By पं. नरेंद्र शर्मा
भगवान राम के दर्शन और राम नाम के माध्यम से भक्ति और आंतरिक जागृति

राम नवमी वह पावन पर्व है जब भक्त भगवान श्रीराम के प्राकट्य का उत्सव मनाते हैं और धरा पर धर्म की स्थापना की उस दिव्य लीला को स्मरण करते हैं। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आने वाला यह दिन चैत नवरात्र के समापन का भी संकेत देता है और संपूर्ण वातावरण में भक्ति, मर्यादा और राम नाम की सुगंध फैलाता है। वर्ष 2026 में भी राम नवमी श्रद्धा, कीर्तन, दान और आध्यात्मिक जागरण के साथ मनाई जाएगी।
हिंदू चंद्र पंचांग के अनुसार राम नवमी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। यही तिथि भगवान श्रीराम के अवतरण दिवस के रूप में मानी जाती है और इसी दिन चैत नवरात्र का समापन भी होता है। वर्ष 2026 में राम नवमी की तिथि और नवमी तिथि के समय इस प्रकार हैं।
| विवरण | तिथि और समय |
|---|---|
| राम नवमी 2026 पर्व | शुक्रवार, 27 मार्च 2026 |
| नवमी तिथि प्रारंभ | 26 मार्च 2026, प्रातः 11 बजकर 52 मिनट |
| नवमी तिथि समाप्त | 27 मार्च 2026, प्रातः 10 बजकर 09 मिनट |
नवमी तिथि का प्रभाव 26 मार्च की दोपहर से 27 मार्च की प्रातः तक रहता है, इसलिए पंचांग परंपरा के अनुसार राम नवमी 2026 का पर्व शुक्रवार 27 मार्च को मनाया जाएगा।
राम नवमी को भगवान श्रीराम के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। भगवान रामचंद्र को धर्म के मूर्त रूप के साथ साथ मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है जो आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श राजा और आदर्श मानव के रूप में सर्वत्र पूजे जाते हैं। शास्त्रों में वर्णन है कि भगवान रामचंद्र त्रेता युग में अयोध्या नगरी में राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र रूप में अवतरित हुए। उनका पूरा अवतार धर्म की रक्षा, भक्तों की सुरक्षा और अधर्म के विनाश के लिए माना जाता है। राम नवमी का दिन केवल जन्म तिथि का उत्सव नहीं बल्कि धर्म, सत्य और करुणा के उन आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प दिवस भी है।
परंपरा में भगवान जैसे दिव्य स्वरूपों के संदर्भ में साधारण जन्म और मृत्यु शब्द का प्रयोग कम किया जाता है। ऐसे अवसरों को अवतरण, प्राकट्य और अंतर्धान जैसे शब्दों से समझाया जाता है। इसका भाव यह है कि भगवान कर्मबंधन से बंधे जीव की तरह जन्म नहीं लेते बल्कि अपनी इच्छा से संसार में प्रकट होते हैं और उपयुक्त समय आने पर लीला समेट कर अप्रकट हो जाते हैं। इसी कारण राम नवमी को अधिकतर प्राकट्य दिवस या अवतरण दिवस के रूप में देखा जाता है। यह समझ भक्त के मन में यह भाव जगाती है कि यह दिन किसी सामान्य जन्मदिन जैसा नहीं बल्कि भगवान द्वारा भक्तों के लिए प्रदत्त एक विशेष कृपा का क्षण है।
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि जब 27 मार्च 2026 के दिन पर प्रभावी रहती है तब उसी दिन राम नवमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भक्त प्रातः स्नान कर व्रत और संयम का संकल्प लेते हैं, दिन भर राम नाम और श्रीराम के गुणों का कीर्तन करते हैं, रामायण और श्रीराम की लीला कथाओं का पाठ सुनते या कराते हैं, मन्दिरों तथा घरों में विशेष पूजा, भोग, आरती और प्रसाद वितरण करते हैं। इस प्रकार 27 मार्च 2026 को राम नवमी मनाना केवल पंचांग के हिसाब से नहीं बल्कि चैत नवरात्र के समापन और धर्म स्थापना की स्मृति से भी जुड़ा है।
भगवान रामचंद्र को विष्णु के सातवें अवतार के रूप में जाना जाता है। वे अयोध्या के राजा दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र और रानी कौशल्या की गोद के लाल के रूप में वर्णित हैं। उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने जीवन के प्रत्येक संबंध में मर्यादा, सत्य और धर्म को सर्वोच्च स्थान दिया। पिता के वचन की रक्षा के लिए राज्य और सुख त्याग कर वनगमन स्वीकार करना, पत्नी के प्रति पूर्ण निष्ठा, प्रजा के प्रति न्यायपूर्ण व्यवहार और भ्रातृ प्रेम की दुर्लभ मिसाल उनके जीवन का आधार हैं। उनकी यह मर्यादा उन्हें केवल एक अवतार नहीं बल्कि मानव जीवन के आदर्श मानक के रूप में स्थापित करती है।
शास्त्रीय स्तोत्रों में भगवान राम की लीला का सुंदर वर्णन मिलता है। श्री दशावतार स्तोत्र में भगवान के राम अवतार की स्तुति करते हुए कहा गया है
वितरसि दिक्षु रणे दिक्पतिगणय्यम्
दशमुखमौलिबलिं रमणीयम्।
केशव धृत रामशरीर जय जगदीश हरे॥
इस स्तुति का भाव यह है कि भगवान ने राम रूप धारण कर लंका के युद्ध में दशानन रावण का संहार किया और उसके दसों शीशों को दिशाओं की रक्षा करने वाले देवताओं के लिए जैसे यज्ञ की आहुति के रूप में समर्पित कर दिया। इस लीला से यह संदेश मिलता है कि अधर्म चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न दिखाई दे, अंततः धर्म की विजय होती है।
राम नवमी का संदेश केवल उत्सव तक सीमित नहीं बल्कि जीवन शैली से जुड़ा है। यह दिन सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य, धैर्य और कर्तव्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। भगवान राम का जीवन यह दिखाता है कि परिवार, समाज और राज्य सभी स्तरों पर संतुलन आवश्यक है। भक्त के लिए यह पर्व अपने भीतर के लोभ, क्रोध और अहंकार को पहचान कर उन्हें कम करने की प्रेरणा देता है। इस दिन मन में यह भाव लेकर पूजा करना कि जीवन का सार केवल भौतिक सफलताओं में नहीं बल्कि मर्यादित और धर्ममय आचरण में है, राम नवमी को अत्यंत फलदायी बना देता है।
राम नवमी केवल पूजा का दिन नहीं बल्कि सेवा और दान की भावना को जागृत करने वाला अवसर भी है। भगवान राम को धर्म और करुणा के संवाहक के रूप में देखा जाता है। इसलिए इस दिन की गई सेवा उनके चरणों में समर्पित मानी जाती है। इस दिन भूखे और जरूरतमंदों को अन्न दान करना, गौ सेवा में सहयोग देना, मंदिरों या धार्मिक स्थानों पर प्रसाद वितरण में भाग लेना, राम नाम के प्रचार, रामायण पाठ या सत्संग की व्यवस्था में सहयोग देना, इन सबको साधक राम सेवा का रूप मान सकते हैं। दान से केवल दूसरे का ही नहीं बल्कि दाता के मन का शोधन भी होता है।
राम नवमी के अवसर पर राम नाम जप का विशेष महत्व माना जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि राम नाम स्वयं भगवान के स्वरूप से अभिन्न है। एक प्रसिद्ध श्लोक में कहा गया है
श्री राम राम रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥
इसका भाव यह है
हे सुंदर मुख वाली देवी, मन को आनंद देने वाले श्रीराम नाम का बार बार स्मरण करते हुए यह अनुभव होता है कि केवल एक बार राम नाम का जप विष्णु के सहस्र नामों के जप के समान फल देने वाला है।
इससे यह समझ आती है कि राम नाम का स्मरण, कीर्तन और जप साधक के लिए अत्यंत सरल और प्रभावी साधना है।
वर्तमान समय में हरे कृष्ण महामंत्र के माध्यम से भी राम नाम की साधना की जाती है
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
इस मंत्र में कृष्ण और राम दोनों नामों का कीर्तन होता है। राम नवमी के दिन यदि मन लगाकर इस मंत्र का जप किया जाए तो मन की चंचलता कम होकर शांति, विश्वास और भक्ति का अनुभव बढ़ सकता है।
राम नवमी 2026 स्वयं के जीवन की दिशा पर शांत मन से विचार करने का सुंदर अवसर है। भगवान राम की लीला से कई व्यावहारिक शिक्षा मिलती हैं। परिवार और संबंधों में वचनबद्धता और भरोसा बनाए रखना, निर्णय लेते समय केवल स्वार्थ नहीं बल्कि धर्म और न्याय को प्राथमिकता देना, कठिन समय में भी संयमित वाणी और संतुलित व्यवहार रखना, ईश्वर पर विश्वास रखते हुए अपने कर्तव्य का पालन करते रहना। यदि राम नवमी 2026 को इन बातों पर मनन कर अगले वर्ष के लिए छोटे छोटे संकल्प लिए जाएँ, तो यह पर्व केवल एक दिन का उत्सव न होकर जीवन में स्थायी परिवर्तन का कारण बन सकता है।
राम नवमी 2026 कब मनाई जाएगी और नवमी तिथि कब तक रहेगी राम नवमी 2026 का पर्व शुक्रवार 27 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। नवमी तिथि 26 मार्च 2026 को प्रातः 11 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 27 मार्च 2026 को प्रातः 10 बजकर 09 मिनट तक प्रभावी रहेगी।
राम नवमी को जन्मदिन के बजाय अवतरण दिवस या प्राकट्य दिवस क्यों कहा जाता है शास्त्रों के अनुसार भगवान सामान्य जीवों की तरह कर्म के कारण जन्म नहीं लेते बल्कि अपनी इच्छा से संसार में प्रकट होते हैं। इसी कारण उनके लिए जन्म और मृत्यु के स्थान पर अवतरण और अंतर्धान जैसे शब्द प्रयोग किए जाते हैं और राम नवमी को प्राकट्य दिवस माना जाता है।
राम नवमी 2026 के दिन कौन सी साधनाएँ विशेष रूप से उपयोगी मानी जा सकती हैं इस दिन व्रत, श्रीराम की मूर्ति या चित्र की पूजा, रामायण पाठ, राम नाम जप और हरे कृष्ण महामंत्र का कीर्तन अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही दान, प्रसाद वितरण और जरूरतमंदों की सहायता को भी राम सेवा का ही रूप समझा जा सकता है।
राम नाम के जप को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना गया है शास्त्रों में वर्णन है कि श्रीराम नाम स्वयं भगवान के समान ही प्रभावशाली है। श्रीराम नाम का एक बार जप अनेक नामों के जप के समान फल देने वाला माना गया है, इसलिए राम नवमी जैसे पर्व पर इसका जप विशेष महत्व रखता है।
राम नवमी 2026 को व्यावहारिक रूप से जीवन में कैसे उतारा जा सकता है यदि यह संकल्प लिया जाए कि आगे के दिनों में निर्णय अधिक न्यायपूर्ण होंगे, वाणी अधिक संयमित रहेगी और परिवार तथा समाज के प्रति जिम्मेदारी और करुणा बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा, तो राम नवमी 2026 जीवन में धर्म, शांति और संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बन सकती है।
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