By पं. नीलेश शर्मा
जानिए जया पार्वती व्रत 2025 की तिथि, पूजा विधि, धार्मिक महत्व और अविवाहित व विवाहित महिलाओं के लिए लाभ

सावन मास में मनाया जाने वाला जया पार्वती व्रत महिलाओं की श्रद्धा संयम और नारी शक्ति का सुंदर प्रतीक है। पांच दिनों तक चलने वाला यह व्रत अविवाहित कन्याओं के लिए मनचाहा जीवनसाथी और विवाहित महिलाओं के लिए सुखी दांपत्य और पारिवारिक समृद्धि का आशीर्वाद लाता है। मां पार्वती के प्रति समर्पण और श्रद्धा से किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभता का संचार करता है।
व्रत प्रारंभ 8 जुलाई 2025 मंगलवार
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ 7 जुलाई 2025 रात 11:10 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त 9 जुलाई 2025 रात 12:38 बजे
प्रदोष काल 8 जुलाई 2025 शाम 7:23 से 9:24 बजे
पांच दिवसीय नियमों में नमक गेहूं और सब्जियों का त्याग किया जाता है और फल दूध तथा बिना नमक का भोजन ग्रहण किया जाता है।
पहले दिन गेहूं के बीज मिट्टी के पात्र में बोकर जवारा स्थापित किया जाता है और प्रतिदिन जल अर्पित किया जाता है।
कपास की बत्ती को कुमकुम से सजाकर जवारे के चारों ओर बांधा जाता है जिसे नगला कहते हैं।
मां पार्वती की दैनिक पूजा कथा श्रवण दीप धूप पुष्प और नैवेद्य का अर्पण किया जाता है।
चौथे दिन महिलाएं जागरण कर भजन कीर्तन और शिव पार्वती स्तुति करती हैं।
पांचवें दिन जवारा जल में विसर्जित कर व्रत का पारण नमक और अनाज सहित भोजन से किया जाता है।
अविवाहित कन्याओं के लिए यह व्रत योग्य जीवनसाथी प्राप्ति और विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करता है।
विवाहित महिलाओं के लिए यह प्रेम सौहार्द दांपत्य सुख और परिवार की समृद्धि का प्रतीक है।
यह व्रत नारी की शक्ति धैर्य संयम और श्रद्धा को जागृत करता है और जीवन में संतुलन का मार्ग दिखाता है।
शास्त्रों में वर्णित कथा के अनुसार मां पार्वती की कृपा से संकट में फंसे पति को पुनर्जन्म और संतान सुख प्राप्त हुआ था।
यह व्रत केवल अनुष्ठान नहीं बल्कि प्रेम आस्था समर्पण और परिवार की मंगलकामना का पवित्र पर्व है।
मां पार्वती की आराधना से घर में सुख शांति और संतुलन स्थापित होता है और स्त्री के भीतर की शक्ति जागृत होती है।
यह पर्व याद दिलाता है कि श्रद्धा और धैर्य से किया गया प्रयास जीवन में शुभता और समृद्धि के द्वार खोलता है।
1. जया पार्वती व्रत कितने दिनों तक चलता है
यह व्रत पांच दिनों तक निरंतर चलता है।
2. क्या विवाहित महिलाएं भी यह व्रत रख सकती हैं
हां यह व्रत विवाहित और अविवाहित दोनों के लिए शुभ फलदायी है।
3. व्रत में नमक और गेहूं का त्याग क्यों किया जाता है
संयम शुद्धता और तपस्या बढ़ाने के लिए यह नियम रखा गया है।
4. जवारा बोने का क्या महत्व है
जवारा उर्वरता समृद्धि और मां पार्वती की कृपा का प्रतीक है।
5. क्या व्रत कथा प्रतिदिन सुनना अनिवार्य है
हां कथा श्रवण इस व्रत का मुख्य अंग माना गया है और इससे व्रत की सिद्धि पूर्ण होती है।
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