गौरी गणेश चतुर्थी 2026: तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

By पं. नीलेश शर्मा

जानें 22 जनवरी 2026 को गौरी गणेश चतुर्थी क्यों है विशेष और मुख्य पूजा समय

गौरी गणेश चतुर्थी 2026 तारीख और पूजा समय

22 जनवरी 2026 को कब है गौरी गणेश चतुर्थी और क्या है सही मुहूर्त

माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाने वाली गौरी गणेश चतुर्थी ज्ञान, विवेक और विघ्नों से मुक्ति की प्रार्थना का अत्यंत शुभ दिन मानी जाती है। यह वही माघ शुक्ल चतुर्थी है जिसे माघी गणेश चतुर्थी या गणेश जयंती के रूप में भी जाना जाता है और इस दिन विशेष रूप से भगवान गणेश के साथ माता गौरी की उपासना की जाती है। व्रत, पूजा और चंद्र दर्शन से जुड़ी सूक्ष्म बातें समझकर ही इस तिथि का पूर्ण लाभ लिया जा सकता है।

गौरी गणेश चतुर्थी 2026 की तिथि और महत्वपूर्ण समय इस प्रकार हैं।

विवरणसमय और तिथि
चतुर्थी तिथि आरंभ22 जनवरी 2026, प्रातः 02 बजकर 47 मिनट
चतुर्थी तिथि समाप्त23 जनवरी 2026, प्रातः 02 बजकर 28 मिनट
पर्व मनाए जाने की तिथि22 जनवरी 2026, गुरुवार
चतुर्थी मध्याह्न पूजन मुहूर्त22 जनवरी 2026, 11 बजकर 29 मिनट से 01 बजकर 37 मिनट तक
चंद्र दर्शन वर्जित समय22 जनवरी 2026, प्रातः 09 बजकर 22 मिनट से रात्रि 09 बजकर 19 मिनट के बीच

इस दिन भक्त प्रातःकाल से लेकर भगवान गणेश की पूजा होने तक व्रत रखते हैं और मध्याह्न के शुभ मुहूर्त में गौरी गणेश की विधि विधान से पूजा कर व्रत का फल पूर्ण करते हैं। साथ ही, पूरे दिन चंद्रमा न देखने की स्पष्ट मान्यता भी इस तिथि से जुड़ी हुई है।

गौरी गणेश चतुर्थी क्या है और इसका विशेष स्वरूप क्या है

गौरी गणेश चतुर्थी वह तिथि है जब भगवान गणेश के साथ माता गौरी की भी भक्तिभाव से आराधना की जाती है। इस दिन

  • गणेश जी को विघ्नहर्ता, ज्ञान और विवेक के अधिष्ठाता के रूप में
  • गौरी जी को शक्ति, सौभाग्य, समृद्धि और मातृत्व की प्रतीक रूप में

स्मरण किया जाता है।

भक्त इस तिथि पर विशेष रूप से

  • जीवन से बाधाओं और रुकावटों को दूर करने
  • कार्य सिद्धि, शिक्षा, व्यापार और संबंधों में संतुलन पाने
  • परिवार की सुख समृद्धि और सुरक्षा की प्रार्थना करने

के उद्देश्य से गणेश गौरी की उपासना करते हैं। यह दिन केवल गणेश चतुर्थी ही नहीं बल्कि माता और पुत्र दोनों के संयुक्त आशीर्वाद का विशेष अवसर बन जाता है।

चंद्र दर्शन से बचने का नियम क्यों है

गौरी गणेश चतुर्थी पर विशेष रूप से चंद्र दर्शन न करने की परंपरा प्राचीन कथाओं से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने से व्यक्ति पर झूठे आरोप लगने की आशंका रहती है। इसी कारण इस तिथि पर चंद्र दर्शन से बचने को शास्त्रों में महत्वपूर्ण माना गया है।

22 जनवरी 2026 को चंद्र दर्शन से बचने के लिए समय इस प्रकार है।

  • 09 बजकर 22 मिनट सुबह से लेकर 09 बजकर 19 मिनट रात तक चंद्रमा नहीं देखना चाहिए
  • यदि अनजाने में चंद्रमा दिख भी जाए तो भक्त गणेश जी की स्तुति, कथा या मंत्र जप का सहारा लेकर मानसिक रूप से क्षमा याचना करते हैं

यह नियम केवल भय का कारण नहीं बल्कि यह भी संकेत देता है कि इस दिन अहंकार, उपहास और दोषारोपण की प्रवृत्ति से दूर रहना उचित है।

गौरी गणेश चतुर्थी 2026 की पूजा से पहले की तैयारी

पूजा को सफल बनाने के लिए साधारण तैयारी भी अत्यंत महत्व रखती है। यह तैयारी न केवल स्थान की बल्कि मन की भी शुद्धि का प्रतीक मानी जाती है।

  • प्रातः सूर्योदय से पहले या उसके आसपास उठकर स्नान करें और स्नान जल में यदि संभव हो तो कुछ बूंदें गंगाजल की मिलाएँ
  • पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें और आस पास की अनावश्यक वस्तुओं को हटा दें
  • जिस स्थान पर चौकी रखनी हो, वहाँ पहले साफ कपड़ा बिछाकर जगह को शुद्ध और सुसज्जित बनाएँ
  • स्वयं भी स्वच्छ, सादे और संभव हो तो पीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करें

यह सारी तैयारी इस भावना के साथ की जाती है कि आज घर का यह छोटा सा स्थान गौरी गणेश के लिए पवित्र वेदी बन रहा है।

गौरी गणेश चतुर्थी 2026 की विस्तृत पूजा विधि

पूजा विधि को सरल शब्दों में इस प्रकार क्रमबद्ध किया जा सकता है ताकि घर पर भी सहजता से पालन किया जा सके।

  • एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ
  • चौकी पर माता गौरी और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र प्रतिष्ठित करें
  • सामने शुद्ध घी का एक दीपक जलाएँ और धूप या अगरबत्ती प्रज्वलित करें
  • दोनों देवताओं का ध्यान कर संकल्प लें कि आज पूरे दिन व्रत, संयम और श्रद्धा से पूजा की जाएगी
  • गंगाजल की कुछ बूंदें लेकर दोनों विग्रहों पर छिड़क कर शुद्धिकरण करें
  • रोली, चावल, पुष्प, अक्षत, अक्षतों से युक्त थाली से क्रमशः माता गौरी और गणेश जी का पूजन करें
  • भगवान गणेश को दूर्वा की पत्तियाँ, लाल फूल और मोदक या बूँदी के लड्डू का भोग अर्पित करें
  • माता गौरी को हल्दी, कुंकुम, पुष्प, सुहाग सामग्री की प्रतीक वस्तुएँ जैसे चुनरी या चूड़ी इत्यादि अर्पित की जा सकती हैं
  • पाँच प्रकार के मौसमी फल और कुछ मेवे भी दोनों के चरणों में सामर्थ्य अनुसार अर्पित करें
  • अंत में दोनों की संयुक्त आरती करें और प्रसाद को श्रद्धा से ग्रहण करें

इस प्रकार की सादगी पूर्ण परंतु व्यवस्थित पूजा भी गहरी आध्यात्मिक तृप्ति दे सकती है, यदि मन सजग और विनम्र रहे।

गौरी गणेश चतुर्थी पर व्रत रखने के नियम

इस दिन व्रत रखने वाले भक्त प्रातः से ही नियमपूर्वक दिन आरंभ करते हैं।

  • व्रत का संकल्प प्रातः पूजन से पहले लिया जाता है
  • अधिकांश भक्त दिन भर अन्न का त्याग कर फलाहार, दूध, पानी और हल्के सात्त्विक आहार पर ही रहते हैं
  • व्रत के दौरान किसी पर क्रोध, कटु वचन, दूसरों की निंदा या विवाद से बचने का विशेष ध्यान रखा जाता है
  • पूजा के बाद, विशेष रूप से मध्याह्न मुहूर्त के बाद, प्रसाद ग्रहण कर व्रत फल प्राप्त किया जाता है

व्रत का वास्तविक उद्देश्य शरीर को कमजोर करना नहीं बल्कि मन और इंद्रियों को संयमित और सजग करना है। जो साधक स्वास्थ्य कारणों से कठोर व्रत न रख सकें, वे भी यथासंभव आहार को सात्त्विक और संयमित रखकर भागीदारी कर सकते हैं।

गौरी गणेश चतुर्थी का महत्व और देवी गौरी की कृपा

गौरी गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को ज्ञान, बुद्धि, विवेक और विघ्नों के नाशक के रूप में पूजा जाता है। जो भक्त पूर्ण श्रद्धा से गणेश जी का पूजन करते हैं, उनके लिए यह तिथि

  • कार्यों में आ रही बाधाओं को धीरे धीरे कम करने
  • शिक्षा, करियर और व्यवसाय में स्थिरता और प्रगति पाने
  • सही निर्णय क्षमता और मानसिक स्पष्टता विकसित करने

के लिए विशेष मानी जाती है।

साथ ही इस दिन माता गौरी की पूजा से

  • घर परिवार में सुख, शांति और सौहार्द बढ़ने
  • दांपत्य जीवन में मधुरता और स्थिरता आने
  • आर्थिक स्थिति में धीरज और संतुलन बढ़ने

की मान्यता भी जुड़ी हुई है। माता गौरी को समर्पित व्रत और प्रार्थना से साधक के जीवन में संरक्षण, करुणा और मातृ ऊर्जा का अनुभव गहरा हो सकता है।

गौरी गणेश चतुर्थी 2026 के मंत्र और जप

इस दिन गणेश जी और गौरी जी दोनों के स्मरण के लिए कुछ सरल और प्रभावी मंत्र प्रचलित हैं।

  • ॐ गं गणपतये नमः
  • ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ निरविघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा

ये मंत्र गणेश जी की कृपा, विघ्नों की शांति और कार्य सिद्धि के लिए अत्यंत सरल और प्रभावकारी माने जाते हैं। जप के लिए संख्या बहुत अधिक न हो, लेकिन मन एकाग्र और उच्चारण शुद्ध रखने का प्रयास अवश्य होना चाहिए।

घर पर गौरी गणेश चतुर्थी 2026 को सार्थक कैसे बनाएं

हर भक्त के पास अयोध्या, किसी बड़े मंदिर या तीर्थस्थान जाने का अवसर हो यह आवश्यक नहीं है। फिर भी घर पर ही इस दिन को सुंदर और आध्यात्मिक रूप से गहरा बनाने के अनेक सहज तरीके हैं।

  • सुबह बच्चों के साथ मिलकर गणेश और गौरी के बारे में सरल कथाएँ और गुण सुनाएँ
  • परिवार के साथ मिलकर एक समय का भोजन बहुत सरल और सात्त्विक रखकर प्रसाद भाव से ग्रहण करें
  • आज के दिन किसी एक नकारात्मक आदत जैसे क्रोध, देर तक जागना या अनावश्यक मोबाइल उपयोग को थोड़ा कम करने का संकल्प लें
  • आर्थिक क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद को भोजन, फल, कपड़ा या अध्ययन सामग्री दान करें

ऐसे छोटे लेकिन सच्चे कदम इस तिथि को केवल एक पर्व नहीं बल्कि जीवन में नई शुरुआत का बिंदु भी बना सकते हैं।

सामान्य प्रश्न

गौरी गणेश चतुर्थी 2026 कब मनाई जाएगी
गौरी गणेश चतुर्थी 2026 माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गुरुवार, 22 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि 22 जनवरी को प्रातः 02 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर 23 जनवरी को प्रातः 02 बजकर 28 मिनट तक रहेगी, इसलिए उदया तिथि के आधार पर 22 जनवरी को ही पर्व माना गया है।

इस दिन का मुख्य पूजा मुहूर्त कौन सा है
गौरी गणेश चतुर्थी 2026 के लिए मध्याह्न पूजन का प्रमुख मुहूर्त 11 बजकर 29 मिनट से 01 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। इसी अवधि में गौरी गणेश की स्थापना, संकल्प, मुख्य पूजा, भोग और आरती करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

चंद्र दर्शन से बचने का समय क्या है
22 जनवरी 2026 को प्रातः 09 बजकर 22 मिनट से रात 09 बजकर 19 मिनट तक चंद्रमा को न देखने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस समय चंद्र दर्शन से बचना चाहिए, अन्यथा जीवन में झूठे आरोप या अनावश्यक दोषारोपण की स्थितियाँ बढ़ सकती हैं।

गौरी गणेश चतुर्थी पर किन देवताओं की पूजा की जाती है
इस दिन मुख्य रूप से भगवान गणेश और माता गौरी की संयुक्त पूजा की जाती है। गणेश जी से विघ्नों की शांति, ज्ञान और बुद्धि की प्रार्थना की जाती है, जबकि माता गौरी से सौभाग्य, समृद्धि, परिवार की रक्षा और सुख शांति का आशीर्वाद माँगा जाता है।

इस तिथि को घर पर कौन सा सरल उपाय किया जा सकता है
घर पर साफ स्थान पर चौकी बिछाकर गौरी गणेश की प्रतिमा स्थापित कर, घी का दीपक जलाकर “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जप और सरल प्रसाद जैसे फल, मिठाई और मोदक अर्पित करना इस दिन को बहुत अर्थपूर्ण बना सकता है। साथ ही किसी जरूरतमंद को भोजन या वस्त्र दान करना भी श्रेष्ठ माना जाता है।

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