2026 प्रदोष व्रत तिथियाँ: त्रयोदशी प्रदोषम का सम्पूर्ण मार्गदर्शन

By पं. संजीव शर्मा

मासिक प्रदोष व्रत तिथियाँ, काल, प्रकार और महत्त्व का विस्तृत विवरण

2026 प्रदोष व्रत तिथियाँ और प्रदोष काल: सम्पूर्ण प्रदोष व्रत मार्गदर्शक

प्रदोष व्रत को हमेशा से ऐसा समय माना गया है जब शिव भक्त अपनी आध्यात्मिक यात्रा को गहरा कर सकते हैं, बीते हुए कर्मों का बोझ हल्का कर सकते हैं और जीवन में नए सुख तथा शांति को आमंत्रित कर सकते हैं। इस व्रत की विशेषता यह है कि यह हर महीने दो बार आता है, इसलिए जो साधक इसे नियमित रूप से अपनाते हैं उनके जीवन में एक अलग ही स्थिरता और सहजता का अनुभव होने लगता है।

2026 में प्रदोष व्रत की तिथियाँ, प्रदोष काल के समय और त्रयोदशी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए नई दिल्ली के लिए एक विस्तृत सूची तैयार की गई है, जिससे साधक अपने पूजा समय को आसानी से योजनाबद्ध कर सकें। प्रदोष व्रत का समय हमेशा सूर्यास्त के बाद के पवित्र पलों से जुड़ा होता है, इसलिए इस काल की सही जानकारी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है।

2026 में प्रदोष व्रत कब हैं

2026 के वर्ष में प्रदोष व्रत की तिथियाँ पूरे साल में फैली हुई हैं। यह व्रत त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है, जो हर पक्ष में एक बार आती है। वर्ष भर की कुछ मुख्य तिथियाँ इस प्रकार हैं।

  • जनवरी: 1, 16, 30
  • फ़रवरी: 14
  • मार्च: 1, 16, 30
  • अप्रैल: 15, 28
  • मई: 14, 28
  • जून: 12, 27
  • जुलाई: 12, 26
  • अगस्त: 10, 25
  • सितंबर: 8, 24
  • अक्टूबर: 8, 23
  • नवंबर: 6, 22
  • दिसंबर: 6, 21

ये सभी तिथियाँ त्रयोदशी के दौरान आती हैं और जहाँ जहाँ त्रयोदशी प्रदोष काल को स्पर्श करती है, वहीं प्रदोष व्रत मनाया जाता है। कुछ तिथियों पर गुरु, Soma, Shani, Shukra, Bhauma, Budha और Ravi प्रदोष के रूप में अलग अलग विशेषताएँ भी जुड़ी होती हैं।

2026 प्रदोष व्रत और प्रदोष काल की सम्पूर्ण सूची

नई दिल्ली के सूर्यास्त के समय को आधार बनाकर 2026 के लिए प्रदोष काल, तिथि, तिथि आरम्भ और समाप्ति का विवरण इस प्रकार है।

महीना तिथि व दिन प्रदोष प्रकार प्रदोष काल अवधि तिथि (त्रयोदशी) तिथि आरम्भ तिथि समाप्ति
जनवरी 1 जनवरी, गुरुवार गुरु प्रदोष 17:35 - 20:19 2 h 44 m पौष शुक्ल त्रयोदशी 01:47, 1 जनवरी 22:22, 1 जनवरी
जनवरी 16 जनवरी, शुक्रवार शुक्र प्रदोष 17:47 - 20:29 2 h 42 m माघ कृष्ण त्रयोदशी 20:16, 15 जनवरी 22:21, 16 जनवरी
जनवरी 30 जनवरी, शुक्रवार शुक्र प्रदोष 17:59 - 20:37 2 h 38 m माघ शुक्ल त्रयोदशी 11:09, 30 जनवरी 08:25, 31 जनवरी
फ़रवरी 14 फ़रवरी, शनिवार शनि प्रदोष 18:10 - 20:44 2 h 34 m फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी 16:01, 14 फ़रवरी 17:04, 15 फ़रवरी
मार्च 1 मार्च, रविवार रवि प्रदोष 18:21 - 19:09 48 m फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी 20:43, 28 फ़रवरी 19:09, 1 मार्च
मार्च 16 मार्च, सोमवार सोम प्रदोष 18:30 - 20:54 2 h 24 m चैत्र कृष्ण त्रयोदशी 09:40, 16 मार्च 09:23, 17 मार्च
मार्च 30 मार्च, सोमवार सोम प्रदोष 18:38 - 20:57 2 h 19 m चैत्र शुक्ल त्रयोदशी 07:09, 30 मार्च 06:55, 31 मार्च
अप्रैल 15 अप्रैल, बुधवार बुध प्रदोष 18:47 - 21:00 2 h 14 m वैशाख कृष्ण त्रयोदशी 00:12, 15 अप्रैल 22:31, 15 अप्रैल
अप्रैल 28 अप्रैल, मंगलवार भौम प्रदोष 18:54 - 21:04 2 h 10 m वैशाख शुक्ल त्रयोदशी 18:51, 28 अप्रैल 19:51, 29 अप्रैल
मई 14 मई, गुरुवार गुरु प्रदोष 19:04 - 21:09 2 h 05 m ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी 11:20, 14 मई 08:31, 15 मई
मई 28 मई, गुरुवार गुरु प्रदोष 19:12 - 21:15 2 h 02 m ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी 07:56, 28 मई 09:50, 29 मई
जून 12 जून, शुक्रवार शुक्र प्रदोष 19:36 - 21:20 1 h 44 m ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी 19:36, 12 जून 16:07, 13 जून
जून 27 जून, शनिवार शनि प्रदोष 19:23 - 21:23 2 h 01 m ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी 22:22, 26 जून 00:43, 28 जून
जुलाई 12 जुलाई, रविवार रवि प्रदोष 19:22 - 21:24 2 h 02 m आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी 02:04, 12 जुलाई 22:29, 12 जुलाई
जुलाई 26 जुलाई, रविवार रवि प्रदोष 19:16 - 21:21 2 h 05 m आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी 13:57, 26 जुलाई 16:14, 27 जुलाई
अगस्त 10 अगस्त, सोमवार सोम प्रदोष 19:05 - 21:14 2 h 09 m श्रावण कृष्ण त्रयोदशी 08:00, 10 अगस्त 04:54, 11 अगस्त
अगस्त 25 अगस्त, मंगलवार भौम प्रदोष 18:51 - 21:04 2 h 13 m श्रावण शुक्ल त्रयोदशी 06:20, 25 अगस्त 07:59, 26 अगस्त
सितंबर 8 सितंबर, मंगलवार भौम प्रदोष 18:35 - 20:52 2 h 18 m भाद्रपद कृष्ण त्रयोदशी 14:42, 8 सितंबर 12:30, 9 सितंबर
सितंबर 24 सितंबर, गुरुवार गुरु प्रदोष 18:16 - 20:39 2 h 23 m भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी 22:50, 23 सितंबर 23:18, 24 सितंबर
अक्टूबर 8 अक्टूबर, गुरुवार गुरु प्रदोष 17:59 - 20:27 2 h 28 m आश्विन कृष्ण त्रयोदशी 23:16, 7 अक्टूबर 22:15, 8 अक्टूबर
अक्टूबर 23 अक्टूबर, शुक्रवार शुक्र प्रदोष 17:44 - 20:16 2 h 33 m आश्विन शुक्ल त्रयोदशी 14:35, 23 अक्टूबर 13:36, 24 अक्टूबर
नवंबर 6 नवंबर, शुक्रवार शुक्र प्रदोष 17:33 - 20:09 2 h 37 m कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी 10:30, 6 नवंबर 10:47, 7 नवंबर
नवंबर 22 नवंबर, रविवार रवि प्रदोष 17:25 - 20:06 2 h 41 m कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी 04:56, 22 नवंबर 02:36, 23 नवंबर
दिसंबर 6 दिसंबर, रविवार रवि प्रदोष 17:24 - 20:07 2 h 43 m मार्गशीर्ष कृष्ण त्रयोदशी 00:51, 6 दिसंबर 02:22, 7 दिसंबर
दिसंबर 21 दिसंबर, सोमवार सोम प्रदोष 17:36 - 20:13 2 h 37 m मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी 17:36, 21 दिसंबर 14:23, 22 दिसंबर

इस तालिका के माध्यम से 2026 के प्रदोष व्रत को समझना बहुत आसान हो जाता है। हर तिथि का प्रदोष काल, तिथि और उसकी अवधि देखकर साधक पूजा की तैयारी पहले से कर सकते हैं।

प्रदोषम क्या है और प्रदोष व्रत क्यों रखा जाता है

प्रदोषम या प्रदोष व्रत हर महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाने वाला एक पवित्र उपवास है जो भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन संध्या के समय, जब सूर्य अस्त होकर आकाश में कोमल अंधकार छाने लगता है तब प्रदोष काल के रूप में एक विशेष अवधि आरम्भ होती है।

इस व्रत को इसलिए अनमोल माना गया है क्योंकि यह भक्त के बीते हुए पाप, दुर्भाग्य और मानसिक अशांति को कम करने में सहायक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो साधक नियमित रूप से प्रदोष व्रत रखते हैं, उनके जीवन में सफलता, सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की राह कुछ अधिक सुगम हो जाती है।

प्रदोष व्रत का मुख्य महत्व

प्रदोष व्रत का महत्व केवल एक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के कई पहलुओं को स्पर्श करता है।

  • बीते हुए कर्मिक दोषों को कम करने में सहायक
  • घर में शांति, आर्थिक स्थिरता और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी
  • भगवान शिव और माँ पार्वती की कृपा प्राप्त करने का विशेष समय
  • रुकावट, कष्ट, आपत्ति और विपरीत परिस्थितियों को कोमल बनाने वाला व्रत
  • सफलता, आध्यात्मिक प्रगति और जीवन में नए अवसर प्रदान करने वाला पवित्र दिन

जो व्यक्ति अपनी रोज़मर्रा की व्यस्तता में भी प्रदोष काल के दौरान थोड़ा समय निकालकर ध्यान और पूजा में लग जाता है, उसके मन में एक अलग ही शांति का प्रवेश होने लगता है।

प्रदोष काल क्या होता है

प्रदोष काल, सूर्यास्त के तुरंत बाद शुरू होने वाला वह समय है जो लगभग 2 घंटे 24 मिनट के आसपास माना जाता है, यद्यपि हर तिथि और स्थान के अनुसार इसकी अवधि थोड़ा बदल सकती है। जब त्रयोदशी तिथि का प्रभाव प्रदोष काल पर आकर मिलता है तब ही प्रदोष व्रत पूर्ण रूप से फलदायक माना जाता है।

धर्म ग्रन्थों में यह स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि प्रदोष काल में की गई शिव पूजा को अनेकों यज्ञों के बराबर फल प्राप्त होता है। इसलिए यह समय केवल संख्या के रूप में नहीं, बल्कि भाव के रूप में भी अत्यंत पवित्र माना जाता है।

2026 में प्रदोष व्रत के प्रमुख प्रकार

हर सप्ताह का अलग ग्रह और देवता से संबंध होता है, इसी से प्रदोष व्रत के अलग अलग स्वरूप भी बनते हैं। 2026 में भी विभिन्न दिनों पर प्रदोष व्रत निम्न प्रकार से देखा जाएगा।

प्रदोष का नाम किस दिन आता है विशेष लाभ का संदर्भ
Soma प्रदोष सोमवार मानसिक शांति, स्वास्थ्य, हृदय की कोमलता
Bhauma प्रदोष मंगलवार हिम्मत, साहस, विवादों का शमन
गुरु प्रदोष गुरुवार ज्ञान, अध्यापन, उच्च आध्यात्मिक प्रगति
शुक्र प्रदोष शुक्रवार गृहस्थ सुख, सौन्दर्य, आर्थिक सुदृढ़ता
Shani प्रदोष शनिवार कर्मिक ऋण कम होना, रुकावटों का निवारण
Ravi प्रदोष रविवार प्रभाव, प्रतिष्ठा, आत्मविश्वास में वृद्धि
Budha प्रदोष बुधवार बुद्धिमत्ता, संचार कौशल, व्यापार में लाभ

यह विभेद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई लोग अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं, ग्रह दोष या जीवन के लक्ष्यों के अनुसार विशेष दिन का प्रदोष व्रत चुनते हैं। जैसे जो व्यक्ति कर्मबाध्यता से राहत चाहते हैं, वे अक्सर Shani प्रदोष को विशेष रूप से मानते हैं।

प्रदोष व्रत की पावन कथा

पुराने धर्म ग्रन्थों के अनुसार एक समय देवताओं पर असुरों का भारी प्रहार हो रहा था। देवता, अपनी शक्ति कम पड़ती देखकर बहुत चिंतित हो गए। अंत में वे सबके उद्धारकर्ता भगवान शिव की शरण में आ गए और प्रदोष काल के दौरान उन्होंने गहरी विनती की।

उस समय भगवान शिव उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें रक्षा का आशीर्वाद दिया और असुरों से मुक्ति का वचन दिया। इस कथा से यह भावना मजबूत होती है कि जब भक्त प्रदोष काल में सच्चा मन रखकर प्रार्थना करते हैं तो उनकी रक्षा और मार्गदर्शन निश्चित रूप से होता है। यही कथा आगे चलकर प्रदोषम को शिव उपासना का एक विशेष अवसर बना देती है।

2026 प्रदोष व्रत तिथियों का उपयोग कैसे करें

2026 की पूरी तिथि सूची के साथ जीवन में इस व्रत को अपनाना आसान हो जाता है। इस सूची का सबसे सार्थक उपयोग तब होता है जब:

  • प्रत्येक महीने की शुरुआत में अगले प्रदोष की तिथि लिखकर याद रख ली जाए
  • घर के मंदिर या डायरी में प्रदोष काल का समय छोटे से चिन्ह के रूप में अंकित कर दिया जाए
  • परिवार के सदस्यों को पहले से बता दिया जाए ताकि सब लोग मिलकर भाग ले सकें

इस प्रक्रिया से केवल एक व्यक्ति नहीं, पूरा परिवार प्रदोष व्रत के अनुष्ठान का अनुभव कर सकता है।

क्या प्रदोष व्रत हर शहर में एक ही दिन होता है

यह ऐसा प्रश्न है जो अक्सर भक्तों के मन में आता है। प्रदोष व्रत का समय सूर्यास्त से जुड़ा होता है और सूर्यास्त का समय हर शहर में अलग होता है। इसी कारण से त्रयोदशी का प्रदोष काल से मिलन हर स्थान पर थोड़ा बदल सकता है।

इसी वजह से हो सकता है कि एक ही वर्ष में किसी शहर में प्रदोष व्रत एक तिथि को मनाया जाए और दूसरे शहर में अगले या पिछले दिन। इसलिए स्थानीय पंचांग देखना या विश्वसनीय ज्योतिष स्रोत से समय जाँचना हमेशा उपयुक्त माना जाता है।

प्रदोष व्रत में क्या करें

प्रदोष व्रत के दौरान भक्त की भावना सबसे महत्वपूर्ण होती है। फिर भी, कुछ आचरण ऐसे हैं जो सामान्य रूप से सभी के लिए उपयोगी माने गए हैं।

  • पूरे दिन या कम से कम प्रदोष काल तक व्रत या फलाहार पर रहना
  • प्रदोष काल से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना
  • शिवलिंग पर जल, दुग्ध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करना
  • बिल्व पत्र अर्पित करना, जो शिव को अति प्रिय माना जाता है
  • मन से या उच्चारण के साथ “Om Namah Shivaya” का जप करना
  • “Maha Mrityunjaya Mantra” का स्मरण करना और कुछ समय ध्यान में बैठना

ऐसा कहा जाता है कि प्रदोष काल के लगभग 1.5 घंटे के भीतर की गई पूजा, जप और ध्यान का फल साधारण दिनों की तुलना में अनेक गुना अधिक होता है।

प्रदोषम व्रत का आध्यात्मिक प्रभाव

जो व्यक्ति नियमित रूप से प्रदोष व्रत का पालन करते हैं, उनके भीतर धीरे धीरे एक अलग ही स्थिरता, सहनशीलता और अंदर से मजबूती का अनुभव होने लगता है। यह व्रत केवल बाहरी क्रियाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मन, विचार और आचरण पर भी प्रभाव डालता है।

लंबे समय तक की गई प्रदोष उपासना से व्यक्ति को अपने कर्मों की समझ अधिक गहराई से मिलने लगती है। इससे निर्णय अधिक सजगता, दयाभाव और संवेदनशीलता के साथ लिए जा सकते हैं, जिससे जीवन को संतुलित बनाने में सहायता मिलती है।

प्रदोषम और पारिवारिक सुख

जब प्रदोष व्रत को पारिवारिक रूप से अपनाया जाता है, तो घर के वातावरण में एक अलग ही कोमल ऊर्जा का संचार होने लगता है। जब बच्चे, वृद्ध और युवा सभी मिलकर प्रदोष काल में आरती, कथा या जप करते हैं, तो परिवार के रिश्तों में पारस्परिक सम्मान और प्रेम की गहराई बढ़ने लगती है।

इस दिन की शाम को यदि सब लोग मिल बैठकर थोड़ा समय केवल पूजा, भजन, स्तोत्र या कथा सुनने में बिताएँ तो घर का वातावरण धीरे धीरे तनाव से मुक्त होकर शांति से भरने लगता है। प्रदोष व्रत का यही व्यावहारिक पक्ष इसे आज के व्यस्त युग में और भी अधिक उपयोगी बना देता है।

FAQs: प्रदोष व्रत से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न

1. प्रदोषम क्या है और प्रदोष व्रत इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है
प्रदोषम त्रयोदशी तिथि के आसपास का वह समय है जब सूर्यास्त के दौरान भगवान शिव की विशेष कृपा दृष्टि का वर्णन मिलता है। इस समय रखा गया प्रदोष व्रत भक्त के कर्मिक बोझ को हल्का करता है और उसे समृद्धि, स्वास्थ्य, रुकावटों से मुक्ति तथा दिव्य अनुग्रह की ओर ले जाता है।

2. प्रदोष व्रत की तिथि का निर्धारण कैसे किया जाता है
जब त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल के दौरान विद्यमान रहती है तब उस दिन को प्रदोष व्रत के रूप में माना जाता है। क्योंकि प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद लगभग 1.5 घंटे या उससे अधिक समय तक रहता है, इसलिए सही तिथि जानने के लिए स्थान विशेष के अनुसार पंचांग देखना आवश्यक होता है।

3. अलग अलग शहरों में प्रदोष व्रत की तिथि अलग क्यों होती है
हर स्थान पर सूर्यास्त का समय अलग होता है, जिससे प्रदोष काल का आरम्भ और समाप्ति भी थोड़ा बदल जाती है। यदि किसी स्थान पर त्रयोदशी प्रदोष काल से पहले समाप्त हो जाए या बाद में आए, तो वहाँ प्रदोष व्रत की तिथि एक दिन आगे या पीछे हो सकती है।

4. कौन सा प्रदोषम मनोकामना पूर्ति के लिए अधिक शक्तिशाली माना जाता है
Soma प्रदोष जो सोमवार को आता है और Shani प्रदोष जो शनिवार को होता है, मनोकामना पूर्ति के लिए अत्यधिक प्रभावी माने गए हैं। Soma प्रदोष से मानसिक शांति, रोगों से राहत और आध्यात्मिक वृद्धि की बात कही जाती है, जबकि Shani प्रदोष से रुकावट, कर्मिक ऋण और नकारात्मकता में कमी आती है।

5. प्रदोष काल के दौरान अधिकतम लाभ के लिए क्या करना चाहिए
प्रदोष काल में स्नान करके पवित्र वस्त्र धारण करना, शिवलिंग पर जल, दुग्ध, दही, घी, शहद या गंगाजल चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ “Om Namah Shivaya” का जप, “Maha Mrityunjaya Mantra” का उच्चारण, बिल्व पत्र अर्पण और कुछ समय ध्यान में बिताना व्रत के फल को बहुत बढ़ा देता है।

पाएं अपनी सटीक कुंडली

कुंडली बनाएं

क्या आपको यह पसंद आया?

लेखक

पं. संजीव शर्मा

पं. संजीव शर्मा (63)


अनुभव: 20

इनसे पूछें: Family Planning, Career

इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें

ZODIAQ के बारे में

ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।

यदि आप एक उपयोगकर्ता हैं

अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।

यदि आप एक ज्योतिषी हैं

अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।

WELCOME TO

ZODIAQ

Right Decisions at the right time with ZODIAQ