By पं. अमिताभ शर्मा
17 फरवरी 2026 को अंगुलीय सूर्य ग्रहण, वैश्विक समय और दृश्यता विवरण

साल 2026 की शुरुआत के साथ ही फरवरी महीने में एक विशेष सूर्य ग्रहण लगने वाला है, जिसे रिंग ऑफ फायर सूर्य ग्रहण के रूप में जाना जाएगा। यह वही स्थिति होती है जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता और सूर्य की बाहरी परिधि अग्नि वलय की तरह चमकती दिखाई देती है।
यह सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को पड़ेगा और वैश्विक स्तर पर यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण रहेगा। ग्रहण की शुरुआत, चरम और समाप्ति की समयावधि को समझना सूर्य ग्रहण की संपूर्ण तस्वीर को स्पष्ट करता है।
| विवरण | समय (विश्व मानक समय के अनुसार) |
|---|---|
| आंशिक सूर्य ग्रहण प्रारंभ | 09 बजकर 56 मिनट के आसपास |
| वलयाकार चरण प्रारंभ | लगभग 11 बजकर 42 मिनट |
| अधिकतम ग्रहण | लगभग 12 बजकर 12 मिनट |
| वलयाकार चरण समाप्त | लगभग 12 बजकर 41 मिनट |
| आंशिक ग्रहण समाप्त | लगभग 14 बजकर 27 मिनट |
यह समय वैश्विक पैमाने पर ग्रहण की गति का संकेत देता है। स्थानीय समय अनुसार यह अवधि क्षेत्र विशेष के हिसाब से थोड़ी आगे पीछे हो सकती है, क्योंकि ग्रहण एक स्थान से शुरू होकर पृथ्वी के दूसरे भाग पर समाप्त होता है।
आम भाषा में रिंग ऑफ फायर उसी सूर्य ग्रहण को कहा जाता है जिसे ज्योतिषीय और खगोलीय मानकों पर वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है।
इस स्थिति में चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच तो आ जाता है, पर दूरी के कारण उसका प्रत्यक्ष आकार सूर्य से थोड़ा छोटा दिखाई देता है। परिणामस्वरूप सूर्य का मध्य भाग काफी हद तक ढक जाता है, लेकिन किनारों पर एक चमकदार गोलाकार वलय जैसा दृश्य बनता है।
इस प्रकार के ग्रहण में दिन का उजाला पूरी तरह समाप्त नहीं होता, फिर भी प्रकाश में एक अजीब सी मद्धिमता और वातावरण में अलग तरह की शांति अनुभव की जा सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ वलयाकार चरण प्रत्यक्ष दिख रहा हो।
फरवरी 2026 का यह सूर्य ग्रहण खगोलीय दृष्टि से अत्यंत रोचक है, क्योंकि इसका वलयाकार हिस्सा पृथ्वी के अत्यंत दूरस्थ और जमे हुए हिस्सों के ऊपर से गुजरेगा।
इस कारण सामान्य भारतीय भक्त या जिज्ञासु इस ग्रहण को प्रत्यक्ष रूप से आकाश में नहीं देख पाएँगे, केवल इसके बारे में समाचार और चित्रों के माध्यम से ही जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
सूर्य ग्रहण सदियों से खगोल और ज्योतिष दोनों के अध्ययन का केंद्र रहे हैं। खगोलीय दृष्टि से यह ग्रहण सूर्य, चंद्र और पृथ्वी के बीच सटीक ज्यामितीय संयोग का परिणाम होता है।
सांस्कृतिक दृष्टि से भारत और अन्य देशों में ग्रहण के समय कुछ विशेष नियम और सावधानियाँ बताई जाती हैं। यद्यपि इस विशेष ग्रहण का प्रत्यक्ष प्रभाव भारत में दिखाई नहीं देगा, फिर भी सूर्य ग्रहण से जुड़ी पारंपरिक मान्यताएँ और ग्रंथों में वर्णित सावधानियाँ सामान्य चर्चा का विषय बनी रहेंगी।
जहाँ भी यह सूर्य ग्रहण प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देगा, वहाँ इसे देखने वालों के लिए आँखों की सुरक्षा अत्यंत अनिवार्य होती है। साधारण चश्मा, काला काँच या बिना प्रमाणित साधन से सूर्य की ओर देखना आँखों के लिए हानिकारक हो सकता है।
वलयाकार सूर्य ग्रहण के दौरान भी सूर्य का तेज कम नहीं होता, केवल उसका आकार बदलता है। इस कारण सूर्य ग्रहण को देखने के लिए विशेष सुरक्षित सोलर व्यूइंग ग्लास या उपयुक्त फिल्टर वाले दूरबीन या उपकरण का ही प्रयोग किया जाना चाहिए।
सामान्य सलाह यह है कि केवल जिज्ञासा में या असुरक्षित तरीके से सूर्य की ओर सीधे न देखें, चाहे ग्रहण कितना भी आकर्षक क्यों न हो।
ज्योतिष में सूर्य को आत्मबल, राजसत्ता, पिता, स्वास्थ्य और प्रतिष्ठा का कारक माना जाता है। जब सूर्य पर ग्रहण पड़ता है, तो प्रतीकात्मक स्तर पर इसे आत्मविश्वास, शासन व्यवस्था और सामूहिक ऊर्जा पर एक प्रकार की छाया के रूप में देखा जाता है।
फरवरी 2026 वाले इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव अधिकतर उन क्षेत्रों के लिए महत्त्वपूर्ण माना जा सकता है जहाँ यह सीधे दिखाई देगा। भारत जैसे क्षेत्रों के लिए इसका प्रभाव अपेक्षाकृत सूक्ष्म और मनोवैज्ञानिक स्तर पर अधिक हो सकता है, जहाँ लोग इस घटना को सुनकर या देखकर अपने भीतर के विचारों और योजनाओं पर पुनर्विचार करें।
साधक ग्रहण के समय आत्मचिंतन, मौन और जप में रहना पसंद करते हैं, ताकि बाहरी घटना के साथ भीतर भी एक प्रकार का शुद्धिकरण हो सके। जो लोग प्रत्यक्ष ग्रहण क्षेत्र से दूर रहते हैं, वे भी इस दिन को मानसिक और आध्यात्मिक सफाई के अवसर के रूप में ले सकते हैं।
परंपरा में ग्रहण के समय को साधारण मनोरंजन के बजाय अधिक सजगता से बिताने की सलाह दी जाती है।
यह सब नियम विवेक और श्रद्धा के साथ अपनाने योग्य हैं, कठोर भय के साथ नहीं। उद्देश्य यह है कि जब प्रकृति में कोई विशेष घटना हो रही हो तब मन भी थोड़ा अधिक सजग और भीतर की ओर उन्मुख रहे।
फरवरी 2026 का यह सूर्य ग्रहण अधिकतर लोगों के लिए प्रत्यक्ष दृश्य के बजाय ज्ञान और सजगता का विषय बनेगा।
जो लोग ज्योतिष में रुचि रखते हैं, वे अपनी जन्मकुंडली में सूर्य की स्थिति देखकर यह सोच सकते हैं कि आने वाले समय में आत्मबल, निर्णय क्षमता और सामाजिक जीवन के किन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। जो लोग केवल खगोलीय रुचि रखते हैं, वे इस ग्रहण को पृथ्वी, चंद्र और सूर्य के अद्भुत संतुलन की एक सुंदर मिसाल के रूप में समझ सकते हैं।
जब ग्रहण जैसी घटनाओं को अंधविश्वास से ऊपर उठकर, विवेक, ज्योतिषीय संकेत और आध्यात्मिक चिंतन के साथ देखा जाए तब यह केवल आकाश का दृश्य नहीं रहता बल्कि भीतर के आकाश को भी थोड़ा साफ करने का अवसर बन जाता है।
फरवरी 2026 में लगने वाला सूर्य ग्रहण किस प्रकार का है
फरवरी 2026 में लगने वाला सूर्य ग्रहण वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसे रिंग ऑफ फायर कहा जाता है। इसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढकता बल्कि किनारों पर अग्नि वलय जैसा दृश्य बनता है।
यह सूर्य ग्रहण कब लगेगा और इसकी मुख्य समयावधि क्या है
यह सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को पड़ेगा। विश्व मानक समय के अनुसार आंशिक ग्रहण की शुरुआत लगभग 09 बजकर 56 मिनट पर, वलयाकार चरण की शुरुआत लगभग 11 बजकर 42 मिनट पर, अधिकतम ग्रहण लगभग 12 बजकर 12 मिनट पर और पूर्ण समाप्ति लगभग 14 बजकर 27 मिनट के आसपास मानी गई है।
क्या फरवरी 2026 का सूर्य ग्रहण भारत से दिखाई देगा
यह सूर्य ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा। ग्रहण के समय सूर्य भारतीय उपमहाद्वीप के लिए क्षितिज के नीचे रहेगा और ग्रहण का मार्ग मुख्य रूप से अंटार्कटिका तथा दक्षिणी गोलार्ध के कुछ दूरस्थ क्षेत्रों से होकर गुजरेगा।
रिंग ऑफ फायर सूर्य ग्रहण को देखने के लिए किस प्रकार की सावधानी आवश्यक है
सूर्य ग्रहण को कभी भी साधारण चश्मे, काले काँच या बिना प्रमाणित साधनों से सीधे नहीं देखना चाहिए। आँखों की सुरक्षा के लिए केवल मान्यताप्राप्त सोलर व्यूइंग ग्लास या उचित फिल्टर वाले उपकरण का ही उपयोग करना चाहिए, चाहे ग्रहण आंशिक हो या वलयाकार।
ज्योतिषीय दृष्टि से इस सूर्य ग्रहण को कैसे समझा जा सकता है
ज्योतिष में सूर्य आत्मबल, स्वास्थ्य और प्रतिष्ठा का कारक माना जाता है। सूर्य ग्रहण को प्रतीकात्मक रूप से आत्मचिंतन, पुरानी धारणाओं की समीक्षा और भीतर के प्रकाश को और साफ करने के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। जो क्षेत्र इस ग्रहण को प्रत्यक्ष रूप से देखते हैं, वहाँ इसका प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक माना जाता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में इसे मुख्यतः मानसिक और आध्यात्मिक सजगता के अवसर के रूप में लिया जा सकता है।
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