By पं. अभिषेक शर्मा
अमावस्या के बाद चंद्र दर्शन की सही तिथि, शुभ समय और आध्यात्मिक अर्थ

अमावस्या की अंधेरी रात के बाद जो पहला पतला चांद दिखता है, उसी के दर्शन को चंद्र दर्शन कहा जाता है। इसे नए चंद्र मास की शुभ शुरुआत, मानसिक शुद्धि और नई ऊर्जा के स्वागत का दिन माना जाता है। वर्ष 2026 में यह अवसर साधकों के लिए और भी विशेष बनकर आने वाला है।
उज्जैन पंचांग के आधार पर चंद्र दर्शन 2026 के तिथि और समय इस प्रकार हैं।
| विवरण | समय और तिथि |
|---|---|
| चंद्र दर्शन की तिथि | 20 जनवरी 2026, मंगलवार |
| प्रतिपदा तिथि का आरंभ | 19 जनवरी 2026, रात्रि 01:22 बजे |
| प्रतिपदा तिथि का समाप्त | 20 जनवरी 2026, रात्रि 02:14 बजे |
| 20 जनवरी को चंद्रोदय | प्रातः 08:14 बजे |
| 20 जनवरी को चंद्रास्त | सायं 07:34 बजे |
| चंद्र दर्शन का आदर्श समय | 20 जनवरी 2026, सूर्यास्त के बाद पश्चिम दिशा में |
चंद्र दर्शन का सबसे शुभ समय सूर्यास्त के तुरंत बाद माना जाता है, जब पश्चिमी क्षितिज पर हल्की रोशनी में पतला चंद्रकोर पहली बार दिखने लगता है। बहुत देर हो जाने पर चांद ऊँचा उठ जाता है और वह पहला कोमल दृश्य छूट सकता है, इसलिए सूर्यास्त के आस पास समय का ध्यान रखना आवश्यक है।
अमावस्या पर जब रात पूरी तरह अँधेरी हो जाती है, तो उसे एक प्रकार से भावनात्मक और ऊर्जात्मक शून्य की स्थिति माना जाता है। इसके तुरंत बाद प्रतिपदा की तिथि में जब चंद्रमा पतली रेखा के रूप में दिखता है, तो यह नई शुरुआत, बढ़ती रोशनी और आशा का प्रतीक बन जाता है।
हिंदू चंद्र पंचांग में अनेक पर्व, व्रत और मासिक गणना चंद्र दर्शन के आसपास ही व्यवस्थित मानी जाती है। अमावस्या पर जहाँ पुराने बोझ और थकान को छोड़ने का संकेत है, वहीं चंद्र दर्शन पर नए संकल्प, सकारात्मक विचार और विकास की भावना को अपनाने पर जोर दिया जाता है।
वैदिक ज्योतिष में चंद्र को मन, भावनाओं, कल्पना शक्ति और समृद्धि का प्रमुख कारक माना गया है। कुंडली में चंद्रमा की मजबूत स्थिति से
जैसी बातें प्रभावित होती हैं।
चंद्र दर्शन के दिन बढ़ते चंद्रमा की पहली झलक को मन की नयी दिशा और सकारात्मक प्रवाह से जोड़ा जाता है। अमावस्या के पूर्ण शून्य के बाद यह पतली प्रकाश रेखा यह याद दिलाती है कि जीवन में भी पुनः वृद्धि, सुधार और स्पष्टता संभव है। जो लोग भावनात्मक असंतुलन, अनिर्णय या मन की कमजोरी अनुभव करते हों, उनके लिए यह दिन विशेष रूप से मन को स्थिर दिशा देने का अवसर बन सकता है।
चंद्र दर्शन के दिन अनेक भक्त कुछ सरल लेकिन प्रभावी नियमों का पालन करते हैं।
यह व्रत केवल शरीर को अनाज से दूर रखने के लिए नहीं होता बल्कि मन और इंद्रियों को भी अनुशासन में रखने का अभ्यास बन जाता है।
शाम के समय चंद्र दर्शन की मुख्य प्रक्रिया बहुत सरल और सहज मानी जाती है, फिर भी कुछ बिंदुओं का ध्यान रखने से साधना अधिक प्रभावी हो सकती है।
चंद्र दर्शन के समय कुछ साधक थोड़ी देर चुपचाप चंद्रमा की ओर देखते हुए अपनी सांस को भी सहज और गहरा रखने की कोशिश करते हैं, इससे मन और अधिक शांत होता है।
चंद्र दर्शन के बाद चंद्र देव की पूजा के लिए घर या मंदिर में सरल व्यवस्था की जा सकती है।
जो लोग और विशेष रूप से मंत्र जप करना चाहें, वे चंद्र बीज मंत्र “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः” का शुद्ध उच्चारण सीखकर सीमित संख्या में जप कर सकते हैं। यह जप मन की शांति, भावनात्मक संतुलन और चंद्र ग्रह से जुड़े दोषों को शांत करने के लिए उपयोगी माना गया है।
यह दिन केवल चंद्र दर्शन और पूजा तक सीमित नहीं है बल्कि दान और सेवा को भी बहुत महत्व दिया गया है। परंपरा के अनुसार इस दिन
की थोड़ी मात्रा किसी जरूरतमंद, ब्राह्मण, गौशाला या धार्मिक स्थान पर दान की जा सकती है। सफेद रंग और शीतल पदार्थ चंद्रमा के स्वभाव से जुड़े माने जाते हैं, इसलिए इनका दान मानसिक शांति, संबंधों की मधुरता और भावनात्मक संतुलन की दिशा में शुभ माना गया है।
आज के व्यस्त और शहरी जीवन में भी चंद्र दर्शन को सहज रूप से अपनाया जा सकता है।
इस तरह परंपरा और आधुनिकता साथ साथ चल सकती हैं और साधक बिना किसी अतिरिक्त दिखावे के भी इस दिन का लाभ ले सकता है।
चंद्रमा को मन और भावनात्मक लय का प्रतीक माना गया है। अमावस्या के बाद बढ़ते चंद्र के पहले दर्शन से यह संदेश मिलता है कि
जो लोग अनिद्रा, बेचैनी या भावनात्मक अस्थिरता महसूस करते हैं, उनके लिए चंद्र दर्शन पर कुछ मिनट शांत बैठकर चंद्रमा की रोशनी में श्वास और विचारों को देखना बहुत सुकून दे सकता है।
चंद्र दर्शन 2026 को अधिक अर्थपूर्ण और उपयोगी बनाने के लिए कुछ छोटे लेकिन प्रभावकारी उपाय अपनाए जा सकते हैं।
ऐसे छोटे कदम चंद्र दर्शन को केवल रीति रिवाज नहीं रहने देते बल्कि पूरे चंद्र मास के लिए आत्मिक आधार तैयार करते हैं।
चंद्र दर्शन 2026 किस तिथि को मनाया जाएगा
चंद्र दर्शन 2026 मंगलवार, 20 जनवरी को मनाया जाएगा। उज्जैन के पंचांग अनुसार प्रतिपदा तिथि 19 जनवरी 2026 को रात्रि 01:22 से शुरू होकर 20 जनवरी 2026 को रात्रि 02:14 तक रहेगी और इसी प्रतिपदा की सांझ में अमावस्या के बाद पहला चंद्र दर्शन किया जाएगा।
चंद्र दर्शन के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा माना जाता है
चंद्र दर्शन के लिए सबसे शुभ समय सूर्यास्त के तुरंत बाद का माना गया है, जब पश्चिम दिशा में पतला चंद्रकोर पहली बार दिखाई देता है। 20 जनवरी 2026 को चंद्रास्त लगभग रात 07:34 बजे होगा, इसलिए सूर्यास्त के बाद से इस समय के बीच चंद्र दर्शन करना उत्तम रहेगा।
चंद्र दर्शन के दिन व्रत कैसे रखा जाए
अनेक भक्त सूर्योदय से लेकर चंद्र दर्शन तक अन्न ग्रहण नहीं करते और केवल जल, फल या बहुत हल्का सात्त्विक आहार लेते हैं। चंद्र दर्शन के बाद चंद्र देव की पूजा करके ही व्रत खोला जाता है, ताकि पूरे दिन की साधना एक शांत और पूर्णता के भाव के साथ समाप्त हो।
चंद्र दर्शन पर कौन सा मंत्र जपना शुभ होता है
चंद्र दर्शन के समय “ॐ चंद्राय नमः” या “ॐ सोमाय नमः” का जप सरल और प्रभावकारी माना जाता है। जो साधक विशेष जप करना चाहें, वे “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः” इस चंद्र बीज मंत्र का सीमित संख्या में शुद्ध उच्चारण के साथ जप कर सकते हैं।
क्या आधुनिक जीवन में बिना पूरा व्रत रखे भी चंद्र दर्शन का लाभ मिल सकता है
हाँ, यदि पूरा व्रत संभव न हो तो भी चंद्र दर्शन के समय कुछ मिनट शांत मन से चांद को देखकर प्रार्थना करना, हल्का सात्त्विक भोजन रखना और किसी एक सकारात्मक संकल्प को दृढ़ करना इस दिन को लाभकारी बना सकता है। मुख्य बात श्रद्धा, सजगता और मन की ईमानदार तैयारी है।
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