छठ पूजा 2025: संपूर्ण चार दिवसीय अनुष्ठान कैलेंडर, समय और महत्व

By पं. नीलेश शर्मा

छठ पूजा की विस्तृत विधि, तिथियां और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

छठ पूजा 2025: तिथि, विधि और महत्व की संपूर्ण जानकारी

सामग्री तालिका

छठ पूजा भारत के सबसे पवित्र और प्राचीन त्योहारों में से एक है जो सूर्य देव और छठी मैया की आराधना को समर्पित है। यह चार दिवसीय महापर्व कार्तिक मास में मनाया जाता है और मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार प्रकृति और भक्ति के बीच एक अद्भुत संबंध स्थापित करता है, जहां भक्त अस्तगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

छठ पूजा की परंपरा माता से पुत्री तक पीढ़ी दर पीढ़ी अपरिवर्तित रूप से चली आ रही है। यह व्रत अत्यंत कठिन और कठोर नियमों वाला होता है, जिसमें भक्त बिना जल के छत्तीस घंटे का व्रत रखते हैं। नदी या तालाब के पवित्र जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देना इस पर्व की विशेषता है। यह त्योहार न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता का भी संदेश देता है।

छठ पूजा 2025 की तिथियां और मुहूर्त

छठ पूजा का यह पावन पर्व 28 अक्टूबर 2025 से प्रारंभ होकर 31 अक्टूबर 2025 को समाप्त होगा। चार दिनों तक चलने वाले इस व्रत में प्रत्येक दिन की अपनी विशेष विधि और महत्व है।

छठ पूजा 2025 की संपूर्ण तिथि सारणी

दिनतिथिअनुष्ठान का नामप्रमुख कार्य
पहला दिन28 अक्टूबर 2025नहाय खायपवित्र स्नान और सात्विक भोजन
दूसरा दिन29 अक्टूबर 2025खरनानिर्जला व्रत और शाम को प्रसाद
तीसरा दिन30 अक्टूबर 2025संध्या अर्घ्यअस्तगामी सूर्य को अर्घ्य
चौथा दिन31 अक्टूबर 2025उषा अर्घ्यउदीयमान सूर्य को अर्घ्य और पारण

छठ पूजा की तैयारी दिवाली के तुरंत बाद शुरू हो जाती है। भक्त अपने घरों की सफाई करते हैं, पूजा सामग्री एकत्र करते हैं और मानसिक रूप से कठिन व्रत के लिए तैयार होते हैं।

पहला दिन: नहाय खाय (28 अक्टूबर 2025)

छठ पूजा का प्रथम दिन नहाय खाय के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रती सूर्योदय से पूर्व उठते हैं और पवित्र नदी, तालाब या घर पर स्वच्छ जल से स्नान करते हैं। यह स्नान शारीरिक और मानसिक शुद्धि का प्रतीक है।

नहाय खाय की विशेष विधि

स्नान के पश्चात व्रती पूरी तरह से सात्विक और शुद्ध भोजन तैयार करते हैं। इस दिन का भोजन अत्यंत सरल होता है और इसमें कद्दू की सब्जी, चना दाल और चावल प्रमुख रूप से शामिल होते हैं। इस भोजन में प्याज, लहसुन और किसी भी प्रकार के तामसिक पदार्थों का उपयोग वर्जित होता है।

नहाय खाय दिवस की प्रमुख बातें

  • सूर्योदय से पूर्व पवित्र जल में स्नान अनिवार्य
  • घर की संपूर्ण सफाई और शुद्धिकरण
  • केवल मिट्टी के बर्तनों में भोजन पकाना
  • परिवार के सभी सदस्य एक साथ भोजन करते हैं
  • भोजन में कद्दू, चना दाल और चावल मुख्य
  • किसी भी प्रकार का नमक मध्यम मात्रा में उपयोग
  • मन को शुद्ध और आगामी व्रत के लिए तैयार करना

इस दिन व्रती अपने घर को पूरी तरह से साफ करते हैं और पूजा की तैयारी में लग जाते हैं। घर में पवित्रता बनाए रखना और सकारात्मक ऊर्जा लाना इस दिन का मुख्य उद्देश्य होता है।

नहाय खाय का आध्यात्मिक महत्व

नहाय खाय केवल शारीरिक स्वच्छता का दिन नहीं है बल्कि यह मन की शुद्धि और व्रत के प्रति समर्पण का प्रतीक है। इस दिन व्रती संकल्प लेते हैं कि वे पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ चार दिनों तक व्रत का पालन करेंगे।

दूसरा दिन: खरना (29 अक्टूबर 2025)

छठ पूजा का दूसरा और सबसे कठिन दिन खरना के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत रखते हैं, अर्थात वे सूर्योदय से लेकर शाम तक न तो कुछ खाते हैं और न ही एक बूंद पानी पीते हैं। यह छत्तीस घंटे का निर्जला उपवास होता है जो अत्यंत कठिन माना जाता है।

खरना व्रत की विस्तृत विधि

समयकार्यविवरण
सुबहव्रत प्रारंभसूर्योदय से निर्जला व्रत शुरू
दिन भरउपवासबिना जल के पूर्ण उपवास
शाम 5-6 बजेप्रसाद तैयारीखीर, रोटी और फल
सूर्यास्त के बादपूजासूर्य देव और छठी मैया की पूजा
रात्रि 7-8 बजेप्रसाद ग्रहणखीर खाकर व्रत खोलना

शाम को सूर्यास्त के पश्चात व्रती गुड़ की खीर, घी में बनी रोटी और केले का प्रसाद तैयार करते हैं। इस प्रसाद को पहले सूर्य देव और छठी मैया को अर्पित किया जाता है, फिर परिवार के सभी सदस्यों में वितरित किया जाता है। व्रती इसी प्रसाद को ग्रहण करके अपना उपवास तोड़ते हैं।

खरना प्रसाद की विशेष सामग्री

खरना का प्रसाद अत्यंत पवित्र और विशेष विधि से तैयार किया जाता है। इसमें निम्नलिखित वस्तुएं शामिल होती हैं:

  • गुड़ की खीर: चावल, दूध और गुड़ से बनी मीठी खीर
  • घी की रोटी: शुद्ध देसी घी में बनाई गई रोटी
  • केला: पके हुए पीले केले
  • नारियल: सूखा नारियल या नारियल का दूध
  • गन्ना: मीठा गन्ना (वैकल्पिक)

खरना के प्रसाद को तैयार करते समय अत्यंत पवित्रता का ध्यान रखा जाता है। प्रसाद बनाने वाले व्यक्ति को स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए। प्रसाद बनाते समय बात नहीं करनी चाहिए और पूर्ण एकाग्रता के साथ भगवान का स्मरण करना चाहिए।

खरना के बाद की तैयारियां

खरना के प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती अगले दिन संध्या अर्घ्य की तैयारी में जुट जाते हैं। इस रात व्रती फिर से निर्जला व्रत पर चले जाते हैं जो अगले दिन उषा अर्घ्य तक जारी रहता है।

तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य (30 अक्टूबर 2025)

छठ पूजा का तीसरा दिन सबसे महत्वपूर्ण और भव्य होता है। इस दिन व्रती पूरा दिन बिना जल के व्रत रखते हैं और शाम को अस्तगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए नदी, तालाब या जल स्रोत के किनारे जाते हैं। यह छठ पूजा का सबसे दर्शनीय और भक्तिमय दिन होता है।

संध्या अर्घ्य की विस्तृत तैयारी

दिन भर व्रती परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर अर्घ्य के लिए प्रसाद और सामग्री तैयार करते हैं। पारंपरिक बांस की टोकरी या सूप में विभिन्न प्रकार के फल, ठेकुआ, चावल के लड्डू और अन्य पूजा सामग्री सजाई जाती है।

संध्या अर्घ्य के लिए आवश्यक सामग्री

सामग्रीमात्राउपयोग
ठेकुआ20-25 पीसमुख्य प्रसाद
केला5-7 दर्जनफल अर्पण
नारियल5-7 पीसपूजा सामग्री
सेब1-2 किलोफल अर्पण
संतरा1-2 किलोफल अर्पण
गन्ना5-7 डंडेप्रतीकात्मक अर्पण
अदरक250 ग्रामपवित्रता का प्रतीक
हल्दी गांठ100 ग्रामशुद्धि के लिए
सिंघाड़ा500 ग्रामजल फल
मिट्टी के दीये10-15प्रकाश के लिए

अर्घ्य देने की पारंपरिक विधि

सूर्यास्त से लगभग एक घंटा पहले पूरा परिवार नदी या तालाब के किनारे पहुंचता है। व्रती पवित्र जल में कमर तक पानी में खड़े होकर अस्तगामी सूर्य की ओर मुख करके अर्घ्य देते हैं। दोनों हाथों की अंजलि में जल, फूल, दूध और अक्षत लेकर सूर्य देव को अर्पित किया जाता है।

इस समय पारंपरिक छठ गीत गाए जाते हैं जो अत्यंत मधुर और भक्तिपूर्ण होते हैं। "केलवा जे फरेला घवद से" और "पहिले पहर हम छठी मैया" जैसे गीत पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं।

संध्या अर्घ्य का आध्यात्मिक महत्व

अस्तगामी सूर्य को अर्घ्य देने का गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। सूर्यास्त के समय सूर्य की किरणें सीधी और कम तीव्र होती हैं, जो शरीर के लिए लाभदायक होती हैं। इस समय सूर्य की पूजा करने से विटामिन डी की प्राप्ति होती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

संध्या अर्घ्य के दौरान ध्यान देने योग्य बातें

  • जल में खड़े होकर सूर्य की ओर मुख करें
  • दोनों हाथों की अंजलि में जल लेकर तीन बार अर्घ्य दें
  • प्रत्येक अर्घ्य के साथ मंत्र या प्रार्थना करें
  • परिवार के सदस्य पीछे खड़े होकर प्रार्थना करें
  • पूरी प्रक्रिया में पवित्रता और शुद्धता बनाए रखें
  • अर्घ्य के बाद प्रसाद को पवित्र स्थान पर रखें
  • रात भर प्रसाद की सुरक्षा और पवित्रता बनाए रखें

संध्या अर्घ्य के बाद व्रती और परिवार घर लौट आते हैं लेकिन व्रती का उपवास जारी रहता है। वे पूरी रात बिना जल के व्रत रखते हैं।

चौथा दिन: उषा अर्घ्य और पारण (31 अक्टूबर 2025)

छठ पूजा का चौथा और अंतिम दिन उषा अर्घ्य के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रती और परिवार के सदस्य सूर्योदय से पूर्व ही नदी या तालाब के किनारे पहुंच जाते हैं। उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है।

उषा अर्घ्य की संपूर्ण विधि

समयकार्यविवरण
भोर 4-5 बजेघाट पर पहुंचनासूर्योदय से पूर्व
सूर्योदयअर्घ्य तैयारीप्रसाद और सामग्री सजाना
सूर्योदय कालउषा अर्घ्यउगते सूर्य को अर्घ्य देना
अर्घ्य के बादछठी मैया की पूजाविशेष प्रार्थना और आराधना
प्रातः 7-8 बजेपारणअदरक और गुड़ से व्रत खोलना
बाद मेंप्रसाद वितरणसभी को प्रसाद बांटना

सूर्योदय के समय जब सूर्य की पहली किरण क्षितिज पर दिखाई देती है, व्रती जल में खड़े होकर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। यह अर्घ्य भी संध्या अर्घ्य की तरह ही दिया जाता है, लेकिन इसका महत्व विशेष होता है क्योंकि यह नए दिन, नई ऊर्जा और नए जीवन का प्रतीक है।

उषा अर्घ्य के पश्चात पारण विधि

उषा अर्घ्य देने के बाद व्रती छठी मैया से प्रार्थना करते हैं और अपने परिवार की सुख समृद्धि की कामना करते हैं। इसके बाद व्रती घाट पर ही या घर लौटकर अदरक, गुड़ और पानी से अपना व्रत खोलते हैं। यह प्रक्रिया पारण कहलाती है।

पारण के समय विशेष बातें

  • सबसे पहले थोड़ा सा पानी पीएं
  • अदरक का टुकड़ा और गुड़ खाएं
  • धीरे धीरे हल्का भोजन करें
  • एकदम से भारी भोजन न करें
  • प्रसाद में से कुछ ग्रहण करें
  • परिवार के साथ बैठकर भोजन करें
  • छठी मैया का धन्यवाद करें

पारण के बाद परिवार के सभी सदस्य और पड़ोसी मिलकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह प्रसाद अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसे ग्रहण करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

छठ पूजा का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व

छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है बल्कि इसका गहरा आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व है। यह पर्व प्रकृति की पूजा, शरीर की शुद्धि और मन की एकाग्रता का अद्भुत संगम है।

सूर्य पूजा का वैज्ञानिक आधार

सूर्य जीवन का आधार है और सभी ऊर्जा का स्रोत है। सूर्य की किरणों में विटामिन डी प्रचुर मात्रा में होता है जो हड्डियों के विकास और प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाने में सहायक है। छठ पूजा के दौरान सूर्योदय और सूर्यास्त के समय जल में खड़े होकर सूर्य की पूजा करने से शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन डी की प्राप्ति होती है।

छठ पूजा के स्वास्थ्य लाभ

लाभविवरणप्रभाव
विटामिन डीसूर्य की किरणों सेहड्डियों की मजबूती
उपवासशरीर की सफाईविषाक्त पदार्थों का निष्कासन
जल चिकित्सानदी में खड़े रहनारक्त संचार में सुधार
मानसिक शांतिध्यान और प्रार्थनातनाव में कमी
प्राकृतिक संपर्कनदी और सूर्यऊर्जा में वृद्धि

छठी मैया की महिमा

छठी मैया को सूर्य देव की बहन माना जाता है और उन्हें बच्चों की रक्षक देवी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि छठी मैया की कृपा से संतान प्राप्ति होती है और बच्चों को दीर्घायु और स्वस्थ जीवन का आशीर्वाद मिलता है। व्रती छठी मैया से अपने परिवार की सुख समृद्धि और बच्चों की लंबी उम्र की प्रार्थना करते हैं।

छठ व्रत से शरीर और मन की शुद्धि

छठ व्रत में निर्जला उपवास रखने से शरीर की संपूर्ण सफाई होती है। उपवास के दौरान शरीर में जमा विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और पाचन तंत्र को आराम मिलता है। साथ ही मन की एकाग्रता बढ़ती है और आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है।

छठ पूजा में पर्यावरण संरक्षण का संदेश

आधुनिक युग में छठ पूजा पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देती है। इस पर्व में प्राकृतिक और जैव अपघटनीय सामग्री का उपयोग किया जाता है।

पर्यावरण अनुकूल छठ पूजा के उपाय

  • प्लास्टिक का उपयोग न करें: बांस की टोकरी, मिट्टी के दीये और पत्तों के दोने का उपयोग करें
  • नदी और तालाब की सफाई: पूजा से पहले और बाद में जल स्रोतों की सफाई करें
  • रासायनिक पदार्थों से बचें: प्राकृतिक रंग और सामग्री का उपयोग करें
  • प्रसाद का सही निपटान: बचे हुए प्रसाद को जानवरों को खिलाएं या मिट्टी में दबाएं
  • सामूहिक प्रयास: समुदाय के साथ मिलकर घाट की सफाई करें

शहरी क्षेत्रों में छठ पूजा

बड़े शहरों में जहां प्राकृतिक नदी या तालाब नहीं हैं, वहां प्रशासन कृत्रिम तालाब और घाट बनवाता है। इन स्थानों पर भी पूरी श्रद्धा के साथ छठ पूजा संपन्न होती है। कुछ स्थानों पर बड़े बर्तनों या टैंकों में पानी भरकर भी अर्घ्य दिया जाता है।

छठ पूजा की महत्वपूर्ण तैयारियां

छठ पूजा की सफलता के लिए पहले से ही उचित तैयारी आवश्यक है। व्रती और परिवार के सदस्यों को निम्नलिखित तैयारियां करनी चाहिए:

घर की तैयारी

  • घर की संपूर्ण सफाई करें
  • पूजा कक्ष या स्थान को विशेष रूप से साफ करें
  • दीवारों को पोतें या साफ करें
  • फर्श को गोबर से लीपें (ग्रामीण क्षेत्रों में)
  • पूजा सामग्री के लिए अलग स्थान बनाएं

पूजा सामग्री की खरीदारी

सामग्रीमात्राउपयोग
बांस की टोकरी2-3प्रसाद रखने के लिए
मिट्टी के दीये15-20प्रकाश के लिए
गन्ना5-7 जोड़ीअर्घ्य के लिए
केला5-7 दर्जनफल अर्पण
नारियल7-9पूजा सामग्री
आटा2-3 किलोठेकुआ बनाने के लिए
गुड़1-2 किलोठेकुआ और खीर
देसी घी500 ग्रामप्रसाद बनाने के लिए

ठेकुआ बनाने की विधि

ठेकुआ छठ पूजा का मुख्य प्रसाद है। इसे बनाने की विधि:

  • गेहूं का आटा लें और छान लें
  • गुड़ को पानी में घोलकर चाशनी बनाएं
  • आटे में घी, चाशनी और सौंफ मिलाएं
  • आटे को अच्छी तरह गूंथें
  • छोटे छोटे टुकड़े काटकर आकार दें
  • देसी घी में सुनहरा होने तक तलें
  • ठंडा होने पर स्टोर करें

मानसिक और शारीरिक तैयारी

छठ व्रत अत्यंत कठिन होता है, इसलिए व्रती को पहले से ही मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहना चाहिए:

  • व्रत से एक सप्ताह पहले से हल्का और सात्विक भोजन करें
  • शरीर को पानी में खड़े रहने का अभ्यास कराएं
  • नियमित ध्यान और प्रार्थना करें
  • सकारात्मक विचार रखें
  • परिवार का सहयोग सुनिश्चित करें
  • स्वास्थ्य की जांच करवाएं (विशेषकर बुजुर्ग व्रती)

छठ पूजा में सामुदायिक भागीदारी

छठ पूजा केवल एक व्यक्ति या परिवार का पर्व नहीं है बल्कि यह पूरे समुदाय का त्योहार है। इस अवसर पर सभी लोग मिलजुल कर तैयारियां करते हैं और एक दूसरे की मदद करते हैं।

सामुदायिक गतिविधियां

  • घाट की सफाई: सभी लोग मिलकर नदी या तालाब के घाट की सफाई करते हैं
  • रोशनी की व्यवस्था: घाटों पर प्रकाश की उचित व्यवस्था की जाती है
  • सुरक्षा व्यवस्था: स्वयंसेवक सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखते हैं
  • प्रसाद वितरण: सभी को प्रसाद बांटा जाता है
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम: छठ गीत और भजन का आयोजन किया जाता है

छठ गीतों की परंपरा

छठ पूजा के दौरान गाए जाने वाले पारंपरिक गीत इस पर्व की आत्मा हैं। ये गीत अत्यंत मधुर और भक्तिपूर्ण होते हैं। कुछ प्रसिद्ध छठ गीत:

  • केलवा जे फरेला घवद से
  • पहिले पहर हम छठी मैया
  • उगी हे सूरुज देव भोर भईल
  • कांच ही बांस के बहंगिया
  • पटना से छठी मैया आइली

ये गीत दादी नानी से सीखे जाते हैं और पीढ़ी दर पीढ़ी चलते रहते हैं। इन गीतों में छठी मैया की महिमा, सूर्य देव की स्तुति और प्रकृति का गुणगान होता है।

छठ पूजा के नियम और सावधानियां

छठ पूजा में कुछ विशेष नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। इन नियमों का पालन न करने से व्रत अपूर्ण माना जाता है।

महत्वपूर्ण नियम

  • व्रत के दौरान पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का सेवन न करें
  • जमीन पर सोएं, बिस्तर का उपयोग न करें
  • पूरी पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखें
  • क्रोध, ईर्ष्या और नकारात्मक विचारों से बचें
  • अस्वस्थ होने पर व्रत न करें
  • गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह लें

सावधानियां

  • लंबे समय तक जल में खड़े रहने से बचें यदि स्वास्थ्य समस्या हो
  • सूर्य की तेज किरणों से आंखों को बचाएं
  • बच्चों की विशेष देखभाल करें
  • वृद्ध व्रतियों के साथ कोई सहायक रहे
  • घाट पर भीड़ से सावधान रहें
  • पानी की गहराई का ध्यान रखें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छठ पूजा 2025 कब से शुरू होगी? छठ पूजा 28 अक्टूबर 2025 (नहाय खाय) से शुरू होकर 31 अक्टूबर 2025 (उषा अर्घ्य) को समाप्त होगी।

छठ व्रत कितने दिन का होता है? छठ व्रत चार दिन का होता है, जिसमें नहाय खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य शामिल हैं।

खरना में क्या खाया जाता है? खरना में गुड़ की खीर, घी में बनी रोटी, केला और नारियल खाया जाता है।

छठ पूजा में कौन सा फल अर्पण किया जाता है? छठ पूजा में केला, नारियल, सेब, संतरा, अनार, सिंघाड़ा और गन्ना मुख्य रूप से अर्पण किए जाते हैं।

क्या पुरुष भी छठ व्रत कर सकते हैं? हां, छठ व्रत महिला और पुरुष दोनों कर सकते हैं, हालांकि यह मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता है।

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लेखक

पं. नीलेश शर्मा

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