By पं. संजीव शर्मा
वैशाख शुक्ल एकादशी पर भगवान विष्णु के मोहिनी रूप की पूजा और व्रत का महत्व

वैशाख शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी उन एकादशी तिथियों में गिनी जाती है, जिनका सीधा संबंध भगवान विष्णु के विशेष अवतार से जुड़ता है। इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी रूप की पूजा की जाती है, जो समुद्र मंथन के समय देवताओं की रक्षा के लिए प्रकट हुआ था। माना जाता है कि मोहिनी एकादशी का व्रत मन और कर्म, दोनों को शुद्ध करने में सहायता करता है और साधक को धीरे धीरे वैराग्य, स्पष्टता और भक्ति की ओर ले जाता है।
2026 में मोहिनी एकादशी वैशाख मास के पावन वातावरण में आएगी। जो लोग बीते समय की गलतियों, मोह और भ्रम से मुक्त होकर अधिक सजग और संतुलित जीवन की ओर बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए यह तिथि एक गहरा अवसर बन सकती है।
सबसे पहले मोहिनी एकादशी 2026 से जुड़े मुख्य पंचांग विवरण को स्पष्ट रूप से समझ लेना उपयोगी है।
| विवरण | तिथि | वार | समय / टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| मोहिनी एकादशी व्रत तिथि | 27 अप्रैल 2026 | सोमवार | वैशाख शुक्ल एकादशी, सूर्योदय पर एकादशी तिथि |
| एकादशी तिथि प्रारम्भ | 26 अप्रैल 2026 | रविवार | 08:52 PM पर आरम्भ |
| एकादशी तिथि समाप्त | 27 अप्रैल 2026 | सोमवार | 10:14 PM पर समाप्त |
चूँकि 27 अप्रैल 2026 के सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए मोहिनी एकादशी का व्रत इसी दिन रखा जाएगा। इस दिन सुबह से लेकर रात तक, एकादशी तिथि के भीतर, व्रत, पूजन और नामजप किया जा सकता है।
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। पारण को सही समय पर करना उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना व्रत रखना।
| पारण विवरण | तिथि | समय / टिप्पणी |
|---|---|---|
| पारण तिथि | 28 अप्रैल 2026 | मंगलवार सुबह |
| पारण समय | 06:00 AM से 08:30 AM | द्वादशी तिथि के भीतर, प्रातःकालीन समय में |
शास्त्रीय मत के अनुसार व्रत तोड़ने में अधिक विलम्ब करना उचित नहीं माना जाता। इसलिए 28 अप्रैल 2026 को प्रातः 06:00 AM से 08:30 AM के बीच, द्वादशी तिथि रहते हुए ही पारण करना चाहिए। पारण सामान्यतः जल, फल या हल्के सात्त्विक भोजन के साथ किया जाता है।
नीचे सारणी में मोहिनी एकादशी 2026 से जुड़े सभी प्रमुख समय एक साथ दिए जा रहे हैं।
| घटना | तिथि | समय / विवरण |
|---|---|---|
| मोहिनी एकादशी व्रत | 27 अप्रैल 2026 | सोमवार |
| एकादशी तिथि प्रारम्भ | 26 अप्रैल 2026 | 08:52 PM |
| एकादशी तिथि समाप्त | 27 अप्रैल 2026 | 10:14 PM |
| पारण तिथि | 28 अप्रैल 2026 | प्रातःकाल |
| पारण समय | 28 अप्रैल 2026 | 06:00 AM से 08:30 AM |
यह सारणी स्पष्ट करती है कि व्रत का मुख्य दिन 27 अप्रैल है और पारण के लिए अगली सुबह का समय निर्धारित है।
मोहिनी शब्द उस रूप की ओर संकेत करता है, जिसमें भगवान विष्णु ने अत्यन्त मोहक नारी रूप धारण किया।
समुद्र मंथन के समय जब देवता और असुर, दोनों अमृत पाने के इच्छुक थे तब इस बात का संकट पैदा हुआ कि अमृत किसके हाथ लगेगा। कथा के अनुसार, धर्म की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया और अपनी मधुर वाणी और सौम्य आचरण से असुरों का ध्यान बँटाकर अमृत देवताओं को पिला दिया।
यह कथा केवल बाहरी प्रसंग नहीं बल्कि एक गहरा संकेत भी देती है।
मोहिनी एकादशी का व्रत इसी भाव के साथ रखा जाता है कि जीवन में जहाँ भ्रम, दोष और भ्रमित निर्णय जमा हो गए हों, वहाँ भगवान विष्णु की अनुकम्पा से नयी स्पष्टता और संतुलन प्रकट हो सके।
माना जाता है कि मोहिनी एकादशी पर रखा गया व्रत, सही विधि और भाव के साथ किया जाए, तो।
इस एकादशी का मुख्य संदेश यह है कि जब व्यक्ति अपने आचरण की ज़िम्मेदारी लेकर, संयम और जप के साथ ईश्वर की ओर कदम बढ़ाता है, तो भीतर की धुंध स्वतः कम होने लगती है।
मोहिनी एकादशी व्रत केवल एक दिन का उपवास नहीं बल्कि तीन तिथियों में फैला हुआ एक अनुशासन माना जाता है।
यह तैयारी शरीर को हल्का और मन को शांत बनाने में सहायता करती है, ताकि एकादशी के दिन साधना सहज हो सके।
पूजा के क्रम में।
व्रत के प्रकार के अनुसार कोई निर्जल, कोई फलाहार और कोई केवल जल व फल के साथ यह एकादशी रखता है। स्वास्थ्य की स्थिति को समझते हुए संतुलित व्रत रखना अधिक उचित होता है।
कई भक्त मोहिनी एकादशी की रात जागरण करने का प्रयास करते हैं।
रात्रि में सकारात्मक संगति और मंत्र स्मरण, मन की गहराई में जमा नकारात्मक प्रवृत्तियों को ढीला करने में सहायक हो सकता है।
द्वादशी तिथि बीत जाने के बाद भी व्रत को बिना पारण के खींचना उचित नहीं माना जाता, इसलिए समय का ध्यान रखना आवश्यक है।
मोहिनी एकादशी केवल भोजन त्यागने का नाम नहीं बल्कि संपूर्ण जीवनशैली पर एक दिन के लिए विशेष ध्यान देने का अवसर है।
एकादशी का मूल भाव यह है कि शरीर को हल्का, मन को सरल और बुद्धि को जागरूक बनाकर ईश्वर के अधिक निकट आया जाए।
एकादशी तिथि चन्द्रमा के चक्र की ग्यारहवीं तिथि है।
इस दिन का व्रत मन की चंचलता को संयमित करने और बुद्धि को ईश्वर की ओर उन्मुख करने का सरल उपाय बन सकता है।
मोहिनी एकादशी का व्रत कोई भी रख सकता है, फिर भी कुछ स्थितियों में इसका प्रभाव अधिक गहराई से अनुभव हो सकता है।
इनके लिए मोहिनी एकादशी केवल एक तिथि नहीं बल्कि स्वयं के भीतर गहरी सफाई का एक नियमित माध्यम बन सकती है।
मोहिनी एकादशी 2026 इस बात की कोमल याद दिलाती है कि।
इस प्रकार मोहिनी एकादशी 2026 को श्रद्धा, संयम और शांत मन से मनाया जाए, तो यह दिन केवल पाप क्षय का साधन नहीं रहेगा बल्कि जीवन को अधिक स्पष्ट, संतुलित और समर्थ बनाने की ओर एक महत्त्वपूर्ण कदम बन सकता है।
मोहिनी एकादशी 2026 किस दिन पड़ेगी
मोहिनी एकादशी 2026 सोमवार 27 अप्रैल 2026 को पड़ेगी, क्योंकि इसी दिन वैशाख शुक्ल एकादशी तिथि सूर्योदय पर विद्यमान रहेगी।
एकादशी तिथि का प्रारम्भ और अंत कब होगा
एकादशी तिथि 26 अप्रैल 2026 को रात 08:52 PM पर शुरू होगी और 27 अप्रैल 2026 को रात 10:14 PM पर समाप्त होगी। इसी अवधि में मोहिनी एकादशी का व्रत, पूजा और नामजप किया जाएगा।
मोहिनी एकादशी व्रत का पारण कब करना चाहिए
व्रत का पारण 28 अप्रैल 2026 को प्रातः 06:00 AM से 08:30 AM के बीच, द्वादशी तिथि के भीतर करना चाहिए। इससे अधिक विलम्ब करना उचित नहीं माना जाता।
मोहिनी एकादशी पर कौन से मुख्य नियमों का ध्यान रखना चाहिए
चावल और अनाज का सेवन न करना, क्रोध और कटु वाणी से बचना, संयमित आहार रखना, भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जप और एकादशी कथा सुनना या पढ़ना इन मुख्य नियमों में शामिल हैं।
मोहिनी एकादशी 2026 से व्यक्ति अपने जीवन के लिए क्या मुख्य सीख ले सकता है
यह कि सच्चा परिवर्तन कठोरता से नहीं बल्कि सरलता, जागरूकता और भक्ति से आता है। यदि इस व्रत के माध्यम से व्यक्ति अपने मोह, भ्रमित निर्णय और असंयमित आदतों को पहचानकर उन्हें धीरे धीरे छोड़ने का अभ्यास शुरू कर दे, तो यही मोहिनी एकादशी का सच्चा और स्थायी फल कहलाएगा।
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