By अपर्णा पाटनी
19 दिसंबर 2025 की अंजनेयर जयंती पर पूजा, मंत्र और विशेष लाभ

वर्ष 2025 में अंजनेयर जयंती या हनुमान जयंती 19 दिसंबर 2025, शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी। यह दिन श्री अंजनेयर के जन्मोत्सव के रूप में आदरपूर्वक माना जाता है और भय, ऋण तथा शत्रु बाधा जैसी समस्याओं से राहत पाने के लिए अत्यंत प्रभावी अवसर माना जाता है। इस दिन श्रद्धा से की गई पूजा और मंत्र जप को शीघ्र फलदायी माना जाता है और कहा जाता है कि श्रीराम के परम भक्त अंजनेयर अपने उपासकों की समस्याएँ जल्दी सुनते हैं।
हनुमान जयंती के इस विशेष संयोजन को साहस, आशा और साधना का संगम माना जाता है। जो लोग लंबे समय से मानसिक तनाव, शत्रु बाधा, आर्थिक दबाव या निराधार भय से जूझ रहे हों वे 19 दिसंबर 2025 के दिन को आंतरिक परिवर्तन और मजबूती की शुरुआत बना सकते हैं।
श्री अंजनेयर वीरता, समर्पण और बुद्धिमत्ता के प्रतीक माने जाते हैं। श्रीराम के प्रति पूर्ण निष्ठा और सेवा भाव के कारण उन्हें संकटमोचक के रूप में भी स्मरण किया जाता है। परंपराओं के अनुसार जो भी व्यक्ति श्रद्धा के साथ अंजनेयर की शरण में आता है उसके भय, अविश्वास और कमजोरी धीरे धीरे कम होने लगते हैं और मन में स्थिरता और साहस की भावना बढ़ती है।
हनुमान जयंती के दिन की गई पूजा अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली मानी जाती है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ माना जाता है जो शत्रु बाधा, ऋण के बोझ, बार बार असफलता या नकारात्मक विचारों से घिरे रहते हैं। इस दिन अंजनेयर के समक्ष अपनी मनोकामनाएँ ईमानदारी से रखकर मंत्र जप करने से मन को नई दिशा मिलने की मान्यता है।
हनुमान जयंती के दिन साधारण परंतु अनुशासित पूजा विधि से भी गहरा लाभ प्राप्त किया जा सकता है। यह आवश्यक नहीं कि पूजा केवल मंदिर में ही हो, घर पर भी श्रद्धा से की गई साधना प्रभावशाली मानी जाती है।
सुबह जल्दी उठकर शरीर और मन दोनों को शुद्ध रखने का प्रयास किया जाता है। स्नान के बाद लाल या केसरिया रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।
अंजनेयर की पूजा में तैल दीप विशेष माने जाते हैं। इस दिन तिल के तेल का दीपक जलाकर श्री अंजनेयर के समक्ष रखना शुभ माना जाता है। घर हो या मंदिर, श्रद्धा का भाव सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
पूजा में प्रचलित अर्पण इस प्रकार बताए जाते हैं।
जो लोग मंदिर जाते हैं वे वहाँ अभिषेक, अर्चना और विशेष आरती में सम्मिलित होकर सामूहिक ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं। घर पर पूजा करने वाले भी सादगी के साथ वही भाव अपने भीतर अनुभव कर सकते हैं।
हनुमान जयंती के दिन एक सरल और सुलभ मंत्र “ॐ हनुमते नमः” अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। यह मंत्र अंजनेयर की कृपा को आमंत्रित करने वाला और मन में साहस जगाने वाला माना जाता है। इस मंत्र को जपने के लिए बहुत अधिक औपचारिकता नहीं चाहिए, केवल श्रद्धा, एकाग्रता और नियमितता की आवश्यकता मानी जाती है।
| मंत्र | जप संख्या | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|
| ॐ हनुमते नमः | 108 बार | भय में कमी, साहस में वृद्धि |
| ॐ हनुमते नमः | 1008 बार | ऋण से राहत, शत्रु बाधा में कमी |
मंत्र जप के लिए शांत स्थान चुनना बेहतर माना जाता है। आसन पर सीधा बैठकर, हनुमानजी के चित्र, मूर्ति या केवल मानसिक स्मरण के साथ जप शुरू किया जा सकता है। 108 या 1008 बार जप करते समय मन को धीरे धीरे चिंता से हटाकर भरोसे और आस्था की ओर ले जाने का प्रयास किया जाता है।
“ॐ हनुमते नमः” के साथ साथ इस दिन सुंदरकांड का पाठ और हनुमान चालीसा का नियमित पाठ भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। सुंदरकांड में अंजनेयर की सेवा, शक्ति और सूझबूझ से जुड़े प्रसंग हैं जो मन को प्रेरित और स्थिर बनाने में सहायक माने जाते हैं।
ऐसे पाठ से मन धीरे धीरे नकारात्मकता और भय से हटकर धैर्य और निर्भीकता की ओर बढ़ता है।
हनुमान जयंती की पूजा अलग अलग प्रकार की जीवन स्थितियों में फंसे लोगों के लिए सहारा मानी जाती है। यह दिन केवल धार्मिक भावना भरने के लिए नहीं बल्कि व्यावहारिक जीवन की समस्याओं को हल करने की मानसिक शक्ति देने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
नीचे दी गई सारणी में विभिन्न स्थितियों के अनुसार हनुमान पूजा से अपेक्षित लाभ को संक्षेप में रखा जा सकता है।
| जीवन स्थिति | अंजनेयर पूजा से अपेक्षित लाभ |
|---|---|
| विद्यार्थी | एकाग्रता में वृद्धि, परीक्षा का भय कम होना |
| नौकरी खोजने वाले | आत्मविश्वास बढ़ना, अवसरों के प्रति लचीला दृष्टिकोण |
| व्यापार में हानि झेल रहे लोग | नई रणनीति की प्रेरणा, नकारात्मकता में कमी |
| ऋण में फंसे व्यक्ति | मानसिक दबाव कम होना, समाधान सोचने की क्षमता में वृद्धि |
| पारिवारिक कलह का सामना कर रहे लोग | क्रोध और अविश्वास की कमी, संवाद की भावना मजबूत होना |
मंगलवार और शनिवार को भी हनुमानजी की पूजा लाभकारी मानी जाती है। फिर भी जयंती के दिन की पूजा को विशेष अवसर माना जाता है क्योंकि जन्मतिथि से जुड़ा दिन साधक और देवता के बीच एक अलग भावनात्मक निकटता की अनुभूति देता है।
19 दिसंबर 2025 को पड़ने वाली अंजनेयर जयंती को भय, असफलता और मानसिक बोझ से उबरने के लिए एक शुभ अवसर के रूप में देखा जा सकता है। जो व्यक्ति “नो फियर, नो फेल्योर” जैसी स्थिति की ओर बढ़ना चाहता हो वह इस दिन प्रारंभ किए गए मंत्र जप और नियमित हनुमान पूजा को जीवन में स्थिर अभ्यास बना सकता है। मन जब बार बार “ॐ हनुमते नमः” के स्पंदन से जुड़ता है तो आत्मविश्वास, धैर्य और समर्पण की भावना स्वाभाविक रूप से बढ़ती मानी जाती है।
यह दिन केवल समस्याएँ दूर करने के लिए नहीं बल्कि साहस, विनम्रता और सेवा भावना को जागृत करने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। हनुमान जयंती 2025 पर श्रद्धा से की गई पूजा, सच्चे मन से किया गया मंत्र जप और दूसरों के प्रति सद्भाव का व्यवहार मिलकर जीवन को अधिक संतुलित और आश्वस्त बना सकते हैं।
1. हनुमान जयंती 2025 किस दिन मनाई जाएगी
हनुमान जयंती 2025 शुक्रवार 19 दिसंबर को मनाई जाएगी और इसी दिन विशेष पूजा, जप और व्रत रखना शुभ माना जाता है।
2. भय और ऋण से मुक्ति के लिए कौन सा मंत्र जपें
“ॐ हनुमते नमः” मंत्र को 108 या 1008 बार जपना भय, ऋण और शत्रु बाधा से राहत के लिए उपयुक्त माना जाता है।
3. हनुमान जयंती के दिन कौन से वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है
स्नान के बाद लाल या केसरिया रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनना शुभता और उत्साह का प्रतीक माना जाता है।
4. इस दिन घर पर पूजा करना भी उतना ही प्रभावी है क्या
हाँ, श्रद्धा और निष्ठा के साथ घर पर की गई साधना भी प्रभावी मानी जाती है, मंदिर जाना अनिवार्य नहीं है।
5. क्या केवल हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी लाभ मिल सकता है
हाँ, नियमित और एकाग्रचित्त होकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी साहस, स्थिरता और मानसिक शांति में वृद्धि देखी जा सकती है।
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