By पं. अभिषेक शर्मा
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जन्म और भक्ति का महत्व

राम नवमी वह पावन पर्व है जो धर्म, सत्य और मर्यादा के आदर्श स्वरूप भगवान श्रीराम के प्राकट्य की स्मृति से जुड़ा है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अयोध्या में भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला यह दिन हर वर्ष साधकों को फिर से यह देखने का अवसर देता है कि जीवन की राह को धर्म और करुणा से कैसे जोड़ा जाए। वर्ष 2026 में भी राम नवमी पूरे भारत में भक्तिभाव, व्रत, राम नाम जप और रामायण पाठ के साथ मनाई जाएगी।
हिंदू चंद्र पंचांग के अनुसार राम नवमी चैत्र मास की शुक्ल पक्ष नवमी तिथि को मनाई जाती है। यह वही तिथि मानी जाती है जब त्रेता युग में अयोध्या में भगवान श्रीराम का अवतरण हुआ। वर्ष 2026 के लिए तिथि और समय इस प्रकार हैं।
| विवरण | समय और तिथि |
|---|---|
| राम नवमी की तिथि | गुरुवार, 26 मार्च 2026 |
| नवमी तिथि प्रारंभ | 26 मार्च 2026, रात्रि 01 बजकर 32 मिनट |
| नवमी तिथि समाप्त | 26 मार्च 2026, रात्रि 11 बजकर 55 मिनट |
क्योंकि 26 मार्च 2026 के पूरे दिन के दौरान नवमी तिथि प्रभावी रहेगी, इसलिए राम नवमी का व्रत, पूजन और सभी प्रमुख अनुष्ठान इसी दिन किए जाएँगे।
परंपरा के अनुसार यह माना जाता है कि भगवान श्रीराम का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था। इसलिए राम नवमी पर भगवान राम की विशेष पूजा, अभिषेक और आराधना के लिए मध्याह्न का समय अत्यंत शुभ माना जाता है।
| विवरण | समय |
|---|---|
| मध्याह्न पूजन मुहूर्त | प्रातः 11 बजकर 12 मिनट से दोपहर 01 बजकर 39 मिनट तक |
इस अवधि में भक्त श्रीराम की मूर्ति या चित्र के समक्ष बैठकर शुद्ध जल, पंचामृत या साधारण अभिषेक करते हैं, पुष्प, तुलसी पत्ते, फल, मिष्ठान और धूप दीप से पूजा करते हैं और मन को राम नाम के जप में लगाते हैं। इस समय राम मंत्र, रामायण के पाठ और भक्ति गीतों का विशेष महत्व माना जाता है।
राम नवमी भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का दिन है। श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, जो आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श राजा और आदर्श मनुष्य के रूप में पूजे जाते हैं।
इस दिन भक्त प्रातःकाल स्नान करके घर और पूजा स्थल की साफ सफाई करते हैं। बहुत से लोग राम नवमी को व्रत के रूप में मानते हैं। कुछ भक्त जल और फल के सहारे और कुछ केवल फलाहार या जल के साथ दिन भर का उपवास रखते हैं। घरों और मंदिरों में भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की मूर्तियों या चित्रों को फूलों, मालाओं और रोशनी से सजाया जाता है। पूजा के समय शंख, घंटी और राम नाम की गूँज वातावरण को विशेष रूप से पवित्र बना देती है।
राम नवमी 2026 पर व्रत और पूजन के लिए साधक सरल लेकिन नियमित विधि अपना सकता है।
इस प्रकार राम नवमी का व्रत केवल खाने पीने की सीमा नहीं बल्कि पूरे दिन अपने विचारों और व्यवहार को मर्यादित रखने का अभ्यास भी बन सकता है।
राम नवमी के अवसर पर रामायण का पाठ विशेष रूप से शुभ माना जाता है। कई स्थानों पर पूरे दिन या कई दिनों तक बाल कांड सहित रामायण के विभिन्न कांडों का पाठ किया जाता है। इससे भक्त भगवान राम के जीवन, उनके आदर्शों और धर्म के लिए किए गए त्याग को निकट से अनुभव कर पाता है।
घर स्तर पर भी राम नवमी 2026 में यदि परिवार मिलकर कुछ समय के लिए रामायण का पाठ या श्रवण करे, तो बच्चों के मन में भी सत्य, त्याग और सेवा के संस्कार मजबूत हो सकते हैं। इसके साथ साथ राम नाम का जप मन को स्थिर और शांत बनाने में सहायक माना जाता है।
राम नवमी धर्म और अधर्म के बीच के भेद को समझाने वाला पर्व भी है। भगवान श्रीराम का जीवन यह दिखाता है कि परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन हों, धैर्य, सत्य, न्याय और करुणा का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।
इस दिन की पूजा से जीवन में नकारात्मकता कम होने, चरित्र में दृढ़ता बढ़ने और परिवार में शांति और समन्वय की भावना जागने की मान्यता है। जो व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में राम के आदर्शों को अपनाने का प्रयास करता है, उसके लिए राम नवमी आत्मबल और नैतिक स्पष्टता देने वाला दिन बन सकता है।
राम नवमी 2026 केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि यह संकेत भी है कि धर्म का पालन केवल पूजा तक सीमित न रहे। भगवान राम के जीवन की प्रेरणा यह सिखाती है कि कठिन समय में भी वचन, संबंध और कर्तव्य के प्रति सच्चाई बनाए रखना ही सच्ची भक्ति है।
यदि यह संकल्प लिया जाए कि राम नवमी 2026 के बाद आने वाले वर्ष में निर्णय अधिक न्यायपूर्ण होंगे, वाणी अधिक संयमित होगी और परिवार व समाज के प्रति जिम्मेदारी और करुणा बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा, तो यह पर्व जीवन की दिशा को भीतर से बदलने वाला चरण बन सकता है।
राम नवमी 2026 कब मनाई जाएगी और नवमी तिथि कब रहेगी राम नवमी 2026 गुरुवार 26 मार्च 2026 के दिन मनाई जाएगी। नवमी तिथि 26 मार्च 2026 को रात्रि 01 बजकर 32 मिनट पर शुरू होकर उसी दिन रात 11 बजकर 55 मिनट पर समाप्त होगी और दिन भर प्रभावी रहेगी।
राम नवमी 2026 पर सबसे शुभ पूजन समय कौन सा रहेगा राम नवमी पर भगवान श्रीराम की विशेष पूजा के लिए मध्याह्न काल सर्वोत्तम माना जाता है। वर्ष 2026 में मध्याह्न पूजन मुहूर्त प्रातः 11 बजकर 12 मिनट से दोपहर 01 बजकर 39 मिनट तक रहेगा।
राम नवमी के दिन व्रत कैसे रखा जाता है राम नवमी के व्रत में भक्त प्रातः स्नान कर संकल्प लेते हैं और दिन भर फल, दूध या केवल जल पर रहते हैं। दिन में विशेष रूप से मध्याह्न के समय पूजा, राम नाम जप और रामायण पाठ करते हैं और फिर संध्या या पूजन समापन के बाद सात्त्विक भोजन से व्रत का पारण करते हैं।
राम नवमी पर रामायण पढ़ना क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है रामायण में भगवान राम के आदर्श जीवन, त्याग, धैर्य और धर्म पालन का विस्तृत वर्णन मिलता है। राम नवमी पर रामायण पढ़ने या सुनने से भक्त को जीवन में सही आचरण, कर्तव्य और संबंधों के प्रति संतुलित दृष्टि विकसित करने की प्रेरणा मिलती है।
राम नवमी 2026 का जीवन में व्यावहारिक संदेश क्या हो सकता है राम नवमी 2026 यह याद दिलाती है कि भक्ति का सार केवल आरती और पूजा में नहीं बल्कि दैनिक व्यवहार में सत्य, मर्यादा और करुणा को अपनाने में है। जो व्यक्ति इस दिन से प्रेरित होकर अपने निर्णयों, संबंधों और कर्तव्यों में राम के आदर्शों को थोड़ा भी स्थान देता है, उसके लिए यह पर्व आत्मिक शक्ति और स्थिरता बढ़ाने वाला बन सकता है।
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