By पं. नरेंद्र शर्मा
जानिए गोपद्म व्रत 2025 की तिथि, पूजन विधि, धार्मिक महत्व और परिवार में प्रेम और कृतज्ञता का संदेश

गोपद्म व्रत भारतीय परंपरा में परिवार गौपूजन और भाई बहन के स्नेह का प्रतीक माना जाता है। यह व्रत कृतज्ञता सेवा और समर्पण का संदेश देता है और माध्व समुदाय में विशेष श्रद्धा से सात दिनों तक किया जाता है। यह अनुष्ठान पांच वर्षों तक निरंतर पालन किया जाता है और साधक के जीवन में संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खोलता है।
व्रत का प्रारंभ 6 जुलाई 2025 रविवार और समापन 2 नवंबर 2025 रविवार को होगा।
चातुर्मास में मनाया जाने वाला यह व्रत आषाढ़ शुक्ल एकादशी से आरंभ होकर देवउठनी एकादशी तक चलता है।
व्रत लगातार सात दिनों तक किया जाता है और यह क्रम पांच वर्षों तक दोहराया जाता है।
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल या गौशाला में गोमाता और बछड़े के साथ कमल और शुभ चिह्नों की रंगोली बनाएं।
गाय के साथ छह कमलों की आकृति बनाएं जो तैंतीस करोड़ देवी देवताओं की उपस्थिति का प्रतीक है।
रंगोली पर कुमकुम अक्षत पुष्प फल और नैवेद्य अर्पित करें।
तैंतीस परिक्रमा करें और छह कमलों के लिए अलग से छह परिक्रमा करें।
गोमाता की आरती करें और विशेष पूजा करें।
सातों दिनों तक यह प्रक्रिया दोहराएं और यदि कोई दिन छूट जाए तो अगले दिन पूर्ति करें।
व्रत के अंत में दान दें पहले वर्ष पायसम तैंतीस सिक्के तुलसी चंदन और पान का दान करें।
अगले वर्षों में भिन्न मिठाइयां जैसे लड्डू अथिरसा एलाई अप्पम उब्बिट्टु आदि दान करें।
यह दान भाई या उनकी अनुपस्थिति में किसी योग्य व्यक्ति को दें।
यह व्रत गौमाता के प्रति कृतज्ञता और प्रकृति के सम्मान का प्रतीक है।
विवाहिता महिलाएं भाइयों की आयु स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं।
यह पर्व परिवार में प्रेम सहयोग और एकता को बढ़ाता है।
साधक को तैंतीस करोड़ देवी देवताओं का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में विनम्रता सेवा और समर्पण का भाव जागृत होता है।
कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बहन सुभद्रा को यह व्रत करने की प्रेरणा दी।
उन्होंने सुभद्रा को विनम्रता और भक्ति का महत्व समझाते हुए मोती और शिलाखंड के चूर्ण से रंगोली बनाकर गौमाता की पूजा करने का निर्देश दिया।
यह परंपरा आज भी श्रद्धा से निभाई जाती है और परिवार में सौहार्द और मंगल ऊर्जा लाती है।
यह व्रत संबंधों को मजबूत करने आत्मा को शुद्ध करने और प्रकृति से जुड़ने का माध्यम है।
सात दिनों का यह अनुष्ठान साधक के मन में कृतज्ञता और सेवा भावना को बढ़ाता है।
यह पर्व सिखाता है कि प्रेम विनम्रता और समर्पण से ही जीवन में सुख शांति और समृद्धि आती है।
1. गोपद्म व्रत कितने वर्षों तक किया जाता है
यह व्रत पांच वर्षों तक लगातार सात सात दिनों के लिए किया जाता है।
2. क्या यह व्रत केवल विवाहित महिलाएं ही रखती हैं
मुख्य रूप से विवाहित महिलाएं यह व्रत भाइयों की दीर्घायु के लिए रखती हैं परंतु श्रद्धा से कोई भी कर सकता है।
3. व्रत की परिक्रमा क्यों की जाती है
तैंतीस परिक्रमा तैंतीस करोड़ देवी देवताओं की उपस्थिति का प्रतीक है।
4. व्रत में किस प्रकार का दान आवश्यक है
वर्षानुसार अलग प्रकार की मिठाइयां और प्रतीकात्मक वस्तुएं दान की जाती हैं।
5. यदि कोई दिन छूट जाए तो क्या करना चाहिए
अगले दिन उसकी पूर्ति करनी चाहिए ताकि व्रत का क्रम अखंड रहे।
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