By पं. अमिताभ शर्मा
गणेश चतुर्थी के बाद पंचमी तिथि पर सप्त ऋषियों की पूजा और रजस्वला दोष निवारण का व्रत

ऋषि पंचमी 2026 मंगलवार, 15 सितंबर को गणेश चतुर्थी के ठीक अगले दिन मनाई जाएगी। पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 11:30 बजे से दोपहर 01:40 बजे तक रहेगा। पंचमी तिथि 15 सितंबर सुबह 07:54 बजे से 16 सितंबर सुबह 08:50 बजे तक रहेगी। सात ऋषियों कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ की पूजा का यह पावन अवसर है। महिलाएं विशेष रूप से राजस्वला दोष निवारण हेतु व्रत रखती हैं। यह व्रत अज्ञानतावश हुए पापों का नाश करता है।
भाद्रपद शुक्ल पंचमी पर ऋषि पंचमी का आयोजन होता है। वर्ष 2026 में यह मंगलवार, 15 सितंबर को आएगी। पूजा मुहूर्त की अवधि 2 घंटे 10 मिनट रहेगी। यह तिथि गणेश चतुर्थी के पश्चात आती है। कerala में विश्वकर्मा पूजा के रूप में भी मनाई जाती है। सप्त ऋषि समाज कल्याण में उनके योगदान हेतु पूजित होते हैं।
व्रत का उद्देश्य ऋषियों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना है। महिलाएं विशेष लाभ प्राप्त करती हैं। अज्ञात पापों का क्षय होता है। पति के प्रति भक्ति व्यक्त होती है। यह व्रत सभी वर्गों के लिए शुभफलदायी है।
हिंदू परंपरा में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को धार्मिक कार्यों से विरत रहना होता है। रसोई के बर्तनों से भी परहेज करना चाहिए। यदि अज्ञानतावश यह नियम भंग हो जाए तो राजस्वला दोष लगता है। ऋषि पंचमी व्रत इसी दोष का निवारण करता है।
महिलाएं अनाज रहित भोजन ग्रहण करती हैं। भूमिगत फल खाते हैं। यह व्रत पाचन तंत्र को बल प्रदान करता है। जैन धर्म में भी विशेष महत्व है। श्वेतांबर संप्रदाय पर्शुजन महा पर्व का समापन करते हैं। दिगंबर संप्रदाय महा पर्व का प्रारंभ करते हैं।
महेश्वरी समाज में भाई पंचमी के रूप में मनाया जाता है। बहनें भाइयों को राखी बांधती हैं। भाइयों की दीर्घायु की कामना करती हैं। पूजा के पश्चात ही भोजन ग्रहण करती हैं।
विदर्भ देश में एक ब्राह्मण और उनकी धर्मपत्नी निवास करते थे। उनका एक पुत्र और पुत्री थी। पुत्री का विवाह संस्कारी ब्राह्मण से हुआ। किंतु युवती विधवा हो गई। पिता के घर लौट आई। कुछ दिनों बाद उसके शरीर में कीड़े पड़ गए। माता पिता चिंतित हो ऋषि के पास गए।
ऋषि ने पूर्व जन्म देखा। बताया कि युवती ने मासिक धर्म के दौरान रसोई के बर्तन छुए थे। ऋषि पंचमी व्रत नहीं रखा था। इस कारण वर्तमान जन्म में यह कष्ट भोगना पड़ रहा है। विधिवत व्रत रखने से मुक्ति मिलेगी। युवती ने ऐसा किया। कीड़े समाप्त हो गए।
यह कथा नियमों का पालन सिखाती है। अज्ञानता से हुए पापों का प्रायश्चित संभव है। ऋषियों की कृपा से जीवन शुद्ध होता है।
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के स्वच्छ स्थान पर हल्दी, कुमकुम, रोली से चौकोर मंडल बनाएं। सप्त ऋषियों की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। शुद्ध जल और पंचामृत से अभिषेक करें। चंदन का तिलक लगाएं। फूलमाला चढ़ाएं। पुष्प अर्पित करें। यज्ञोपवीत पहनाएं।
श्वेत वस्त्र, फल, मिठाई भोग लगाएं। धूप दीप प्रज्वलित करें। कई क्षेत्रों में नदी तट या तालाब के पास पूजा होती है। महिलाएं अनाज ग्रहण नहीं करतीं। विशेष चावल खाती हैं।
| श्रेणी | सामग्री |
|---|---|
| मंडल | हल्दी, कुमकुम, रोली |
| अभिषेक | शुद्ध जल, पंचामृत, चंदन |
| भोग | फल, मिठाई, श्वेत वस्त्र, यज्ञोपवीत |
| आरती | धूप, दीप, अगरबत्ती, कपूर |
| सज्जा | फूलमाला, पुष्प, चंदन लेप |
प्राचीन काल में भूमिगत फल ग्रहण किए जाते थे। आधुनिक समय में ऋषि पंचमी भाजी प्रसिद्ध है। महाराष्ट्र में विशेष रूप से बनाई जाती है। इसमें चौली भाजी, सूरन, शकरकंदी, आलू, चिचिंडा, मूंगफली, कद्दू, अरबी पत्ते, कच्चा केला आदि उपयोग होते हैं।
बिना मसाले सरल विधि से बनाई जाती है। ऋषि परंपरा के अनुसार। मिट्टी के बर्तनों में बनती थी। वर्तमान में धातु के बर्तन प्रयुक्त होते हैं। व्रत उद्घाटन हेतु यह भाजी ग्रहण की जाती है। पाचन के लिए हितकारी है।
कश्यप ऋषि सृष्टि के प्रथम ऋषि माने जाते हैं। अत्रि ऋषि को चंद्रमा का जनक कहा जाता है। भारद्वाज ऋषि अश्वविज्ञान के विशेषज्ञ थे। विश्वामित्र ने गायत्री मंत्र की रचना की। गौतम ऋषि को शास्त्रों का ज्ञाता माना जाता है। जमदग्नि के पुत्र परशुराम हुए। वशिष्ठ ऋषि राजर्षि थे। इनका योगदान हिंदू धर्म को अक्षय है।
व्रत से राजस्वला दोष नष्ट होता है। अज्ञात पाप क्षय होते हैं। पति भक्ति बढ़ती है। पारिवारिक सुख प्राप्त होता है। पाचन तंत्र सुदृढ़ होता है। मानसिक शांति मिलती है। भाई बंधु प्रेम बढ़ता है। जैन अनुयायियों को विशेष लाभ। जीवन शुद्धिकरण होता है।
महाराष्ट्र में ऋषि पंचमी भाजी प्रसिद्ध। महेश्वरी समाज में भाई राखी बांधते हैं। केरल में विश्वकर्मा पूजा। जैन मंदिरों में विशेष आयोजन। उत्तर भारत में गृहस्थ पूजा। सभी क्षेत्रों में ऋषि भक्ति का भाव समान रहता है।
ऋषि पंचमी 2026 कब मनाई जाएगी?
मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को। पूजा मुहूर्त 11:30 AM से 01:40 PM।
ऋषि पंचमी का महत्व क्या है?
सप्त ऋषियों की पूजा। राजस्वला दोष निवारण। अज्ञात पाप क्षय।
ऋषि पंचमी पर कौन सी रस्में होती हैं?
चौकोर मंडल बनाना। सप्त ऋषि पूजन। पंचामृत अभिषेक। फल भोग।
ऋषि पंचमी व्रत में क्या खाया जाता है?
भूमिगत फल। ऋषि पंचमी भाजी। विशेष चावल। अनाज वर्जित।
महिलाएं ऋषि पंचमी क्यों रखती हैं?
पति भक्ति। राजस्वला दोष निवारण। आध्यात्मिक शुद्धि।
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