By पं. अमिताभ शर्मा
जानें 27 अगस्त को गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस महापर्व का महत्व।

ढोल-नगाड़ों की गूंज, मोदक की सुगंध और हर ओर “गणपति बप्पा मोरया” का जयघोष गणेश चतुर्थी को एक अलौकिक उत्सव बना देते हैं। यह पर्व केवल आनन्द नहीं, बल्कि जीवन में नई शुरुआत, बुद्धि, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के आगमन का संकेत है। दस दिवसीय यह उत्सव पूरे भारत में अत्यंत भक्तिभाव से मनाया जाता है।
चतुर्थी तिथि आरंभ: 26 अगस्त 2025, मंगलवार दोपहर 01:54
चतुर्थी तिथि समाप्त: 27 अगस्त 2025, बुधवार दोपहर 03:44
उदयातिथि के नियम के अनुसार
मुख्य गणेश चतुर्थी 27 अगस्त 2025, बुधवार को मनाई जाएगी।
| मुहूर्त | समय |
|---|---|
| सूर्योदय | 06:28 AM |
| सूर्यास्त | 06:14 PM |
| चंद्रोदय | 08:52 AM |
| चंद्रास्त | 08:28 PM |
| ब्रह्म मुहूर्त | 03:58–04:43 AM |
| विजय मुहूर्त | 01:58–02:49 PM |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:14–06:36 PM |
| निशीथ मुहूर्त | 11:28–12:13 PM |
• शुभ योग और शुक्ल योग: दोपहर तक शुभ प्रभाव देंगे
• सर्वार्थ सिद्धि योग: 06:04 AM से प्रारंभ
• भद्रावास योग: 03:44 PM तक
इन विशेष योगों के कारण स्थापना और पूजन के फल कई गुना बढ़ जाते हैं।
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि-प्रदाता और प्रथम पूज्य माना गया है।
इस दिन घर में गणपति की स्थापना करने से:
• नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
• सुख, सौभाग्य और समृद्धि आती है
• मन और बुद्धि में स्पष्टता उत्पन्न होती है
• परिवार में शांति और एकता बढ़ती है
यह महोत्सव आत्म-विवेचन, आंतरिक शुद्धिकरण और नई शुरुआत का शक्तिशाली समय है।
• शुभ मुहूर्त में प्रतिमा को स्थापित करें
• जल, चावल और पुष्प लेकर संकल्प करें
• पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक
• लाल/पीले वस्त्र पहनाएं
• दूर्वा घास, लाल पुष्प और मोदक अर्पित करें
• गणेश चालीसा, अथर्वशीर्ष या कथा का पाठ
• घी के दीपक से आरती
दस दिनों तक प्रतिदिन पूजा के बाद अनंत चतुर्दशी को भक्त पूर्ण विधि से विसर्जन करते हैं।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| मुख्य पर्व | 27 अगस्त 2025, बुधवार |
| तिथि | 26 Aug 01:54 PM – 27 Aug 03:44 PM |
| प्रमुख योग | शुभ, शुक्ल, सर्वार्थ सिद्धि |
| महत्व | विघ्न नाश, बुद्धि, सौभाग्य, समृद्धि |
1. गणेश चतुर्थी 2025 किस दिन मनाई जाएगी?
27 अगस्त 2025, बुधवार को, क्योंकि उदयातिथि उसी दिन है।
2. पूजा का सबसे शुभ समय क्या है?
सुबह का ब्रह्म मुहूर्त, सूर्यास्त के बाद का गोधूलि मुहूर्त और सर्वार्थ सिद्धि योग अत्यंत शुभ हैं।
3. स्थापना के लिए किस दिशा की ओर मुख रखना चाहिए?
गणेश प्रतिमा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख होनी चाहिए।
4. गणेश जी का प्रिय भोग क्या है?
मोदक, लड्डू, दूर्वा घास और लाल पुष्प विशेष प्रिय हैं।
5. क्या प्रतिमा मिट्टी की ही होनी चाहिए?
पर्यावरणीय दृष्टि से शास्त्र भी मिट्टी की प्रतिमा को श्रेष्ठ बताते हैं।
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