By पं. सुव्रत शर्मा
प्रत्येक माह के लिए नवीन चंद्र दर्शन समय और आध्यात्मिक महत्व का मार्गदर्शन

चंद्र दर्शन का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है और इसे सही समय पर देखने के लिए प्रत्येक माह के चंद्रार्ध के पहले दृश्य का सही ज्ञान आवश्यक है। यह मार्गदर्शिका 2025 के लिए न केवल सटीक चंद्र दर्शन तिथियाँ प्रस्तुत करती है बल्कि उस समय के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताती है जब चंद्रमा प्रथम बार अमावस्या के बाद क्षितिज पर प्रकट होता है। चंद्र दर्शन केवल तिथि याद रखने की प्रक्रिया नहीं बल्कि एक दिव्य क्षण का अनुभव है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर संक्रमण, नवोत्थान और शुद्धि का प्रतीक है।
'चंद्र दर्शन' का शाब्दिक अर्थ है चंद्रमा का दर्शन। हिन्दू परंपरा में अमावस्या के अगले दिन जब चंद्रमा प्रथम बार प्रकट होता है, उसे अत्यंत शुभ माना जाता है। यह क्षण मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि, नयी शुरुआत और ऊर्जा का स्रोत है।
इस समय पर उपवास तोड़ना, विशेष पूजा-अर्चना और प्रार्थनाएँ करना बहुत फलदायी माना जाता है। चंद्रमा का दर्शन निश्चित समय - सूर्यास्त के ठीक बाद - के दौरान होना चाहिए, क्योंकि देर से या समय चूकने पर दिये गए नियमों की पूर्ति में कमी आती है।
| तिथि | चंद्रोदय समय (लगभग) |
|---|---|
| 1 जनवरी 2025 | शाम 5:36 बजे से 6:53 बजे तक |
| 30 जनवरी 2025 | शाम 5:59 बजे से 6:51 बजे तक |
| 1 मार्च 2025 | शाम 6:21 बजे से 7:51 बजे तक |
| 30 मार्च 2025 | शाम 6:38 बजे से 7:45 बजे तक |
| 28 अप्रैल 2025 | शाम 6:55 बजे से 7:43 बजे तक |
| 28 मई 2025 | शाम 7:12 बजे से 8:53 बजे तक |
| 26 जून 2025 | शाम 7:23 बजे से 8:33 बजे तक |
| 26 जुलाई 2025 | शाम 7:16 बजे से 8:29 बजे तक |
| 24 अगस्त 2025 | शाम 6:51 बजे से 7:29 बजे तक |
| 23 सितंबर 2025 | शाम 6:16 बजे से 6:53 बजे तक |
| 23 अक्टूबर 2025 | शाम 5:43 बजे से 6:29 बजे तक |
| 22 नवंबर 2025 | शाम 5:25 बजे से 6:39 बजे तक |
| 21 दिसंबर 2025 | शाम 5:29 बजे से 6:24 बजे तक |
ये समय लगभग हैं और पारंपरिक पंचांग विशेषज्ञों, जैसे द्रिग पंचांग के खगोलिय गणनाओं पर आधारित हैं। ये भक्तों के लिए चंद्र दर्शन के सही आयोजन हेतु दिशानिर्देश प्रदान करते हैं।
चंद्र दर्शन अवसर सिर्फ एक कर्मकांड नहीं बल्कि आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है। अमावस्या की अंधकारमय रात के बाद बढ़ता चंद्र प्रकाश नई आशा, शुद्धि और मानसिक शांति की ओर प्रेरित करता है। हिन्दू दर्शन में चंद्र को मन का प्रतीक माना गया है, अतः उसका उदय मानसिक तनाव के खत्म होने और सुख-शांति की प्राप्ति का संकेत देता है।
सही समय पर दर्शन करने से चंद्र ऊर्जा के साथ तालमेल बढ़ता है, जिससे साधना, ध्यान और सामाजिक शुभता में वृद्धि होती है।
इस पंचांगानुसार परिवार, पुरोहित एवं आध्यात्मिक समुदाय निम्न कार्यों को यथासमय संपादित कर सकते हैं,
क्या आप चाहेंगे कि मैं प्रत्येक माह के चंद्र दर्शन के लिए विशिष्ट मंत्र और अनुष्ठान भी प्रदान करूँ, जिससे आपका अनुभव और भी गहरा बने?
प्रश्न 1: चंद्र दर्शन कब और किस समय किया जाता है?
उत्तर: चंद्र दर्शन अमावस्या के अगले दिन, सूर्यास्त के बाद चंद्रमा के प्रथम दर्शन के समय किया जाता है। यह समय प्रत्येक माह बदलता है, लगभग सूर्यास्त के बाद निर्धारित चंद्रोदय की खिड़की में होता है।
प्रश्न 2: चंद्र दर्शन क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह अंधकार से प्रकाश की ओर संक्रमण का प्रतीक है, जो आध्यात्मिक जागृति, मानसिक शांति और सद्भावना के लिए शुभ माना जाता है। चंद्र दर्शन के दौरान की गई पूजा से स्वास्थ्य, समृद्धि और मानसिक स्वास्थ्य में लाभ होता है।
प्रश्न 3: क्या चंद्र दर्शन के लिए उपवास रखना जरूरी है?
उत्तर: उपवास अनिवार्य नहीं है, लेकिन अधिकांश भक्त शुद्धि और आध्यात्मिक तैयारी के लिए इसे पालते हैं। इससे शरीर और मन दोनों ऊर्जावान बनते हैं।
प्रश्न 4: चंद्र दर्शन के समय किन विशेष मंत्रों का उच्चारण किया जाता है?
उत्तर: अधिकतर भक्त “ॐ चंद्राय नमः” मंत्र का जाप करते हैं, जिसे चंद्र देव की कृपा पाने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
प्रश्न 5: चंद्र दर्शन की तिथियाँ कैसे तय होती हैं?
उत्तर: ये तिथियाँ खगोल विज्ञान एवं पारंपरिक पंचांगों के आधार पर निर्धारित होती हैं, जो अमावस्या के अगले दिन सूर्यास्त के बाद चंद्रमा के उदय के समय को दर्शाती हैं।
चंद्र राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी चंद्र राशि
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इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि., ओडि
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