दुर्गा अष्टमी 2026: तिथि और अष्टमी तिथि समय

By पं. नरेंद्र शर्मा

26 जून 2026 को दुर्गा अष्टमी पूजा, व्रत और नवरात्रि के अवसर पर शुभ मुहूर्त

दुर्गा अष्टमी 2026: तिथि, अष्टमी तिथि और शुभ मुहूर्त

दुर्गा अष्टमी, जिसे महाअष्टमी भी कहा जाता है, देवी दुर्गा की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाने वाली तिथि है। इस दिन को शक्ति, संरक्षण और धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है और भारत के अनेक क्षेत्रों में इसे गहरी श्रद्धा और शांति भरे उत्साह के साथ मनाया जाता है।

दुर्गा अष्टमी 2026: तिथि और अष्टमी तिथि के समय

दुर्गा अष्टमी हर वर्ष शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है, जब चंद्र मास के बढ़ते चरण का आठवाँ दिन होता है। वर्ष 2026 में दुर्गा अष्टमी शुक्रवार, 26 जून को मनाई जाएगी।

इस दिन की तिथि और समय विवरण इस प्रकार हैं।

विवरणतिथिसमय
दुर्गा अष्टमी 2026 का दिनशुक्रवार, 26 जून 2026दिनभर पूजन और व्रत का पर्व
अष्टमी तिथि प्रारंभ26 जून 2026प्रातः 06 बजकर 58 मिनट
अष्टमी तिथि समाप्त27 जून 2026प्रातः 09 बजकर 08 मिनट

चूँकि 26 जून को दिन के समय अष्टमी तिथि विद्यमान रहती है, इसलिए दुर्गा अष्टमी का मुख्य व्रत, पूजन और अनुष्ठान इसी दिन किए जाते हैं।

दुर्गा अष्टमी क्या है और इसे इतना विशेष क्यों माना जाता है

दुर्गा अष्टमी वह तिथि है जब देवी दुर्गा के पराक्रम, संरक्षण और मातृ स्वरूप की आराधना विशेष रूप से की जाती है।

हिंदू परंपरा में इसे देवी के उन रूपों के स्मरण के रूप में देखा जाता है जो अधर्म, भय और नकारात्मक शक्तियों का नाश करते हैं। इस दिन की साधना से भक्त अपने जीवन में जमा हुए भय, संदेह और अवरोधों को पहचानकर देवी से उन्हें दूर करने की प्रार्थना करते हैं।

दुर्गा अष्टमी को कई स्थानों पर महाअष्टमी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह शक्ति उपासना के लिए अत्यंत प्रभावी मानी गई तिथि है। इस दिन किए गए व्रत, जप और पूजन को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक फलदायी माना जाता है।

दुर्गा अष्टमी 2026 और नवरात्रि से संबंध

दुर्गा अष्टमी का महत्व नवरात्रि के दौरान और अधिक बढ़ जाता है।

नवरात्रि में नौ दिनों तक देवी के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है और आठवाँ दिन दुर्गा अष्टमी के रूप में शक्ति के उत्कर्ष का संकेत माना जाता है। जिन परिवारों में चैत्र या शारदीय नवरात्रि के समय दुर्गा अष्टमी मनाई जाती है, वहाँ इस दिन विशेष हवन, कन्या पूजन और अष्टमी व्रत का विशेष नियम माना जाता है।

हालाँकि वर्ष भर में आने वाली मासिक दुर्गा अष्टमी भी अत्यंत शुभ मानी जाती है, लेकिन नवरात्रि के दौरान आने वाली दुर्गा अष्टमी पर भक्तों का भाव और उमंग दोनों अलग ही स्तर पर दिखाई देते हैं। 2026 की यह दुर्गा अष्टमी भी शक्ति उपासना के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बन सकती है।

दुर्गा अष्टमी का आध्यात्मिक महत्व क्या है

दुर्गा अष्टमी को केवल त्यौहार नहीं बल्कि भीतर की शक्ति जागरण का दिन माना जाता है।

देवी दुर्गा को साहस, धैर्य और धर्म की रक्षा की प्रतीक शक्ति के रूप में पूजा जाता है। इस दिन किए गए जप, स्तुति और ध्यान से मन में छिपे भय, असुरक्षा और नकारात्मक विचारों पर काबू पाने की प्रेरणा मिलती है।

भक्त मानते हैं कि दुर्गा अष्टमी पर की गई सच्ची प्रार्थना जीवन से अवरोध, भय और नकारात्मकता को कम करने में सहायक होती है। यह तिथि केवल बाहरी विजय का नहीं बल्कि भीतर के कमजोरियों पर विजय पाने का भी संकेत देती है।

दुर्गा अष्टमी पर किए जाने वाले मुख्य अनुष्ठान

दुर्गा अष्टमी के दिन सुबह से ही घरों और मंदिरों में विशेष पूजा और अनुष्ठान की तैयारी शुरू हो जाती है।

  • प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और पूजा स्थान को साफ कर फूल, दीपक और धूप से सजाया जाता है
  • देवी दुर्गा की प्रतिमा या स्वरूप के सामने कलश स्थापना, पुष्प, चावल, अक्षत, सिंदूर, नैवेद्य और जल अर्पित किया जाता है
  • कई भक्त दिनभर या आंशिक उपवास रखते हैं और केवल फलाहार या हल्का प्रसाद ग्रहण करते हैं
  • दुर्गा सप्तशती या अन्य पावन स्तोत्रों का पाठ किया जाता है, जिससे मन में भक्ति और शक्ति दोनों साथ साथ प्रकट हों

पूजा के अंत में आरती, प्रसाद वितरण और कुछ स्थानों पर हवन भी किया जाता है, ताकि वातावरण में शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।

दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन क्यों किया जाता है

दुर्गा अष्टमी के प्रमुख अनुष्ठानों में कन्या पूजन विशेष स्थान रखता है।

कन्या पूजन में छोटी बालिकाओं को देवी के जीवंत रूप के रूप में सम्मान दिया जाता है। उन्हें चरण प्रक्षालन के बाद रोली, अक्षत और फूल से पूजकर चने, हलुआ, पूरी या स्थानीय परंपरानुसार बने प्रसाद का भोजन कराया जाता है। कई परिवार नई पोशाक या छोटी भेंट भी अर्पित करते हैं।

इस परंपरा का भाव यह है कि देवी की ऊर्जा हर कन्या में विद्यमान है और समाज में स्त्री का सम्मान, सुरक्षा और आदर करना ही सच्ची दुर्गा उपासना का विस्तार है। जब कन्याओं की पूजा श्रद्धा और सच्चे सम्मान के साथ की जाती है तब दुर्गा अष्टमी की साधना अधिक पूर्ण मानी जाती है।

दुर्गा अष्टमी पर दान, सेवा और करुणा की भूमिका

दुर्गा अष्टमी के दिन दान और सेवा को विशेष महत्व दिया जाता है।

गरीब, जरूरतमंद या असहाय लोगों को भोजन कराना, वस्त्र देना और यथाशक्ति सहयोग करना देवी की आराधना का ही एक रूप माना जाता है। कई लोग इस दिन अनाज, फल, मिठाई या उपयोगी वस्तुओं का वितरण करते हैं और मन में यह भावना रखते हैं कि जो कुछ मिला है, वह देवी की कृपा से ही मिला है।

दुर्गा अष्टमी के दिन मन में करुणा, विनम्रता और सहानुभूति के भाव को जगाना भी पूजा का हिस्सा है। जब व्यक्ति अपने व्यवहार में कठोरता छोड़कर विनम्रता अपनाने का निर्णय लेता है, तो यह भी देवी दुर्गा की कृपा को आमंत्रित करने का एक सूक्ष्म माध्यम बन जाता है।

दुर्गा अष्टमी 2026 को जीवन में कैसे उतारें

दुर्गा अष्टमी 2026 को यदि केवल एक पर्व की तरह मनाया जाए, तो उसका प्रभाव कुछ घंटों तक ही रह पाता है।

इस तिथि को जीवन में वास्तविक परिवर्तन का आधार बनाने के लिए आवश्यक है कि भक्त अपने भीतर की कमजोरियों, भय और नकारात्मक आदतों को पहचानने की कोशिश करे। जो लोग क्रोध, आलस्य, नकारात्मक सोच या असंतुलन से जूझ रहे हों, वे इस दिन देवी दुर्गा के समक्ष इन्हें छोड़ने का संकल्प ले सकते हैं।

दैनिक जीवन में थोड़ी अनुशासन, नियमित प्रार्थना, स्त्री सम्मान और जरूरतमंदों की सेवा को स्थान देने से दुर्गा अष्टमी 2026 केवल कैलेंडर की तिथि न रहकर जीवन में स्थिरता, साहस और स्पष्टता का आधार बन सकती है।

सामान्य प्रश्न

दुर्गा अष्टमी 2026 कब है और अष्टमी तिथि का समय क्या रहेगा
दुर्गा अष्टमी 2026 शुक्रवार, 26 जून को मनाई जाएगी। अष्टमी तिथि 26 जून 2026 को प्रातः 06 बजकर 58 मिनट पर प्रारंभ होकर 27 जून 2026 को प्रातः 09 बजकर 08 मिनट पर समाप्त होगी, इसलिए मुख्य व्रत और पूजन 26 जून के दिन किए जाएँगे।

दुर्गा अष्टमी को महाअष्टमी क्यों कहा जाता है
दुर्गा अष्टमी शक्ति उपासना की दृष्टि से अत्यंत प्रभावी तिथि मानी जाती है। इस दिन देवी दुर्गा के पराक्रमी और संरक्षक रूप की विशेष पूजा की जाती है, इसलिए कई परंपराओं में इसे महाअष्टमी कहा जाता है और नवरात्रि के दौरान यह दिन विशेष रूप से मनाया जाता है।

दुर्गा अष्टमी पर कौन से मुख्य अनुष्ठान किए जाते हैं
इस दिन प्रातः स्नान, देवी की मूर्ति या चित्र के सामने पूजा, दीप, धूप, फूल, नैवेद्य अर्पण, दुर्गा सप्तशती या स्तोत्र पाठ और आरती की जाती है। कई लोग व्रत रखते हैं, कन्या पूजन करते हैं और दिन के अंत में प्रसाद वितरण तथा दान के माध्यम से पूजा पूर्ण करते हैं।

कन्या पूजन का क्या महत्व है और इसे कैसे किया जाता है
कन्या पूजन में छोटी लड़कियों को देवी के रूप में सम्मान दिया जाता है। उनके चरण धोकर तिलक लगाया जाता है, उन्हें प्रसाद स्वरूप भोजन कराया जाता है और यथाशक्ति वस्त्र या छोटी भेंट दी जाती है। इससे जीवन में देवी की कृपा, स्त्री सम्मान और परिवार में सुख शांति की कामना की जाती है।

दुर्गा अष्टमी 2026 को व्यक्तिगत जीवन में कैसे सार्थक बनाया जा सकता है
दुर्गा अष्टमी 2026 के दिन व्यक्ति भय, नकारात्मकता और बुरी आदतों को छोड़ने का संकल्प लेकर साहस, संयम और करुणा जैसे गुणों को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। नियमित प्रार्थना, दुर्गा स्तुति और जरूरतमंदों की सेवा से इस तिथि का प्रभाव पूरे वर्ष मानसिक शक्ति, आत्मविश्वास और सकारात्मकता के रूप में अनुभव किया जा सकता है।

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