By पं. अमिताभ शर्मा
जानें क्यों 2026 में गणेश जयंती की तारीख पर है भ्रम

माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाने वाली गणेश जयंती को माघी गणेश चतुर्थी भी कहा जाता है। यही तिथि भगवान गणेश के अवतरण दिवस के रूप में मानी जाती है, इसलिए इस दिन का व्रत और पूजन अत्यंत फलदायी माना जाता है। हर महीने दो चतुर्थी आती हैं, लेकिन माघ शुक्ल चतुर्थी को विशेष रूप से जन्मोत्सव रूप में मनाया जाता है।
वर्ष 2026 में गणेश जयंती की सही तारीख को लेकर कुछ लोगों के मन में हल्का भ्रम दिखाई देता है, क्योंकि चतुर्थी तिथि दो दिनों में फैली हुई है। वैदिक पंचांग गणना के अनुसार तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय समझना आवश्यक है।
| विवरण | समय और तिथि |
|---|---|
| चतुर्थी तिथि का आरंभ | 22 जनवरी 2026, रात 02 बजकर 47 मिनट |
| चतुर्थी तिथि का समापन | 23 जनवरी 2026, रात 02 बजकर 28 मिनट |
| उदया तिथि के अनुसार पर्व तिथि | 22 जनवरी 2026, गुरुवार |
| पूजा का शुभ मुहूर्त | प्रातः 11 बजकर 28 मिनट से दोपहर 01 बजकर 42 मिनट तक |
उदया तिथि के सिद्धांत के अनुसार जिस दिन सूर्योदय के समय चतुर्थी तिथि विद्यमान रहती है, वही दिन पर्व मान्य होता है। इस कारण गणेश जयंती 2026 गुरुवार, 22 जनवरी को मनाई जाएगी और इसी दिन गणेश जयंती का व्रत, पूजन और उत्सव रखा जाना उचित माना गया है।
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और प्रथम पूज्य देव के रूप में मान्यता प्राप्त है। किसी भी शुभ कार्य, यज्ञ, गृह प्रवेश या नई शुरुआत से पहले सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है, ताकि कार्य बिना बाधा के पूर्ण हो सके।
माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को
जैसे नामों से जाना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन गणपति का अवतरण हुआ था। “वरद” का अर्थ है वर देने वाले, इसलिए इस दिन किया गया व्रत और पूजा विशेष रूप से मनोकामना पूर्ति से जोड़ी जाती है।
गणेश जयंती पर पूजा के लिए मध्याह्न के आसपास का समय विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि यह गणेश उपासना के लिए अनुकूल काल माना गया है।
यदि किसी कारण इस पूरे समय में पूजा संभव न हो, तो यथासंभव इसी अवधि के करीब पूजा करने की कोशिश करना अच्छा रहता है। मुख्य बात श्रद्धा, शुद्धता और एकाग्रता की है।
गणेश जयंती की पूजा अत्यंत सुलभ और घर पर भी सहजता से की जा सकती है। दिए गए क्रम को अपनी सुविधा के अनुसार थोड़ा सरल या विस्तृत भी किया जा सकता है, पर मूल भाव वही रहे।
पूजा के बाद प्रसाद को परिवार में बाँटें और व्रत रखने वाले साधक को पहले गणेश जी का भोग लगाकर ही प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।
गणेश जयंती पर व्रत रखने की परंपरा को सरल रखा गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें सम्मिलित हो सकें।
व्रत केवल भोजन से संयम नहीं बल्कि विचार और व्यवहार से भी संयम की ओर ले जाने वाला अभ्यास है, इसलिए बाहरी नियमों के साथ साथ मन की शुद्धता पर विशेष ध्यान रखना बहुत आवश्यक है।
गणेश जयंती को जन्मोत्सव के रूप में मनाने से भक्त के जीवन में अनेक प्रकार के लाभ बताए जाते हैं।
जो साधक नियमित रूप से किसी एक चतुर्थी का व्रत नहीं रख पाते, वे केवल माघी गणेश चतुर्थी का व्रत रखकर भी गणेश जी से विशेष कृपा की प्रार्थना कर सकते हैं।
इस तिथि को तिलकुंद चतुर्थी भी कहा जाता है। इसके पीछे यह मान्यता जुड़ी है कि इस दिन तिल का दान और तिल से बनी वस्तुओं का सेवन दोनों ही अत्यंत शुभ होते हैं।
इस दिन तिलकुंद चतुर्थी नाम का प्रयोग तिल दान और तिल से जुड़े प्रसाद की महत्ता पर विशेष ध्यान दिलाता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से गणेश जी का संबंध विशेष रूप से बुध ग्रह से जोड़ा जाता है, जो बुद्धि, तार्किक क्षमता, संवाद, शिक्षा और व्यापार का कारक माना जाता है।
यह सब मान्यताएँ हैं, पर इनके पीछे का भाव यही है कि गणेश जयंती पर बुद्धि और विवेक की दिशा में विशेष प्रयास किया जाए।
गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से बचने की परंपरा बहुत प्रसिद्ध है। पौराणिक कथा के अनुसार एक प्रसंग में गणेश जी का वाहन मूषक लड़खड़ा गया, जिससे गणेश जी नीचे गिर गए और चंद्रमा ने इस घटना पर हँसी उड़ाई। इसके फलस्वरूप गणेश जी ने चंद्रमा को श्राप दिया कि जो भी इस दिन चंद्र दर्शन करेगा, उस पर झूठा आरोप लगने का भय रहेगा।
इसी कारण
हालाँकि यह कथा प्रतीकात्मक भी मानी जा सकती है, पर संदेश यही है कि इस दिन अनावश्यक अहंकार और मजाक उड़ाने की प्रवृत्ति से दूर रहना बेहतर है।
गणेश जयंती 2026 को केवल एक पर्व न मानकर जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत की तरह भी जीया जा सकता है।
इस प्रकार गणेश जयंती केवल पूजा तक सीमित न रहकर जीवन की दिशा को भी अधिक संतुलित और सुनियोजित बना सकती है।
गणेश जयंती 2026 किस दिन और कब मनाई जाएगी
वैदिक पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 22 जनवरी 2026 को रात 02 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर 23 जनवरी 2026 को रात 02 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर गणेश जयंती 2026 गुरुवार, 22 जनवरी को मनाई जाएगी।
गणेश जयंती 2026 की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है
गणेश जयंती 2026 पर पूजा के लिए प्रमुख मुहूर्त सुबह 11 बजकर 28 मिनट से दोपहर 01 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। इसी अवधि में गणेश प्रतिमा स्थापना, संकल्प, मुख्य पूजा, मंत्र जप और आरती करना शुभ माना जाता है।
गणेश जयंती को तिलकुंद चतुर्थी क्यों कहा जाता है
इस दिन तिल से बने प्रसाद का सेवन और तिल का दान अत्यंत शुभ माना जाता है, इसलिए इसे तिलकुंद चतुर्थी भी कहा जाता है। तिल दान से कई तरह के सूक्ष्म दोष शांत करने की भावना जुड़ी है और यह शनि तथा पितृ शांति से भी संबंधित माना जाता है।
गणेश जयंती पर चंद्रमा को क्यों नहीं देखना चाहिए
पौराणिक कथा के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा देखने से व्यक्ति पर झूठा आरोप लगने का भय रहता है। इसी कारण गणेश जयंती पर चंद्र दर्शन से बचने की परंपरा है और गलती से चंद्र दर्शन हो जाए तो गणेश स्तुति या कथा का स्मरण करने की सलाह दी जाती है।
गणेश जयंती पर कौन सा मंत्र जपना लाभदायक है
गणेश जयंती पर “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जप अत्यंत शुभ माना जाता है। विद्यार्थी, व्यापारी और बुद्धि से जुड़े कार्य करने वाले लोग इस दिन शांत मन से इस मंत्र का जप कर अपनी एकाग्रता और विवेक के लिए गणेश जी से प्रार्थना कर सकते हैं।
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