By पं. नरेंद्र शर्मा
लक्ष्मी पंचमी 2026 का महत्व, समृद्धि, घर में लक्ष्मी का स्वागत और शुभ प्रारंभ

लक्ष्मी पंचमी 2026 चैत्र नवरात्र और नव वर्ष की शुरुआत में आने वाला ऐसा दिवस है जिसे धन, समृद्धि और सौभाग्य की दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। वर्ष की शुरुआती सप्ताह में जब घर परिवार नए संकल्पों और योजनाओं के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में रहते हैं, उसी समय लक्ष्मी पंचमी साधक को यह अवसर देती है कि वह अपनी अर्थव्यवस्था, गृहस्थी और कर्मक्षेत्र को देवी महालक्ष्मी की कृपा के साथ जोड़कर नए सिरे से व्यवस्थित करे। इस दिन की सबसे विशेष बात यह है कि यह केवल धन प्राप्ति का पर्व नहीं बल्कि शुभारंभ, शुद्धता और सत्कार्य की दिशा में उठाया गया एक सामूहिक कदम भी माना जाता है।
लक्ष्मी पंचमी हमेशा चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। वैदिक समय विभाजन के अनुसार यह तिथि कल्पादि से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए इसे अत्यंत पवित्र आरंभिक काल माना गया है। वर्ष 2026 में लक्ष्मी पंचमी के संबंध में तिथि और समय इस प्रकार हैं।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पर्व | लक्ष्मी पंचमी 2026 |
| मास और पक्ष | चैत्र मास, शुक्ल पक्ष |
| वार | सोमवार |
| लक्ष्मी पंचमी की तिथि | 23 मार्च 2026 |
| पंचमी तिथि प्रारंभ | 22 मार्च 2026, रात्रि 09:16 बजे |
| पंचमी तिथि समाप्त | 23 मार्च 2026, सायं 06:38 बजे |
लक्ष्मी पंचमी 2026 सोमवार 23 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। पंचमी तिथि 22 मार्च की रात 09 बजकर 16 मिनट पर आरंभ होकर 23 मार्च की शाम 06 बजकर 38 मिनट तक रहेगी। चूंकि 23 मार्च के दिन सूर्योदय से लेकर सायंकाल तक पंचमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए इसी दिन लक्ष्मी पंचमी व्रत, लक्ष्मी पूजा और विशेष अनुष्ठान करना शास्त्र सम्मत माना जाएगा।
लक्ष्मी पंचमी को केवल सामान्य पंचमी नहीं बल्कि कल्पादि तिथि माना गया है। वैदिक समय गणना में कल्प एक बहुत लंबी अवधि को कहा जाता है और इस दृष्टि से चैत्र शुक्ल पंचमी उस कल्प के आरंभ का सूचक मानी जाती है। इसलिए इस तिथि पर की गई पूजा को ब्रह्मांडीय स्तर पर शुभ आरंभ का प्रतीक माना गया है।
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष भर में कुल सात कल्पादि दिन माने जाते हैं। इन सात कल्पादि दिनों में गुड़ी पड़वा या उगादि, अक्षय तृतीया और अन्य कुछ विशेष तिथियाँ शामिल हैं जो नए आरंभ, स्थायी शुभ फल और दीर्घकालिक समृद्धि से जुड़ी होती हैं। लक्ष्मी पंचमी इन्हीं सात विशेष कल्पादि दिनों में से एक है, इसलिए इसे वर्ष के महत्वपूर्ण आरंभिक पर्वों की श्रेणी में रखा गया है।
लक्ष्मी पंचमी का दिन हिंदू नव वर्ष के पहले सप्ताह में आता है, जब पूरा वर्ष अभी खुला हुआ भविष्य बनकर सामने होता है। ऐसे समय पर माता लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है, क्योंकि इससे नए वर्ष के लिए धन की गति, व्यापार की दिशा और गृहस्थ जीवन की स्थिरता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की मान्यता है।
इस दिन अनेक घरों में एक दिन का व्रत रखा जाता है। गृहस्थ केवल घर में ही नहीं बल्कि दुकान, कार्यालय और व्यापारिक प्रतिष्ठान में भी मां लक्ष्मी की विशेष पूजा करते हैं। कई व्यापारिक घराने इस दिन विस्तृत पूजा का आयोजन करते हैं, जिसमें लेखा पुस्तिकाओं, तिजोरी, व्यापार से जुड़ी वस्तुओं और पूरे संस्थान के लिए लक्ष्मी कृपा की प्रार्थना की जाती है। लक्ष्मी पंचमी 2026 उन परिवारों और व्यापारियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है जो वर्ष की शुरुआत को संगठित, अनुशासित और ईश्वर कृपा से युक्त भाव के साथ जीना चाहते हैं।
कई बार नाम की समानता के कारण लक्ष्मी पंचमी और वासंती श्री पंचमी को लेकर भ्रम हो जाता है। लक्ष्मी पंचमी चैत्र मास की शुक्ल पंचमी को आती है और यह पूरी तरह देवी लक्ष्मी को समर्पित पर्व है, जहां धन, सुख और समृद्धि की साधना की जाती है। इसे श्री पंचमी या श्री व्रत भी कहा जाता है, क्योंकि श्री नाम स्वयं मां लक्ष्मी का एक अत्यंत प्रिय स्वरूप माना गया है।
दूसरी ओर वसंत पंचमी माघ मास की शुक्ल पंचमी को आती है, जिसे कई स्थानों पर श्री पंचमी के नाम से भी पुकारा जाता है, लेकिन यह पर्व मुख्य रूप से देवी सरस्वती को समर्पित होता है। उस दिन ज्ञान, कला और शिक्षा की देवी की पूजा की जाती है। इस प्रकार लक्ष्मी पंचमी और वसंत पंचमी दोनों अलग अलग मास, अलग अलग भाव और अलग अलग देवियों से संबंधित पर्व हैं।
लक्ष्मी पंचमी के दिन भक्त प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लेते हैं। एक दिन का यह व्रत शरीर की शुद्धि के साथ साथ मन को भी संयमित करने का माध्यम बनता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत में अन्न ग्रहण नहीं किया जाता। भक्त दिन भर फल, दूध और मिठाई इत्यादि का सेवन करते हैं और भोजन की अपेक्षा पूजा, जप और स्तोत्र पाठ पर अधिक ध्यान रखते हैं।
कई घरों में लक्ष्मी पंचमी के व्रत को परिवार के सभी सदस्यों की ओर से एक सामूहिक संकल्प की तरह रखा जाता है। जिस घर में नए व्यापार की योजना हो, नई नौकरी की संभावना हो या पिछले समय में आर्थिक कठिनाइयाँ रही हों, वहाँ इस व्रत के माध्यम से मन में एक सकारात्मक और अनुशासित दृष्टिकोण विकसित करने की कोशिश की जाती है।
लक्ष्मी पंचमी की पूजा विधि सरल होते हुए भी अत्यंत अर्थपूर्ण है। भक्तों के लिए प्रमुख बिंदु यह हैं कि पूजा शुद्ध स्थान पर, स्वच्छ मन से और यथासंभव पंचमी तिथि के प्रभाव में की जाए।
लक्ष्मी पंचमी 2026 पर पूजा का क्रम इस प्रकार रखा जा सकता है।
इस प्रकार लक्ष्मी पंचमी 2026 पर घर और कार्यस्थल दोनों स्थानों पर एक ही भाव से लक्ष्मी पूजा करना पूरे वर्ष के लिए संतुलित आर्थिक दृष्टि और नैतिक व्यावहारिकता का आधार बन सकता है।
लक्ष्मी पंचमी पर केवल औपचारिक पूजा ही नहीं बल्कि स्तोत्र पाठ को भी विशेष महत्व दिया गया है। विशेषकर जिनके जीवन में आर्थिक चिंता, बार बार बाधित होते कार्य या मानसिक अस्थिरता महसूस हो, उनके लिए यह दिन मन को स्थिर और सकारात्मक करने में सहायक बन सकता है।
इस दिन भक्तों को Kanakadhara Stotram का पाठ करने की सलाह दी जाती है। यह स्तोत्र आदि शंकराचार्य से संबंधित माना जाता है और इसमें मां लक्ष्मी से करुणा तथा कृपा की प्रार्थना की गई है। इसके साथ साथ Lakshmi Stotram और Shri Suktam भी अत्यंत प्रभावी माने गए हैं। Shri Suktam में महालक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों और गुणों का वर्णन है, जो साधक के मन में समृद्धि की शुद्ध और सात्त्विक समझ विकसित करने में सहायक हो सकता है। लक्ष्मी पंचमी 2026 पर यदि इन स्तोत्रों का पाठ श्रद्धा और एकाग्रता के साथ किया जाए, तो यह केवल धन वृद्धि के लिए नहीं बल्कि जिम्मेदार और नैतिक जीवन शैली को मजबूत करने के लिए भी प्रेरणा दे सकता है।
मान्यता है कि लक्ष्मी पंचमी के दिन की गई पूजा, व्रत और स्तोत्र पाठ से धन, सुख, सफलता और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन मां लक्ष्मी अपने भक्तों के घर में स्थायी रूप से निवास करने की भावना से पूजी जाती हैं। प्राचीन काल से यह विश्वास चला आ रहा है कि चैत्र शुक्ल पंचमी पर महालक्ष्मी की पूजा, यदि सच्चे मन से और शास्त्र सम्मत विधि से की जाए, तो वह कभी निष्फल नहीं जाती।
इसका अर्थ केवल तत्काल धन लाभ नहीं बल्कि लंबे समय तक चलने वाली स्थिरता, सही निर्णय लेने की क्षमता और धन के सही उपयोग की प्रेरणा भी है। लक्ष्मी पंचमी 2026 उन सभी के लिए एक संकेत बन सकती है कि धन को केवल संग्रहित करने की वस्तु न मानकर उसे सेवा, धर्म और परिवार के हित में संतुलित ढंग से प्रयोग किया जाए।
लक्ष्मी पंचमी 2026 केवल धन प्राप्ति की आकांक्षा का दिन नहीं बल्कि यह याद दिलाने वाला अवसर है कि समृद्धि तब स्थायी बनती है जब वह ईमानदारी, परिश्रम और करुणा के साथ जुड़ी हो। जो लोग इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा के साथ साथ अपने खर्च, बचत और दान के संतुलन पर भी विचार करेंगे, उनके लिए यह पर्व आने वाले वर्ष की दिशा तय करने वाला बन सकता है। मन में यह संकल्प रखा जाए कि अगले वर्ष में धन का अर्जन भी सात्त्विक होगा और उसका उपयोग भी विवेकपूर्ण होगा, तो लक्ष्मी पंचमी 2026 जीवन में आंतरिक और बाहरी दोनों स्तरों पर स्थिरता और संतोष का आधार बन सकती है।
लक्ष्मी पंचमी 2026 कब है और पंचमी तिथि का समय क्या रहेगा लक्ष्मी पंचमी 2026 सोमवार 23 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। पंचमी तिथि 22 मार्च 2026 को रात 09 बजकर 16 मिनट पर प्रारंभ होकर 23 मार्च 2026 को शाम 06 बजकर 38 मिनट पर समाप्त होगी, इसलिए मुख्य पूजन 23 मार्च को ही किया जाएगा।
लक्ष्मी पंचमी को कल्पादि तिथि क्यों कहा जाता है वैदिक समय गणना के अनुसार चैत्र शुक्ल पंचमी कल्प की शुरुआत से संबंधित मानी जाती है, इसलिए इसे कल्पादि तिथि कहा जाता है। हिंदू पंचांग में वर्ष भर में सात कल्पादि दिन बताए गए हैं, जिनमें गुड़ी पड़वा या उगादि, अक्षय तृतीया और लक्ष्मी पंचमी जैसे पर्व शामिल हैं।
क्या लक्ष्मी पंचमी और वसंत पंचमी एक ही पर्व हैं लक्ष्मी पंचमी चैत्र मास की शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है और यह देवी लक्ष्मी को समर्पित होती है, जबकि वसंत पंचमी माघ मास की शुक्ल पंचमी को आती है और देवी सरस्वती की आराधना का दिन है। दोनों तिथि, मास और उपास्य देवी के आधार पर अलग अलग पर्व हैं, हालाँकि कुछ स्थानों पर वसंत पंचमी को भी श्री पंचमी कहा जाता है।
लक्ष्मी पंचमी 2026 पर व्रत रखने और क्या क्या नहीं खाना चाहिए लक्ष्मी पंचमी के व्रत में भक्त सामान्यतः अन्न का सेवन नहीं करते। पूरे दिन फल, दूध और मिठाई आदि लेकर व्रत रखा जाता है और अधिक समय जप, पाठ और स्तोत्र पाठ में लगाने की परंपरा मानी जाती है।
लक्ष्मी पंचमी की पूजा से जीवन में कैसा परिवर्तन आ सकता है यदि लक्ष्मी पंचमी 2026 पर पूजा के साथ साथ धन के प्रति दृष्टिकोण भी बदला जाए, आय और व्यय में संतुलन रखा जाए और सेवा तथा दान के लिए भी कुछ अंश निर्धारित किया जाए, तो यह पर्व केवल एक दिन की पूजा न रहकर पूरे वर्ष की आर्थिक और नैतिक दिशा को सुव्यवस्थित करने वाला साधन बन सकता है।
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