संकष्टी चतुर्थी 2026: तिथि, व्रत नियम और चंद्र उदय

By पं. नीलेश शर्मा

कृष्ण पक्ष चतुर्थी पर गणेश पूजा और व्रत का गहन आध्यात्मिक अर्थ

संकष्टी चतुर्थी 2026: तिथि, व्रत नियम और पूजा विधि

जो लोग जीवन में बार बार आती रुकावटों, भय और अनिश्चितता से थक चुके हों, उनके लिए संकष्टी चतुर्थी एक बहुत सरल, पर प्रभावी साधना मानी जाती है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर रखा जाने वाला यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और नाम ही बताता है कि इसका उद्देश्य संकटों से मुक्ति, अर्थात संकष्टी, की दिशा में चलना है। इस व्रत की खास बात यह है कि चाहे दिन भर कितनी ही साधना क्यों न हो, व्रत तब तक पूरा नहीं माना जाता जब तक चन्द्रमा का दर्शन कर के व्रत का पारण न कर लिया जाए।

संकष्टी चतुर्थी में सबसे महत्त्वपूर्ण नियम यही है कि व्रत का समापन केवल चंद्र दर्शन के बाद ही होता है, सूर्यास्त के साथ नहीं। इसी कारण हर महीने संकष्टी चतुर्थी का पालन करते समय उस दिन के चन्द्र उदय समय का ध्यान रखना बहुत आवश्यक होता है। 2026 में बारह संकष्टी चतुर्थी के साथ एक विशेष अंगारकी संकष्टी भी पड़ रही है, जो और अधिक शक्तिशाली मानी जाती है।

संकष्टी चतुर्थी 2026 की सभी तिथियाँ एक नज़र में

नीचे तालिका में वर्ष 2026 की सभी संकष्टी चतुर्थी तिथियाँ दी जा रही हैं, ताकि पूरे वर्ष के व्रत की योजना आसानी से बन सके।

माह तिथि वार
जनवरी 2026 7 जनवरी 2026 बुधवार
फ़रवरी 2026 6 फ़रवरी 2026 शुक्रवार
मार्च 2026 8 मार्च 2026 रविवार
अप्रैल 2026 6 अप्रैल 2026 सोमवार
मई 2026 6 मई 2026 बुधवार
जून 2026 4 जून 2026 गुरुवार
जुलाई 2026 4 जुलाई 2026 शनिवार
अगस्त 2026 2 अगस्त 2026 रविवार
सितम्बर 2026 1 सितम्बर 2026 मंगलवार
अक्तूबर 2026 30 अक्तूबर 2026 शुक्रवार
नवम्बर 2026 29 नवम्बर 2026 रविवार
दिसम्बर 2026 28 दिसम्बर 2026 सोमवार

इनमें से हर तिथि पर कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि और चन्द्र उदय समय के अनुसार संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। स्थान बदलने पर चन्द्र उदय समय बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय स्रोत से समय देखना आवश्यक रहता है।

अंगारकी संकष्टी 2026 कब है और क्यों विशेष है

जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार के दिन पड़ती है तब उसे अंगारकी संकष्टी कहा जाता है। मंगल ग्रह को अंगारक भी कहा जाता है, इसीलिए यह नाम पड़ा।

2026 में अंगारकी संकष्टी की तिथि इस प्रकार रहेगी।

विशेष संकष्टी तिथि वार
अंगारकी संकष्टी 1 सितम्बर 2026 मंगलवार

परंपरा के अनुसार इस दिन रखा गया व्रत सामान्य संकष्टी की तुलना में और अधिक फलदायी माना जाता है। जो साधक दीर्घकाल से किसी विशेष बाधा, मुकदमे, व्यवसायिक रुकावट या स्वास्थ्य संबंधी कठिनाई से जूझ रहे हों, वे विशेष श्रद्धा के साथ अंगारकी संकष्टी का व्रत रखने का संकल्प कर सकते हैं।

संकष्टी चतुर्थी का तिथि नियम क्या है

संकष्टी चतुर्थी के पालन में चतुर्थी तिथि और चन्द्र उदय दोनों का नियम एक साथ देखा जाता है।

  • यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है।
  • व्रत उसी दिन माना जाता है जिस दिन चतुर्थी तिथि चन्द्र उदय के समय विद्यमान हो।
  • व्रत का पारण चन्द्र उदय के बाद, चन्द्र दर्शन कर के ही किया जाता है, सूर्यास्त से पहले नहीं।

यदि किसी माह में ऐसा हो कि चतुर्थी तिथि चन्द्र उदय के समय विद्यमान न हो, तो पंचांग के नियमों के अनुसार व्रत की तिथि का निर्णय किया जाता है। साधारण साधक के लिए यही पर्याप्त है कि मान्य पंचांग या विश्वसनीय स्रोत द्वारा बताई गई संकष्टी चतुर्थी की तिथि को अपनाया जाए।

संकष्टी चतुर्थी में चन्द्र दर्शन इतना महत्त्वपूर्ण क्यों है

संकष्टी चतुर्थी व्रत की विशेषता यह है कि यह चन्द्र दर्शन आधारित व्रत है।

  • दिन भर का व्रत, संयम और पूजा एक प्रकार से आंतरिक तैयारी मानी जाती है।
  • व्रत का वास्तविक समापन तब होता है जब चन्द्रमा को आकाश में देख कर, उसे जल अर्घ्य दिया जाए।
  • चन्द्रमा को जल अर्पित करने के बाद ही भगवान गणेश के आगे प्रसाद ग्रहण कर, व्रत तोड़ा जाता है।

चन्द्रमा मन और भावनाओं का प्रतिनिधि माना जाता है। इस दृष्टि से देखा जाए तो चन्द्र उदय के समय गणेश पूजन और अर्घ्य के माध्यम से साधक अपने मन की अशांति, भय और बाधाओं को भी भगवान के चरणों में समर्पित करने का भाव रखता है।

चन्द्र उदय का समय हर नगर और देश के अनुसार अलग होता है, इसलिए हर महीने संकष्टी चतुर्थी पर स्थानीय चन्द्र उदय समय अवश्य देख लेना चाहिए।

संकष्टी चतुर्थी व्रत की विधि: सुबह से रात तक

जो लोग संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखना चाहते हैं, उनके लिए एक सरल और संतुलित विधि इस प्रकार अपनाई जा सकती है।

प्रातःकाल के नियम

  • प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ, सात्त्विक वस्त्र धारण करें।
  • घर के पूजाघर या शांत स्थान पर बैठकर संकष्टी चतुर्थी व्रत का संकल्प लें।
  • संकल्प में यह भाव रखें कि आज पूरे दिन अनाज, भारी भोजन और नकारात्मक वाणी से यथासंभव बचा जाएगा।

कई साधक संकष्टी व्रत में दिन भर फल, दूध या केवल पानी पर रहते हैं। कुछ लोग एक बार हल्का सात्त्विक भोजन लेते हैं। यह निर्णय हमेशा अपने स्वास्थ्य और क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए।

संध्या और गणेश पूजा कैसे करें

  • सूर्यास्त के समय या उसके बाद, व्रतकर्ता स्नान करके या कम से कम हाथ मुंह धोकर पूजा की तैयारी करें।
  • स्वच्छ पट या चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • दीपक, धूप और एक छोटा सा कलश या जलपात्र रखकर पूजा प्रारम्भ करें।
  • भगवान गणेश को दूरवा घास, लाल या पीले पुष्प अर्पित करें।
  • मोदक, लड्डू या कोई भी उपलब्ध मिष्ठान्न भोग के रूप में रखें।
  • श्रद्धा के साथ गणपति अथर्वशीर्ष, सरल गणेश मंत्र या संकष्टी व्रत कथा का पाठ करें।

पूजा के दौरान मन में इतनी ही प्रार्थना रहे कि जीवन की बाधाएँ धीरे धीरे हटें और सही निर्णय लेने की समझ और शक्ति प्राप्त हो।

चन्द्र दर्शन और व्रत का पारण

  • चन्द्र उदय समय पर आकाश की ओर देख कर चन्द्रमा को प्रणाम करें।
  • एक पात्र में स्वच्छ जल लेकर चन्द्रमा की ओर मुख करके अर्घ्य अर्पित करें।
  • इसके बाद पुनः गणेश जी के आगे आकर आरती करें और प्रसाद ग्रहण करते हुए व्रत का पारण करें।

व्रत तोड़ते समय मन में कृतज्ञता का भाव होना बहुत आवश्यक है, कि यह दिन ईमानदारी से पूरा किया जा सका।

संकष्टी चतुर्थी का आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और हर शुभ कार्य की शुरुआत में पूजनीय देवता माना जाता है। संकष्टी चतुर्थी व्रत इसी भाव का मासिक अभ्यास है।

  • यह व्रत वित्तीय बाधाओं, करियर में रुकावट और कार्यक्षेत्र की अनिश्चितता को कम करने की प्रार्थना के रूप में रखा जाता है।
  • विद्यार्थियों के लिए यह व्रत एकाग्रता, स्मरण शक्ति और परीक्षाओं की तैयारी में मानसिक स्थिरता बढ़ाने वाला माना जाता है।
  • पारिवारिक स्तर पर यह व्रत घर के भीतर के तनाव, तकरार और असुरक्षा की ऊर्जा को कम करने की दिशा में सहायक हो सकता है।

ज्योतिषीय दृष्टि से चतुर्थी तिथि मन में उठने वाली बेचैनी, जिद और असंतुलित विचारों को संयमित करने के लिए उपयुक्त मानी जाती है। जब इस तिथि पर गणेश पूजन, चन्द्र अर्घ्य और उपवास का संयोजन होता है, तो यह मन और जीवन, दोनों के लिए संतुलन की दिशा में एक व्यावहारिक उपाय बन जाता है।

संकष्टी चतुर्थी किन लोगों के लिए विशेष उपयोगी है

हालाँकि संकष्टी चतुर्थी का व्रत कोई भी रख सकता है, फिर भी कुछ स्थितियों में इसका प्रभाव अधिक स्पष्ट अनुभव किया जा सकता है।

  • वे लोग जो जीवन में लगातार रुकावटों, असफलताओं या बार बार टलते कामों से परेशान हों।
  • विद्यार्थी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवक युवतियाँ, जिन्हें एकाग्रता और स्थिरता की आवश्यकता हो।
  • ऐसे परिवार जहाँ आर्थिक अस्थिरता, कर्ज या अनिश्चित आय की स्थिति लंबे समय से चल रही हो।
  • जो लोग नया व्यवसाय, स्टार्टअप या प्रोजेक्ट शुरू करना चाह रहे हों और चाहते हों कि शुरुआत से ही विघ्न कम हों।

इन सभी के लिए संकष्टी चतुर्थी का नियमित व्रत एक ऐसी साधना बन सकता है जो न केवल बाहरी परिस्थिति बल्कि भीतर के दृष्टिकोण और धैर्य को भी बदलने में सहायक हो।

संकष्टी चतुर्थी 2026 के संदर्भ में एक सार्थक दृष्टि

संकष्टी चतुर्थी 2026 केवल बारह तिथियों की सूची नहीं बल्कि बारह बार खुद को संभालने, अनुशासन में लाने और भगवान गणेश के सामने झुककर दिशा माँगने का अवसर है।

यह वर्ष सिखा सकता है कि।

  • जब कोई व्यक्ति महीने में एक दिन भोजन, वाणी, मन और व्यवहार पर विशेष निगरानी रखता है, तो धीरे धीरे उसके निर्णय, संबंध और कार्यशैली में भी स्पष्टता आने लगती है।
  • भगवान गणेश से प्रार्थना केवल बाधाएँ हटाने के लिए नहीं बल्कि उचित समय पर उचित निर्णय लेने की बुद्धि माँगने के लिए भी होनी चाहिए।
  • यदि संकष्टी चतुर्थी 2026 की बारहों तिथियों में से कुछ पर भी व्रत ईमानदारी से रखा जाए, तो यह वर्ष जीवन में अधिक संतुलित प्रयास, धैर्य और स्थिर प्रगति की दिशा में मोड़ ले सकता है।

इसी भाव के साथ यदि यह व्रत रखा जाए, तो संकष्टी केवल कठिनाई से मुक्ति का साधन नहीं रहेगा बल्कि स्वयं को भीतर से मजबूत बनाने का भी माध्यम बन सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: संकष्टी चतुर्थी 2026

संकष्टी चतुर्थी 2026 की कुल कितनी तिथियाँ हैं
संकष्टी चतुर्थी 2026 में कुल बारह तिथियाँ हैं, हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर, जनवरी से दिसम्बर तक एक एक संकष्टी चतुर्थी पड़ेगी।

अंगारकी संकष्टी 2026 में कब पड़ेगी
2026 में अंगारकी संकष्टी 1 सितम्बर 2026, मंगलवार को पड़ेगी, जब संकष्टी चतुर्थी का दिन और वार दोनों मिलकर विशेष रूप से शक्तिशाली संयोग बनाते हैं।

संकष्टी चतुर्थी का व्रत कब खोलना चाहिए
यह व्रत केवल चन्द्र दर्शन के बाद ही खोला जाता है। चन्द्रमा को देख कर उसे जल अर्घ्य दिया जाता है, फिर गणेश पूजा के बाद प्रसाद और फलाहार ले कर व्रत का पारण किया जाता है।

क्या संकष्टी व्रत में पूरे दिन अन्न पूरी तरह त्यागना आवश्यक है
पूर्ण उपवास अनिवार्य नहीं है, यह व्यक्ति की क्षमता और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। कई लोग फल, दूध या हल्के सात्त्विक आहार पर रहते हैं, पर मुख्य ध्यान संयम, भक्ति और चन्द्र दर्शन के बाद ही व्रत तोड़ने पर होना चाहिए।

संकष्टी चतुर्थी 2026 से व्यक्ति को क्या मुख्य सीख लेने की कोशिश करनी चाहिए
यह कि बाधाएँ केवल बाहर नहीं, भीतर के असंतुलन और असावधान निर्णयों से भी आती हैं। यदि संकष्टी व्रत के माध्यम से व्यक्ति स्वयं को अनुशासन, धैर्य, भक्ति और सही समय का इंतजार करना सिखा सके, तो यही भगवान गणेश की वास्तविक कृपा और इस व्रत का सबसे बड़ा फल होगा।

पाएं अपनी सटीक कुंडली

कुंडली बनाएं

क्या आपको यह पसंद आया?

लेखक

पं. नीलेश शर्मा

पं. नीलेश शर्मा (63)


अनुभव: 20

इनसे पूछें: Family Planning, Career

इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें

ZODIAQ के बारे में

ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।

यदि आप एक उपयोगकर्ता हैं

अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।

यदि आप एक ज्योतिषी हैं

अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।

WELCOME TO

ZODIAQ

Right Decisions at the right time with ZODIAQ

500+

USERS

100K+

TRUSTED ASTROLOGERS

20K+

DOWNLOADS