By पं. नरेंद्र शर्मा
जानिए 2025 में सावन के चौथे सोमवार की तिथि, पूजा मुहूर्त, उपाय और भक्ति का प्रभावशाली महत्व

बारिश की हल्की बूंदें, हरियाली की मधुर छटा और मंदिरों की घंटियों की ध्वनि इस सोमवार को दिव्यता से भर देती है। पूरे महीने की शिव भक्ति का यह अंतिम पड़ाव मन को स्थिर, आत्मा को शांत और श्रद्धा को पूर्ण करता है। ऐसा माना जाता है कि इस सोमवार को की गई प्रार्थना सीधे महादेव तक पहुँचती है।
तिथि: 4 अगस्त 2025, सोमवार
दशमी तिथि प्रारंभ: 3 अगस्त, सुबह 9:42
दशमी तिथि समाप्त: 4 अगस्त, सुबह 11:41
| मुहूर्त | समय |
|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:20 AM – 05:02 AM |
| प्रातः संध्या | 04:41 AM – 05:44 AM |
| अभिजित मुहूर्त | 12:00 PM – 12:54 PM |
| विजय मुहूर्त | 02:41 PM – 03:35 PM |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:10 PM – 07:31 PM |
| सायाह्न संध्या | 07:10 PM – 08:13 PM |
| अमृत काल | 01:47 AM – 03:32 AM (5 अगस्त) |
| निशीथ काल | 12:06 AM – 12:48 AM (5 अगस्त) |
| सर्वार्थ सिद्धि योग | 05:44 AM – 09:12 AM |
| रवि योग | पूरे दिन |
प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद का सर्वोत्तम समय माना गया है।
• यह सोमवार सावन का अंतिम, सबसे ऊर्जावान और सिद्धि देने वाला दिन है।
• विवाह, संतान, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थनाएँ विशेष फलकारी मानी जाती हैं।
• सात्विकता, सत्य और संयम का पालन आवश्यक है।
| लाभ | प्रभाव |
|---|---|
| सौभाग्य, पति की दीर्घायु | विवाहित महिलाओं हेतु |
| योग्य जीवनसाथी | अविवाहितों के लिए |
| संतान प्राप्ति | संतानहीन भक्तों हेतु |
| स्वास्थ्य और शांति | रोग मुक्ति और मानसिक संतुलन |
| आर्थिक उन्नति | व्यापार और घर-परिवार में लाभ |
| आध्यात्मिक शक्ति | आत्मबल और आंतरिक शुद्धि |
खाएं: फल, दूध, मेवे, साबूदाना, कुट्टू, सेंधा नमक, उबले आलू।
न खाएं: गेहूं, चावल, दाल, प्याज-लहसुन, तामसिक भोजन, सामान्य नमक, मांसाहार।
यह सोमवार सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि आंतरिक यात्रा है। हर मंत्र, हर बेलपत्र, हर प्रार्थना आत्मा को शिव के समीप ले जाती है। भक्त की सच्ची निष्ठा ही इस दिन का अद्भुत फल बनती है।
1. क्या चौथा सोमवार अन्य सोमवारों से अधिक महत्वपूर्ण है?
हाँ, इसे सावन का सबसे शक्तिशाली और सिद्धिदायक सोमवार कहा गया है।
2. क्या व्रत बिना पूजा सामग्री के भी रखा जा सकता है?
हाँ, केवल मन की शुद्धता और शिव स्मरण भी पर्याप्त हैं।
3. क्या अभिषेक में पंचामृत अनिवार्य है?
अनिवार्य नहीं, पर अत्यंत शुभ माना गया है।
4. अविवाहित लोग इस दिन क्या विशेष कर सकते हैं?
शिव-पार्वती का संयुक्त पूजन योग्य साथी के योग बढ़ाता है।
5. क्या इस दिन मांस और तामसिक भोजन पूरी तरह वर्जित है?
हाँ, सात्विकता इस व्रत का मूल आधार है।
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