयन नोम्बु 2026 से जीवन में क्या सीख ली जा सकती है

करडैयन नोम्बु 2026 स्त्री और पुरुष दोनों के लिए

  • निष्ठा
  • पारस्परिक सम्मान
  • और संबंधों में जिम्मेदारी

का सजीव स्मरण बन सकता है।

स्त्री के लिए यह व्रत

  • केवल पति की दीर्घायु के लिए प्रार्थना नहीं बल्कि स्वयं के भीतर
    • धैर्य
    • विश्वास
    • और निर्णय क्षमता

को मजबूत करने का अवसर भी है, जैसा सावित्री ने किया।

पुरुष के लिए यह दिन

  • पत्नी के प्रेम, त्याग और व्रत के प्रति सम्मान जागृत करने वाला दिन बन सकता है,
    ताकि वैवाहिक जीवन केवल अधिकारों पर नहीं बल्कि आभार, सहयोग और समर्पण पर खड़ा रहे।

परिवार यदि इस दिन

  • मिलकर पूजा करे
  • प्रसाद साझा करे
  • और एक दूसरे के प्रति सम्मान के संकल्प को दोहराए

तो करडैयन नोम्बु 2026 उनके लिए दीर्घकाल तक सुरक्षित, संतुलित और सद्भावपूर्ण वैवाहिक जीवन की शुभ कामना का आधार बन सकता है।

सामान्य प्रश्न

करडैयन नोम्बु 2026 कब है और व्रत तोड़ने का समय क्या है
करडैयन नोम्बु 2026 14 मार्च 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। व्रत तोड़ने और करडैयन नोम्बु सरडु धारण करने का शुभ समय रात 07:30 से 08:30 के बीच रहेगा, जब तमिल मास मासी से पंगुनी में प्रवेश का संधिकाल होता है।

करडैयन नोम्बु को सावित्री नोम्बु व्रतम क्यों कहा जाता है
यह व्रत सत्यवान सावित्री की प्रेरणादायक कथा पर आधारित है, जिसमें सावित्री ने कठोर व्रत, प्रार्थना और बुद्धिमत्ता के बल पर अपने पति को यमराज से वापस प्राप्त किया। इसीलिए विवाहिता स्त्रियाँ इसी आदर्श को याद करते हुए यह व्रत रखती हैं।

करडई प्रसाद क्या होता है और इसका व्रत में क्या महत्व है
करडई चावल के आटे और अन्य पारंपरिक सामग्री से बनाया जाने वाला विशेष व्यंजन है, जिसे करडैयन नोम्बु अदई भी कहा जाता है। मान्यता है कि सावित्री ने भी इसी प्रकार का व्यंजन बना कर यमराज को अर्पित किया था, इसलिए इस व्यंजन को व्रत का मुख्य नैवेद्य माना जाता है और उसी से व्रत तोड़ा जाता है।

करडैयन नोम्बु सरडु क्यों बाँधा जाता है और इसका क्या अर्थ है
पीले रंग का यह पवित्र धागा, जिसे करडैयन नोम्बु सरडु कहा जाता है, मासी से पंगुनी के संधिकाल में गले में बाँधा जाता है। यह पति के दीर्घायु, वैवाहिक सुख और दांपत्य संबंधों की सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है और स्त्री का संकल्प होता है कि वह सावित्री जैसी निष्ठा और धैर्य को अपने जीवन में स्थिर रखेगी।

करडैयन नोम्बु 2026 से वैवाहिक जीवन के लिए क्या संदेश लिया जा सकता है
यह व्रत सिखाता है कि केवल अनुष्ठान ही नहीं बल्कि विश्वास, संवाद, त्याग और कृतज्ञता भी वैवाहिक जीवन के आधार हैं। यदि पति पत्नी दोनों इस दिन एक दूसरे के प्रति सम्मान, सहयोग और संरक्षण का संकल्प दोहराएँ, तो करडैयन नोम्बु 2026 उनके संबंधों में स्थिरता और गहराई लाने वाला दिन बन सकता है।

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लेखक

पं. सुव्रत शर्मा

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