By पं. नीलेश शर्मा
हर कार्तिकाई नक्षत्र पर दीपक अर्पण और भगवान शिव व मुरुगन की पूजा

मासिक कार्तिगई 2026 उन साधकों के लिए विशेष वर्ष है जो हर महीने कार्तिगई नक्षत्र के प्रभाव में दीप जलाकर भगवान शिव और भगवान मुरुगन की शरण लेना चाहते हैं। पूरे वर्ष में जब भी कार्तिगई या कृत्तिका नक्षत्र प्रबल होता है, उस दिन घर में और मंदिरों में दीपदान, अभिषेक और मंत्र जप के माध्यम से जीवन की अंधकारपूर्ण स्थितियों से बाहर निकलने का संकल्प किया जा सकता है। इन दिनों पर किया गया मासिक कार्तिगई व्रत केवल एक परंपरागत क्रिया नहीं माना जाता बल्कि मन, शरीर और घर के वातावरण को शुद्ध कर दिव्य ऊर्जा से जोड़ने वाला आध्यात्मिक साधन समझा जाता है।
मासिक कार्तिगई हर तमिल मास में उस दिन मनाई जाती है जब कार्तिगई नक्षत्र सक्रिय होता है। 2026 में यह तिथियाँ पूरे वर्ष में लगभग नियमित अंतराल पर आती हैं और साधकों के लिए एक सुंदर साधना क्रम तैयार करती हैं।
| माह | मासिक कार्तिगई 2026 तिथि | वार |
|---|---|---|
| जनवरी | 27 जनवरी 2026 | मंगलवार |
| फ़रवरी | 23 फ़रवरी 2026 | सोमवार |
| मार्च | 23 मार्च 2026 | सोमवार |
| अप्रैल | 19 अप्रैल 2026 | रविवार |
| मई | 16 मई 2026 | शनिवार |
| जून | 13 जून 2026 | शनिवार |
| जुलाई | 10 जुलाई 2026 | शुक्रवार |
| अगस्त | 7 अगस्त 2026 | शुक्रवार |
| सितंबर | 3 सितंबर 2026 | गुरुवार |
| सितंबर | 30 सितंबर 2026 | बुधवार |
| अक्तूबर | 27 अक्तूबर 2026 | मंगलवार |
| नवंबर कार्तिगई दीपम | 24 नवंबर 2026 | मंगलवार |
| दिसंबर | 21 दिसंबर 2026 | सोमवार |
प्रत्येक तिथि पर वास्तविक पूजा और दीपदान के लिए कार्तिगई नक्षत्र के प्रारंभ और समाप्ति का सही समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग देखना आवश्यक रहता है। मासिक कार्तिगई 2026 में विशेष रूप से नवंबर माह की कार्तिगई तिथि पर मनाया जाने वाला कार्तिगई दीपम अत्यंत प्रसिद्ध है, जो तमिल मास कार्तिगई में पर्वतों और मंदिरों पर दीपों के महासागर के रूप में दिखाई देता है।
मासिक कार्तिगई वह मासिक व्रत और उत्सव है जो हर महीने कार्तिगई या कृत्तिका नक्षत्र के प्रबल रहने पर मनाया जाता है। यह नक्षत्र तीन प्रमुख देव रूपों से जुड़ा माना गया है। पहला, भगवान शिव, जिनकी आराधना से आयु, शांति और कर्म बंधन से राहत की भावना जागृत होती है। दूसरा, भगवान मुरुगन जिन्हें स्कंद या कार्तिकेय के नाम से भी जाना जाता है और जो देवसेना के सेनापति माने जाते हैं। तीसरा, अग्नि देव जिनके द्वारा प्रकाश, शुद्धि और रूपांतरण का प्रतीकात्मक संदेश मिलता है।
मासिक कार्तिगई में दीप जलाना मुख्य साधना माना जाता है। इन दीपों के माध्यम से अंधकार पर प्रकाश की विजय, नकारात्मकता का हरण, भीतरी भ्रमों का निवारण और दिव्य संरक्षण की अनुभूति साधक के मन में गहराई से बैठाई जाती है। माना जाता है कि कार्तिगई नक्षत्र का प्रभाव पापों के क्षय, मानसिक घावों की भरपाई और परिवार के भीतर भावनात्मक निकटता को बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में मासिक कार्तिगई की परंपरा बहुत जीवंत रूप में देखी जाती है।
शैव परंपरा में यह दिन भगवान शिव को गहन भक्ति के साथ याद करने का अवसर माना जाता है। तेल के दीपक, घी के दीपक, आरती, रुद्र अभिषेक और दीप पूजा के माध्यम से शिवलिंग पर जल, दुग्ध और बिल्वपत्र अर्पित किए जाते हैं। यह विश्वास किया जाता है कि कार्तिगई नक्षत्र के दिन शिव पूजा करने से दीर्घायु, आंतरिक शांति और कर्म जन्य कष्टों में कमी का अनुभव होता है।
मुरुगन भक्ति परंपरा में यह दिन विशेष रूप से भगवान मुरुगन के लिए समर्पित होता है। साधक उनका स्मरण कर विघ्न नाश, शत्रु भय से रक्षा, मानसिक शक्ति, साहस और सफलता की प्रार्थना करते हैं। मंदिरों में मुरुगन की मूर्ति पर अभिषेक, पुष्पार्चन और विशेष आरती की जाती है।
वार्षिक स्तर पर तमिल माह कार्तिगई में आने वाला कार्तिगई दीपम इस मासिक साधना का चरम रूप है, जो 2026 में 24 नवंबर मंगलवार के दिन मनाया जाएगा। उस दिन अन्नामलाई जैसे पवित्र स्थलों पर दीपों का सागर देखकर मासिक कार्तिगई की गहराई और व्यापकता को सहज अनुभव किया जा सकता है।
मासिक कार्तिगई 2026 केवल कैलेंडर में दर्ज तिथियों की सूची नहीं बल्कि पूरे वर्ष में बार बार मिलने वाला वह अवसर है जहाँ साधक अपने जीवन के कई स्तरों पर संतुलन ला सकता है।
इस दिन दीप जलाने से जुड़ी मान्यता यह है कि ये दीपक दुर्भावना, बुरी दृष्टि, नकारात्मक ऊर्जा और अज्ञान के अंधकार को जला कर समाप्त करने में सहायक होते हैं। भगवान मुरुगन की कृपा से विघ्नों से रक्षा, भय में कमी और आगे बढ़ने की मानसिक शक्ति प्राप्त करने की भावना बनी रहती है। परिवार के स्तर पर यह दिन सद्भाव, आपसी सम्मान और भावनात्मक निकटता को बढ़ाने वाला माना जाता है, क्योंकि दीपक जलाने, पूजा करने और भजन कीर्तन जैसे कार्य प्रायः पूरे परिवार के साथ मिलकर किए जाते हैं। भगवान शिव की पूजा के माध्यम से मन की शांति, तनाव में कमी और हानिकारक विचारों से दूरी का भाव विकसित होता है। साथ ही दीपदान को घर में समृद्धि, स्थिरता और पितरों की कृपा आकर्षित करने वाला कृत्य माना जाता है।
यद्यपि मासिक कार्तिगई का व्रत कोई भी रख सकता है, फिर भी 2026 में यह साधना कुछ विशेष श्रेणियों के लिए अत्यंत उपयोगी मानी जा सकती है।
परिवार और महिलाओं के लिए यह व्रत घर में शांति, बच्चों की रक्षा, वैवाहिक समरसता और संतान प्राप्ति जैसी कामनाओं के लिए किया जा सकता है। विद्यार्थियों के लिए कार्तिगई नक्षत्र की साधना एकाग्रता, बुद्धि और अध्ययन में प्रगति की दिशा में सहायक मानी जाती है। नौकरीपेशा या व्यापार से जुड़े लोग करियर में स्थिरता, चुनौतियों पर विजय और प्रगति की राह खुलने की भावना के साथ मासिक कार्तिगई व्रत रख सकते हैं।
जो लोग स्वास्थ्य समस्याओं, तनाव, अवसाद, पारिवारिक विवाद या आर्थिक कठिनाई जैसी परिस्थितियों से गुजर रहे हों, उनके लिए मासिक कार्तिगई 2026 का दीपदान, पूजा और मंत्र जप मानसिक सहारा देने वाला आध्यात्मिक अभ्यास बन सकता है।
मासिक कार्तिगई की पूजा विधि सरल होकर भी बेहद गरिमापूर्ण है। दीपक इस दिन की साधना का केंद्र होते हैं, इसलिए पूजा स्थल और घर की साफ सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
मासिक कार्तिगई 2026 पर एक साधारण पूजा क्रम इस प्रकार रखा जा सकता है।
पूजा के बाद यदि संभव हो तो एक दीपक रात्रि भर जलता छोड़ने की भी परंपरा कई स्थानों पर देखी जाती है, जिसे निरंतर दिव्य प्रकाश की उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है।
मासिक कार्तिगई व्रत अनिवार्य नहीं है, लेकिन जो भक्त इसे रखते हैं उनके लिए कुछ सामान्य नियम बताए गए हैं।
इस दिन व्रत रखने वाले साधक के लिए दूध, फल, नारियल, सूखे मेवे, साबूदाना, दही और सेंधा नमक से बने हल्के भोजन का सेवन उचित माना जाता है। प्याज, लहसुन, मांसाहार, मदिरा, अधिक मसालेदार और अत्यधिक तला भोजन इस दिन ग्रहण न करने की सलाह दी जाती है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो व्रत को सख्ती से निभाना चाहते हैं। कई साधक अनाज का पूर्ण त्याग कर केवल फलाहार और हल्का सात्त्विक भोजन लेकर दिन भर दीपदान और पूजा में लगे रहते हैं। व्रत प्रायः सूर्यास्त के बाद या संध्या पूजा के पूर्ण होने के बाद साधारण सात्त्विक भोजन से खोला जाता है।
एक प्रचलित कथा के अनुसार एक समय धरती पर गहरा अंधकार और अशांति फैल गई थी। असुर शक्तियों के प्रभाव से देवता और साधारण जीव दोनों ही भय और भ्रम में पड़ गए। देवताओं ने जब भगवान शिव से सहायता की प्रार्थना की तो शिव के मस्तक से एक दिव्य अग्नि ज्वाला प्रकट हुई। इसी दिव्य अग्नि से भगवान मुरुगन का अवतरण माना जाता है, जो देवसेना के सेनापति बने और दुष्ट शक्तियों का नाश किया।
देवताओं ने उस समय मुरुगन के स्वागत के लिए स्वर्ग लोक में चारों ओर दीप प्रज्वलित किए। ये दीपक प्रकाश की विजय, अधर्म के अंत और शांति की वापसी के प्रतीक बने। उसी स्मृति में कार्तिगई नक्षत्र के दिन दीप जलाने की परंपरा चली और मासिक कार्तिगई में दीपदान के माध्यम से शिव और मुरुगन की कृपा का आह्वान किया जाता है।
मासिक कार्तिगई 2026 पर साधक अपनी सामर्थ्य और समय के अनुसार कुछ सरल और प्रभावी मंत्रों का जप कर सकते हैं।
भगवान शिव के लिए Om Namah Shivaya मंत्र अत्यंत प्रसिद्ध है, जिसका अर्थ है "शिव को नमन"। यह पंचाक्षरी मंत्र मन को शांत करने और भीतर के भय को कम करने में सहायक माना जाता है। भगवान मुरुगन की आराधना के लिए Om Saravanabhavaya Namah मंत्र का जप किया जा सकता है, जिसमें मुरुगन के सर्वतीर्थ स्वरूप को प्रणाम किया जाता है। दीपक के समक्ष Om Deepajyotir Namostute का जप भी किया जाता है जिसका भाव है "दीप ज्योति को नमन"। जहाँ संभव हो साधक इन मंत्रों को 108 बार जपने का प्रयास कर सकते हैं, क्योंकि इसे विशेष रूप से शुभ माना गया है।
मासिक कार्तिगई 2026 पूरे वर्ष में बार बार मिलने वाला ऐसा साधना अवसर है जो जीवन के कई स्तरों पर सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
भगवान मुरुगन की कृपा से अदृश्य नकारात्मक प्रभाव, भय और बाधाएँ कम होने की भावना विकसित होती है। पति पत्नी के बीच प्रेम, संवाद और समझ बढ़ाने के लिए भी दीपदान और संयुक्त पूजा को लाभदायक माना जाता है। अग्नि तत्व से जुड़े इस पर्व पर दीपक जलाने से घर के वातावरण में सात्त्विकता और शुद्धता की भावना प्रबल होती है जो स्वास्थ्य के लिए भी सहायक मानी जाती है। आर्थिक और पारिवारिक स्तर पर यह विश्वास किया जाता है कि नियमित मासिक कार्तिगई साधना से स्थिरता, प्रगति और बेहतर निर्णय की क्षमता विकसित हो सकती है।
जो माता पिता अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य, रक्षा और प्रगति के लिए चिंतित रहते हैं, वे मासिक कार्तिगई व्रत के माध्यम से उनके लिए विशेष प्रार्थना कर सकते हैं। साथ ही, ध्यान, मंत्र जप और दीप दर्शन जैसी सरल साधनाएँ स्वयं साधक के मन को भी गहराई से शांत और संतुलित करने में सहायक बनती हैं।
मासिक कार्तिगई की पूजा के बाद प्रसाद का वितरण और जरूरतमंदों को भोजन कराना इस व्रत के पुण्यफल को और बढ़ाने वाला माना जाता है। कई भक्त इस दिन दीपों में उपयोग होने वाला तेल, वस्त्र या धन गरीबों और मंदिरों को अर्पित करते हैं। गायों या पक्षियों को भोजन देना भी इस दिन की सात्त्विक सेवा में सम्मिलित किया जा सकता है।
कुछ घरों में यह परंपरा भी रहती है कि मासिक कार्तिगई के दिन कम से कम एक दीपक पूरी रात जलता रहे, जबकि परिवार के सदस्य अपने अपने स्तर पर अंदर के अंधकार को पहचानकर उसे प्रकाश में बदलने का संकल्प लेते रहे। इस तरह मासिक कार्तिगई 2026 केवल एक दिन का अनुष्ठान नहीं रहकर पूरे वर्ष में आत्मविकास, सेवा और दिव्य स्मरण का मार्गदर्शक बन सकता है।
मासिक कार्तिगई 2026 में कुल कितनी तिथियाँ हैं और क्या कार्तिगई दीपम भी इन्हीं में शामिल है मासिक कार्तिगई 2026 में जनवरी से दिसंबर तक कार्तिगई नक्षत्र के अनुरूप कुल तेरह तिथियाँ आती हैं, जिनमें नवंबर माह की 24 नवंबर 2026 की तिथि विशेष रूप से कार्तिगई दीपम के रूप में मनाई जाएगी।
मासिक कार्तिगई 2026 का व्रत किन लोगों के लिए अधिक उपयोगी माना जा सकता है यह व्रत परिवार और महिलाओं के लिए घर की शांति, बच्चों की रक्षा और वैवाहिक सौहार्द के लिए, विद्यार्थियों के लिए एकाग्रता और सफलता के लिए, वहीं नौकरी या व्यापार में लगे लोगों के लिए स्थिरता और प्रगति के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जा सकता है।
मासिक कार्तिगई पूजा में दीपकों की क्या भूमिका रहती है मासिक कार्तिगई में मिट्टी, पीतल या चाँदी के दीपकों में तेल या घी भरकर दीप जलाना मुख्य साधना है। ये दीप अंधकार, नकारात्मकता और भय को दूर करने वाले प्रकाश के प्रतीक माने जाते हैं और घर के द्वार, पूजा स्थल तथा मुख्य स्थानों पर लगाए जाते हैं।
क्या मासिक कार्तिगई व्रत में सभी के लिए अनाज छोड़ना आवश्यक है व्रत नियम व्यक्तिगत सामर्थ्य और परिवार की परंपरा पर निर्भर करते हैं। सामान्य रूप से अनुशंसा यह रहती है कि इस दिन प्याज, लहसुन, मांसाहार और अत्यधिक तैलीय या तीखा भोजन न लिया जाए। जो लोग सख्ती से व्रत रखते हैं वे अनाज त्यागकर फल, दूध और सात्त्विक व्रत भोजन से दिन बिताते हैं।
मासिक कार्तिगई 2026 को जीवन में अधिक सार्थक कैसे बनाया जा सकता है यदि मासिक कार्तिगई 2026 पर दीपदान और मंत्र जप के साथ साथ साधक यह संकल्प ले कि हर महीने इस तिथि पर कुछ समय आत्ममंथन, सेवा और परिवार के साथ शांत संवाद के लिए सुरक्षित रखा जाएगा, तो यह व्रत पूरे वर्ष के लिए मानसिक शांति, आध्यात्मिक प्रगति और संबंधों में संतुलन का मजबूत आधार बन सकता है।
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