By अपर्णा पाटनी
जानें 2026 में मासि मगम की सही तिथि, मगम नक्षत्र का समय और आध्यात्मिक महत्व

तमिल परंपरा में मासी मगम ऐसा पर्व है जो बाहरी और भीतर दोनों स्तरों पर शुद्धि और कृपा का अनुभव कराता है। इस दिन समुद्र, नदी या सरोवर के तट पर मंदिरों की शोभायात्रा, दीप, मंत्र और जल का संगम एक विशिष्ट आध्यात्मिक वातावरण बनाता है। वर्ष 2026 में मासी मगम मंगलवार, 3 मार्च 2026 को मनाया जाएगा, जब मगम नक्षत्र तमिल मास मासी में विद्यमान रहेगा। मगम नक्षत्र 2 मार्च 2026 को प्रातः 07 बजकर 51 मिनट पर प्रारंभ होकर 3 मार्च 2026 को प्रातः 07 बजकर 31 मिनट पर समाप्त होगा और इसी अवधि में मासी मगम का पर्व मनाया जाएगा।
मासी मगम की तिथि केवल अंग्रेजी कैलेंडर के आधार पर नहीं तय होती बल्कि तमिल मास और नक्षत्र की स्थिति पर निर्भर करती है। यह पर्व तमिल महीने मासी में तब मनाया जाता है जब मगम नक्षत्र विद्यमान हो। यही कारण है कि इसे मासी मगम या माासी मकाम कहा जाता है।
| विवरण | समय और तिथि |
|---|---|
| पर्व का दिन | मंगलवार, 3 मार्च 2026 |
| तमिल मास | मासी |
| मगम नक्षत्र प्रारंभ | 2 मार्च 2026, प्रातः 07:51 |
| मगम नक्षत्र समाप्त | 3 मार्च 2026, प्रातः 07:31 |
| पर्व निर्धारण का आधार | मासी मास में मगम नक्षत्र की उपस्थिति |
यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि सामान्यतः मगम नक्षत्र का संबंध पूर्णिमा से माना जाता है, पर हर वर्ष ऐसा संयोग नहीं बनता। इसी कारण मासी मगम की तिथि पूर्णिमा से सीधे नहीं बल्कि केवल मगम नक्षत्र से जोड़ी जाती है।
मासी मगम तमिल हिंदू परंपरा का एक प्रमुख उत्सव है जो विशेष रूप से तमिल भाषी समुदाय द्वारा श्रद्धा से मनाया जाता है। यह उत्सव जल, नक्षत्र और देवताओं के पावन संगम का प्रतीक माना जाता है। इस दिन मंदिरों की मूर्तियों को शोभायात्रा के रूप में समुद्र, नदी, झील या सरोवर के तट तक ले जाया जाता है और वहाँ उनका औपचारिक स्नान कराया जाता है।
इस शोभायात्रा में देवताओं के रथ, पालकी, वाद्य, मंत्रोच्चार और दीप के साथ भक्तों की भीड़ शामिल होती है। मूर्तियों के साथ साथ भक्तगण भी जल में आस्था के साथ डुबकी लगाते हैं, ताकि वे अपने पुराने पापों, मानसिक बोझ और नकारात्मक प्रवृत्तियों से मुक्त हो सकें। जल को यहां केवल तत्व नहीं बल्कि शुद्धि और कृपा का माध्यम माना जाता है।
मासी मगम के मूल में यह भावना निहित है कि जब मगम नक्षत्र, जो अपने आप में एक शुभ और राजसिक नक्षत्र माना जाता है, जल तत्व के साथ जुड़ता है तो मानसिक, आध्यात्मिक और कर्मगत शुद्धि के लिए विशेष अवसर बनता है। इस दिन की साधना व्यक्ति को यह अनुभव कराती है कि जैसे देव विग्रह जल में स्नान कर पुनः अलंकृत होते हैं, वैसे ही मनुष्य भी अपने भीतर के बोझ को धोकर नए भाव के साथ जीवन को आगे बढ़ा सकता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से मगम नक्षत्र, जिसे मगहा या मगम भी कहा जाता है, पूर्वजों, परंपरा, राजसत्ता और गरिमा से जुड़ा नक्षत्र माना जाता है। यह नक्षत्र जब तमिल मास मासी में आता है और विशेष रूप से जब समुद्र या पवित्र जल के स्नान से जोड़ा जाता है तब इसे पूर्वजों के आशीर्वाद, कर्म शुद्धि और जीवन में कुल की गरिमा बढ़ाने वाला माना जाता है।
हालाँकि सामान्य वर्णन में कहा जाता है कि मगम नक्षत्र प्रायः पूर्णिमा या पौर्णमी के साथ आता है, पर हर वर्ष यह संयोग अनिवार्य नहीं होता। इसलिए शास्त्रीय और पारंपरिक मान्यताओं में मासी मगम की तिथि को केवल मगम नक्षत्र की वास्तविक अवधि से जोड़ा गया है। वर्ष 2026 में यह अवधि 2 मार्च की सुबह से 3 मार्च की सुबह तक रहेगी, इसलिए मासी मगम का पर्व मंगलवार, 3 मार्च 2026 को मनाया जाएगा।
मासी मगम के दिन की पूजन परंपराएं सरल होते हुए भी अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती हैं। यह उत्सव विशेष रूप से समुद्र, नदी, झील या तालाब के किनारे स्थित मंदिरों में अधिक भव्य रूप से दिखाई देता है।
| अनुष्ठान | संक्षिप्त विवरण |
|---|---|
| देव विग्रह शोभायात्रा | मंदिरों से मूर्तियों को जलाशय तक ले जाया जाता है |
| तीर्थ स्नान | मूर्तियों का विधिपूर्वक जल स्नान कराया जाता है |
| भक्तों की डुबकी | श्रद्धालु स्वयं भी जल में डुबकी लगाते हैं |
| पूजा और आरती | तट पर विशेष पूजा, आरती और मंत्रोच्चार |
| प्रसाद और सेवा | प्रसाद वितरण और सेवा गतिविधियां |
भक्तगण प्रातःकाल स्नान कर पारंपरिक वस्त्र धारण करते हैं और परिवार सहित शोभायात्रा में शामिल होते हैं। तट पर पहुँचकर पहले देवताओं का जल स्नान, फिर विशेष पूजा, आरती और स्तुति की जाती है। इसके बाद भक्त अपने अपने भाव अनुसार जल में डुबकी लेकर आंतरिक शुद्धि और पुराने पापों की क्षमा की प्रार्थना करते हैं।
मासी मगम को केवल व्यक्तिगत पूजा तक सीमित नहीं माना जाता बल्कि यह सामूहिक साधना और सामाजिक सद्भाव का भी पर्व है। समुद्र या नदी तट पर हजारों लोगों का एक साथ एक ही भाव से उपस्थित होना स्वयं में एक विशेष आध्यात्मिक वातावरण बना देता है।
1. भीतर की शुद्धि का अवसर
जल में डुबकी लगाना यहां केवल बाहरी स्नान नहीं बल्कि भीतर की गिल्ट, भय और नकारात्मकता को छोड़ने का प्रतीक है। जो व्यक्ति इस दिन सचेत भाव से प्रार्थना करता है, उसके लिए यह एक मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक मुक्त अनुभव बन सकता है।
2. पारिवारिक और वंशीय आशीर्वाद की भावना
क्योंकि मगम नक्षत्र का संबंध भी पूर्वजों और कुल परंपरा से जोड़ा जाता है, इसलिए मासी मगम पर कई लोग अपने परिवार, पूर्वजों और आने वाली पीढ़ियों के कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं। यह भावना व्यक्ति को अपने मूल से जोड़ती है और कृतज्ञता को मजबूत करती है।
3. समुदाय और एकता का माहौल
विभिन्न स्थानों से आए भक्त एक ही जलाशय पर जुटते हैं। यह दृश्य इस बात का प्रतीक है कि भिन्न पृष्ठभूमियों के लोग भी आध्यात्मिकता और श्रद्धा के स्तर पर एक साथ खड़े हो सकते हैं। यह उत्सव सामाजिक दूरियों को कम करने में भी सहायक बनता है।
यद्यपि मासी मगम मूल रूप से तमिल हिंदू परंपरा से जुड़ा है, फिर भी इसकी छाप केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है। यह पर्व भारत के बाहर भी उन स्थानों पर मनाया जाता है, जहाँ तमिल समुदाय संख्या में अधिक है।
मासी मगम केवल एक वार्षिक पर्व नहीं बल्कि जीवन के लिए भी कुछ सूक्ष्म संकेत छोड़ जाता है। जल, नक्षत्र और देव विग्रह का यह संगम व्यक्ति को यह याद दिलाता है कि जीवन में समय समय पर रुककर स्वयं को धोना, साफ करना और नया करना भी आवश्यक है।
जो साधक इस दिन उपस्थित न भी हो सकें, वे भी अपने स्तर पर कुछ बातों पर ध्यान दे सकते हैं।
मासी मगम 2026 किस दिन पड़ेगा और नक्षत्र का समय क्या है
वर्ष 2026 में मासी मगम मंगलवार, 3 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। मगम नक्षत्र 2 मार्च 2026 को प्रातः 07:51 पर शुरू होकर 3 मार्च 2026 को प्रातः 07:31 पर समाप्त होगा और तमिल मास मासी में यही नक्षत्र अवधि मासी मगम के रूप में ग्रहण की जाएगी।
मासी मगम का संबंध पूर्णिमा से है या केवल नक्षत्र से
सामान्यतया माना जाता है कि मगम नक्षत्र अक्सर पौर्णमी या पूर्णिमा के आसपास आता है, लेकिन हर वर्ष यह संयोग अनिवार्य नहीं होता। मासी मगम का वास्तविक निर्धारण तमिल मास मासी में मगम नक्षत्र की उपस्थिति पर आधारित होता है, न कि सीधे पूर्णिमा तिथि पर।
इस दिन देव विग्रहों को जलाशय तक क्यों ले जाया जाता है
मासी मगम पर मंदिरों की मूर्तियों को समुद्र, नदी या झील तक ले जाकर औपचारिक स्नान कराया जाता है। इसका भाव यह है कि जैसे देव विग्रह जल से शुद्ध होकर पुनः अलंकृत होते हैं, वैसे ही भक्तगण भी जल में डुबकी लगाकर अपने पापों और मानसिक बोझ से मुक्ति की प्रार्थना कर सकें।
मासी मगम केवल तमिलनाडु में मनाया जाता है या अन्य देशों में भी
मासी मगम का मूल केंद्र तमिलनाडु और तमिल भाषी क्षेत्र हैं, पर यह पर्व सिंगापुर, थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों में बसे तमिल समुदाय द्वारा भी मनाया जाता है। वहाँ के मंदिरों में भी इसी भाव से देव विग्रह स्नान, पूजा और प्रसाद की परंपरा निभाई जाती है।
यदि कोई समुद्र या नदी तट पर न पहुँच सके तो मासी मगम कैसे मनाया जा सकता है
यदि तट या बड़े जलाशय तक पहुँचना संभव न हो तो साधक अपने घर या स्थानीय मंदिर में स्नान, सरल पूजा, जल अर्पण और कुछ समय शांत ध्यान या प्रार्थना कर सकता है। मुख्य भावना यह रहे कि इस दिन भीतर की नकारात्मकता को छोड़कर, शुद्धता और कृतज्ञता के साथ जीवन की दिशा को थोड़ा और संतुलित बनाया जाए।
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