By पं. सुव्रत शर्मा
शरद ऋतु में घटस्थापना से विजयादशमी तक नौ दिनों की देवी साधना और महत्व

वर्ष के कुछ मौसम ऐसे होते हैं जब भक्ति मानो अपने आप जाग उठती है। ऐसा लगता है जैसे पृथ्वी स्वयं किसी प्राचीन लय को फिर से स्मरण कर रही हो। भारत में शरद ऋतु का समय ऐसा ही एक पवित्र चरण माना जाता है। वर्षा धीरे धीरे विदा लेती है, आकाश निर्मल होने लगता है और वातावरण में एक गहरी शांति उतर आती है। इसी काल में शारदीय नवरात्रि का आगमन होता है। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से घटस्थापना के साथ आरम्भ होगी और मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को विजयदशमी के साथ पूर्ण होगी। इन नौ दिनों में घरों, मंदिरों, गाँवों और नगरों में देवी उपासना का अनुपम वातावरण बनता है, किन्तु इसके भीतर केवल उत्सव नहीं बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक यात्रा भी छिपी होती है।
नवरात्रि शब्द का सीधा अर्थ है नौ रातें। इन नौ रातों में साधक और श्रद्धालु उस दिव्य शक्ति की उपासना करते हैं जिसे भारतीय दर्शन में शक्ति कहा गया है। शक्ति केवल अनेक देवियों में से एक देवी नहीं है। वह सम्पूर्ण सृष्टि की गति, सृजन, संरक्षण और परिवर्तन के पीछे कार्यरत दिव्य ऊर्जा मानी जाती है।
जो कुछ चलता है, बढ़ता है, बदलता है और पुनः नया होता है, वह सब शक्ति के ही प्रभाव में माना गया है। इसीलिए नवरात्रि को केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि जीवन के मूल स्रोत का स्मरण भी कहा जाता है। यह उत्सव उस दिव्य स्त्री ऊर्जा का अभिनंदन है जो अज्ञान, असंतुलन और अधर्म पर विजय प्राप्त करती है।
नवरात्रि वर्ष में कई बार आती है, किन्तु सबसे अधिक व्यापक रूप से मनाई जाने वाली नवरात्रि शारदीय नवरात्रि है, जो शरद ऋतु में आती है। शारदीय शब्द शरद से बना है, जिसका अर्थ है वर्षा के बाद का निर्मल और शांत ऋतु परिवर्तन।
इस समय आकाश वर्षा के बाद साफ हो जाता है। यह दृश्य केवल मौसम का परिवर्तन नहीं दर्शाता बल्कि भीतर की साधना का भी प्रतीक माना जाता है। जैसे मेघ हटने पर आकाश स्पष्ट दिखाई देता है, वैसे ही नवरात्रि की साधना मन के भ्रम, भय और अशांति को धीरे धीरे हटाकर भीतर की स्पष्टता को प्रकट करने का प्रयास करती है।
बाहरी रूप में देखें तो नवरात्रि में दीप जलते हैं, मंत्र गूंजते हैं, पुष्पमालाएं सजती हैं, भजन होते हैं और घरों में पूजा की तैयारी चलती रहती है। परन्तु इसका सबसे गहरा अर्थ इससे भी आगे है। नवरात्रि को आत्मिक रूपांतरण की नौ सीढ़ियां भी कहा जा सकता है।
पहले दिन जागरण होता है। बीच के दिनों में साधना, संघर्ष, शुद्धि और धैर्य का भाव आता है। अंतिम दिनों में करुणा, प्रकाश, सिद्धि और विजय का अनुभव प्रकट होता है। इस दृष्टि से नवरात्रि बाहरी आराधना के साथ साथ भीतर की यात्रा भी है।
शारदीय नवरात्रि का आरम्भ घटस्थापना से होता है। इसे कलश स्थापना भी कहा जाता है। इस अनुष्ठान में एक पवित्र कलश स्थापित किया जाता है, जिसमें जल भरा जाता है। उसके ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखा जाता है। कलश के चारों ओर प्रायः जौ बोए जाते हैं, जो उर्वरता, वृद्धि और नवजीवन के प्रतीक माने जाते हैं।
यह अनुष्ठान केवल पूजा की शुरुआत नहीं है। इसका आध्यात्मिक अर्थ यह है कि साधक अपने घर, अपने पूजास्थल और अपने हृदय में देवी चेतना का आवाहन करता है। इस प्रकार घटस्थापना बाहर रखे हुए कलश से अधिक भीतर जागी हुई दिव्य उपस्थिति का संकेत बन जाती है।
नवरात्रि के नौ दिन दुर्गा जी के नौ रूपों, अर्थात नवदुर्गा, को समर्पित माने जाते हैं। इन नौ रूपों को साधना की एक क्रमिक प्रगति के रूप में भी समझा जाता है।
नवदुर्गा के रूप इस प्रकार हैं:
| क्रम | देवी का नाम | आध्यात्मिक संकेत |
|---|---|---|
| 1 | शैलपुत्री | स्थिरता और आरम्भ |
| 2 | ब्रह्मचारिणी | तप, अनुशासन और समर्पण |
| 3 | चंद्रघंटा | साहस और रक्षा |
| 4 | कूष्मांडा | सृजन और दिव्य प्रकाश |
| 5 | स्कंदमाता | करुणा और मातृत्व |
| 6 | कात्यायनी | धर्ममय शक्ति और संकल्प |
| 7 | कालरात्रि | भय और अज्ञान का विनाश |
| 8 | महागौरी | शुद्धि और करुणा |
| 9 | सिद्धिदात्री | सिद्धि, पूर्णता और कृपा |
इन नौ रूपों को यदि ध्यान से देखा जाए, तो यह केवल देवी के अलग रूप नहीं हैं बल्कि साधक के भीतर घटित होने वाली आध्यात्मिक यात्रा के भी प्रतीक हैं।
वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का क्रम इस प्रकार रहेगा:
| दिन | तिथि | वार | पूजन | दिन का रंग |
|---|---|---|---|---|
| पहला दिन | 11 अक्टूबर 2026 | रविवार | माँ शैलपुत्री | नारंगी |
| दूसरा दिन | 12 अक्टूबर 2026 | सोमवार | माँ ब्रह्मचारिणी | सफेद |
| तीसरा दिन | 13 अक्टूबर 2026 | मंगलवार | माँ चंद्रघंटा | लाल |
| चौथा दिन | 14 अक्टूबर 2026 | बुधवार | माँ कूष्मांडा | रॉयल ब्लू |
| पाँचवां दिन | 15 अक्टूबर 2026 | गुरुवार | माँ स्कंदमाता | पीला |
| छठा दिन | 16 अक्टूबर 2026 | शुक्रवार | माँ कात्यायनी | हरा |
| सातवां दिन | 17 अक्टूबर 2026 | शनिवार | माँ कालरात्रि | धूसर |
| आठवां दिन | 18 अक्टूबर 2026 | रविवार | माँ महागौरी | बैंगनी |
| नौवां दिन | 19 अक्टूबर 2026 | सोमवार | दुर्गा अष्टमी और महानवमी | मोर हरा |
| दसवां दिन | 20 अक्टूबर 2026 | मंगलवार | विजयदशमी | विजय और धर्म की जय |
11 अक्टूबर 2026, रविवार को नवरात्रि का पहला दिन माँ शैलपुत्री को समर्पित रहेगा। वे हिमालय की पुत्री मानी जाती हैं और स्थिरता, धैर्य तथा साधना के आरम्भ का प्रतीक हैं। आध्यात्मिक जीवन का पहला कदम धरातल से जुड़ना होता है और शैलपुत्री इसी आधार शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं।
इस दिन का रंग नारंगी माना गया है। नारंगी रंग उत्साह, तेज, प्रेरणा और पवित्र आकांक्षा का प्रतीक है। यह साधक को स्मरण कराता है कि आध्यात्मिक यात्रा साहस और जागरूकता से आरम्भ होती है।
12 अक्टूबर 2026, सोमवार को दूसरा दिन माँ ब्रह्मचारिणी के पूजन का है। यह रूप तपस्या, आत्मसंयम, साधना और एकनिष्ठ भक्ति का प्रतीक है। ब्रह्मचारिणी वह शक्ति हैं जो लक्ष्य से विचलित हुए बिना साधना के मार्ग पर स्थिर चलना सिखाती हैं।
इस दिन का रंग सफेद है। सफेद शांति, पवित्रता और निर्मलता का प्रतीक माना जाता है। जब मन की चंचलता कम होती है तब भीतर की शांति अनुभव होने लगती है और यही ब्रह्मचारिणी का संदेश है।
13 अक्टूबर 2026, मंगलवार को तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी। वे दुर्गा का वीर और संरक्षक रूप हैं। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र की आभा उन्हें विशिष्ट बनाती है। वे भय को दूर करती हैं और साधक को साहस देती हैं।
इस दिन का रंग लाल है। लाल शक्ति, संकल्प, साहस और सक्रिय दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है। यह रंग बताता है कि साधना केवल शांत बैठने की प्रक्रिया नहीं बल्कि भीतर के अंधकार का सामना करने की शक्ति भी है।
14 अक्टूबर 2026, बुधवार का दिन माँ कूष्मांडा को समर्पित है। उन्हें वह आदिशक्ति माना जाता है जिन्होंने अपनी दिव्य मुस्कान से सृष्टि के अंड का सृजन किया। यह रूप विराट सृजन, ब्रह्मांडीय चेतना और दिव्य प्रकाश का द्योतक है।
इस दिन का रंग रॉयल ब्लू है। यह गहराई, विवेक और व्यापकता का प्रतीक है। यह साधक को स्मरण कराता है कि देवी की शक्ति केवल व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं बल्कि समूची सृष्टि में व्यापी है।
15 अक्टूबर 2026, गुरुवार को पाँचवां दिन माँ स्कंदमाता की उपासना का है। वे भगवान कार्तिकेय की माता हैं और मातृत्व, करुणा, सुरक्षा तथा प्रेमपूर्ण संरक्षण का प्रतीक हैं।
इस दिन का रंग पीला है। पीला ज्ञान, शुभता, प्रकाश और अनुग्रह का द्योतक है। यह बताता है कि करुणा और ज्ञान साथ साथ चल सकते हैं और माँ की कृपा में दोनों ही समाहित रहते हैं।
16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को छठा दिन माँ कात्यायनी को समर्पित है। वे वह दिव्य शक्ति हैं जिन्होंने महिषासुर का वध किया। वे धार्मिक साहस, न्यायपूर्ण कर्म और अधर्म के विरोध का रूप हैं।
इस दिन का रंग हरा है। हरा रंग संतुलन, नवीकरण, विकास और सामंजस्य का प्रतीक है। यह दिखाता है कि वीरता और शांति एक दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि सच्ची धर्मशक्ति में दोनों साथ होते हैं।
17 अक्टूबर 2026, शनिवार को सातवां दिन माँ कालरात्रि का है। वे दुर्गा के सबसे प्रचंड रूपों में से एक मानी जाती हैं। उनका स्वरूप अज्ञान, भय और नकारात्मकता का नाश करने वाला है।
इस दिन का रंग धूसर माना गया है। धूसर संतुलन, तटस्थता और भीतरी संयम का संकेत देता है। यह बताता है कि अंधकार का सामना करने के लिए भीतर की स्थिर शक्ति आवश्यक है।
18 अक्टूबर 2026, रविवार को आठवां दिन माँ महागौरी को समर्पित है। वे शुद्धि, क्षमा, करुणा और दिव्य कोमलता का स्वरूप मानी जाती हैं। कालरात्रि के प्रचंड रूप के बाद महागौरी का श्वेत और शांत रूप यह सिखाता है कि शुद्धि के बाद कोमलता प्रकट होती है।
इस दिन का रंग बैंगनी है। बैंगनी आध्यात्मिकता, आंतरिक रूपांतरण और उच्च चेतना का प्रतीक है। यह साधक को भीतर उठती हुई सूक्ष्म बुद्धि की ओर ले जाता है।
19 अक्टूबर 2026, सोमवार को नवमी का अत्यंत पावन दिन आएगा। इस दिन को कई परम्पराओं में दुर्गा अष्टमी और महानवमी के संधिकाल का विशेष महत्व प्राप्त है। इसी समय संधि पूजा की जाती है।
संधि पूजा का समय, नई दिल्ली के अनुसार, प्रातः 10:27 बजे से 11:15 बजे तक माना गया है। यह वह सूक्ष्म काल है जहाँ एक शक्ति चरण दूसरे में रूपांतरित होता है। इसलिए इस समय की पूजा अत्यंत विशिष्ट मानी जाती है।
इस दिन का रंग मोर हरा है। यह समृद्धि, सौंदर्य, संतुलन और दिव्य माधुर्य का संकेत देता है।
20 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि विजयदशमी के साथ पूर्ण होगी। यह दिन धर्म की अधर्म पर विजय, प्रकाश की अंधकार पर विजय और सत्य की असत्य पर विजय का प्रतीक है।
इस दिन दो महान स्मृतियां एक साथ जुड़ी रहती हैं। पहली, भगवान राम की रावण पर विजय। दूसरी, माँ दुर्गा की महिषासुर पर विजय। इसीलिए विजयदशमी केवल पर्व नहीं बल्कि धर्म की सार्थकता का उद्घोष है।
कई क्षेत्रों में इस दिन आयुध पूजा भी की जाती है। औजार, पुस्तकें, वाद्य यंत्र और कार्य से जुड़े साधनों की पूजा करके यह स्मरण किया जाता है कि ज्ञान, श्रम और साधन भी दिव्य कृपा के पात्र हैं।
नवरात्रि के रंग केवल उत्सव की परम्परा नहीं हैं। वे साधक की भीतर की यात्रा को भी दर्शाते हैं।
| रंग | आध्यात्मिक संकेत |
|---|---|
| नारंगी | आरम्भ, उत्साह और आकांक्षा |
| सफेद | शुद्धि और शांति |
| लाल | शक्ति और साहस |
| रॉयल ब्लू | गहराई और ब्रह्मांडीय चेतना |
| पीला | ज्ञान और शुभता |
| हरा | संतुलन और विकास |
| धूसर | तटस्थता और आंतरिक धैर्य |
| बैंगनी | आध्यात्मिक रूपांतरण |
| मोर हरा | सौंदर्य, समृद्धि और दिव्य माधुर्य |
इन रंगों को यदि एक क्रम में देखा जाए, तो वे साधक की चेतना के क्रमिक विस्तार का भी प्रतीक बन जाते हैं।
आधुनिक जीवन में गति बहुत तेज हो गई है। दिनचर्या अक्सर बिखरी हुई, तनावपूर्ण और बाहरी व्यस्तताओं से भरी रहती है। ऐसे समय में नवरात्रि एक पवित्र विराम देती है। नौ दिनों तक पूजा, जप, आरती और पारिवारिक सहभागिता जीवन की गति को धीमा करती है और मन को भीतर लौटने का अवसर देती है।
मंदिरों की रोशनी, घरों की सजावट, शाम की आरती और भक्ति संगीत का वातावरण बाहर से जितना सुंदर होता है, उससे अधिक महत्व उस सूक्ष्म परिवर्तन का है जो भीतर घटता है। नवरात्रि व्यक्ति को स्मरण कराती है कि शक्ति केवल पूजी जाने वाली सत्ता नहीं बल्कि भीतर जगाई जाने वाली चेतना भी है।
यदि नवरात्रि की रातों में कोई खुले आकाश के नीचे कुछ देर ठहर जाए, तो शरद ऋतु का विशेष सौंदर्य स्वयं अनुभव होने लगता है। वर्षा के बाद का निर्मल आकाश, गहराता हुआ नीला विस्तार और रात में चमकते तारों के बीच भक्ति का स्वर कुछ अधिक ही मर्मस्पर्शी लगता है।
ऐसे क्षणों में नवरात्रि का अर्थ केवल देवी उत्सव नहीं रहता। वह यह स्मरण भी बन जाता है कि वही दिव्य शक्ति, जिसकी पूजा बाहर की जाती है, भीतर भी मौन रूप से विद्यमान है। ये नौ रातें एक निमंत्रण हैं, अधिक मजबूत बनने का, अधिक जागरूक बनने का, अधिक करुणामय बनने का।
और संभव है कि जब दसवें दिन विजयदशमी के दीप जलें तब बाहर मनाई जा रही विजय भीतर भी धीरे से प्रारम्भ हो चुकी हो।
शारदीय नवरात्रि 2026 कब से कब तक है
शारदीय नवरात्रि 2026 रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 तक रहेगी।
घटस्थापना का क्या महत्व है
घटस्थापना नवरात्रि का आरम्भिक अनुष्ठान है, जो घर और हृदय में देवी चेतना के आवाहन का प्रतीक है।
नवरात्रि के नौ दिन किन देवियों को समर्पित हैं
ये नौ दिन शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री को समर्पित हैं।
विजयदशमी का मुख्य संदेश क्या है
विजयदशमी धर्म, सत्य और प्रकाश की अधर्म, असत्य और अंधकार पर विजय का प्रतीक है।
नवरात्रि के रंगों का महत्व क्या है
नवरात्रि के रंग साधना की विभिन्न अवस्थाओं, जैसे शुद्धि, शक्ति, संतुलन, ज्ञान और आध्यात्मिक रूपांतरण, का प्रतीक माने जाते हैं।
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