By पं. नरेंद्र शर्मा
कन्या संक्रांति पर मनाया जाने वाला पर्व, भगवान विश्वकर्मा को समर्पित और शिल्पियों तथा कारीगरों के लिए महत्वपूर्ण

विश्वकर्मा पूजा 2026 गुरुवार, 17 सितंबर को कन्या संक्रांति के पावन अवसर पर मनाई जाएगी। विश्वकर्मा जयंती का समय दोपहर 04:14 बजे रहेगा। संक्रांति का क्षण प्रातः 07:59 बजे होगा। स्वर्गीय स्थपति भगवान विश्वकर्मा की पूजा का यह महान पर्व कारीगरों, कला प्रेमियों और शिल्पकारों के लिए सर्वोच्च महत्व रखता है। सभी देवताओं के भवन, शस्त्रास्त्र और वाहन बनाने वाले इस दिव्य शिल्पी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। गुजरात, राजस्थान के कुछ भागों और पूर्वी भारत के भाद्र मास के अंतिम दिन यह विशेष उत्सव होता है।
विश्वकर्मा जयंती कन्या संक्रांति या कन्या संक्रमानम के दिन आती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह सामान्यतः 16 या 17 सितंबर को होती है। वर्ष 2026 में यह गुरुवार, 17 सितंबर को आएगी। संदक्रांति का क्षण प्रातः 07:59 बजे होगा। विश्वकर्मा जयंती का मुख्य समय दोपहर 04:14 बजे निर्धारित है। यह तिथि कारीगर वर्ग के लिए शुभ मुहूर्त लेकर आती है।
दुकानों, कारखानों, कार्यालयों और कार्यस्थलों पर विशेष पूजा आयोजन होते हैं। यह दिन शिल्पकारों के लिए अवकाश का प्रतीक है। उपकरणों की पूजा के बाद उनका उपयोग नहीं किया जाता। भव्य भोज का आयोजन होता है। मालिक और कर्मचारी एक साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं। आकाश में पतंगबाजी का रंगीन नजारा दिखता है।
भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मा के पुत्र और विश्व के निर्माता के रूप में पूजा जाता है। ऋग्वेद और स्थपत्य वेद में उनके निर्माण कौशल का वर्णन है। पांडवों की मायासभा और भगवान कृष्ण की द्वारका का निर्माण इन्होंने किया। कारीगर वर्ग इन्हें अपना आराध्य देव मानता है।
उपकरणों के सुचारू संचालन और कार्यस्थल की समृद्धि हेतु प्रार्थना की जाती है। शिल्पकार अपने औजारों की पूजा करते हैं। यह दिन सफलता और समृद्धि का प्रतीक है। कला और शिल्प के क्षेत्र में उन्नति की कामना की जाती है। विश्वकर्मा पूजा कार्यकुशलता का उत्सव है।
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। कार्यस्थल को फूलों और रंगोली से सजाएं। स्वच्छ स्थान पर मंडप बनाएं। विश्वकर्मा जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। कलश स्थापना करें। तांबे के कलश में जल भरें। आम पत्र और नारियल स्थापित करें।
| श्रेणी | सामग्री |
|---|---|
| प्रतिमा | विश्वकर्मा जी चित्र, मूर्ति, हस्तशिल्प |
| कलश | तांबा कलश, आम पत्र, नारियल, सुपारी |
| पूजन | चंदन, कुमकुम, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य |
| औजार पूजा | हथौड़ा, आरी, ड्रिल, मशीनरी, उपकरण |
| भोग | फल, मिठाई, दूध, पंचामृत, नारियल |
षोडशोपचार पूजा करें। गणेश पूजन से प्रारंभ करें। विश्वकर्मा अथर्वशीर्ष पाठ करें। पंचामृत से अभिषेक करें। फूल अर्पित करें। धूप दीप प्रज्वलित करें। आरती करें। औजारों की पूजा विशेष महत्व रखती है। प्रत्येक उपकरण पर तिलक लगाएं।
यज्ञ कुंड में हवन करें। विशिष्ट मंत्रों से आहुति दें। ब्राह्मणों को दान दें। कारीगरों को भोजन प्रसाद वितरित करें। कार्यस्थल पर रक्षा सूत्र बांधें। संक्रांति काल में तर्पण करें।
पंडाल सज्जा भव्य होती है। फूलमालाओं से सजावट। विद्युत सज्जा का नजारा आकर्षक होता है। कर्मचारियों के परिवार भी सम्मिलित होते हैं। पटाखों का विधान है। भोज का विशेष महत्व। सभी एक साथ भोजन करते हैं।
कई क्षेत्रों में पतंगबाजी प्रतियोगिता होती है। आकाश रंगमय हो जाता है। यह सामुदायिक एकता का प्रतीक है। कारखानों में मशीनरी की आरती उतारी जाती है। उपकरणों को विश्राम दिया जाता है।
विश्वकर्मा पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान विश्वकर्मा आपके समस्त प्रयासों में सफलता प्रदान करें। आपके स्वप्निल भवन का निर्माण हो। आपके सभी उपकरण सुचारू संचालित हों।
आपके परिवार को विश्वकर्मा जी की कृपा प्राप्त हो। कार्यस्थल पर समृद्धि आए। कला कौशल में उन्नति हो। सभी शुभकामनाएं। विश्वकर्मा जयंती पर हर्षोल्लास से मनाएं।
विश्वकर्मा पूजा ऋषि पंचमी से निकटता रखती है। सृष्टि निर्माण में ऋषियों का योगदान। स्थपत्य कला में उनके ग्रंथ। विश्वकर्मा उनके सिद्धांतों के प्रणेता हैं। यह संयोग शास्त्रीय ज्ञान का सम्मान दर्शाता है।
कार्य सफलता प्राप्त होती है। उपकरणों का संचालन निर्बाध रहता है। कारीगरों को कुशलता मिलती है। व्यापार वृद्धि होती है। पारिवारिक सुख बढ़ता है। धन समृद्धि का आगमन होता है। शिल्प कला में निपुणता आती है।
गुजरात में विशाल पंडाल आयोजन। राजस्थान के कुछ भागों में विशेष उत्सव। पूर्वी भारत में भाद्र संक्रांति। बंगाल में कन्या संक्रांति। कारीगर बस्तियों में भव्य सजावट। सभी क्षेत्रों में एक ही भावना।
विश्वकर्मा पूजा 2026 कब है?
गुरुवार, 17 सितंबर 2026। संक्रांति प्रातः 07:59 बजे।
विश्वकर्मा जयंती क्यों मनाई जाती है?
दिव्य शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा के जन्मोत्सव हेतु।
विश्वकर्मा पूजा में कौन सी पूजा होती है?
प्रतिमा पूजन, औजार पूजा, हवन, भोज वितरण।
विश्वकर्मा पूजा की तिथि क्या है?
17 सितंबर 2026, कन्या संक्रांति पर।
विश्वकर्मा पूजा का महत्व क्या है?
कारीगरों की सफलता। उपकरण सुचारुता। कार्य वृद्धि।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएं
अनुभव: 20
इनसे पूछें: Family Planning, Career
इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें
ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।
अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।
अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।
WELCOME TO
Right Decisions at the right time with ZODIAQ
500+
USERS
100K+
TRUSTED ASTROLOGERS
20K+
DOWNLOADS