By पं. नीलेश शर्मा
संकष्टी चतुर्थी का विशेष पर्व: मंगल दोष निवारण और ऋण मुक्ति के लिए

अंगारकी चतुर्थी का पावन पर्व भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर लेकर आता है। यह संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है जो कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। जब यह मंगलवार को पड़ता है तो इसे अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखकर विघ्नहर्ता गणेश की आराधना करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। इस वर्ष यह पर्व 6 जनवरी 2026 को मंगलवार को मनाया जाएगा।
अंगारकी चतुर्थी 2026 का निर्धारित समय निम्नलिखित है।
ये समय ग्रह नक्षत्रों के आधार पर गणना किए गए हैं। चंद्रोदय का समय लगभग रात्रि 08:54 बजे रहेगा। इस समय चंद्रमा के दर्शन के बाद ही पारण किया जाता है।
चंद्रोदय अंगारकी चतुर्थी का सबसे महत्वपूर्ण क्षण होता है। इस वर्ष 6 जनवरी 2026 को चंद्रोदय रात्रि 08:54 बजे के आसपास होगा। व्रतधारी इस समय तक निर्जल या फलाहार करते हैं। चंद्रमा के उदय होने पर गणेश जी को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करते हैं। यह समय भक्तों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
अंगारकी चतुर्थी की कथा भी अत्यंत रोचक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार अंगारक देव ने भगवान गणेश की कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी ने उन्हें वरदान दिया। इसी कारण इस दिन मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी का महत्व और बढ़ जाता है। महाराष्ट्र में तो यह पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
अंगारकी चतुर्थी का महत्व हिंदू पंचांग में अद्वितीय स्थान रखता है। संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को होने पर इसे अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से वर्ष भर की सभी संकष्टी चतुर्थियों के फल प्राप्त हो जाते हैं। भगवान गणेश विघ्नों के नाशक और सौभाग्यदायक हैं। उनकी पूजा से जीवन में आने वाली सभी परेशानियां समाप्त हो जाती हैं।
इस व्रत से मंगल दोष का प्रभाव भी कम होता है। ज्योतिषीय कुंडली में मंगल दोष होने वाले व्यक्तियों के लिए यह विशेष लाभकारी सिद्ध होता है। इसके अलावा ऋण मुक्ति भी इस व्रत का प्रमुख फल है। भगवान गणेश की कृपा से रुके हुए कार्य सिद्ध हो जाते हैं। जीवन समृद्धि और सुख से भर जाता है।
एक लंबे कालखंड से यह परंपरा चली आ रही है। भक्त इस दिन सादगी से व्रत रखते हैं। शाम को चंद्रोदय के समय गणेश जी की विशेष पूजा करते हैं। इससे न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है बल्कि भौतिक सुख भी प्राप्त होते हैं।
अंगारकी चतुर्थी की पूजा सरल किंतु विधिपूर्वक करनी चाहिए। प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
आरती के बाद संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें। चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य दें। रात्रि में पारण करें। विशेष रूप से महाराष्ट्र में इस दिन उड़द दाल के लड्डू और तिल के लड्डू प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाते हैं। ये प्रसाद गणेश जी को अत्यंत प्रिय हैं।
व्रत के दौरान सात्विक भोजन ही ग्रहण करें। ब्रह्मचर्य का पालन आवश्यक है। इस विधि से पूजा करने पर गणेश जी की कृपा निश्चित रूप से प्राप्त होती है।
अंगारकी चतुर्थी 2026 कब है?
6 जनवरी 2026 को मंगलवार को। चतुर्थी तिथि प्रातः 08:02 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 06:53 बजे तक रहेगी।
चंद्रोदय का समय क्या रहेगा?
रात्रि 08:54 बजे के आसपास चंद्रोदय होगा। इसी समय पारण करें।
इस व्रत से कौन से दोष दूर होते हैं?
मंगल दोष और ऋण दोष का प्रभाव समाप्त होता है। सभी विघ्न नष्ट हो जाते हैं।
पूजा में कौन सा प्रसाद चढ़ाएं?
मोडक, लड्डू, उड़द दाल के लड्डू विशेष रूप से चढ़ाएं।
क्या यह व्रत सभी संकष्टी के बराबर फल देता है?
हां, वर्ष भर की सभी संकष्टी चतुर्थियों के फल एक ही व्रत से प्राप्त हो जाते हैं।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएंअनुभव: 25
इनसे पूछें: करियर, पारिवारिक मामले, विवाह
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि.
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें