By पं. संजीव शर्मा
सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ केरल का नववर्ष और आध्यात्मिक संदेश

केरल का नाम लेते ही जो त्योहार सबसे पहले याद आता है, उनमें विषु प्रमुख है। यह केवल एक क्षेत्रीय पर्व नहीं बल्कि मलयालम नववर्ष की शुरुआत, सूर्य के मेष राशि में प्रवेश और जीवन में नये चक्र के आरम्भ का सूचक माना जाता है। विषु 2026 भी इसी भावना के साथ आएगा, जहाँ सुबह की पहली झलक पूरे वर्ष की मानसिक दिशा तय करने वाली मानी जाती है।
विषु उस समय मनाया जाता है जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है और सौर वर्ष के नये चरण की शुरुआत होती है। यह परिवर्तन नये कृषि चक्र, नयी मानसिक ऊर्जा और आध्यात्मिक जागरण का संकेत देता है। मेष सूर्य की उच्च राशि मानी जाती है, इसलिए इस दिन की ऊर्जा को विशेष रूप से तेजस्वी और प्रेरक माना जाता है।
वर्ष 2026 में विषु निम्न तिथि पर मनाया जाएगा।
| विवरण | तिथि | वार | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| विषु 2026 की तिथि | 14 अप्रैल 2026 | मंगलवार | केरल में विषु उत्सव और मलयालम नववर्ष |
| सूर्य का मेष राशि में प्रवेश | 14 अप्रैल 2026 | मंगलवार | मेष संक्रांति, सौर वर्ष का आरम्भ |
14 अप्रैल 2026, मंगलवार को विषु मनाया जाएगा। यही वह समय है जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर सौर नवचक्र की शुरुआत का संकेत देगा। इस दिन को नये कृषि और आध्यात्मिक चक्र के आरम्भ के रूप में देखा जाता है, इसलिए सुबह की पूजा, विषुक्कनी और संकल्प का विशेष महत्व रहता है।
विषु शब्द की जड़ संस्कृत के विषुवम् शब्द से मानी जाती है, जिसका अर्थ है समत्व या संतुलन। प्राचीन परंपरा में विषु को उस समय से जोड़ा गया जब दिन और रात लगभग समान होते थे, इसलिए इसे प्रकाश और अंधकार के संतुलन का प्रतीक माना गया।
आध्यात्मिक स्तर पर विषु कुछ मुख्य भावों को उजागर करता है।
यह मान्यता भी प्रचलित है कि विषु की सुबह जो पहला दृश्य देखा जाता है, उसका प्रभाव पूरे वर्ष की मानसिकता पर पड़ता है। इसी कारण विषुक्कनी की व्यवस्था को इतना पवित्र और संवेदनशील माना जाता है।
विषु की सबसे प्रमुख परंपरा विषुक्कनी है। शब्दार्थ की दृष्टि से इसका अर्थ है देखने योग्य पहली पावन दृश्यरचना।
इस अनुष्ठान में परिवार के बड़े सदस्य विषु से एक रात पहले, प्रातःकाल के लिए एक विशेष पवित्र सजावट तैयार करते हैं, जिसमें सामान्यतः ये वस्तुएँ रखी जाती हैं।
इन सबको सुसज्जित रूप से देवता के सामने रखा जाता है। विषु की सुबह परिवार के सदस्यों को आँखें बंद रखकर पूजा कमरे तक ले जाया जाता है और फिर धीरे से आँखें खोलकर सबसे पहले विषुक्कनी का दर्शन कराया जाता है।
विश्वास यह है कि वर्ष की शुरुआत abundance और शुभता की इस झलक से हो, तो मन पूरे वर्ष समृद्धि, कृतज्ञता और सकारात्मक दृष्टि से जुड़ा रहता है।
एक प्रचलित मान्यता के अनुसार विषु उस दिन से भी जुड़ा है जब भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक असुर का वध किया था। यह घटना अधर्म पर धर्म की, भय पर निर्भयता की और अंधकार पर प्रकाश की विजय का संकेत मानी जाती है।
एक दूसरी परंपरागत मान्यता यह भी बताती है कि प्राचीन समय में विषु को खगोलीय गणनाओं की शुरुआत का दिन माना जाता था। अर्थात यह केवल पर्व नहीं बल्कि समय के नये खंड के आरम्भ और आकाशीय संतुलन की स्वीकृति भी थी। इस दृष्टि से विषु का अर्थ केवल सांस्कृतिक उत्सव से कहीं अधिक व्यापक हो जाता है।
विषु 2026 के दिन घर, मंदिर और समाज तीनों स्तर पर अनेक सुगठित परंपराएँ दिखाई देंगी।
इस समय भीतर की शांति और कृतज्ञता के साथ वर्ष के लिए नये संकल्प किए जाते हैं।
विषु का एक भावनात्मक और सामाजिक रूप से महत्त्वपूर्ण हिस्सा विषु कैनीत्तम है। इसमें परिवार के बड़े सदस्य बच्चों और छोटे सदस्यों को धन या उपहार स्वरूप राशि देते हैं।
इससे परिवार में स्नेह, सुरक्षा और संबल का भाव और गहरा होता है।
विषु के दिन घर में विशेष भोजन विषु साद्य बनाया जाता है, जिसमें सामान्यतः।
शाम के समय कई स्थानों पर आतिशबाजी, उत्सव और लोगों के बीच परस्पर शुभकामनाएँ आदान प्रदान की जाती हैं। इससे नववर्ष का वातावरण हर्ष और सामुदायिक जुड़ाव से भर जाता है।
विषु उसी समय आता है जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से यह गोचर कुछ महत्वपूर्ण संकेत देता है।
सूर्य आत्मा, अधिकार और जीवन शक्ति का प्रतीक माना जाता है। मेष में उसका गोचर लोगों को यह प्रेरणा दे सकता है कि वे अपनी क्षमता को स्पष्ट रूप से पहचानें और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ें।
विषुक्कनी की हर वस्तु अपने भीतर गहरा प्रतीक लिए होती है।
इन सबको एक साथ देखने का अर्थ है कि वास्तविक समृद्धि केवल धन नहीं बल्कि भोजन, स्वास्थ्य, प्रकाश, ज्ञान और आत्मचेतना का संतुलन है।
विषु 2026 उस समय आएगा जब सूर्य उच्च स्थिति में होकर नयी ऊर्जा का संदेश देगा। इस पृष्ठभूमि में यह दिन कुछ गहरे चिंतन के लिए अत्यन्त उपयुक्त रहेगा।
विषु का गहरा संदेश यह है कि समृद्धि सबसे पहले दृष्टि में जन्म लेती है। जब व्यक्ति वर्ष की शुरुआत abundance और प्रकाश देखने के भाव से करता है, तो उसका मन कृतज्ञता, आत्मविश्वास और संतुलन के साथ काम करने के लिए तैयार होता है।
विषु केवल एक और त्योहार नहीं बल्कि यह याद दिलाने वाला दिन है कि हर नया चक्र प्रकाश से ही शुरू होता है।
यह संकेत देता है कि।
अप्रैल 2026 में जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेगा और विषु की सुबह विषुक्कनी की रोशनी में आँखें खुलेंगी तब भीतर उठता संकल्प ही तय करेगा कि नया वर्ष केवल कैलेंडर का बदलाव रहेगा या सचमुच जीवन की दिशा में एक सार्थक परिवर्तन बनेगा।
विषु 2026 कब मनाया जाएगा
विषु 2026 मंगलवार 14 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश के साथ मलयालम नववर्ष और नये सौर चक्र की शुरुआत का संकेत देगा।
विषु और मेष संक्रांति का आपस में क्या सम्बन्ध है
विषु उसी समय के आसपास मनाया जाता है जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है। यही गोचर सौर वर्ष की शुरुआत और विषु के ज्योतिषीय आधार का संकेत है।
विषुक्कनी की तैयारी कब और कैसे की जाती है
विषुक्कनी की व्यवस्था विषु से एक रात पहले की जाती है। परिवार के बड़े सदस्य धान, फल, सब्जियाँ, सोना, दर्पण, धार्मिक ग्रंथ, दीपक और भगवान कृष्ण की मूर्ति या चित्र को सजाकर पूजा स्थान पर रखते हैं ताकि सुबह सबसे पहले उसी दर्शन से दिन और वर्ष की शुरुआत हो।
विषु कैनीत्तम का आध्यात्मिक अर्थ क्या समझा जाता है
विषु कैनीत्तम केवल पैसे देना नहीं बल्कि बड़े सदस्यों द्वारा छोटे सदस्यों को समृद्धि, सुरक्षा और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। इससे संदेश मिलता है कि संपन्नता साझा की जाए और परिवार में प्रेम तथा जिम्मेदारी का प्रवाह बना रहे।
विषु 2026 से व्यक्ति अपने जीवन के लिए कौन सी मुख्य सीख ले सकता है
यह कि वास्तविक समृद्धि दृष्टिकोण से शुरू होती है। यदि वर्ष की शुरुआत कृतज्ञता, आत्मजागरूकता और साहस के साथ की जाए, तो सूर्य की उच्च स्थिति का लाभ लेकर व्यक्ति अपने काम, संबंध और लक्ष्य सभी क्षेत्रों में अधिक स्पष्ट और संतुलित ढंग से आगे बढ़ सकता है।
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