By पं. नीलेश शर्मा
माघ शुक्ल पंचमी पर बसंत पंचमी 2026 में सरस्वती पूजा, अबूझ मुहूर्त और बच्चों के अक्षर अभ्यास का महत्व

बसंत पंचमी 2026 ज्ञान, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती की कृपा प्राप्त करने का एक बहुत ही सुंदर अवसर लेकर आएगी। माघ मास की शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि को आने वाला यह दिन बसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। विद्यार्थी, कलाकार, संगीत साधक और ज्ञान के मार्ग पर चलने वाले सभी लोग इस दिन विशेष श्रद्धा से सरस्वती पूजा करते हैं। सही समय पर की गई पूजा से अध्ययन में प्रगति, स्मरण शक्ति में सुधार और विचारों में स्पष्टता का अनुभव होता है।
वैदिक पंचांग के अनुसार माघ शुक्ल पंचमी की तिथि और सरस्वती पूजा का मुहूर्त इस दिन को और भी शुभ बना देता है। जो लोग अपने जीवन या अपने बच्चों के जीवन में शिक्षा और विद्या का उजाला लाना चाहते हैं, उनके लिए बसंत पंचमी 2026 ऐसा दिन है जिसे साधना और संकल्प के साथ अवश्य मनाना चाहिए।
2026 में बसंत पंचमी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही मनाई जाएगी। इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की विधिवत पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
पंचमी तिथि प्रारंभ: 23 जनवरी 2026 सुबह 02 बजकर 28 मिनट
पंचमी तिथि समाप्त: 24 जनवरी 2026 सुबह 01 बजकर 46 मिनट
ऐसे में बसंत पंचमी का मुख्य पर्व 23 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन सुबह से ही घर, विद्यालय और संस्थानों में सरस्वती पूजा की तैयारी शुरू हो जाती है।
बसंत पंचमी पर विद्या आराधना के लिए दोपहर से पहले का समय अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। 2026 में सरस्वती पूजा के लिए विशेष मुहूर्त इस प्रकार है।
| मुहूर्त | समय |
|---|---|
| सरस्वती पूजा मुहूर्त | सुबह 07 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 33 मिनट तक |
इस अवधि में मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र के सामने शांत मन से बैठकर पूजन, मंत्रजप और संकल्प करना सबसे शुभ माना गया है। जो विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी कर रहे हों, वे इस समय अपनी पुस्तकों और पेन को भी देवी के चरणों में रखकर आशीर्वाद ले सकते हैं।
बसंत पंचमी को केवल मौसम परिवर्तन का त्योहार मानना पर्याप्त नहीं है। यह दिन भीतर के बौद्धिक और भावनात्मक अंधकार से बाहर आने की प्रेरणा भी देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मा जी के मुख से इसी पंचमी के दिन देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। उनके प्रकट होते ही संसार से अज्ञान का अंधेरा हटने लगा और ज्ञान, शब्द और संगीत का प्रवाह शुरू हुआ।
बसंत पंचमी को कई परंपराओं में अबूझ मुहूर्त माना जाता है। अबूझ मुहूर्त का अर्थ है ऐसा शुभ समय, जब किसी भी मंगल कार्य के लिए अलग से पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं मानी जाती। विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे कई शुभ कार्य इस दिन संकल्पपूर्वक किए जा सकते हैं। इस दिन की सकारात्मक ऊर्जा नए आरंभ के लिए सहायक मानी जाती है।
ज्ञान, कला और संगीत की साधना करने वालों के लिए यह दिन अपने उद्देश्य को पुनः स्पष्ट करने का अवसर भी है। जो लोग अध्ययन में आलस्य या एकाग्रता की कमी महसूस करते हैं, वे बसंत पंचमी पर मां सरस्वती से दृढ़ संकल्प के साथ प्रार्थना करें तो भीतर से नई प्रेरणा मिल सकती है।
बसंत ऋतु में खेतों में लहलहाती फसल, सरसों के पीले फूल और हल्की धूप, इन सबका रंग पीला होता है। यही पीला रंग प्रसन्नता, बुद्धि की चमक और हल्केपन का प्रतीक माना जाता है। परंपरा है कि मां सरस्वती को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए बसंत पंचमी पर पीले वस्त्र धारण करना, पूजा में पीले फूल और पीले प्रसाद रखना अत्यंत शुभ माना जाता है।
पीला रंग मन को हल्का और प्रसन्न बनाता है। पढ़ते समय या नई विद्या सीखते समय यदि मन शांत और प्रसन्न रहे तो ज्ञान जल्दी धारण होता है। इसीलिए विद्यार्थी बसंत पंचमी के दिन पीले कपड़े पहनकर, पीले चावल, केसरिया हलवा, बूंदी के लड्डू जैसे पीले भोग अर्पित कर देवी की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा बहुत भव्य भी की जा सकती है और बहुत सरल भी। मुख्य बात श्रद्धा और स्वच्छता की रहती है। घर, विद्यालय या कार्यालय में जहां भी पूजा करनी हो, उस स्थान को पहले साफ कर लें और मन को भी शांत कर लें।
इसके बाद शांत मन से बैठकर मां सरस्वती के समक्ष प्रणाम करें। जो बच्चे पढ़ाई कर रहे हों, वे अपनी किताबें, पेन, कॉपी और अन्य अध्ययन सामग्री देवी के चरणों में रख दें। जो लोग किसी कला, संगीत, लेखन या अन्य रचनात्मक क्षेत्र में कार्य करते हैं, वे अपने काम से जुड़ी वस्तुएँ भी प्रतीक रूप में रखकर आशीर्वाद ले सकते हैं।
पूजा के दौरान मां सरस्वती को पीले चावल, बूंदी के लड्डू और केसरिया हलवे का भोग लगाया जाता है। यह भी ध्यान रहे कि प्रसाद शुद्ध और सात्विक हो। यदि संभव हो तो थोड़ी देर के लिए माधुर्य से भरे भजन या वाद्य संगीत भी चलाया जा सकता है जो वातावरण को और पवित्र बना देता है।
फिर शुद्ध भाव से ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः मंत्र का 108 बार जाप करें। यह मंत्र विद्या, वाणी और स्मरण शक्ति को संतुलित करने वाला माना जाता है। जाप के समय मन को भटकने न दें और पूरे ध्यान के साथ नाम स्मरण करें। मंत्रजप के बाद मां सरस्वती की आरती करें और परिवार या विद्यार्थियों के बीच प्रसाद का वितरण करें।
जब किसी दिन को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है, तो इसका अर्थ यह नहीं कि उस दिन कोई सावधानी आवश्यक नहीं। इसका संकेत यह है कि उस दिन का संपूर्ण काल ही इतना शुभ माना गया है कि विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण या शिक्षा की शुरुआत जैसे कार्य सामान्यतः बिना अलग से मुहूर्त निकाले भी किए जा सकते हैं।
बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त इसलिए कहा गया कि यह दिन ज्ञान, सौभाग्य और नई शुरुआत के लिए अत्यंत अनुकूल है। जो परिवार अपने बच्चों के लिए किसी नए पाठ, संगीत की कक्षा या किसी नई कला की शुरुआत करना चाहते हों, वे इस दिन पूरे विश्वास के साथ पहला कदम बढ़ा सकते हैं। फिर भी यदि कोई विशेष परंपरा में कार्य करता हो, तो अपने कुलाचार्य या ज्ञानी पंडित से मार्गदर्शन लेना भी उचित रहता है।
बसंत पंचमी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष अक्षर अभ्यास से जुड़ा हुआ है। परंपरा है कि छोटे बच्चों की शिक्षा की शुरुआत के लिए यह दिन बहुत शुभ माना जाता है। कई परिवार इस दिन अपने बच्चे से पहली बार किसी अक्षर, मंत्र या ईश्वर का नाम लिखवाते हैं।
अक्षर अभ्यास के लिए आमतौर पर एक साफ पट्टिका, कॉपी या फिर तश्तरी में फैला हुआ चावल, राई या रेत आदि का उपयोग किया जाता है। बच्चा अपनी छोटी सी उंगली से ओंकार, ईश्वर का नाम या कोई सरल अक्षर लिखता है। इस प्रक्रिया के साथ माता पिता यह संकल्प करते हैं कि बच्चे का जीवन ज्ञान, सदाचार और अच्छे संस्कारों से भरा रहे।
जो बच्चे पहले से पढ़ाई कर रहे हों, उनके लिए भी बसंत पंचमी आत्मसमीक्षा का दिन बन सकता है। वे अपने पुराने नोट्स, पुस्तकों और पढ़ाई की आदतों को देखते हुए यह तय कर सकते हैं कि आगे किन विषयों पर अधिक मेहनत करनी है। मां सरस्वती के समक्ष यह संकल्प रखने से मन को अतिरिक्त प्रेरणा मिलती है।
विद्यार्थियों के लिए बसंत पंचमी 2026 केवल त्योहार नहीं, बल्कि पढ़ाई और जीवन संतुलन को समझने का अवसर भी है। पढ़ाई के साथ साथ संगीत, कला और रचनात्मक गतिविधियाँ भी मन को ताजगी देती हैं और तनाव कम करती हैं। मां सरस्वती स्वयं ज्ञान के साथ संगीत और कला की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं, इसलिए इस दिन केवल किताबों तक विद्या को सीमित न रखकर स्वभाव, बोलचाल और व्यवहार में भी शालीनता का संकल्प लेना लाभकारी रहता है।
जो अभिभावक अपने बच्चों को लेकर चिंता महसूस करते हैं, वे भी सरस्वती पूजा के समय यह प्रार्थना कर सकते हैं कि बच्चों में एकाग्रता, धैर्य और सही दिशा की समझ बढ़े। इससे घर का वातावरण भी सकारात्मक बनता है और पढ़ने वाले बच्चे स्वयं को समर्थ और सुरक्षित महसूस करते हैं।
बसंत पंचमी 2026 किस दिन मनाई जाएगी?
बसंत पंचमी 2026 माघ महीने की शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि को 23 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। पंचमी तिथि 23 जनवरी की सुबह 02 बजकर 28 मिनट पर शुरू होकर 24 जनवरी की सुबह 01 बजकर 46 मिनट तक रहेगी।
बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
इस दिन मां सरस्वती की पूजा के लिए मुख्य मुहूर्त सुबह 07 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इस समय में पूजा, मंत्रजप और अक्षर अभ्यास करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त क्यों कहा जाता है?
धार्मिक मान्यता है कि ब्रह्मा जी के मुख से इसी दिन देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं और संसार से अज्ञान का अंधकार दूर हुआ था। इसलिए बसंत पंचमी को इतना शुभ माना गया कि विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मंगल कार्यों के लिए अलग पंचांग देखने की आवश्यकता कम मानी जाती है।
बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा कैसे की जाए?
पीले या हल्के वस्त्र पहनकर, पीला कपड़ा बिछाकर मां सरस्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। कलश रखें, पीले चावल, बूंदी के लड्डू और केसरिया हलवा का भोग लगाएं। फिर ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः मंत्र का 108 बार जाप करें, आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
छोटे बच्चों के लिए बसंत पंचमी पर क्या खास किया जाता है?
बसंत पंचमी को अक्षर अभ्यास के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन बच्चों से पहली बार अक्षर, ईश्वर का नाम या ओंकार लिखवाया जाता है। माना जाता है कि इससे शिक्षा की शुरुआत मंगलमय होती है और आगे चलकर पढ़ाई में अच्छा फल मिलता है।
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